भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने देश में छिड़े लाउडस्पीकर विवाद पर अपनी राय देते हुए कहा कि लाउडस्पीकर को धार्मिक आधार पर नहीं, साउंड के आधार पर बंद करना चाहिए। एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि देश में केवल एक चीज पर काम चल रहा है कि वोट कैसे मिलेंगे। वोट हासिल करने पर पीएचडी चल रही है।
राकेश टिकैत ने कहा कि लाउडस्पीकर कहीं पर भी हो वो आवाज करता है, ऐसे में उसको धार्मिक आधार पर नहीं नॉइस पॉल्यूशन फैलाने के आधार पर बंद करना चाहिए। देश में व्याप्त बिजली संकट के बीच किसानों को सस्ती बिजली मुहैया कराने के सवाल पर किसान नेता ने कहा कि सरकार और बिजली कंपनियां मिली हुई हैं। उन्होंने कहा कि चार-पांच महीने पहले कोयले का रेट 8000 रुपए प्रति टन था आज 18,000 रुपए है।
कोयला खदानें अडानी को देनी हैं: टिकैत ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोयला खदानें अडानी को देनी हैं इसलिए कोयले और बिजली का संकट दिखाकर खदानें अडानी को कैसे दी जाएं इसका षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को अब तक सस्ती बिजली नहीं मिली है। साथ ही उन्होंने बताया कि दिल्ली के किसान आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश में एग्रिकल्चर बिजली के रेट आधे करने की बात जरूर की है पर बिजली की आपूर्ति में कटौती हुई है।
एमएसपी के सवाल पर टिकैत ने कहा कि भारत सरकार ने कमेटी के नाम मांगे हैं पर हमने सरकार से कुछ सवाल पूछे हैं, उन सवालों के जवाब मिलते ही हम एक हफ्ते के अंदर कमेटी के नाम बता देंगे।
किसान खेती छोड़ मजदूर बन रहे: इससे पहले राकेश टिकैत ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए ट्वीट किया था कि किसान खेती छोड़कर मजदूर बन रहे हैं। किसानों की आय घट रही है और अरबपतियों की संपत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन ही रास्ता बचेगा। साथ ही राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सबका साथ-सबका विकास मुद्दे की कमियां भी गिनाई थीं। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि जिला पंचायत का बजट अपने समर्थित सदस्यों के इलाके में आवंटित करना “सबका साथ-सबका विकास” में सबसे बड़ी बाधा है।
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