सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मई, 2022) को मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को हरी झंडी दे दी है। कोर्ट ने इस हफ्ते आरक्षण नोटिफाई और अगले हफ्ते चुनाव का नोटिफिकेशन जारी करने को कहा है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी स्थिति (ओबीसी, एससी-एसटी) में आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं मिलेगा।
इससे पहले कोर्ट ने मध्य प्रदेश में तीन साल से अटके नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव ओबीसी आरक्षण के बिना ही कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शिवराज सरकार ने ओबीसी कोटा को लेकर 12 मई को देर रात शीर्ष अदालत में संशोधन याचिका दाखिल की थी। इस पर बुधवार को सुनावई करते हुए कोर्ट ने ये आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को स्वीकर कर लिया है, जिसके बाद अब ओबीसी आरक्षण के साथ स्थानीय निकाय चुनाव होंगे।
बता दें कि 10 मई के अपने आदेश में ओबीसी आरक्षण के बिना निकाय चुनाव कराने के निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 24 मई से पहले निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाए। साथ ही, कोर्ट ने कहा था कि ओबीसी आरक्षण की शर्तों को पूरा किए बगैर रिजर्वेशन नहीं दिया जा सकता।
इसके बाद, राज्य सरकार ने फिर से ओबीसी कोटा लागू करने की अनुमति के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि आयोग की पहली रिपोर्ट को अदालत द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संशोधित कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश के ओबीसी आयोग ने राज्य में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिए जाने के आधार संबंधी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की थी। इसमें ओबीसी को 35 फीसद कोटा देने की मांग की गई है। मध्य प्रदेश में त्रिस्तरीय (ग्राम, जनपद और जिला) पंचायत और नगरीय निकाय (नगर परिषद, नगर पालिका और नगर निगम) में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के लिए कोर्ट ने अध्ययन कराने के निर्देश दिए थे।
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