देशभर में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद के बीच इस्लामिक स्कॉलर जुनैद हारिस ने दावा किया कि लोधी इब्राहिम को खत्म करने के लिए राजपूतों ने ही बाबर को बुलाया था। इसके साथ ही, उन्होंने इस बात का भी दावा किया कि अकबर ने मुस्लिम संस्कृति से ज्यादा हिंदू संस्कृति को अपनाने की कोशिश की और विक्रमादित्य को फॉलो करते हुए उसने भी नवरत्न रखे।
एक टीवी डिबेट के दौरान इस्लामिक स्कॉलर ने इस बात पर जोर दिया कि मुगलों ने हिंदुस्तान में आकर हिंदू सभ्यता को अपनाया और यहां के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए काम किए।
जुनैद हारिस ने कहा, “भारत में मुगलों के आने से पहले मोहम्मद गौरी और उसका गवर्नर ऐबक आ चुका था और सल्तनत का सिलसिला शुरू हो चुका था। इसके बाद इब्राहिम लोधी को खत्म करने के लिए यहां के राजपूत रांगा सांगा ने बाबर को बुलाया। इसके बाद वह यहां पर रह गया, तो रहने के बाद ये बाबरनामा का जिक्र करते हैं। उसने यहां के हिसाब से मिलने की कोशिश की और प्रेम का भाव शुरू करते हुए उसने गाय की हत्या पर रोक लगाई क्योंकि यहां के लोगों की आस्था उससे जुड़ी है, तो उनका दिल दुखेगा। इसके बाद हुमांयू तो बहुत दिन ठहर नहीं सका। शेरशाह सूरी को लोगों ने मिलकर उसको भगा दिया।”
अकबर को लेकर जुनैद हारिस ने कहा कि अकबर ने कोई मुस्लिम संस्कृति को अपनाने की कोशिश नहीं की। हिंदू शासक विक्रमादित्य के जमाने में नवरत्नों की परंपरा को अकबर ने जारी रखा। इसके बाद, उसके नवरत्नों में शामिल राजा बीरबल और राजा टोडरमल जैसे लोगों ने कई मंदिरों का निर्माण करवाया, जिनमें काशी विश्वनाथ मंदिर भी शामिल है।
ईदगाह और श्रीकृष्ण जन्मस्थान विवाद पर जुनैद हारिस ने कहा कि इस बात को मान सकता हूं कि औरंगजेब ने जरूरत के हिसाब से बहुत से मंदिर और मस्जिद तुड़वाए, लेकिन इससे सहमत नहीं हूं कि उस जगह को तोड़कर ईदगाह बनवाई गई।
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