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Thursday, March 10, 2022

‘आप’ मुख्यालय में रंग-गुलाल लगाकर कार्यकर्ताओं ने मनाया जीत का जश्न

पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) को मिली शानदार जीत को लेकर दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में गुरुवार को दिन भर जश्न का महौल बना रहा। जैसे-जैसे पार्टी की जीत सुनिश्चित होती गई, वैसे-वैसे कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह बढ़ता गया। समर्थक एक-दूसरे को जीत की बधाई देते नजर आए। मिठाईयां बांट कर जीत का जश्न मनाया गया। कार्यकर्ता यह चर्चा करते हुए भी नजर आए कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का माडल अब दिल्ली के बाहर भी लोगों को पंसद आ रहा है।

गुरुवार की सुबह से ही पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ मुख्यालय के बाहर जुटने लगी थी। दोपहर होते-होते मुख्यालय पूरी तहर से भर गया था। दोपहर बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी पहुंचे। उनके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद कजरीवाल भी पहुंचे और पार्टी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उनके अलावा मंत्री गोपाल राय, राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता, पार्टी के कई विधायक और पार्टी के पदाधिकारी मुख्यालय में मौजूद रहे थे।

जीत का जश्न मनाते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि पंजाब में पार्टी ने इतिहास रच दिया। वहीं गोवा की जनता ने भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भरोसा जताया और भरपूर समर्थन दिया। अब अरविंद केजरीवाल के काम की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हो रही है। उनके माडल को देश के लोगों का समर्थन मिल रहा है। यह बदलाव की आहट है। आने वाले समय में आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी बनेगी और उन सरकार को उखाड़ फेंकेगी, जो झूठ की राजनीति करते हैं। इस बार पंजाब ने कर दिखाया है। पंजाब की जनता ने न केवल आप को समर्थन दिया है, बल्कि उस विचारधारा को उखाड़ फेंकने का काम किया है, जो झूठा सपना दिखाकर लोगों से वोट लेते है ओर चुनाव बाद उन वादों को भूल जाते हैं।

एग्जिट पोल के बाद कर दी थीं तैयारियां शुरू’

आप नेता शैलेंद्र पांडे ने बताया कि एग्जिट पोल से ही साफ हो गया था कि आम आदमी पार्टी पंजाब में सरकार बनाने जा रही है और बाकी दलों का सूपड़ा पंजाब में साफ होने जा रहा है। इसको लेकर पार्टी कार्यालय में चुनाव परिणाम से आने से पहले ही जीत का जश्न मानने की तैयारी शुरू कर दी गई थी। पार्टी मुख्यालय में पैर रखने की जगह नहीं है। इससे साफ है कि दिल्ली की जनता का भरोसा आज भी ‘आप’ पर भरोसा कर रही है। भले ही केंद्र की भाजपा सरकार ने निगम चुनावों को टालने की कोशिश की है, लेकिन दिल्ली में निगम चुनावों में भी आप जीत का परचम लहराएगी।

सड़क पर लगा घंटों जाम

जीत का जश्न मनाने के लिए भारी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक डीडीयू मार्ग पर स्थित पार्टी मुख्यालय में अपनी निजी वाहनों से पहुंचे थे। कुछ लोग मेट्रो से पहुंचे थे। मुख्यालय के अंदर पर्याप्त जगह नहीं होने पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक सड़क पर एकत्रित हो गए। इस कारण नई दिल्ली की ओर से आइटीओ आने वाले राउज एवेन्यू इलाके में जाम लग गया। पुलिस ने एहतियातन मार्ग में बदलाव किया था, लेकिन संख्या अधिक होने की वजह से घंटो जाम में फंसे रहे।

पहले दिल्ली में इंकलाब हुआ,अब पूरे देश में इंकलाब होगा’

पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला। इसके बाद दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में जश्न मनाया गया। दोपहर करीब ढाई बजे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुख्यालय पहुंचे। पार्टी कार्यालय के बाहर और अंदर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उनका इंतजार कर रहे थे। दोपहर करीब तीन बजे वह छत पर बने मंच पर पहुंचे और कहा कि पहले दिल्ली में इंकलाब हुआ, आज पंजाब में इंकलाब हुआ है, अब पूरे देश में इंकलाब होगा।

केजरीवाल बोले पंजाब के लोगों ने कमाल कर दिया, यह पंजाब के लोगों का प्यार है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से बीते 75 साल से जो सिस्टम चल रहा था, उसे आम आदमी की पार्टी ने बदल दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भदौर विधानसभा में एक मामूली ‘आप’ कार्यकर्ता लाभ सिंह ने हरा दिया, जो कि एक मोबाइल की दुकान में काम करते हैं।

‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह इतना आसान नहीं था। बहुत बड़ी-बड़ी ताकतें हैं। हम लोग तो उनके सामने बहुत छोटे हैं। यह सारी ताकतें मिलकर आज देश को आगे बढ़ने से रोकना चाहती हैं। आपने देखा है कि पंजाब में कितने बड़े-बड़े षडयंत्र किए गए। सबका एक ही मकसद था कि आम आदमी पार्टी नहीं आनी चाहिए, चाहे कोई भी पार्टी आ जाए। अंत में ये सारे इकट्ठा हो कर बोले कि केजरीवाल आतंकवादी है।

आज इन नतीजों के जरिए जनता ने बता दिया कि केजरीवाल आतंकवादी नहीं है। केजरीवाल देश का सच्चा सपूत है। केजरीवाल सच्चा देशभक्त है। अब पंजाब की जनता ने अपना नतीजा सुना दिया है। जनता ने कहा है कि केजरीवाल आतंकवादी नहीं है। आतंकवादी तो वह लोग हैं, जो सारे मिलकर देश को लूट रहे हैं।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि एक ऐसा भारत बनाएंगे, जहां कोई भूखा नहीं सोएगा। एक ऐसा भारत बनाएंगे, जहां हमारी मां-बहनें सुरक्षित होंगी। एक ऐसा भारत बनाएंगे, जहां अमीरों और गरीबों के बच्चों को एक जैसी अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुझे बहुत दुख होता है कि आज आजादी के 75 साल बाद भी बच्चों को मेडिकल की शिक्षा लेने के लिए यूक्रेन जैसे छोटे से देश में जाना पड़ता है। एक ऐसा भारत बनाएंगे, जहां खूब सारे मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेज खोलेंगे। एक ऐसा भारत बनाएंगे, जहां भारत के बच्चों को यूक्रेन नहीं जाना पड़ेगा, पूरी दुनिया के बच्चे भारत में शिक्षा लेने के लिए आया करेंगे।



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नोएडा आकर योगी ने गद्दी गंवाने का मिथक तोड़ा

नोएडा आने वाले मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है, इस मिथक को तोड़ने में योगी आदित्यनाथ सफल हुए हैं। उन्होंने तीन दशक पुराने रेकार्ड को तोड़ दिया है। योगी का दोबारा मुख्यमंत्री तय माना जा रहा है। अपने कार्यकाल के दौरान बतौर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 20 बार से ज्यादा यहां आए। यहां तक कि पिछले महीने गौतम बुद्धनगर की जेवर सीट से भाजपा प्रत्याशी ठाकुर धीरेंद्र सिंह के समर्थन में प्रचार समाप्ति से महज कुछ देर पहले भी एक सभा को उन्होंने संबोधित भी किया। वहीं, 1967 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ सरकार की दोबारा वापसी हुई है।

साल 1988 से यह मिथक था कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह नोएडा गए थे और उनकी कुर्सी चली गई थी। फिर एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने, वे 1989 में नोएडा के सेक्टर-12 के एक पार्क का उद्घाटन करने आए थे। उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस सत्ता हासिल नहीं कर पाई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए कल्याण सिंह की भी नोएडा आने के कुछ दिन बाद कुर्सी छिन गई थी। तब नेताओं के दिलों-दिमाग पर नोएडा आने से कुर्सी जाने का मिथक इस कदर हावी हो गया था कि राजनाथ सिंह ने डीएनडी का उद्घाटन नोएडा के बजाए दिल्ली से किया था।

इसी मान्यता के कारण अखिलेश यादव ने भी पांच साल मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा जाने से पहेज किया। मगर योगी आदित्यनाथ ने इस डर को दूर कर दिया। अपने पांच साल के कार्यकाल में वे कई बार नोएडा आए और दर्जनों योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। गौतम बुद्ध नगर के गांव बादलपुर की रहने वाले बसपा प्रमुख मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए 2007-12 के कार्यकाल के दौरान नोएडा आने के डर को दूर करने की कोशिश की और दो बार नोएडा आई लेकिन चुनाव में उनकी सरकार के हार जाने से यह मिथक फिर से नेताओं के दिमाग पर हावी हो गया था।

कई मुख्यमंत्रियों की चली गई कुर्सी

साल 1988 से यह मिथक था कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में नोएडा जाने वाले मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह नोएडा गए थे और उनकी कुर्सी चली गई थी। फिर एनडी तिवारी मुख्यमंत्री बने, वे 1989 में नोएडा के सेक्टर-12 के एक पार्क का उद्घाटन करने आए थे। उसके बाद हुए चुनाव में कांग्रेस सत्ता हासिल नहीं कर पाई थी। मुख्यमंत्री रहते हुए कल्याण सिंह की भी नोएडा आने के कुछ दिन बाद कुर्सी छिन गई थी।



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उत्तर प्रदेश में लाभार्थी वर्ग ने तोड़ी जाति की सीमाएं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान धर्म और जाति से अलग एक नया मतदाता वर्ग ‘लाभार्थी’ भी सामने आया जिसने चुपचाप भाजपा को मत दिया। इस नए वर्ग में महिलाएं सबसे अधिक रहीं। कोरोना काल में वैसे तो पूरे देश के गरीबों को अनाज दिया गया लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इससे आगे बढ़कर दाल, तेल और मसाले तक लोगों को उपलब्ध कराए।

इसके साथ ही केंद्र सरकार की योजनाओं उज्ज्वला, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय आदि का लाभ भी बड़ी संख्या में लोगों को हुआ। यहां सबसे जरूरी बात यह रही कि अधिकतर योजनाएं महिलाओं से जुड़ी हैं। घर में खाना बनाने का सामान नहीं होगा तो सबसे अधिक परेशान घर की महिला ही होगी। शौचालयों और उज्ज्वला का योजना के तहत मिले सिलेंडर फायदा भी महिलाओं को ही सबसे ज्यादा हुआ। इसके अलावा मकान भी महिलाओं के नाम से बनाए गए। माना जा रहा है इसी ‘लाभार्थी’ वर्ग ने चुपचाप भाजपा को जिताने में अहम भूमिका निभाई।

विधानसभा चुनाव के परिणाम में इस बात के संकेत छिपे हैं कि उत्तर प्रदेश में जातिगत विभाजन पर योगी की छवि हावी रही है। दूसरा, प्रदेश की सवर्ण जातियों के मतदाता अभी भी योगी के साथ हैं। ओम प्रकाश राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्य और धर्म सिंह सैनी के समाजवादी पार्टी के साथ आने के बाद भी अखिलेश यादव पिछड़ों को पूरी तरह अपने पाले में नहीं कर पाए।

प्रदेश के लोगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जोड़ी को लेकर लोगों का भरोसा दिखा। योगी छवि जन विश्वास पर इतनी खरी थी कि लोग खुलकर सामने आए और इनके नाम पर मतदान किया। बेहतर कानून व्यवस्था और गरीब कल्याण योजनाओं की दोहरी खुराक ने लोगों के भरोसे को बनाए रखा और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित किया।

उत्तर प्रदेश में पूरा चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर लड़ा गया। चुनाव घोषणा के बाद प्रधानमंत्री 27 सभाएं कीं। सभाओं में प्रधानमंत्री ने ‘यूपी ने भरी हुंकार फिर एक बार योगी सरकार’ और ‘आएंगे तो योगी ही’ जैसे नारे देकर योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश चुनाव का केंद्र बिंदु बना दिया। योगी ने भी परिणाम की परवाह ना कर पूरा चुनाव अपने कंधे पर ले लिया। चुनाव में उन्होंने 200 से अधिक सभाएं और रोड शो किए। चुनाव का एजंडा तय किया। इसी का नतीजा है कि कमजोर माने जा रहे बहुत उम्मीदवार भी चुनाव जीत गए।

महंगाई, बेरोजगारी, छुट्टा पशु और किसानों के कुछ मुद्दे होने के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि का लोगों पर इतना गहरा प्रभाव रहा कि लोगों ने जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर भाजपा को मतदान किया। सवर्ण तो पहले से ही भाजपा के मतदाता माने जाते रहे हैं लेकिन योगी ने न केवल इन मतदाताओं को बचाया बल्कि पिछड़ों को भी अपने साथ जोड़ा। वहीं, अखिलेश यादव खुद को पिछड़ों के साथ जोड़ने में विफल रहे। वे इस वर्ग के मतदाताओं को सुरक्षा का आश्वासन नहीं दे पाए। शायद यही वजह रही कि उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

अंतिम क्षणों में किसानों के लिए हुई घोषणाएं भाजपा के लिए बनीं जीवनरक्षक

विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार की ओर से तीन कृषि कानून की वापसी और उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए निजी ट्यूबवेल के बिजली बिलों में 50 फीसद छूट देने की घोषणा की थी। ये घोषणाएं उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार के लिए जीवनदायनी साबित हुर्इं। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों में भारी रोष देखा गया।

इन कानूनों की वापसी की मांग को लेकर किसानों के कई गुटों ने 14 महीनों तक संघर्ष किया। इस दौरान वे दिल्ली की सभी सीमाओं पर लगातार प्रदर्शन करते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर, 2021 को अचानक तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एसएसपी) पर नीति बनाने के लिए एक समिति गठन करने का निर्णय किया गया।

इस फैसले ने उत्तर प्रदेश विशेषकर पश्चिमी यूपी के उन किसानों के गुस्से को ठंडा करने का काम किया जो भाजपा के ही समर्थक थे लेकिन सरकार के जिद्दी स्वभाव की वजह से छिटकने को तैयार थे। उत्तर प्रदेश में चुनाव की सुगबुगाहट के बीच समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने उनकी सरकार पर घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली देने का वादा किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की सरकार बैकफुट पर आ गई और चुनाव की घोषणा होने से सप्ताह भर पहले ही सरकार को निजी ट्यूबवेल के बिजली बिलों में 50 फीसद छूट देने की घोषणा करनी पड़ी।



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चुनाव परिणामों के बाद बढ़ा केजरीवाल व योगी का कद

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं आम आदमी पार्टी के राष्‍ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कद बढ़ा गया है। अरविंद केजरीवाल 2013 में एक नई पार्टी के साथ दिल्ली की राजनीति में कदम रखा था। केवल दस साल के अंदर ही पार्टी ने देशभर में हुए चुनावों में दस्तक देकर अपना जनाधार बनाया है।

पार्टी ने जो भी चुनाव लड़ा उसमें पार्टी का बड़ा चेहरा केवल अरविंद केजरीवाल ही रहे और उनका दिल्ली का विकास माडल चुनावी राज्यों में पंसद किया गया। इस माडल से ही आम आदमी पार्टी पंजाब में भी बहुमत के साथ सत्ता में आई है। दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है और इस वजह से यहां की गतिविधियों में केंद्र सरकार का पूरा दखल है, इसके बावजूद अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आकर आप का मुफ्त माडल विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। प्रदर्शन की बदौलत अब आम आदमी पार्टी के पास पंजाब में पूर्ण अधिकार वाली सरकार होगी।

अरविंद केजरीवाल ने 2013 में नई दिल्ली विधानसभा से चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और 15 साल से लगातार दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहीं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को चुनाव में शिकस्त देकर उनका विजयी अभियान रोका था। अरविंद केजरीवाल ने एक नौकरशाह से सामाजिक कार्यकर्ता और इसके बाद एक राजनीतिज्ञ बनकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 2013 में आप को केवल 28 सीट मिली थी। इसके बाद 2015 में हुए चुनाव में पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 67 सीटें हासिल करके नया कीर्तिमान बनाया था।

योगी ने रचा इतिहास

योगी आदित्यनाथ फिर उत्तर प्रदेश प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने उतरे योगी आदित्यनाथ प्रदेश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री होंगे जो पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में लौटेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के नोएडा और बिजनौर जाने जैसे मिथक भी टूट गए। इस जीत ने योगी को भाजपा के साथ-साथ देश में बड़ा चेहरा बना दिया है। शायद यही वजह है कि एक वर्ग योगी को भारत के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखता है।

साल 1972 में उत्तराखंड के गढ़वाल जिले के एक गांव में जन्में अजय मोहन बिष्ट बचपन से आरएसएस की शाखाओं में जाते थे। अजय बिष्ट ने बीएससी की पढ़ाई गढ़वाल के श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से पूरी की। 1994 में विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए सहायता मांगने के लिए ही बिष्ट पहली बार गोरक्षपीठ के महंत अवैद्यनाथ से मिले और दो सालों के अंदर ही उन्होंने न केवल दीक्षा ली बल्कि उत्तराधिकारी भी बन गए।

दीक्षा लेने के साथ ही उन्होंने अपना नाम बदल कर योगी आदित्यनाथ कर लिया। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। 26 साल की उम्र में योगी गोरखपुर से सांसद चुने गए। उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले योगी लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद, वर्तमान में श्री गोरक्षपीठ के पीठाधीश चुने जा चुके थे।



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Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...