ज्ञानवापी केस में गुरुवार को वाराणसी की जिला अदालत में बहस शुरू हुई तो उसमें मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि हिंदुओं की याचिका निराधार है और इस पर कोई केस नहीं बनता है। इसको लेकर टीवी चैनलों पर भी बहस शुरू हो गई।
न्यूज-24 पर एंकर मानक गुप्ता के साथ डिबेट के दौरान महंत नवल किशोर दास महराज ने कहा कि परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी की पूजा तो वहां हमेशा से होती रही थी और इसको मुलायम सिंह यादव ने बंद करवाया था। वहां पूजा होती रहती तो यह विवाद ही नहीं खड़ा होता।
उन्होंने कहा कि कई सौ साल पहले पूरे सनातन धर्म को अपमानित करने के लिए कुछ लोगों ने मंदिर को तोड़कर वहां मस्जिद बनवा दी थी। मंदिर के अंदर हिंदू धर्म के कई प्रतीक मिले हैं, यह साबित करते हैं कि वहां मंदिर था और तोड़ा गया है।
इस दौरान डिबेट में भाजपा की प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने मुस्लिम नेता तस्लीम रहमानी से तीन सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या किसी मस्जिद का नाम संस्कृत में हो सकता है। अगर नहीं तो फिर इसका नाम ज्ञानवापी क्यों है? क्या मस्जिद के अंदर हिंदू धर्म के प्रतीक और श्रृंगार गौरी की प्रतिमा कहां से आई? उनका तीसरा सवाल था कि आप क्यों नहीं कहते हैं कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर गलती थी। आप कहिए औरंगजेब और बाबर मुर्दाबाद।
इसके जवाब में तस्लीम रहमानी ने कहा कि “मस्जिद का नाम आलमगीरी है। ज्ञानवापी किसने लिखा मुझे नहीं मालूम है।” दूसरे सवाल पर वे बोले- “वहां हिंदू धर्म के प्रतीकों को मिलने की बात कहकर केस को उलझाने और विवाद पैदा करने की साजिश की जा रही है।”
तीसरे सवाल पर उन्होंने कहा कि “औरंगजेब चार सौ साल पहले हिंदुस्तान का बादशाह था आज नहीं है। अगर हम औरंगजेब को मुर्दाबाद कहेंगे तो आप भी कहिए कि अशोक मुर्दाबाद, जिन्होंने कलिंग के युद्ध में लाखों लोगों को मरवा दिए थे।”
रहमानी ने कहा कि विवाद सिर्फ इतना है कि पांच महिलाएं कोर्ट में जाकर मांग कर रही हैं कि उन्हें श्रृंगार गौरी की पूजा करने का अधिकार मिले। इस पर हम उनके साथ हैं, कोर्ट उन्हें पूजा करने का अधिकार दे। बाकी जैसा पहले से है, वैसा ही रहने दें।
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