Tuesday, May 17, 2022

ज्ञानवापी मस्जिद: मैं अल्लाह से डरता हूं, किसी योगी या मोदी से नहीं, याद रखो मैं बोलूंगा, मैं जिंदा हूं, मुर्दा नहीं, बोले ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि “मैं जिंदा हूं, मुर्दा नहीं हूं, इसलिए मैं ज्ञानवापी मस्जिद समेत हर मसले पर बोलूंगा।” उन्होंने कहा कि “मैं अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरता, किसी योगी या मोदी से नहीं डरता हूं।”
गुजरात के छापी में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब ज्ञानवापी मसले पर मैंने बोलना शुरू किया तो मुझ पर मुस्लिम संगठनों ने ही उंगलियां उठाना शुरू कर दिया कि तुम क्यों बोलते हो। कहा कि “मैं नहीं बोलूंगा तो आप बोलो न, जो मुझे कह रहे हैं वे खुद क्यों नहीं बोलते।”

औवैसी ने कहा कि “हिजाब के मसले पर आपको बोलना चाहिए था, आप नहीं बोले, हलाल गोस्त का मसला था, आपको बोलना था आप नहीं बोले। मुसलमान नौजवानों को नौकरियां मिल रही थीं तो कहा गया जॉब जिहाद, इस पर आपको बोलना था, लेकिन आप नहीं बोले। जब मस्जिद का मसला आया और हम दलील के साथ मस्जिद की बात बोलते हैं तो कहते हैं तुम क्यों बोलते हो।”

उन्होंने कहा कि तो याद रखो, “मैं इसलिए बोलता हूं कि मैं जिंदा हूं मुर्दा नहीं। मैं इसलिए बोलता हूं कि मैं जमीर को अभी बेचा नहीं हूं और इंशा अल्लाह कभी बेचूंगा भी नहीं। मैं इसलिए बोलता हूं कि मैं सिर्फ अल्लाह से डरता हूं किसी मोदी और योगी से नहीं डरता हूं। मैं इसलिए बोलता हूं कि भारत का संविधान जिसे बाबा साहब अंबेडकर ने बनाया है उसमें मुझे फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन की इजाजत है। और मैं खुलकर अपनी बात रखना चाहता हूं। हां अगर तुम्हें मेरी बात पसंद नहीं आती है तो अपने कान में उंगलियां रख लो लेकिन मेरी जबान नहीं रोक सकते हो।”

कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नज़र-अंदाज़ किया जा रहा है। भारत को कमज़ोर करने की कोशिशें मुसलसल जारी है। उन्होंने कहा कि भाजपा और तमाम ऐसी पार्टियों को ये लोग बचाने का काम करते हैं। कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद मसले पर 1991 में हाईकोर्ट ने स्टे दे दिया तो आप अक्टूबर 2021 में जाते हैं।

कहा कि “लोअर कोर्ट फैसला देता है तो मैंने कहा कि उस फैसले की मैं मुखालफत करता हूं।” तब लोग डराते हैं कि आप कैसे कोर्ट के खिलाफ बोल सकते हैं। वे बोले कि “बोल सकते हैं कोर्ट के खिलाफ, इज्जत से अपनी बात रख सकते हैं। भारत है कोई नार्थ कोरिया का सरबरा यहां का प्रधानमंत्री नहीं है।” कहा कि 1991 का कानू है कि 15 अगस्त 1947 के समय जो मस्जिद – मंदिर थे, वे उसी स्वरूप में रहेंगे।



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