नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद बीजेपी की हर तरफ बल्ले-बल्ले है। एक तरफ चुनावों में बीजेपी धड़ाधड़ जीत हासिल कर रही वहीं दूसरी तरफ उसका खजाना भी दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहा है। चुनाव आयोग की रिपोर्ट है कि चंदे के मामले में बीजेपी देश की सबसे अग्रणी पार्टी है। कांग्रेस की तुलना में उसे तकरीबन 7 गुना धन मिला है।
निर्वाचन कानून के प्रावधानों के मुताबिक राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपये से अधिक के चंदे से जुड़ी जानकारी देनी होती है। जो जानकारी राजनीतिक दलों ने आयोग को दी इसके मुताबिक भाजपा को 2020-21 में 477.5 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जबकि विपक्षी कांग्रेस को 74.50 करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले।
आयोग ने दोनों दलों की चंदे से जुड़ी रिपोर्ट मंगलवार को सार्वजनिक की। भाजपा ने चंदे की रिपोर्ट गत 14 मार्च को आयोग को सौंपी थी। जबकि कांग्रेस ने उससे कुछ पहले चुनाव आयोग को चंदे की सारी जानकारी दी थी। कांग्रेस को मिला चंदा बीजेपी को मिली रकम का महज 15 फीसदी है। वहीं भाजपा को कांग्रेस से छह गुना से ज्यादा चंदा मिला।
हालांकि ये पहली बार नहीं है जब चंदे के मामले में बीजेपी ने दूसरे दलों को पीछे छोड़ा है। 2019-20 की रिपोर्ट के मुताबिक संपत्ति के मामले में तब भी भाजपा पहले नंबर पर थी। मायावती की बहुजन समाज पार्टी तब दूसरे नंबर पर थी। जबकि कांग्रेस तीसरे नंबर पर थी। 2019-20 में भाजपा ने अपनी संपत्ति 4847 करोड़ रुपये घोषित की थी। यह देश के सभी राजनीतिक दलों में सबसे अधिक है। वहीं, कांग्रेस ने तब अपनी संपत्ति 588.16 करोड़ रुपये घोषित की थी।
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक 2020-21 के दौरान सात इलेक्टोरल ट्रस्टों का कहना है कि उन्हें कारपोरेट और व्यक्तिगत मद में कुल 258.4915 करोड़ रुपये मिले। इनमें से 258.4301 विभिन्न दनों को बांटे गए। इसमें से बीजेपी को 212.05 करोड़ यानि कुल रकम का 82.05 फीसदी हिस्सा मिला। सबसे बड़े इलेक्टोरेल ट्रस्ट प्रूडेंट ने 209 करोड़ रुपये बीजेपी को दिए। 2019-20 के दौरान उसने बीजेपी को 217.75 करोड़ रुपये का चंदा दिया था।
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