वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने के दावों पर कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने कहा कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की जरूरत नहीं होती है, कोर्ट का जो भी आदेश होगा उसे सभी को मानना होगा। उन्होंने आगे कहा कि कुतुब मीनार और ताजमहल, भारत सरकार के अधीन है और किसी धर्म से जुड़े हुए नहीं है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि ताजमहल और कुतुब मीनार हिंदुओं को सौंप दें क्योंकि ये भारत के जनमानस की भावनाओं से जुड़ा हुआ विषय है।
भारत की जन भावनाओं से जुड़ा मुद्दा: प्रमोद कृष्णम सोमवार (16 मई ) को कांग्रेस संसद दीपेंद्र हुड्डा के साथ अयोध्या में रामलला और हनुमान गढ़ी का दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान कृष्णम ने कहा कि ज्ञानवापी का मुद्दा आस्था और भारत की जन भावनाओं से जुड़ा है, साथ ही न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन सवाल है कि शिवलिंग को अब तक क्यों छिपाया गया और किसने छिपाया? उन्होंने कहा कि यह विषय भारत सरकार का है लेकिन हम राष्ट्र और देश के साथ हैं।
उन्होंने कहा कि भारत भावनाओं का देश है और भारत एक संवैधानिक व्यवस्था से चलता है। ऐसे में जब ये मामला कोर्ट में है तो मैं इस मुद्दे पर कोई राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दूंगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि न्यायालय का जो भी आदेश होगा उसे सभी को मानना होगा।
ओवैसी, राज ठाकरे के सौतेले भाई: वहीं अयोध्या में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के विरोध पर कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने कहा कि बीजेपी सांसद ब्रज भूषण शरण सिंह और राज ठाकरे दोनों एक ही थाली के चट्टे बट्टे हैं। ओवैसी को उन्होंने राज ठाकरे का सौतेला भाई बताते हुए कहा कि ना तो इनका कोई धर्म है, ना ही कोई मजहब और ना ही कोई राशि। यह केवल राजनीति चमकाने के लिए बयानबाजी करते हैं।
ASI ने जारी की ताजमहल की तस्वीरें: वहीं, दूसरी ओर ताजमहल के 22 कमरों को खुलवाने की याचिका रद्द होने के बाद ASI ने ताजमहल की कुछ तस्वीरें जारी की हैं। इनमें कमरों के भीतरी और बाहरी हिस्से को भी दर्शाया गया है। ASI का कहना है कि दिसंबर 2021 और फरवरी 2022 के बीच इन कमरों के संरक्षण का काम किया गया था। ये फोटो संरक्षण के काम से पहले और बाद के हैं।
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