पीएम नरेंद्र मोदी ने जबसे कहा है कि वो एक और पारी के लिए तैयार हैं तबसे बीजेपी बेहद आक्रामक हो गई है। भारत के सबसे अच्छे प्रधानमंत्रियों की रेस में अक्सर पंडित जवाहर लाल नेहरू से नरेंद्र मोदी की तुलना की जाती है। बीजेपी मानती है कि मोदी देश के सबसे अच्छे पीएम हैं। खुद मोदी भी चुनावी सूबों में हो रही रैलियों में अपना बदला चेहरा दिखा रहे हैं। इसकी बानगी तब मिली जब उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का अपना महत्व है। विविधता ही देश की शान है। यानि पीएम ने साफ कर दिया कि वो नहीं चाहते कि हिंदी थोपी जाए।
देश के कुछ सूबों में पिछले कुछ अर्से से हिंदी को लेकर बेवजह का विवाद चल रहा है। जबसे अमित शाह ने कहा कि हिंदी को हर जगह अमल में लाया जाना चाहिए तबसे गैर हिंदी भाषी राज्य बीजेपी के सीधे विरोध में आ खड़े हुए। यहां तक कि खुद बीजेपी के दक्षिण भारतीय नेता इसके विरोध में हो गए। 29 मई को मन की बात में 89वें एपिसोड में मोदी ने जो कहा उससे अमित शाह के वन नेशन वन लैंग्वेज वाले एजेंडे को उन्होंने पूरी तरह से नकार दिया। वो बोले कि विविधता हमारी पहचान है।
मोदी जिस तरह से भाषण दे रहे हैं उससे साफ है कि वो 2024 के लिए अपनी बदली इमेज जनता के सामने रखना चाहते हैं। गुजरात की रैलियों में वो विकास की बात करते हैं। उनका जोर होता है कि लोगों से जुड़ी स्कीमें 100 फीसदी इंप्लीमेंट की जाएं। वो कहते हैं कि उनका मिशन अभी पूरा नहीं हुआ। दूसरी तरफ देश में जिस तरह का माहौल है। बीजेपी शासित राज्यों में सीडेशन लॉ तेजी के साथ इस्तेमाल हो रहा है। उसके बीच मोदी का 30 अप्रैल को चीफ मिनिस्टर्स कान्फ्रेंस में ये कहा कि अंग्रेजों के जमाने के कानून खत्म होने जरूरी हैं। उनकी ये बात साफ तौर पर दर्शा रही है कि ब्रान्ड मोदी चेंज हो रहा है।
बीजेपी के एक सीनियर मंत्री कहते भी हैं कि मोदी के सिवाय बीजेपी के पास कोई मजबूत सहारा नहीं है। ये पीएम का करिश्मा ही है जो महंगाई और बेरोजगारी के बावजूद यूपी उत्तराखंड और गोवा जैसे सूबे बीजेपी जीतने में कामयाब रही। उनका मानना है कि 2024 में मोदी का करिश्मा फिर से चलेगा। वो देश के सबसे अच्छे पीएम हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा ही बदलाव 2016 में भी मोदी में देखने को मिला था। लुढ़कती इकॉनोमी और तल्ख होते धार्मिक माहौल के बीच ये बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजेपी के रणनीतिकार भी मानते हैं कि इस मुश्किल वक्त में पीएम की इमेज को बचाना जरूरी है। इसके लिए सरकार को भी चेहरा बदलना पड़ेगा। यही वजह है कि बीजेपी के तमाम मंत्री और बड़े नेता मोदी सरकार की 8वीं सालगिरह पर पीएम के कसीदे पढ़ते नहीं थक रहे। बेरोजगारी और गिरती इकॉनोमी पर उनका कहना है कि यूक्रेन रूस की लड़ाई न होती तो हालात शायद कुछ अलग होते।
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