ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के बीच एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधा है। साथ ही साथ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी पर देश को दंगों की ओर ले जाने का आरोप भी लगाया है। इसके पहले असदुद्दीन ओवैसी ने ज्ञानवापी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से न्याय की उम्मीद जताई थी और वाराणसी कोर्ट के फैसले को गलत भी ठहराया था। ओवैसी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट जाने की हिदायत भी दी है।
हार्दिक पटेल द्वारा कांग्रेस छोड़ने पर असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कांग्रेस ने महाराष्ट्र पर 15 साल शासन किया लेकिन अब तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है, जबकि दिल्ली में यह कहीं नहीं है। उनके लोग जा रहे हैं। उनके गुजरात के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल को अपने अध्यक्ष पर ही कोई भरोसा नहीं है और उन्होंने पार्टी छोड़ दिया।”
वहीं ओवैसी ने ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग (जिसे हिन्दू पक्ष दावा कर रहा) को फिर से फाउंटेन यानी फव्वारा बताया। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि मुसलमानों को धार्मिक पालन की अनुमति है। जिसका मतलब यह है कि हम वहां पर वजू कर सकते हैं। यह एक फव्वारा है। अगर ऐसा होता है तो ताजमहल के सभी फव्वारों को बंद कर देना चाहिए। भाजपा देश को 1990 के दशक में वापस ले जाना चाहती है, जब दंगे हुए थे।”
वहीं आज बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी प्रेस कांफ्रेंस कर ज्ञानवापी मामले पर पार्टी की राय रखी। उन्होंने कहा, “देश में निरंतर बढ़ रही गरीबी, बेरोजगारी व आसमान छू रही महंगाई आदि से त्रस्त जनता का ध्यान भटकाकर बीजेपी व इनके सहयोगी संगठनों द्वारा चुन चुनकर व खासकर यहाँ के धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है जो किसी से छुपा नहीं है और इससे यहां के हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं।”
मायावती ने आगे कहा, “ज्ञानवापी, मथुरा ताजमहल व अन्य स्थलों के मामलों में जिस प्रकार से साजिश के तहत लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काया जा रहा है, इससे देश मजबूत नहीं बल्कि और कमजोर ही होगा।”
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