पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद देश की राजनीति में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कद बढ़ा गया है। अरविंद केजरीवाल 2013 में एक नई पार्टी के साथ दिल्ली की राजनीति में कदम रखा था। केवल दस साल के अंदर ही पार्टी ने देशभर में हुए चुनावों में दस्तक देकर अपना जनाधार बनाया है।
पार्टी ने जो भी चुनाव लड़ा उसमें पार्टी का बड़ा चेहरा केवल अरविंद केजरीवाल ही रहे और उनका दिल्ली का विकास माडल चुनावी राज्यों में पंसद किया गया। इस माडल से ही आम आदमी पार्टी पंजाब में भी बहुमत के साथ सत्ता में आई है। दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है और इस वजह से यहां की गतिविधियों में केंद्र सरकार का पूरा दखल है, इसके बावजूद अरविंद केजरीवाल ने सत्ता में आकर आप का मुफ्त माडल विकसित करने में सफलता प्राप्त की है। प्रदर्शन की बदौलत अब आम आदमी पार्टी के पास पंजाब में पूर्ण अधिकार वाली सरकार होगी।
अरविंद केजरीवाल ने 2013 में नई दिल्ली विधानसभा से चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी और 15 साल से लगातार दिल्ली की सत्ता पर काबिज रहीं मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को चुनाव में शिकस्त देकर उनका विजयी अभियान रोका था। अरविंद केजरीवाल ने एक नौकरशाह से सामाजिक कार्यकर्ता और इसके बाद एक राजनीतिज्ञ बनकर राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 2013 में आप को केवल 28 सीट मिली थी। इसके बाद 2015 में हुए चुनाव में पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 67 सीटें हासिल करके नया कीर्तिमान बनाया था।
योगी ने रचा इतिहास
योगी आदित्यनाथ फिर उत्तर प्रदेश प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने उतरे योगी आदित्यनाथ प्रदेश के ऐसे पहले मुख्यमंत्री होंगे जो पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सत्ता में लौटेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के नोएडा और बिजनौर जाने जैसे मिथक भी टूट गए। इस जीत ने योगी को भाजपा के साथ-साथ देश में बड़ा चेहरा बना दिया है। शायद यही वजह है कि एक वर्ग योगी को भारत के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखता है।
साल 1972 में उत्तराखंड के गढ़वाल जिले के एक गांव में जन्में अजय मोहन बिष्ट बचपन से आरएसएस की शाखाओं में जाते थे। अजय बिष्ट ने बीएससी की पढ़ाई गढ़वाल के श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय से पूरी की। 1994 में विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए सहायता मांगने के लिए ही बिष्ट पहली बार गोरक्षपीठ के महंत अवैद्यनाथ से मिले और दो सालों के अंदर ही उन्होंने न केवल दीक्षा ली बल्कि उत्तराधिकारी भी बन गए।
दीक्षा लेने के साथ ही उन्होंने अपना नाम बदल कर योगी आदित्यनाथ कर लिया। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई। 26 साल की उम्र में योगी गोरखपुर से सांसद चुने गए। उत्तर प्रदेश के 21वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले योगी लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद, वर्तमान में श्री गोरक्षपीठ के पीठाधीश चुने जा चुके थे।
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