सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मौजूदा अध्यक्ष जस्टिस अरुण मिश्रा ने फर्जी एनकाउंटर को लेकर बड़ी बात कही है। शुक्रवार को विश्व मानवाधिकार के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि फर्जी एनकाउंटर जैसे मामलों को बिल्कुल देश में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सरकार की लोगों के प्रति जिम्मेदारी बनती है और उसे सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं न हों।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी मौजूद थे। जस्टिस मिश्रा ने कहा, ‘सभी के अधिकार पूर्ण तो नहीं हैं लेकिन सामाजिक ताने-बाने के हिसाब से उनका ध्यान रखना चाहिए। अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।’
न्याय मिलने में देरी को लेकर जस्टिस मिश्रा ने कहा, ‘न्याय मिलने में देरी होती है तो लोग कानून अपने हाथ में ले लेते हैं। इसलिए शीघ्र न्याय देने की व्यवस्था जरूरी है।’ उन्होंने यह भी कहा कि आयोग इस बात को सुनिश्चित करेगा कि राज्य अपनी जिम्मेदारी निभाएँ। लोगों के हित में जिन नीतियों को बनाया जाए उनका पालन भी किया जाए।
भारत में एक लाख की आबादी पर केवल दो जज
शुक्रवार को लोकसभा में सरकार ने बताया कि देश में एक लाख की आबादी पर दो जज हैं। कानून मंत्री किरण रिजिजू ने एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में 10 लाख की आबादी पर 21.03 जज हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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