कश्मीर में 22 नवंबर को खुर्रम परवेज की सुरक्षा बलों द्वारा की गई गिरफ्तारी को लेकर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने चिंता जताई है। उसने भारत से आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए में संशोधन करने का आग्रह किया है। जिसपर भारत की तरफ से सख्त प्रतिक्रिया दी गई है। फटकार लगाते हुए भारत ने कहा है कि सीमा पार से आतंकवाद का भारत किस तरह से सामना कर रहा है, उसका अंदाजा यूएन को नहीं है।
खुर्रम परवेज की गिरफ्तारी: बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पिछले हफ्ते कश्मीर अधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज को आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवादी अधिनियम के कमीशन के लिए धन जुटाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। परवेज पर यूएपीए और दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है जिसमें अधिकतम मौत की सजा है।
संयुक्त राष्ट्र की चिंता: परवेज की गिरफ्तारी पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता रूपर्ट कॉलविल ने यूएपीए के प्रयोग को लेकर चिंता जाहिर की है। जेनेवा से बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि हम आरोपों के तथ्यात्मक आधार से अनजान हैं। परवेज के मानवाधिकार कार्यों के लिए उन्हें पहले भी निशाना बनाया जा चुका है।
भारत की तीखी प्रतिक्रिया: वहीं गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने संयुक्त राष्ट्र के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने यूएपीए सही ठहराते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र के बयान से साफ पता चलता है कि भारत सीमा पार के आतंकवाद का जिस तरह से सामना कर रहा है, उससे उसका अंदाजा नहीं है।
बागची ने कहा कि आतंकवाद के चलते भारतीय लोगों का मानवाधिकार काफी प्रभावित हो रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने खुर्रम की गिरफ्तारी को सही बताया गया है। भारत ने कहा कि यूएपीए को भारतीय संसद ने देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए बनाया है।
बागची ने आगे कहा है कि भारत में अधिकारी कानून के उल्लंघन के खिलाफ काम करते हैं न कि कानून के खिलाफ। हम OHCHR से मानवाधिकारों पर आतंकवाद के नकारात्मक प्रभाव की बेहतर समझ विकसित करने की अपील करते हैं।
The post कश्मीर में गिरफ़्तारी और हत्याओं पर यूएन ने उठाया सवाल, मोदी सरकार ने दिया जवाब appeared first on Jansatta.
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