आगामी 18 जुलाई को राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होगा। जिसकी मतगणना 21 जुलाई को होगी। ऐसे में नये राष्ट्रपति के चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों में मंथन का दौर जारी है। बता दें कि 24 जुलाई 2022 को देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में 12 जून को भाजपा ने जेपी नड्डा और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आम सहमति वाले उम्मीदवार पर तमाम दलों से चर्चा करने का जिम्मा दिया है।
बता दें कि इस चुनाव में संख्या बल को देखे तो भाजपा और उसके सहयोगियों दलों को मिलाकर कुल 48 प्रतिशत वोट हैं। संख्या के आधार यह कुल 10.79 लाख वोटों के आधे से थोड़ा कम यानी 5,26,420 है। ऐसे में एनडीए के सबसे अधिक नंबर तो हैं लेकिन उन्हें क्षेत्रीय दलों का भी सहारा चाहिए होगा। जिसमें बीजेडी और वाईएसआरसीपी का साथ अहम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि बीजद के पास 31,000 से अधिक वोट हैं तो वहीं वाईएसआरसीपी के पास 43,000 से अधिक वोट होने का अनुमान है। इनके साथ आने को लेकर भाजपा नेताओं का कहना है कि “हमारे उम्मीदवार के चुनाव हारने का कोई सवाल ही नहीं है।”
हालांकि संख्या बल भले ही राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को मजबूत कर रहे हों, लेकिन एनडीए सहयोगी जदयू की तरफ से नीतीश कुमार का नाम प्रत्याशी के तौर पर सामने लाना, भाजपा के लिए चिंता का सबब हो सकता है। फिलहाल पार्टी के नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा की तरफ से उम्मीदवार नहीं हैं। वहीं नीतीश कुमार भी खुद को इस रेस से बाहर बताते आ रहे हैं।
जीत के समीकरण को देखें तो भाजपा, जिसके पास कुल वोटों की संख्या से आधे से थोड़े कम वोट(5,26,420) हैं। उसे करीब 13,000 के करीब वोट और चाहिए होंगे। ऐसे में उसे BJD, YSRCP जैसे क्षेत्रीय दलों का समर्थन चाहिए होगा।
उम्मीदवार: माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा पिछड़ी जातियों या आदिवासी समुदाय से किसी को राष्ट्रपति चुनाव में अपना प्रत्याशी बना सकती है। इसके अलावा लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की नजर महिला वोटों पर भी है, ऐसे में संभव है कि पार्टी किसी महिला उम्मीदवार को भी मैदान में उतारे।
2017 का हाल: भाजपा ने 2017 में अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के लिए 7,02,044 वोट हासिल किए थे। लेकिन आज की स्थिति में एनडीए के कुल इलेक्टोरल कॉलेज के वोट घटकर 5.26 लाख रह गए हैं। इसमें लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाएं शामिल हैं। ऐसे में भाजपा केवल निचले सदन में बहुमत में है। उच्च सदन में बहुमत के लिए उसे वाईएसआरसीपी, बीजद और अन्नाद्रमुक के समर्थन की जरुरत होगी।
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