Friday, September 24, 2021

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव: पिछली बार हारी सीटों पर योगी की नजर, दो दिन में सात जिलों का किया दौरा, निषाद पार्टी से बीजेपी के गठजोड़ का भी हुआ ऐलान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य का धुंआधार दौर कर रहे हैं। जिन सीटों पर 2017 के चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को शिकस्त मिली थी, वहां खास तौर पर पार्टी का फोकस दिखाई दे रहा है। सीएम योगी द्वारा दो दिनों के भीतर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सात जिलों का दौरा और उनके लिए सौगातों की झड़ी इस बात को मजबूत कर रही है कि बीजेपी ने उन सीटों के लिए खास प्लान तैयार किया है, जहां पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था।

पिछले विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 17 विधानसभा सीटों पर बीजेपी को हार मिली थी। सीएम योगी ने 21 और 22 सितंबर को इन्हीं सीटों से संबंधित सात जिलों का दौरा किया था। 2017 में पार्टी ने ‘अबकी बार 300 पार’ के नारे को 2022 के लिए ‘अबकी बार 350 पार’ कर दिया है।

2017 में किन सीटों पर मिली थी विफलता: वैसे तो 2017 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी, ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी लेकिन ऐसी स्थिति में भी पश्चिम यूपी का हिस्सा उनके प्रभाव से अछूता नजर आया था। साल 2017 में बीजेपी ने 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 14 जिलों की 71 सीटों में से 54 पर कामयाबी मिली थी। जिन 17 पर पार्टी हार गई थी, उनमें मेरठ शहर, धौलाना, सहारनपुर देहात, कैराना, बेहट, मुरादाबाद देहात ठाकुरद्वारा, कुंदरकी, बिलारी, रामपुर, चमरव्वा, स्वार, अमरोहा, नजीबाबाद, नगीना, छपरौली सीट शामिल थी। इसके अलावा बिजनौर की नूरपुर सीट पर बीजेपी को उपचुनाव में हार का मुख देखना पड़ा था।

बागपत की छपरौली विधानसभा सीट से भी बीजेपी का प्रत्याशी हार गया था लेकिन बाद में वहां का विधायक बीजेपी में शामिल हो गया था। इसके अलावा मुजफ्फरनगर की मीरापुर सीट से बीजेपी जीती थी लेकिन अवतार सिंह भड़ाना के इस्तीफे के बीच ऊहापोह की स्थिति बनी रही और वहां उपचुनाव ही नहीं हो सके।

क्या जाटों की नाराजगी गुर्जर समुदाय के सहारे होगी?: बीजेपी के लिए चिंता का विषय जाटों की नाराजगी है। किसान आंदोलन की अनदेखी से नाराज किसानों का गुस्सा 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत के बाद और बढ़ गया है। पार्टी अब जाट बाहुल इलाकों में नुकसान की भरपाई का रास्ता तलाश रही है। ऐसा माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी जाटों की नाराजगी के कारण पैदा हुई चुनौती का सामना गुर्जरों के सहारे करने की कोशिश में है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर समुदाय, जाटों के बाद दूसरा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली समुदाय माना जाता है। जिसका प्रभाव सहारनपुर से लेकर नोएडा तक है। दादरी में सीएम योगी द्वारा राजा मिहिरभोज की प्रतिमा के अनावरण को इसी कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं राजनीति के जानकार मानते हैं कि गुर्जर समुदाय का असर यूपी की 15 से 20 सीटों पर माना जाता है जबकि जाट समुदाय का प्रभाव लगभग 100 सीटों पर माना जाता है।

निषाद पार्टी से बीजेपी का गठजोड़: बीजेपी और निषाद पार्टी के बीच सियासी गठजोड़ को लेकर पिछले कुछ दिनों से सियासी गलियारों में सुगबुगाहटों का दौर जारी थी। शुक्रवार (24 सितंबर) को सभी कयासों पर विराम लगाते हुए बीजेपी ने निषाद पार्टी के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया। बताते चलें कि निषाद पार्टी का पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन हुआ था। संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने संतकबीर नगर से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत भी दर्ज की थी। आगामी चुनावों से पहले निषाद पार्टी द्वारा की गई कई अपीलों की वजह से सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार संजय निषाद द्वारा 14 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का आरक्षण सहित कुछ अन्‍य मांगों पर बीजेपी के बीच सहमति बन चुकी है। सूत्रों का कहना है कि दोनों ही पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर भी सहमति बन चुकी है।

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