भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 में हुआ था। वे 15 साल तक दीनदयाल उपाध्याय ने जनसंघ के महामंत्री पद रहे और पार्टी की जड़ों को मजबूत करने का काम किया। आगे चलकर 1967 में उन्हें पार्टी के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि अध्यक्ष बनने के अगले साल ही, 10 फरवरी 1968 को उनकी रहस्यमयी परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को चकित कर दिया।
लगभग तीन दशकों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में उनके सहयोगी रहे नानाजी देशमुख ने 1971 में दीनदयाल उपाध्याय की 55वीं जयंती पर उपाध्याय की मृत्यु को लेकर बने रहस्य पर खेद व्यक्त किया था। देशमुख ने 1971 में नई दिल्ली में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, “आज हम पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 55वीं जयंती मना रहे हैं, लेकिन हमारी आंखों में आंसू हैं।” न तो सीबीआई और न ही चंद्रचूड़ जांच आयोग यह बता सका कि आखिर दीनदयालजी की हत्या क्यों और किसने की।
बता दें कि दीनदयाल उपाध्याय की मौत को लेकर तत्कालीन सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी थी। उस वक्त जॉन लोबो CBI सीबीआई निदेशक थे। जिनकी छवि एक ईमानदार अधिकारी के तौर थी। जांच मिलते ही लोबो अपनी टीम के साथ मुग़लसराय स्टेशन(अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन) गए।
वहां लोबो इस मामले की जांच पूरी कर पाते, इससे पहले ही उन्हें वापस दिल्ली बुला लिया गया। इसकी वजह से आरोप लगे कि दीनदयाल उपाध्याय की मौत मामले की जांच की दिशा बदलने का प्रयास किया गया है। बाद में सीबीआई की तरफ से इस मामले में निष्कर्ष रिपोर्ट दाखिल की गई कि, दीनदयाल उपाध्याय की हत्या चोरों ने की, और उनका मकसद, चोरी करना था।
इस रिपोर्ट के आधार पर 9 जून 1969 को एक अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि, ‘इस मामले में अभी भी वास्तविक सच्चाई खोजी जानी है।’ इस बयान के बाद से सियासी हलचल मच गई। जिसके बाद इंदिरा गांधी सरकार ने एक जांच आयोग गठित इस मामले को सौंपा। 23 अक्टूबर 1969 को गठित इस कमेटी के अध्यक्ष वाईवी चंद्रचूड़ थे। पांच महीने बाद इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, दीनदयाल उपाध्याय की मौत रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई।
आयोग ने कहा कि, ‘मुगलसराय में जो कुछ भी हुई वो किसी उपन्यास के जैसा रहा। मामले को लेकर कई लोगों का व्यवहार सामान्य नहीं था। जिससे संदेह पैदा होता है। ऐसी परिस्थितियों में सामान्य व्यवहार की उम्मीद की जाती, लेकिन मुग़लसराय की कुछ घटनाओं का ताना बाना अजीब तरह से बुना गया है।’ रिपोर्ट में आगे कहा गया, ‘इस मामले में संदिग्ध परिस्थितियों का अंत नहीं है। इसकी वजह से धुंधलापन पैदा होता है, जिसका मक़सद असली सच को छिपाने जैसा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि, शव के पास से वैध टिकट का मिलना, जिससे उनकी पहचान हो सके, शव को एक अस्थायी तरीके से रखा जाना, जिस कंपार्टमेंट में वो सफर कर रहे थे उसमें फिनायल की बोतल मिलना, ऐसे और भी कई सवाल परिस्थितियों को असामान्य बनाते हैं।
The post दीन दयाल उपाध्याय: हाथ में पांच रुपए का नोट पकड़े पटरी के पास मिली थी लाश, जानिए ट्रेन के आखिरी सफर में कौन थे साथ, सीबीआई निदेशक लोबो को पूरी नहीं करने दी गई थी जांच appeared first on Jansatta.
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