Sunday, November 22, 2020

ज्ञान सागर: जहां धर्म, वहां ओज एवं जय

अकसर कुछ लोग इसलिए भी धर्म की उपेक्षा करते हैं कि उन्हें सच्चे धर्म का बोध नहीं है और वे पंथों, मजहबों द्वारा स्वार्थ के लिए फैलाए गए क्रियाकलापों को धर्म मानते हैं। अत: धर्म का वास्तविक सार्वभौम एवं विश्वमानव के लिए हितकारी समान स्वरूप को समझने की आवश्यकता है। हमें धर्म के लक्षणों को देखना चाहिए।

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