Tuesday, September 29, 2020

स्मृति: करघे पर गांधी के सपनों को बुनता सुवालकुची

असम की संस्कृति में रेशम व सूत की बुनाई-कताई गहरे तक समाई हुई है। इसे उद्योग के रूप में पूर्णत: साकार करने में पहला नाम सुवालकुची का आता है। असम में सूत व रेशों की रंगाई और बुनाई का पारंपरिक ढांचा आज भी विद्यमान है।

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