याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने मंदिर के परिसर में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद की प्रबंध समिति के साथ जो समझौता किया था, वह कानूनी रूप से गैरवाजिब है क्योंकि, सेवा संस्थान जब उक्त 13.37 एकड़ भूमि का मालिक ही नहीं था तो उसे किसी व्यक्ति अथवा संस्था के साथ इस प्रकार कोई भी करार करने का अधिकार नहीं था।
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