Wednesday, May 27, 2020

व्यंग्य: कोरोना से आगे का रोना

आप कहते हैं, इस बार यह कोरोना अदृश्य होकर सामने आया है। प्रतिरोध के लिए दवा-दारू, टीके ढूंढ रहे हैं पर तलाश नहीं कर पाए। अब नीम हकीम जड़ी बूटियों से लेकर गोमूत्र के ताबीज बांट रहे हैं। प्राकृतिक बचाव वाले हाथ धोने से लेकर गरारे करने तक की सलाह दे रहे हैं और मजदूर अपने परिवार को कंधे पर लादकर सड़कों पर भटक लिए।

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