किसान और किसानी की उपेक्षा हर सरकार करती रही है। उन्हें बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, फसलों की उचित कीमत दिलाने के लिए कोई व्यावहारिक नीति नहीं बनाई गई। इस वजह से खेती अब न सिर्फ घाटे का सौदा बन गई है, बल्कि इस पर निर्भर रहने वाले किसान खुदकुशी करने को विवश हो रहे हैं। अब तक तीन लाख से ऊपर किसान आत्महत्या कर चुके हैं। इसलिए किसानों के सब्र का बांध टूट रहा है और वे सरकार के सामने अपनी बात रखने दिल्ली पहुंचे।
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