Saturday, December 1, 2018

संपादकीय: मुआवजे की राहत

भीड़ में तब्दील हो गए लोगों के सोचने-समझने की क्षमता इस कदर बाधित हो जाती है कि वे किसी शक या घटना के सही या गलत पर विचार तक कर सकने लायक नहीं रह जाते। इसके बाद वे ऐसी गतिविधियों में शामिल हो जाते या बह जाते हैं, जो न केवल अपराध, बल्कि इंसानियत के खिलाफ होती हैं।

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