Friday, October 1, 2021

Aadhaar Card अपडेट कराने को केंद्र पर फिजिकल डॉक्यूमेंट ले जाना जरूरी है? जानें- पूरी प्रक्रिया

आधार कार्ड में कुछ गड़बड़ जानकारी छप कर आ गई फिर आपको ही अपना पता या फिर मोबाइल नंबर अपडेट कराना है, तब यह बड़े सरल तरीके से हो सकता है। आधार कार्ड में संशोधन कराने के दो प्रमुख तरीके हैं। पहला- आधार एनरॉलमेंट सेंटर जाकर, जबकि दूसरा आधार के पोर्टल के जरिए।

आपके घर के पास आधार केंद्र कहां है? यह यूआईडीएआई की साइट पर जाकर पता लगाया जा सकता है। वहां ‘लोकेट एनरॉलमेंट सेंटर’ का विकल्प मिलेगा, उस पर क्लिक कर आप नजदीकी केंद्र ढूंढ सकते हैं। वहां आपको अपनी पहचान से जुड़े अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट्स लेकर जाने होंगे।

वहीं, आधार में अपडेशन का काम घर बैठे भी किया जा सकता है। uidai.gov.in पर इसके लिए सेल्फ सर्विस अपडेट पोर्टल (एसएसयूपी) पर जाना पड़ता है, जहां पर ‘अपडेट आधार डिटेल्स’ का ऑप्शन मिलता है।

क्या-क्या कराया जा सकता है अपडेट?: आधार केंद्र पर जाकर डेमोग्राफिक्स (नाम, पता, जन्मतिथि, लिंग, मोबाइल और ई-मेल) और बायोमीट्रिक्स (फिंगर प्रिंट्स, आयरिस और फोटो)।

डेमोग्राफिक हो या फिर बायोमीट्रिक अपडेशन आधार में इन्हें कराने के लिए 50 रुपए की रकम चुकानी पड़ती है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए यूआईडीएआई की वेबसाइट पर मौजूद फीस स्ट्रक्चर चेक किया जा सकता है, जो ‘चार्जेज़ फॉर वेरियस यूआईडीएआई सर्विसेज़ एट आधार केंद्र’ के नाम से मिलेगा।

आधार एनरॉलमेंट के लिए मूल दस्तावेज (ओरिजिनल/फिजिकल) लाने की जरूरत पड़ती है। इन्हें वहां पर संबंधित कर्मचारी स्कैन कर के देखेगा और फिर वापस आपको लौटा देगा।

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अमरिंदर सिंह ने बहुत से वादों को पूरा नहीं किया- बोलीं कांग्रेस प्रवक्ता, बाद में करने लगीं इनकार तो संबित पात्रा ने दिया ये जवाब

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कुछ समय पहले पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा था कि उनका अपमान हुआ था इस कारण उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया। कैप्टन इस बीच गृहमंत्री अमित शाह से भी मिले जिसे लेकर ऐसी अटकलें तेज़ हो गईं कि वो भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने जल्द ही यह स्पष्ट कर दिया कि वो बीजेपी में नहीं जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अब वो कांग्रेस में भी नहीं रहेंगे। उनके इस्तीफे को लेकर बहस अभी तक छिड़ी हुई है।

आज तक के एक डिबेट शो में बोलते हुए कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि कैप्टन अपने सभी वादे पूरे नहीं कर पाए इसलिए सबकी सर्वसम्मति से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वो बोलीं, ‘कैप्टन साहब ने काम किया कांग्रेस की सरकार में लेकिन बहुत सारे वादे थे जिसे पूरे नहीं किए और इसलिए सर्वसम्मति से, सबसे बातचीत कर, विधायकों का मत लेकर निर्णय लिया गया कि हम चन्नी जी (चरणजीत सिंह चन्नी) को मुख्यमंत्री बनाएंगे।’

उनकी इस टिप्पणी पर बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा बोले, ‘कैप्टन साहब साढ़े चार साल तक मुख्यमंत्री रहे और अभी कांग्रेस की प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने जो वादे थे उनको पूरा नहीं किया। तो एक तरह से आप मानती हैं कि कांग्रेस पार्टी ने जो वादे किए थे पंजाब में… ।’ संबित पात्रा की बातों के बीच सुप्रिया श्रीनेत ने असहमति से अपना सिर हिलाते हुए कहा, ‘मैंने बिलकुल ऐसा नहीं कहा…बिलकुल नहीं।’

उनके इनकार पर संबित पात्रा बोले, ‘आप रिवाइंड कराके देख सकतीं हैं…जनता जनार्दन.. सब लोग यहां आपको देख रहे हैं।’ शो की एंकर चित्रा त्रिपाठी ने भी संबित पात्रा की बातों से सहमती जताते हुए सुप्रिया श्रीनेत से कहा कि उन्होंने खुद ये बात कही है लेकिन सुप्रिया श्रीनेत इनकार करतीं रहीं।

संबित पात्रा आगे बोले, ‘इन्होने कहा कि कैप्टन साहब ने जो कहा वो वादे पूरे नहीं किए। इससे बड़े कंफेशन क्या हो सकता है? इससे बड़ी स्वीकृति क्या हो सकती है कि पंजाब की जनता को कांग्रेस की सरकार ने इतने वर्षों तक वो नहीं दिया जो उन्होंने कहा था। इस कारण से कैप्टन साहब को हटाना पड़ा। अगर ये सारा विषय कांग्रेस को पता था तो पहले ही कैप्टन साहब को क्यों नहीं हटा रही थी?’

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महात्मा गांधी पर ‘सच’ बोलने से घबराता है पाकिस्तान! ‘जिन्ना के देश’ में भी सत्य, अहिंसा का संदेश दे रहीं ये मूर्तियां

साल 1946 के आसपास जब देश में एक तरफ दंगे भड़के हुए थे तो दूसरी तरफ दिल्ली में देश की आजादी के साथ ही देश के बंटवारे की भी तैयारियां की जा रही थी। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच बंटवारे की सहमति बन गई थी लेकिन गांधी एक मात्र शख्स थे जो देश के बंटवारे में कोई जल्दबाजी नहीं चाहते थे। इतना ही नहीं उनके ना चाहने के बावजूद भी हुए बंटवारे के बाद भी वे इसे रोकने की कोशिश में लगे हुए थे। गांधी कहते थे कि वह बिना वीजा और पासपोर्ट के पाकिस्तान जाएंगे, क्योंकि वह भी उनका अपना मुल्क है। उनका मानना था कि दोनों देश अपनी-अपनी जगह रहें, लेकिन दोनों देशों के लोग बिना किसी रोक-टोक के एक दूसरे के यहां आ-जा सकें।

पाकिस्तान तक को अपना मानने वाले महात्मा गांधी का आज जन्मदिवस है। उनके इस जन्मदिवस को भारत सहित दुनिया भर के देशों में मनाया जा रहा है। लेकिन जिस पाकिस्तान को वे भारत की तरह ही अपना देश मानते थे, वही देश आज उनके बारे में सच बोलने से घबराता है। वहां की किताबों में उन्हें मुसलमानों का दुश्मन, पाकिस्तान का दुश्मन, हिन्दुओं का नेता और भारत माता की पूजा तक करने वाला बताया है. इतना ही नहीं वहां की किताबों में गांधी को सावरकर के सामने बताया जाता है।

गांधी को पाकिस्तानी इतिहास की किताबों में मुस्लिम विरोधी की जगह दी गई। पाकिस्तानी इतिहासकारों ने लोगों के मन में जमकर गांधी के प्रति नफ़रत भरी। आप इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार एक बार उर्दू के एक लेखक ने लिखा था कि बेहद ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनकी आलोचना की थी।

इस तरह के कईयों उदाहरण पाकिस्तान के विभाजन के बाद वहां लिखे गए उर्दू साहित्य में हैं जहां गांधी के बारे में सिर्फ और सिर्फ नफरती बातें लिखीं गई। लेकिन गांधी के विरोधी अक्सर यह भूल जाते हैं कि उनके चाहने वाले और उनको मानने वाले पाकिस्तान के बनने के पहले भी वहां मौजूद थे और आज भी मौजूद हैं। खुद पाकिस्तान के कायदे-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना भी भले ही उनके राजनीतिक विरोधी हों लेकिन वे भी उनका सम्मान किया करते थे। 

महात्मा गांधी की मौत के बाद जिन्ना ने उन्हें हिंदू समुदाय में पैदा होने वाले महानतम शख्सियतों में से एक बताते हुए कहा था कि गांधी के ऊपर हुए बेहद कायराना हमले के बारे में जानकर मैं हैरान हूं। इस हमले में उनकी मौत हो गई। हमारे राजनीतिक विचारों में चाहे जितना विरोध रहा हो, लेकिन ये सच है कि वो हिंदू समुदाय में पैदा होने वाले महानतम शख्सियतों में से एक थे।  

भले ही जिन्ना के देश पाकिस्तान में गांधी के खिलाफ जमकर नफरत उड़ेली जाती हो लेकिन वहां मौजूद उनकी मूर्तियां आज भी अहिंसा और सत्य का संदेश देती हैं। आज भी पाकिस्तान के इस्लामाबाद में गांधी की दो मूर्तियां मौजूद हैं। पहली मूर्ति इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के दफ्तर में लगाई गई है। दूसरी इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान के संग्रहालय में लगाई गई है। हालांकि यह मूर्ति जिन्ना और गांधी के साथ हुई मुलाकात के सन्दर्भ में लगाई गई है पाकिस्तान के विभाजन के बाद से वहां गांधी की राजनीति और दर्शन पर कोई काम नहीं किया गया है। इतना ही नहीं उनके दौरों और उनसे जुड़ी जगहों के इतिहास को भी सहेज कर नहीं रखा गया है।

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आप कहो तो हम दिल्ली के रास्ते खुलवा देंगे- SC की तल्ख टिप्पणी पर राकेश टिकैत ने यूं दिया जवाब, दिल्ली पुलिस पर फोड़ा ठीकरा

दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन की मांग को लेकर किसानों की तरफ से दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख़ टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसानों ने लंबे समय से शहर का गला घोंट दिया है और अब शहर में जाकर उपद्रव करना चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि हाईवे किसानों ने नहीं बल्कि पुलिस ने अपनी बैरिकेडिंग से जाम कर रखे हैं। टिकैत ने तंज के अंदाज़ में कहा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट चाहे तो वो लोग दिल्ली के रास्ते खुलवा देंगे।

राकेश टिकैत ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट को रास्ते खुलवाने चाहिए, जो पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखे हैं। रास्ते बंद कर रखे हैं सरकार ने। हमारा रास्ता भी क्लियर करवा दो.. हम भी आगे को बढ़ें, जनता भी आगे को बढ़े। पुलिस रोके है रास्ते तो, रास्ते किसान नहीं रोकता। 10 महीने से सरकार ने सड़क बनाकर कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी।’

उन्होंने आगे कहा, ‘बैरिकेडिंग को किसानों ने लगाया? अगर हम बैरिकेडिंग तोड़ें तो कहोगे तोड़ दी। हम अपने आप रास्ते खुलवा लेंगे। आप अगर कहते हो कि दिल्ली के रास्ते बंद हैं तो हम खुलवा लेंगे। अगर आप कहते हो तो बताओ हम खुलवा लें रास्ते…कुछ जनता आ जाए जिनके रास्ते रुक रहे हैं और कुछ हम हो जाएंगे और फिर चलें दिल्ली की तरफ को।’

राकेश टिकैत ने इसी बीच दोहराया कि किसान आंदोलन अभी चलेगा। उनका कहना था कि आंदोलन अब क्रांति बनेगा। वो बोले, ‘देश को बेचने पर निकल गई है सरकार, ये आंदोलन अभी चलेगा। आंदोलन अब खेत से क्रांति की तरफ जाएगा।’

गौरतलब है कि पिछले करीब एक साल से दिल्ली एनसीआर में नेशनल हाईवे को प्रदर्शन के चलते अवरुद्ध करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत को जमकर फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अगुवाई वाली पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने जाने वाले यातायात में रुकावट आई है। इस कारण व्यवसाय बंद हो गए हैं। क्या आपने प्रदर्शन के आस पास के निवासियों से कभी पूछा कि वो इस बात से खुश या नहीं? वहीं किसान महापंचायत के वकील ने कोर्ट में यह कहा कि बैरिकेड्स किसानों ने नहीं, पुलिस ने लगाए हैं।  

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किराए के मकान में रहता है तीन हजार करोड़ हेरोइन मामले में आरोपी दंपत्ति, लॉकडाउन में चली गई थी नौकरी

अरुण जनार्दन.

पिछले दिनों गुजरात पोर्ट से 3000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। इसकी कीमत 21 हजार करोड़ रुपए बताई गई। हेरोइन की जब्ती के बाद की गई जांच में पता चला कि यह आंध्र प्रदेश की एक आशी ट्रेडिंग कंपनी द्वारा आयात किया गया था जिसे एम सुधाकर और उनकी पत्नी जी दुर्गा पूर्णा वैशाली द्वारा चलाया जाता है। तीन हजार करोड़ का हेरोइन आयात करने के मामले में पकड़ा गया दंपत्ति किराए के मकान में रहता है। इतना ही नहीं आरोपी सुधाकर की नौकरी भी लॉकडाउन के दौरान चली गई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार हेरोइन मामले में आरोपी दंपत्ति एम सुधाकर और उनकी पत्नी जी दुर्गा पूर्णा वैशाली चेन्नई अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के नजदीक स्थित कोलापक्कम इलाके के किराए के मकान में करीब छह साल से रहता है। इतना ही नहीं उसके पड़ोसियों के अनुसार पिछले साल लगे लॉकडाउन के दौरान एम सुधाकर की नौकरी चली गई थी। उसी दौरान आशी ट्रेडिंग कंपनी की शुरुआत की गई।

मूल रूप से आंध्र प्रदेश का रहने वाला सुधाकर लंबे समय तक चेन्नई में रहने के कारण धाराप्रवाह तमिल बोलता था। इतना ही नहीं वह हिंदी बोलने में भी पारंगत था। तमिलनाडु पुलिस के सूत्रों के अनुसार सुधाकर चेन्नई बंदरगाह पर एक कार्गो एजेंट के रूप में नौकरी करता था जबकि पड़ोसियों का कहना है कि उसने उन्हें बताया था कि वह मायलापुर में एक प्रमुख औद्योगिक फर्म में काम करता था। वह काम पर जाने के लिए अपने दोपहिया वाहन की सवारी करता था। उसके पास एक कार भी थी।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के द्वारा किए गए पूछताछ में सुधाकर ने उन्हें बताया कि उसने पिछले साल अगस्त महीने में अपनी पत्नी के नाम से इसे शुरू किया। आशी ट्रेडिंग कंपनी सुधाकर की पत्नी वैशाली के मां के नाम पर ख़रीदे गए फ़्लैट वाले पते पर पंजीकृत है। साथ ही कंपनी को भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय से भी आयात-निर्यात करने का लाइसेंस मिला हुआ था।

पिछले दिनों गिरफ्तार किए गए चेन्नई दंपत्ति की संलिप्तता पर अधिकारियों को कोई आश्चर्य नहीं हुआ। अधिकारियों के अनुसार आमतौर पर ड्रग व्यापारी वैध लाइसेंस वाले ऐसे ही लो प्रोफाइल एक्सपोर्टर की तलाश करते हैं क्योंकि इससे अफगानी एक्सपोर्टर की तुलना में उनपर कम शक पैदा होता है। शुक्रवार को विशेष एनडीपीएस अदालत ने सुधाकर और उनकी पत्नी वैशाली को रिमांड पर पलारा स्थित विशेष जेल भेज दिया।

डीआरआई ने हेरोइन बरामदगी के मामले में एक अन्य व्यक्ति राजकुमार पी को भी कोयंबटूर से गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर अर्ध-कीमती तालक पत्थरों की खेप की तस्करी ईरान से भारत में करने का आरोपी है। राजकुमार पी ने ईरान में भी काम किया है। जिसकी वजह से उसका ईरान में अच्छा नेटवर्क स्थापित हो गया था। राजकुमार पी को 4 अक्टूबर तक के लिए डीआरआई की हिरासत में भेजा गया है।  

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UP Election: लगातार ख़राब हो रही कांग्रेस की हालत, चुनाव से पहले सपा की ओर रुख कर सकते हैं बड़े नेता

उत्तर प्रदेश में एक बड़ी रैली के जरिए कांग्रेस भी चुनावी बिगुल फूंकने जा रही है। पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी बरेली में 10 दिन बाद बड़ी जनसभा को संबोधित करने वाली हैं। इससे पहले कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भी ‘दल बदल’ संकट का सामना कर रही है। ज़मीनी पकड़ रखने वाले कई नेता पार्टी में विश्वास खो चुके हैं और वे सपा में शामिल हो रहे हैं।

बुंदेलखंड के बड़े कांग्रेसी नेता और पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी और विनोद चौधरी ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। उनके साथ महोबा के मनोज तिवारी ने भी सपा की सदस्यता ले ली। यह सब तब हुआ जब कांग्रेस के पूर्व विधायक और पश्चिमी यूपी में पकड़ रखने वाले इमरान मसूद ने कह दिया कि राज्य में भाजपा को मात देने में केवल सपा ही सक्षम है। उन्होंने कहा था कि सभी पार्टियों को सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए।

यह भी पढ़ेंः उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव: अमेठी में कांग्रेस नेताओं की आस से बुझेगी जीत की प्‍यास?

मसूद ने यह भी कहा था कि बहुत प्रयासों के बावजूद प्रियंका गांधी वोट जोड़ने में सफल नहीं हो पाई हैं। बता दें कि मसूद पहले सपा में ही थे। बाद में वह कांग्रेस में शामिल हो गए थे। हाल ही में उन्हें दिल्ली में AICC सेक्रटरी का पद दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक मसूद और अन्य कई जाट नेता कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं।

बता दें कि जितिन प्रसाद जैसे हाई प्रोफाइल नेता के भाजपा में जाने से कांग्रेस को पहले ही नुकसान हो चुका है। अब प्रसाद राज्य की भाजपा सरकार में मंत्री हैं। अब अनुरागी के दल बदलने से कांग्रेस की परेशानी बढ़ सकती है क्योंकि वह बुंदेलखंड क्षेत्र में बड़े दलित नेता माने जाते हैं। अनुरागी को कांग्रेस स्टेट यूनिट का उपाध्यक्ष भी बनाया गया था और प्रियंका गांधी ने उनसे चुनाव की तैयारियां करने को कहा था।

सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं ने कांग्रेस का साथ इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उन्हें लगता था कि पार्टी में कोई उनकी बात सुनने वाला नहीं है।

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उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव: अमेठी में कांग्रेस नेताओं की आस से बुझेगी जीत की प्‍यास?

यूपी में व‍िधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होने लगी है। पर अमेठी के कांग्रेस‍ियों की गर्मजोशी अभी नहीं बढ़ी है। हालांक‍ि, इस बार प्र‍ियंका के सक्र‍िय होने से उनकी उम्‍मीदें बढ़ी हैं। लेक‍िन, स्‍थानीय स्‍तर पर नेतृत्‍व की कमी के चलते न केवल कार्यकर्ता, बल्‍क‍ि नेता भी घर बैठे हैं। 

रायबरेली सांसद सोनिया गांधी के प्रतिनिधि केएल शर्मा बयानों से उत्‍साह बढ़ाने की कोश‍िश जरूर करते हैं। उनका कहना है क‍ि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी और रायबरेली की सभी दस सीटों पर कब्जा करेगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की लहर थी। लेकिन रायबरेली में कांग्रेस के दो विधायक चुने गए थे। अब तो कांग्रेस के अच्छे दिन आने वाले हैं। लेक‍िन, अमेठी ब्‍लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बृजेंद्र शुक्ल का दर्द कुछ अलग ही कहानी बयां करता है। उनका कहना है कि राहुल गांधी की हार के बाद से अमेठी में अब कोई बड़ा कांग्रेसी चेहरा या ज‍िम्‍मेदार नेता नहीं है। अमेठी में गांधी परिवार के समर्थकों की आज भी कमी नहीं है। लेकिन कार्यकर्ताओं को संभालने वाले नहीं हैं। न‍िराश कांग्रेसी घर बैठे हैं। 

उत्‍तर प्रदेश व‍िधानसभा चुनाव, 2017 में अमेठी में कांग्रेस को बेहद कम वोट मि‍ले थे। पार्टी उम्‍मीदवार अमीता स‍िंंह चौथे नंबर पर पहुंच गई थीं। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की हार ने तो कांग्रेस‍ियों की सारी उम्‍मीदें खत्‍म कर दीं।  यहां देखें 2017 अमेठी व‍िधानसभा चुनाव में व‍िभ‍िन्‍न उम्‍मीदवारों को मि‍ले वोटों की संख्‍या: 

उत्‍तर प्रदेश में हुए सभी व‍िधानसभा चुनावों की बात करें तो 1951 से 2017 के दौरान कुल 17 चुनाव हुए। इनमें से आठ बार अमेठी में कांग्रेस (1980 में इंद‍िरा कांग्रेस के संजय स‍िंह सह‍ित) के व‍िधायक बने। लेक‍िन, इस दौरान व‍िधायकों के नाम देखने से यह संकेत भी म‍िलता है क‍ि लोगों ने पार्टी के बजाय चेहरे को प्रमुखता दी है। नीचे देखें, अमेठी के अब तक के सभी व‍िधायकों की सूची: 

अब बात करते हैं लोकसभा चुनावों की। 1967 से 2019 के बीच अमेठी में लोकसभा के 16 चुनाव हुए। इनमें केवल तीन बार ही ऐसा हुआ क‍ि गैर कांग्रेसी नेता चुनाव जीता। 2019 में भी राहुल गांधी को चार लाख से ज्‍यादा लोगों ने वोट द‍िया था। स्‍मृत‍ि ईरानी ने उन्‍हें करीब 55 हजार वोटों से हराया था। 

राजीव गांधी यहां से सबसे ज्‍यादा समय तक सांसद रहे। 30 साल पहले 21 मई 1991 को उनकी हत्या हो गई थी। तब भी राजीव गांधी अमेठी के सांसद थे। अब स्मृति ईरानी हैं। राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार कर वापस लौट चुके हैं। लेकिन राजीव गांधी को चाहने वालों की तादाद आज भी यहां काफी है। 1981 की विमान दुर्घटना में संजय गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी को पायलट की नौकरी छोड़वा कर राजनीत‍ि में लाया गया था। तभी वह अमेठी के सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1991 तक अमेठी के सांसद थे।

इस बीच वे देश के प्रधानमंत्री बने तो अमेठी की तस्वीर बदलने की काफी कोश‍िश की। अमेठी के पुराने लोग याद करते हैं और बताते हैं क‍ि राजीव गांधी के कार्यकाल में अमेठी को विकास से जोड़ने के लिए पांच सौ भी ज्‍यादा कल-कारखाने लगवाए गए थे। इसके बाद अमेठी में बुजुर्गों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रौढ़ शिक्षा, महिलाओं को रोजगार के लिए हाथ का चरखा, छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी, युवाओं के लिए अनौपचारिक शिक्षा, निर्धन बच्चों के लिए नवोदय विद्यालय, पंचायती राज योजना, विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी, किसानों की बंजर भूमि को उपजाऊ जमीन बनाने के लिए ऊसर सुधार योजना जैसी कई योजनाएं भी शुरू कराई गई थीं। 

1991 में राजीव गांधी की मौत के बाद से अमेठी में संचालित विकास की योजनाएं छू मंतर हो गईं। बाद में कैप्टन सतीश शर्मा, सोनिया गांधी, राहुल गांधी अमेठी के सांसद चुने गए, लेकिन योजनाएं लाने की रफ्तार नहीं लौटा पाए। कैप्टन सतीश शर्मा और राहुल गांधी दोनों को अमेठी में हार का सामना करना पड़ा।

इस बार प्र‍ियंका गांधी सक्र‍िय हैं। उनकी वजह से स्‍थानीय नेताओं में भी उम्‍मीद जगी है। वे मानते हैं क‍ि अमेठी और रायबरेली में कार्यकताओं की कमी नहीं है। उन्‍हें जगाने का समय आ गया है। स्‍थानीय कांग्रेस प्रवक्ता अनिल सिंह को यहां तक उम्‍मीद है कि कांग्रेस की वापसी के लिए सीनियर नेता भी चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। प‍िछले महीने प्र‍ियंका जब रायबरेली गई थीं तो कुछ समय के ल‍िए अमेठी के त‍िलोई में भी एक गांव गई थीं। कई नेता तो प्र‍ियंका गांधी के भी चुनाव लड़ने की आस लगाए बैठे हैं। ऐसी आस से जीत की प्‍यास कहां तक बुझ पाएगी, यह तो अभी देखना बाकी है। 

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‘विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली भाषा हिंदी’

केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर आयुक्तालय, ठाणे में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह मनाया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ करुणाशंकर उपाध्याय ने जानकारी दी कि हिंदी इस समय संपूर्ण विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली भाषा है। वह वैश्विक स्पर्धा के वर्तमान दौर में हर जगह अपनी उपयोगिता सिद्ध कर रही है।

इस समय भारत सरकार और बाजार की शक्तियां उसके संख्या बल को पहचान कर ही अपनी योजनाएं क्रियान्वित कर रही हैं। आज मीडिया, सोशल साइट्स, इंटरनेट और मनोरंजन के क्षेत्र में वह वर्चस्वकारी भूमिका में है। अब विकसित देश भी हिंदी के प्रति रुझान महसूस कर रहे हैं। इस कारण संयुक्त अरब अमीरात ने हिंदी को अपनी तीसरी आधिकारिक भाषा बना दिया है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से हिंदी और भारतीय भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बना रही है जिससे उच्च स्तरीय मौलिक शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

हमारे प्रधानमंत्री ने उसे वाइट हाउस से संयुक्त राष्ट्र के मंच तक पहुंचा दिया है। भारत की विकासमान अर्थव्यवस्था उसके लिए वरदान सिद्ध हो रही है। अत: वर्तमान सदी हिंद और हिंदी की होने जा रही है।

इस अवसर पर केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर आयुक्त राजन चौधरी ने हिंदी को जोड़ने वाली भाषा बतलाया। उन्होंने कहा कि अब दक्षिण में भी लोग हिंदी तेजी से सीख रहे हैं और वहां भी हिंदी पखवाड़ा जोर-शोर से मनाया जाता है। इस अवसर पर हिंदी पखवाड़े में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। अपर आयुक्त विजय जे मानवटकर ने कार्यक्रम का सफल संयोजन किया और अंत में अपर आयुक्त सतीश चंद्र ने उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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68 साल बाद फिर से टाटा को मिली एयर इंडिया, सरकार ने दी मंजूरी, अब प्राइवेट हो जाएगी सरकारी एयरलाइन

सरकारी कंपनी एयर इंडिया अब प्राइवेट होने जा रही है। देश की नामी कंपनी टाटा इसे खरीदने जा रही है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पैनल ने एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप को चुन लिया है लेकिन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वहीं न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि टाटा ने सबसे ऊंची बोली लगाई, जिसके बाद टाटा को जीत हासिल हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले मंत्री लेवल के पैनल ने इस बोली को मंजूरी दे दी है।

एयर इंडिया के लिए टाटा ग्रुप और स्पाइसजेट ने बोली लगाई थी, लेकिन टाटा ग्रुप के साथ ये डील पक्की हो गई है। खबर है कि टाटा को दिसंबर तक एयर इंडिया का मालिकाना हक मिल जाएगा।

बता दें कि मशहूर बिजनेसमैन जेआरडी टाटा ने साल 1932 में टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के समय विमान सेवाओं को रोक दिया गया था। बाद में जब ये फिर से शुरू हुईं तो 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस का नाम बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड हो गया।

1947 में जब देश आजाद हुआ तो एयर इंडिया की 49 फीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली। बाद में साल 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण हो गया।

बता दें कि एयर इंडिया पर 38,366.39 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस बात की जानकारी सरकार ने संसद में एक सवाल के जवाब में थी। सरकार के ये जानकारी 2019-20 के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक दी थी।

इस दौरान सरकार ने ये भी कहा था कि अगर एयर इंडिया को बेचा नहीं गया तो इसे बंद करना ही एक उपाय बचेगा।

68 साल बाद मिली टाटा को सफलता: टाटा को एयर इंडिया 68 साल बाद मिल रही है। दरअसल एयर इंडिया पहले टाटा ग्रुप की ही कंपनी थी, जिसकी स्थापना जेआरडी टाटा ने साल 1932 में की थी। लेकिन जब 1947 में आजादी मिलने के बाद इसका राष्ट्रीयकरण हुआ तो टाटा एयरलाइंस ने इसके 49 फीसदी शेयर खरीद लिए।

साल 1953 में सरकार ने इस कंपनी के फाउंडर जेआडी टाटा से मालिकाना हक खरीद लिया था। जिसके बाद कंपनी का नाम एयर इंडिया इंटरनेशनल लिमिटेड हो गया। अब 68 साल बाद कंपनी का मालिकाना हक फिर से टाटा ग्रुप को मिलेगा।

बता दें कि इससे पहले साल 2018 में भी एयर इंडिया को बेचने की कोशिश सरकार ने की थी। लेकिन सरकार की ये कोशिश नाकाम हो गई थी।

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Break Point review: Leander Paes, Mahesh Bhupathi bare all on split in docu-series

"There is a big irony to the doubles team of Mahesh Bhupathi and Leander Paes. What makes doubles players tick is the communication and trust. And they didn't have that," says sports writer Rohit Brijnath on their relationship. The rise-and-fall of the pairing forms the crux of the latest Zee5 docu-series 'Break Point' which airs from 1 October.

Directed by Ashwini Iyer-Tiwari and Nitesh Tiwari whose previous notable work includes 'Panga' and 'Dangal'. They've continued the perfect job of finding synergy between archival footage, old photos and speaking to relevant people within their ecosystem. The makers have gone to great lengths to speak to journalists, rivals (Mike and Bob Bryan, Todd Woodbridge and Mark Woodforde), partners (Radek Stepanek, Martina Hingis, Sania Mirza, Rohan Bopanna etc.), friends, family (Dr Vece Paes, Jennifer Paes, Krishna Bhupathi, Mira Bhupathi, Kavitha Bhupathi) and coaches.

The seven-part series brings to the fore their meteoric rise during the cricket-mad India during the 1990s. So much so, Paes-Bhupathi shot a commercial alongside former England batsman Sir Geoffrey Boycott with the duo playing cricket. That alone highlights their importance to advertisers at a time when cricket was the be-all and end-all of brand associations.

But it is their festering differences from 1996 to 2001 (or beyond) that is the recurring theme of this series. The hunt for the 'Break Point,' if you will, for a partnership that is still unsure of what, if any, was the single decisive point behind their split. Unlike Hindi sports biopics or non-fiction content on such topics which tend to go over the top, the makers have squarely kept the focus on bringing out the persona and characters of Paes and Bhupathi.

Based on extensive research, well-pointed questions and detailed interviews with the protagonists, friends, family and coaches, coupled with viewpoints from people in the tennis world, the differences between "The Indian Express" are shared by all concerned.

The series tries to figure how a pairing that played its first in Jakarta; that shared a room and sneakily the access at Wimbledon's All England Club; that shared numerous hours together on and off the court could reach a point where the pair would not even speak to each other.

The series takes a chronological approach to the Lee-Hesh partnership by focusing on their start in tennis in the first episode including a higher-ranked Paes' decision to partner with Bhupathi — contrary to everyone's suggestion.

The second episode highlights their eye-raising performances against the Woodies at the Atalanta Olympics (where Paes won a bronze medal in singles), against Netherlands in Davis Cup in Jaipur where Bhupathi won a decisive fifth rubber but in the grand scheme of things, it is also where the seeds of what became a rather public fallout were sown.

At 1997 French Open, Bhupathi became India's first Grand Slam champion having partnered Japan's Rika Hiraki to the title. It brought about adulation for Bhupathi and, per Mahesh, a cold response from Paes. Leander would state at the end of the episode: "It was the human psychology, the chalupanti, the keeda" regarding the rumours that he wasn't pleased for Bhupathi.

This "keeda", as Paes calls it, becomes a crucial point in their mistrust going forward despite the success on the court. And that triumph, long time coming, finally arrived in 1999. In that year, the Lee-Hesh pairing reached the final of all four Grand Slams winning two (French Open and Wimbledon). They were the highest-ranked team. It seemed like a pairing destined for greatness. On the court they were going through plenty of success but off it, they were hardly conversing.

The third and fourth episodes go into detail of the sacrifices both made for each other and to make things work. Paes let go of his singles sponsorship to get Bhupathi a better deal. Bhupathi let go of long-time coach Enrico Piperno on Paes' insistence. It also details their success at Roland Garros in Paris and Wimbledon where Bhupathi played with a tear in his groin.

A poignant moment in the series, and their partnership, is when both are queried how they were achieving success despite barely speaking. "Rollercoaster. Hot-and-cold-. Unique. Unexplainable. I think it's something no one can answer. I think it came down to the chemistry we had on the tennis court," said Bhupathi.

Paes, meanwhile, said, "With so much pressure, on winning, the expectations, results, lack of communication, from team coming apart at the seams. It is a very strange experience."

It was in Indianapolis, at the end of the year, when it all came apart. After mixed messages from both sets of players and teams, Paes and Bhupathi played with different partners. "That was the episode that broke the camel's back. I was physically and mentally checked out of the relationship after that," said Bhupathi on how things unravelled at the RCA Championships.

Mid-2000, following yet another heart-to-heart, but not without putting ego aside, the team that won a record 24 consecutive Davis Cup matches, decided to part ways. It was at this moment that a fragile relationship became murky with Paes believing Bhupathi was close to an unnamed woman he was seeing. "Then I think this is more broken than I thought it was," recalled Bhupathi telling Paes as part of the interview process.

They would continue to play on-and-off for India in the Davis Cup, try to forge a partnership in 2011 on the men's tour (ATP) but the relationship was seemingly beyond repair.

For Paes, the series is an attempt at exorcising the demons with Bhupathi over the last two decades. He told Firstpost, “I think it’s more like healing. I think the way we were able to address certain issues around 20 years later, that we could maybe laugh about. Where we’re able to look at archival footage and look at our body language and the looks that we’re giving each other, that maybe if we would have done in 1999-2000, we would have communicated better. We might have played a little longer, who knows,” Paes says.



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Google Doodle pays tribute to Sivaji Ganesan on actor's 93rd birth anniversary

Google is celebrating the 93rd birth anniversary of actor Sivaji Ganesan, by featuring a graphic doodle for him. Ganesan is remembered as one of India's most influential actors and was also a recipient of the Dadasaheb Phalke Award, the highest honour for cinema.

The Google Doodle is curated by Noopur Rajesh Choksi, a Bengaluru-based artist. Sivaji's grandson, actor Vikram Prabhu shared the Doodle on Twitter. He mentioned in his post, "Appreciate the people from Google India and their guest artist Noopur Rajesh Choksi for the doodle art. Another proud moment! Love him and miss him more every year”.

While talking to Times Now about his inspiration behind illustrating the doodle, Choksi said that she loved watching Ganesan portray a variety of roles on screen and was in love with his versatility. She also mentioned how she was totally in love with Ganesan's onscreen looks and wanted to represent the vintage Indian film typography in her poster.

Choksi added that she wanted to visualise and celebrate the timelessness of Ganesan's work through her doodle.

Born as Ganesamoorthy on 1 October, 1928, in Villipuram, Tamil Nadu, Ganesan left his home at the age of 7 to join theatre. Donning various roles as a theatre artist, he soon began to play lead roles. As per reports, Ganesan got his name 'Sivaji' when he essayed the role of the valiant Indian King Shivaji, in one of his theatre plays.

Ganesan made his debut in 1952 with Parasakthi and went on to appear in almost 300 films with a career that spanned for about five decades. He worked in nearly 288 languages which included Kannada, Telugu, Malayalam, and Hindi. He received training in Bharatanatyam, Kathak and several other dance forms. Along with his other accomplishments, Ganesan was also the first Indian actor to win a Best Actor award at an international film festival in Egypt for his performance in Veerapandiya Kattabomman.

He passed away on 21 July, 2001, at the age of 72.



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सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत को लगाई फटकार, बोला- पहले हाइवे जाम किए और अब दिल्ली में ‘उत्पात’ मचाना चाहते हो

कृषि कानूनों के विरोध में लगभग एक साल से दिल्ली-एनसीआर में राष्ट्रीय राजमार्गों को प्रदर्शन के चलते अवरुद्ध करने पर सुप्रीम कोर्ट ने किसान महापंचायत को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन कर रहे किसान यातायात बाधित कर रहे हैं, ट्रेनों और राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरुद्ध कर रहे हैं। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि, आपको विरोध करने का अधिकार है लेकिन राजमार्ग को रोककर लोगों को परेशान करने का हक नहीं है। आपके प्रदर्शन के चलते आम लोगों को कई परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों ने पूरे लंबे समय से शहर का गला घोंट दिया है और अब शहर के अंदर आकर उपद्रव करना चाहते हैं। क्या आपकी वजह से शहर के लोग अपना व्यापार बंद कर दें या आपके प्रदर्शन से लोग खुश होंगे?

हालांकि ‘किसान महापंचायत’ के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बैरिकेट्स किसानों ने नहीं पुलिस ने लगाए हैं। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि, “आप अदालत में भी नहीं आ सकते हैं और साथ ही साथ विरोध जारी रख सकते हैं। क्या आप न्यायिक प्रणाली का विरोध कर रहे हैं।”

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मिड डे मीलः 2.5 लीटर दूध में एक बाल्टी पानी, पूर्व आईएएस ने योगी सरकार पर कसा तंज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बेहद लचर शासक बताते हुए पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने अपने एक ट्वीट में उन्हें झूठे आंकड़े देने वाला कहा है। पूर्व आईएएस ने लिखा है कि, “योगी जी एक बेहद लचर प्रशासक सिद्ध हुए” उनका ना तो विभागों पर नियंत्रण है और ना ही प्रदेश की पुलिस पर कोई कंट्रोल है।

सूर्य प्रताप सिंह ने बुलंदशहर में मिड-डे मील के दूध में अधिक पानी मिलाए जाने की खबर को लेकर भी लिखा है कि, “2.5 लीटर दूध में 1 बाल्टी पानी, ये है यूपी में ‘मिड डे मील’ की कहानी। योगी जी एक बेहद लचर प्रशासक सिद्ध हुए, न विभागों पर नियंत्रण और न पुलिस पर। केवल सांप्रदायिक बातें, झूठे आंकड़े व धमकी दिलवा लीजिए, इनसे। बात-बात पर धमकी देने वाले की बातों को लोग गंभीरता से नहीं लेते।”

इस ट्वीट पर एक यूजर इंद्र भूषण त्यागी(@IndraBhushanTya) ने लिखा कि, शुक्र है दूध में पानी मिलाया है वरना ये तो पानी में दो बूंद दूध डालकर भी पिला सकते..

वहीं मंगल नाम से एक यूजर(@m_laguri) ने लिखा कि, सारे पैसे एडवर्टाइजमेंट में खरच दिए होंगे!

एक और यूजर(@gsgogawat) ने लिखा कि, वैसे भी कहावत है, गरजने वाले बरसते नहीं। ऐसा ही हाल है इनका भी।

दूध में मिलाया गया एक बाल्टी पानी: बता दें कि बुलंदशहर जिले के लखावटी थाना क्षेत्र के भासी गांव से एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें भगवती कंपोसिट विद्यालय व प्राइमरी पाठशाला में मिड-डे मील के ढाई लीटर दूध में एक बाल्टी पानी मिलाए जाने का आरोप है। वीडियो वायरल होने के बाद अधिकारियों ने इसकी जांच के निर्देश दिए हैं।

मिड-डे मील योजना नाम अब ‘पीएम पोषण योजना: बता दें कि प्राइमरी स्कूलों में चल रही मिड-डे मील योजना का नाम अब ‘पीएम पोषण‘ होगा। केंद्र सरकार ने दावा किया है कि इस स्कीम के जरिए प्री-प्राइमरी एजुकेशन के तहत सरकारी और ऐडेड स्कूलों के 24 लाख अन्य बच्चों को फायदा मिलेगा। इस योजना में अभी कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के 11.80 करोड़ स्टूडेंट्स को भोजन दिया जाता है।

बता दें कि रिटायर्ड IAS सूर्य प्रताप सिंह इससे पहले भी सरकार पर सवाल खड़े करते रहे हैं। बेरोजगारी को लेकर उन्होंने इसी महीने की शुरुआत में एक ट्वीट में लिखा था कि, “एमए, बीए की डिग्री कटोरे में रखकर भीख मांगो। जुलाई अगस्त 2021 के बीच बेरोजगारी दर 6.95 प्रतिशत से बढ़कर 8.32 प्रतिशत हो गई। अर्थात एक माह में 15 लाख लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा।” दरअसल बिजनेस इंफॉर्मेशन कंपनी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के मुताबिक काम करने वालों की संख्या 399.38 मिलियन से गिरकर अगस्त में 397.78 मिलयिन रह गई है। 

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पीएम मोदी ने की कांग्रेसी मुख्यमंत्री की तारीफ, बोले- गहलोत को मुझपर यकीन, हम अच्छे दोस्त हैं

राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को पीएम मोदी ने अपना अच्छा दोस्त बताया है। दरअसल गुरुवार को राजस्थान में 4 मेडिकल कॉलेजों की आधारशिला रखी गई थी, जिसके वर्चुअल समारोह में पीएम मोदी ने ये बात कही।

पीएम मोदी ने कहा कि सीएम गहलोत ने अपने राज्य के लिए विकास कार्यों की एक सूची मेरे सामने रखी। इससे ये पता चलता है कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के बावजूद वह मुझ पर भरोसा करते हैं। इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं।

पीएम ने कहा कि सीएम गहलोत ने मुझसे खुले दिल से बात की क्योंकि उन्हें मुझ पर भरोसा है। ये दोस्ती और विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है। पीएम मोदी ने जब गहलोत के लिए भरोसा जताने वाली बात कही, तो गहलोत भी बिना मुस्कुराए रह नहीं पाए।

इस दौरान हनुमानगढ़, बांसवाड़ा और सिरोही में आधारशिला रखी गई और जयपुर में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी का उद्घाटन किया गया।

इससे पहले, गहलोत ने कहा था कि हमारे पास 3 पिछड़े क्षेत्र हैं जिनका नाम प्रतापगढ़, राजसमंद और जालोर है। यहां अभी भी एक मेडिकल कॉलेज नहीं है। आप इन जिलों के लिए नए कॉलेजों पर विचार करें। अगर यहां मेडिकल कॉलेज होंगे तो ये जिले इतिहास रच देंगे।

इसके अलावा गहलोत ने पानी की उपलब्धता की समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र से मदद मांगी और बिजली ट्रांसमिशन, सड़क और शिक्षा जैसे बुनियादी ढांचे के लिए वित्तीय मदद की मांग की।

गहलोत ने ये भी कहा कि मैं केंद्र से अपनी देनदारियों को माफ करने का अनुरोध करता हूं।

वहीं वर्चुअल समारोह के दौरान पीएम मोदी ने संबोधन भी दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने दुनियाभर के स्वास्थ्य क्षेत्र के बारे में बहुत कुछ सिखाया है। ऐसे में हर देश इस संकट से अपने तरीके से निपट रहा है। भारत ने भी इस दौरान संकल्प लिया है कि हम अपनी ताकत और आत्मनिर्भरता को बढ़ाएंगे।

पीएम ने कहा कि राजस्थान में चार नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य की शुरुआत और जयपुर में इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल का उद्घाटन इसी दिशा में बढ़ाया गया कदम है।

उन्होंने कहा कि केंद्र ने साल 2014 के बाद से राजस्थान में 23 नए मेडिकल कॉलेजों के लिए स्वीकृति दी थी, जिसमें से 7 ने काम करना शुरू कर दिया है।

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Post Office में है खाता, तो बढ़ेगा बोझ! India Post ATM Card ट्रांजैक्शन के बदल गए नियम; पिन भूलना भी पड़ेगा महंगा

Post Office में अगर आपका बचत खाता (Post Office Savings Account) है, तब एक अक्टूबर, 2021 से आप पर बोझ बढ़ने वाला है। अब महीने में किए जाने वाले एटीएम कार्ड ट्रांजैक्शन पर नया शुल्क देना पड़ेगा और यह चार्जेज़ शुक्रवार से अमल में आएंगे। डाक विभाग के एक सर्कुलर के मुताबिक, पोस्ट ऑफिस एटीमएम कार्ड का शुल्क बैंकों की तरह ही हो जाएगा।

अब पांच फ्री ट्रांजैक्शन के बाद हर लेन-देन पर 10 रुपए काट लिए जाएंगे। वैसे, जानकारी के मुताबिक, गैर-मेट्रो शहरों में ग्राहकों को आठ रुपए देने होंगे। 1 अक्टूबर से डाकघर एटीएम/डेबिट कार्ड के लिए वार्षिक रख-रखाव शुल्क 125 रुपए + जीएसटी होगा। शुल्क 1 अक्टूबर 2021 से 30 सितंबर 2022 तक लागू होंगे। इस बीच, एसएमएस अलर्ट के लिए इंडिया पोस्ट अब ग्राहकों से 12 रुपए + जीएसटी लेगा।

नए सर्कुलर के अनुसार, अगर एक इंडिया पोस्ट ग्राहक अपना एटीएम कार्ड खो देता है, तब उन्हें एक अक्टूबर से एक नया कार्ड हासिल करने के लिए 300 रुपए प्लस जीएसटी का भुगतान करना होगा। अगर कोई ग्राहक अपना एटीएम पिन खो देता है, तब दूसरा पिन प्राप्त करने के लिए, उन्हें 50 रुपए के साथ जीएसटी का भुगतान करना होगा।

यही नहीं, अगर अपर्याप्त खाता शेष के कारण एटीएम या पीओएस लेनदेन से इन्कार कर दिया जाता है, तब ग्राहक को इसके लिए 20 रुपए और जीएसटी का भुगतान करना होगा।

डाक विभाग ने यह भी कहा है कि इंडिया पोस्ट के अपने एटीएम पर केवल पांच मुफ्त लेन-देन होंगे और उसके बाद ग्राहकों को प्रति लेन-देन 10 रुपए + जीएसटी का भुगतान करना होगा।

इस बीच, ग्राहकों को पांच मुफ्त लेन-देन के बाद गैर-वित्तीय लेनदेन के लिए पांच रुपए + जीएसटी का भुगतान करना होगा। प्वॉइंट ऑफ सर्विस (पीओएस) पर नकद निकासी के लिए डेबिट कार्डधारकों को लेन-देन का एक फीसदी भुगतान करना होगा, जो कि प्रति लेन-देन अधिकतम पांच रुपये के अधीन है।

बता दें कि पोस्ट ऑफिस बचत योजनाओं के तहत सेविंग खाता, रिकरिंग खाता, टाइम डिपाजिट, मंथली इनकम स्कीम, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, पीपीएफ खाता, सुकन्या समृद्धि खाता, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (एनएससी), किसान विकास पत्र (केवीपी) आदि मुहैया कराता है। आप अपने नजदीकी पोस्ट ऑफिस जाकर इन सुविधाओं/योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।

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Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...