साल 1946 के आसपास जब देश में एक तरफ दंगे भड़के हुए थे तो दूसरी तरफ दिल्ली में देश की आजादी के साथ ही देश के बंटवारे की भी तैयारियां की जा रही थी। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच बंटवारे की सहमति बन गई थी लेकिन गांधी एक मात्र शख्स थे जो देश के बंटवारे में कोई जल्दबाजी नहीं चाहते थे। इतना ही नहीं उनके ना चाहने के बावजूद भी हुए बंटवारे के बाद भी वे इसे रोकने की कोशिश में लगे हुए थे। गांधी कहते थे कि वह बिना वीजा और पासपोर्ट के पाकिस्तान जाएंगे, क्योंकि वह भी उनका अपना मुल्क है। उनका मानना था कि दोनों देश अपनी-अपनी जगह रहें, लेकिन दोनों देशों के लोग बिना किसी रोक-टोक के एक दूसरे के यहां आ-जा सकें।
पाकिस्तान तक को अपना मानने वाले महात्मा गांधी का आज जन्मदिवस है। उनके इस जन्मदिवस को भारत सहित दुनिया भर के देशों में मनाया जा रहा है। लेकिन जिस पाकिस्तान को वे भारत की तरह ही अपना देश मानते थे, वही देश आज उनके बारे में सच बोलने से घबराता है। वहां की किताबों में उन्हें मुसलमानों का दुश्मन, पाकिस्तान का दुश्मन, हिन्दुओं का नेता और भारत माता की पूजा तक करने वाला बताया है. इतना ही नहीं वहां की किताबों में गांधी को सावरकर के सामने बताया जाता है।
गांधी को पाकिस्तानी इतिहास की किताबों में मुस्लिम विरोधी की जगह दी गई। पाकिस्तानी इतिहासकारों ने लोगों के मन में जमकर गांधी के प्रति नफ़रत भरी। आप इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार एक बार उर्दू के एक लेखक ने लिखा था कि बेहद ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनकी आलोचना की थी।
इस तरह के कईयों उदाहरण पाकिस्तान के विभाजन के बाद वहां लिखे गए उर्दू साहित्य में हैं जहां गांधी के बारे में सिर्फ और सिर्फ नफरती बातें लिखीं गई। लेकिन गांधी के विरोधी अक्सर यह भूल जाते हैं कि उनके चाहने वाले और उनको मानने वाले पाकिस्तान के बनने के पहले भी वहां मौजूद थे और आज भी मौजूद हैं। खुद पाकिस्तान के कायदे-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना भी भले ही उनके राजनीतिक विरोधी हों लेकिन वे भी उनका सम्मान किया करते थे।
महात्मा गांधी की मौत के बाद जिन्ना ने उन्हें हिंदू समुदाय में पैदा होने वाले महानतम शख्सियतों में से एक बताते हुए कहा था कि गांधी के ऊपर हुए बेहद कायराना हमले के बारे में जानकर मैं हैरान हूं। इस हमले में उनकी मौत हो गई। हमारे राजनीतिक विचारों में चाहे जितना विरोध रहा हो, लेकिन ये सच है कि वो हिंदू समुदाय में पैदा होने वाले महानतम शख्सियतों में से एक थे।
भले ही जिन्ना के देश पाकिस्तान में गांधी के खिलाफ जमकर नफरत उड़ेली जाती हो लेकिन वहां मौजूद उनकी मूर्तियां आज भी अहिंसा और सत्य का संदेश देती हैं। आज भी पाकिस्तान के इस्लामाबाद में गांधी की दो मूर्तियां मौजूद हैं। पहली मूर्ति इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के दफ्तर में लगाई गई है। दूसरी इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान के संग्रहालय में लगाई गई है। हालांकि यह मूर्ति जिन्ना और गांधी के साथ हुई मुलाकात के सन्दर्भ में लगाई गई है पाकिस्तान के विभाजन के बाद से वहां गांधी की राजनीति और दर्शन पर कोई काम नहीं किया गया है। इतना ही नहीं उनके दौरों और उनसे जुड़ी जगहों के इतिहास को भी सहेज कर नहीं रखा गया है।
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