पिछले महीने चीन के विदेश मंत्री भारत में थे। इस दौरान बीजिंग ने दिल्ली को पूर्वी लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में पेट्रोलिंग प्वॉइंट 15 से सैनिकों को हटाने का प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव को भारत ने खारिज कर दिया था। इंंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने बताया कि चीन ने प्रस्ताव भेजा कि भारतीय सैनिक जो लगभग दो वर्षों से पेट्रोलिंग प्वॉइंट 15 पर चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने टकराव की स्थिति में हैं, वो पीपी 16 और पीपी 17 के बीच करम सिंह पोस्ट पर वापस चले जाएं।
यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता, तो इसका मतलब यह होता कि चीनी सैनिक बहुत कम पीछे हटते और भारतीय सैनिकों को कई किलोमीटर पीछे हटना पड़ता। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि “जब वे वापस पेट्रोलिंग प्वॉइंट 15 के पीछे चले जाएंगे, तो वो (चीन) हमसे पीपी 16 को भी छोड़ने के लिए कह रहे हैं, जिस पर चीन ने पहले कभी दावा नहीं किया था। यह ऐसा है कि मैं 1 किमी पीछे हटूंगा और आप 5-10 किमी पीछे हटेंगे।”
सुदूर उत्तर में देपसांग के मैदानों में स्थिति उत्साहजनक नहीं है। चीनियों ने भारतीय सैनिकों को उनके पारंपरिक पेट्रोलिंग प्वॉइंट 10, 11, 11A, 12 और 13 तक पहुंचने से वंचित कर दिया है। सरकार के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार चीन की ओर से इन पेट्रोलिंग प्वाइंट्स के पीछे सड़क निर्माण के लिए एक अस्थायी हॉट-मिक्स प्लांट तैनात किया गया है।
पिछले महीने चीन के विदेश मंत्री वांग यी 24 मार्च की शाम दिल्ली पहुंचे और अगले दिन बातचीत के बाद चले गए। चीन के विदेश मंत्री के दौरे से राजनयिक और कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता के माध्यम से पेट्रोलिंग प्वॉइंट 15 पर समस्या के हल होने की उम्मीद बंधी थी।
चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि, “भारत-चीन संबंध सामान्य नहीं थे और समझौतों के उल्लंघन में वहां बड़ी संख्या में सैनिकों की उपस्थिति एक असामान्यता थी। इसलिए सामान्य स्थिति की बहाली के लिए स्पष्ट रूप से शांति की बहाली की आवश्यकता होगी”। भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 15वें दौर की वार्ता 11 मार्च को हुई थी। बैठक से गतिरोध नहीं सुलझ पाया।
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