स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के नए एक्सई स्वरूप के मद्देनजर देश में मास्क के स्वैच्छिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और यह कोरोना विषाणु के सभी प्रकारों के खिलाफ सबसे प्रभावी उपाय है। दो साल से अधिक समय के बाद, महाराष्ट्र और दिल्ली में मास्क पहनने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है।
कोविड-19 संक्रमण के मद्देनजर सार्वजनिक रूप से मास्क पहनना अनिवार्य था और इस नियम का पालन नहीं करने पर 2,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया गया।भारत पर नए संस्करण के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर विशेषज्ञों ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सार्वजनिक रूप से मास्क के स्वैच्छिक उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।देश में ओमीक्रान की वजह से आई संक्रमण की लहर में फरवरी से गिरावट दर्ज की गई और तब से देश में मामलों में गिरावट देखने को मिल रही है।
गुजरात के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य में शनिवार को एक्सई स्वरूप का पहला मामला सामने आया जब अधिकारियों ने मुंबई के एक व्यक्ति से लिए गए नमूने के जीनोम अनुक्रमण परिणाम प्राप्त किए। इस व्यक्ति को 12 मार्च को वडोदरा की यात्रा के दौरान कोविड-19 जांच में संक्रमित पाया गया था।
इससे पहले, मुंबई नागरिक निकाय के अधिकारियों ने कहा था कि फरवरी के अंत में दक्षिण अफ्रीका से आई एक महिला मार्च में कोविड संक्रमित पायी गई थी और वह एक्सई स्वरूप से संक्रमित है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
प्रख्यात विषाणु विज्ञानी टी जैकब जान ने कहा कि एक्सई का मतलब है कि पहले से ही एक्सए, एक्सबी, एक्ससी और एक्सडी मौजूद थे लेकिन उनमें से किसी पर भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया। जान ने कहा, फरवरी के तीसरे सप्ताह तक ओमीक्रान लहर (मुख्य रूप से बीए.2) के घटने के बाद, इस एक विषाणु की एक्सई के रूप में पुष्टि होने पर भी चिंता का कोई कारण नहीं था। हमारी रणनीति में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन आफ इंडिया में प्रोफेसर और महामारी विज्ञान जीवनतंत्र के प्रमुख गिरिधर आर बाबू ने कहा कि एक्सई स्वरूप का पता चलने को निगरानी प्रणाली की ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए।
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