Wednesday, April 6, 2022

डिबेट में फिसल गई BJP प्रवक्ता की जुबान, बोले- भाजपा के लिए दल पहले रहा है, देश बाद में, सुनते ही ताली बजाने लगे मुफ्ती नदीमुद्दीन

भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को अपना 42वां स्थापना दिवस मनाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं में काफी जश्न का माहौल देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। हर राज्य के पार्टी कार्यलय में उत्सव जैसा माहौल था। हालांकि, भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी एक टीवी डिबेट शो में ऐसी जुबान फिसली कि उनकी किरकिरी हो गई। उन्होंने कह दिया कि भाजपा के लिए दल पहले रहा और देश बाद में। उनके इस बयान पर मुस्लिम स्कॉलर मौलाना मुफ्ती नदीमुद्दीन ने चुटकी ली और ताली बजा ने लगे।

इंडिया टीवी पर डिबेट शो के दौरान एंकर पवन नारा ने सवाल किया, ” राकेश जी यूपी के चुनाव में 9 फीसदी मुसलमानों ने बीजेपी को वोट दिया। अब मुसलमानों को बीजेपी को वोट देने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। बीजेपी की सरकार समर्थक मुसलमानों को कैसे सुरक्षा देगी।” इसी सवाल का जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता की जुबान फिसल गई और उन्होंने दल को देश से पहले बता दिया।

राकेश ने जवाब देते हुए कहा, ” देखिए पवन जी आज भारतीय जनता पार्टी का 42वां स्थापना दिवस है। भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांत में, व्यवहार में और विचार में पहले दल रहा है, देश बाद में रहा है।” गलती का तुरंत एहसास होते ही भाजपा प्रवक्ता ने इसमें सुधार करते हुए कहा, “देश पहले रहा, दल हमेशा बाद में रहा है। व्यक्ति सबसे बाद में रहा है। हम पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय का विचार को चलते रहे हैं।”

राकेश त्रिपाठी की जुबान फिसलने पर मुस्लिम स्कॉलर मौलाना मुफ्ती नदीमुद्दीन हंसने लगे और ताली बजाने लगे। इस दौरान उन्होंने कहा कि सच्चाई मुंह से निकल गई त्रिपाठी जी के। इसपर भाजपा प्रवक्ता भड़क उठे और उन्होंने मौलाना पर पलवार किया। मौलाना मुफ्ती नदीमुद्दीन पर पलटवार करते हुए राकेश त्रिपाठी ने कहा, ” बीच में नदीमुद्दीन साहब इंटरपट न करें तो ज्यादा बेहतर होगा। मैं नदीमुद्दीन साहब को सुन रहा था। मैंने इनकी तकरीरें कई बार सुनी है। ये निंदा जब भी करेंगे ऐसे विषयों पर तो किंतु लगाएंगे, परंतु लगाएंगे। कई उदाहरण साथ में दे देंगे।”

राकेश ने आगे कहा, ” इस तरह के विचार का बिना किसी किंतु परंतु के जब कोई इस प्रकार का फतवा जारी करता है तो वह न केवल बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान का अपमान करता है, बल्कि मानवता को भी शर्मसार करने का काम करता है। कोई किसी के हत्या का फतवा जारी कर सकता है, मजहब की आड़ में। ये कौन सा मजहब सिखा सकता है कि आप किसी के हत्या का फतवा जारी कर दें। ये अपने आप में काफी दुर्भाग्यपूर्ण है और बिना किंतु परंतु के इसकी निंदा होनी चाहिए। जो सज्जन फतवा जारी करने की कोशिश कर रहे थे उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।”



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