थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने चीन और पाकिस्तान की ओर से पेश राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर गुरुवार को कहा कि भारत अभी भविष्य के संघर्षों की कुछ झलकियां (ट्रेलर) देख रहा है और उसके विरोधी अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयास लगातार जारी रखेंगे। इससे भविष्य में सीमा पर संघर्ष बढ़ेगा। जनरल नरवणे ने एक संगोष्ठी में यह बात कही। इससे पहले सेना मुख्यालय में उन्होंने उत्तरी एवं पश्चिमी कमान के प्रमुखों के साथ अहम रणनीतिक बैठक में हिस्सा लिया।
बैठक के बाद संगोष्ठी को आनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि भारत ‘अलग तरह की, कठिन तथा बहु-स्तरीय’ सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और उत्तरी सीमा पर घटनाक्रम ने पूरी तरह से तैयार और सक्षम बलों की जरूरत को रेखांकित किया है। उन्होंने देश की संप्रभुता और अखंडता सुरक्षित रखने में बल की मदद के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। सेंटर फार लैंड वारफेयर स्टडीज द्वारा आयोजित संगोष्ठी में वायुसेना प्रमुख वीआर चौधरी, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार और कई देशों के रक्षा अताशे ने भाग लिया।चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना थल सेना प्रमुख ने कहा कि परमाणु-क्षमता से लैस पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद साथ ही राज्य प्रायोजित छद्म युद्ध ने सुरक्षा तंत्र एवं संसाधनों के समक्ष चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
उन्होंने कहा कि सेना अपने बलों के ‘पुनर्गठन, पुनर्संतुलनऔर पुनर्विन्यास’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है और प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है और बल त्रि-सेवा एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए ‘थियेटर कमान पहल’ (सेना के तीनों अंगों का साथ मिलकर काम करना) को लेकर प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा, ‘हम अभी भविष्य के संघर्षों की झलकियां देख रहे हैं। सूचना के क्षेत्र, नेटवर्क और साइबर स्पेस में भी हमें इसके सबूत दिखाई दे रहे हैं। विवादित सीमाओं पर भी ये सब दिखाई दे रहा है। इन झलकियों के आधार पर हमें भविष्य के लिए तैयार होना होगा। यदि आप आस पास देखेंगे, तो आपको आज की वास्तविकता का एहसास होगा।’
अरुणाचल के युवक को यातनाएं देने का मुद्दा उठा
भारत ने अरुणाचल प्रदेश के युवक को उस समय यातना दिए जाने के मुद्दे को चीनी पक्ष के समक्ष उठाया है जब वह चीनी जन मुक्ति सेना की हिरासत में था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, ‘हमने चीनी पक्ष के समक्ष मामला उठाया है।’ अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले से 17 वर्षीय मिराम तारोन 18 जनवरी को लापता हो गया था। उसके बारे में खबरें आई थी कि उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास लुंगटा जोर क्षेत्र में चीनी सेना ने उस समय अगवा कर लिया था जब वह अपने मित्र जानी यायिंग के साथ शिकार पर गया था। यायिंग वहां से बचकर निकलने में सफल रहा था। चीनी सेना ने 27 जनवरी को युवक को भारतीय सेना को सौंप दिया था। इसके बाद मिराम के पिता ओपांग तारो ने कहा था कि चीनी सेना ने हिरासत के दौरान मिराम को बांध कर रखा गया और उसे हल्का बिजली का झटका दिया गया।
‘गलवान संघर्ष में 38 चीनी सैनिक नदी में बह गए थे’
पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत के साथ संघर्ष के दौरान चीन के कम से कम 38 सैनिकों के नदी में बह कर मारे जाने का खुलासा हुआ है।स्ट्रेलिया के अखबार ‘द कलेक्शन’ ने इस बारे में विशेष रिपोर्ट छापी है। यह तीसरी बार है कि गलवान में मारे गए चीनी सैनिकों की असल संख्या को लेकर खबर सामने आई है। हालांकि, चीन ने आधिकारिक तौर पर अपने पांच जवानों के मारे जाने की बात स्वीकार की है।
आस्ट्रेलिया के अखबार ‘द कलेक्शन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएलए के कम से कम 38 सैनिक अंधेरे में तेज धार वाली गलवान नदी को पार करते हुए डूब गए। अखबार ने शोधकर्ताओं के एक समूह द्वारा करीब डेढ़ साल के गहन शोध के आधार पर तैयार की गई एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। खोजी अखबार ने कहा कि चीन ने जिन सैनिकों की मौत के बारे में आधिकारिक जानकारी दी है, उनमें से केवल एक- जूनियर सार्जेंट वांग जुओरान के डूबने की सूचना दी गई है।
अखबार का कहना है कि 15-16 जून की रात में शून्य से भी नीचे तापमान में करीब 38 चीनी सैनिक गलवान नदी में डूब कर मर गए थे। इससे पहले, चीन के सोशल मीडिया प्लेटफार्म वीबो ने भी उस रात 38 चीनी सैनिकों के नदी में बहने की बात कही थी, लेकिन चीनी अधिकारियों ने इन सभी पोस्ट को हटवा दिया था। अमेरिकी खुफिया एजंसी ने भी वहां 40 से ज्यादा चीनी सैनिकों के मारे जाने की रिपोर्ट दी थी।
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