Friday, November 26, 2021

बिहार, झारखंड और यूपी देश के सबसे गरीब राज्य

नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआइ) के अनुसार बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश देश के सबसे गरीब राज्यों के रूप में सामने आए हैं। सूचकांक के अनुसार, बिहार की 51.91 फीसद जनसंख्या गरीब है। वहीं झारखंड में 42.16 फीसद और उत्तर प्रदेश में 37.79 फीसद आबादी गरीब है। सूचकांक में मध्य प्रदेश (36.65 फीसद) चौथे स्थान पर है, जबकि मेघालय (32.67 फीसद) पांचवें स्थान पर है। केरल (0.71 फीसद), गोवा (3.76 फीसद), सिक्किम (3.82 फीसद), तमिलनाडु (4.89 फीसद) और पंजाब (5.59 फीसद) पूरे देश में सबसे कम गरीब लोग वाले राज्य हैं और सूचकांक में सबसे नीचे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक आॅक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव (ओपीएचआइ) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा विकसित विश्व स्तर पर स्वीकृत और मजबूत पद्धति का उपयोग कर तैयार किया जाता है। बहुआयामी गरीबी सूचकांक में मुख्य रूप से परिवार की आर्थिक हालत और अभाव की स्थिति को आंका जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, भारत के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक में तीन समान आयामों- स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर का मूल्यांकन किया जाता है। इसका आकलन पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, प्रसवपूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पीने के पानी, बिजली, आवास, संपत्ति तथा बैंक खाते जैसे 12 संकेतकों के जरिए किया जाता है।

वर्ष 2015 में 193 देशों द्वारा अपनाए गए सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) रूपरेखा ने दुनिया भर में विकास की प्रगति को मापने के लिए विकास नीतियों और सरकारी प्राथमिकताओं को फिर से परिभाषित किया है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सूचकांक की प्रस्तावना में कहा, ‘भारत के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक का विकास एक सार्वजनिक नीति उपकरण स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण योगदान है।

यह बहुआयामी गरीबी की निगरानी करता है, साक्ष्य-आधारित और केंद्रित हस्तक्षेप के बारे में बताता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी पीछे न छूटे।’ कुमार ने आगे कहा कि भारत के पहले राष्ट्रीय एमपीआइ की यह आधारभूत रिपोर्ट राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की 2015-16 की संदर्भ अवधि पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक को 12 प्रमुख घटकों का उपयोग करके तैयार किया गया है जिसमें स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।जीवन स्तर से मूल्यांकन भारत के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक में तीन समान आयामों- स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर का मूल्यांकन किया जाता है। इसका आकलन पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, प्रसवपूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने के ईंधन, स्वच्छता, पीने के पानी, बिजली, आवास, संपत्ति तथा बैंक खाते जैसे 12 संकेतकों के जरिए किया जाता है।

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