एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को कहा है कि उन्होंने लखीमपुर मामले पर जो बयान दिया है, वो सरकार को रास नहीं आया, इसीलिए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के रिश्तेदारों और सहयोगियों के खिलाफ आयकर विभाग की छापेमारी की कार्रवाई हुई है।
बता दें कि शरद पवार ने यूपी के लखीमपुर में हुई हिंसा की तुलना ब्रिटिश शासन के दौरान हुए जलियावाला बाग हत्याकांड से की थी।
पवार ने ये बात सोलापुर में अपनी पार्टी की एक बैठक में बोलते हुए कही। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या लोगों को देश में स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।
बता दें कि गुरुवार को आयकर विभाग ने अजित पवार की 3 बहन, बेटे पार्थ पवार और उनसे संबंधित लोगों के कुल 40 ठिकानों पर छापेमारी की थी।
आयकर विभाग की इस छापेमारी से महाराष्ट्र की राजनीति में भूकंप आ गया था। उस समय एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इस कार्रवाई को बदले की भावना और सत्ता का दुरुपयोग बताया था।
इस छापेमारी पर अजित पवार ने कहा था कि ये इनकम टैक्स विभाग का अधिकार है कि वो कहां छापेमारी करना चाहते हैं, लेकिन मेरी बहनों को बीच में लाने की जरूरत नहीं थी।
इस छापेमारी पर आयकर विभाग ने कहा था कि 2 बिचौलियों ने ओबेरॉय होटल में स्थाई कमरे बुक किए हुए थे, इसी जगह अवैध लेन देन होता था। आयकर विभाग को छापेमारी में करीब 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेन-देन की जानकारी मिली है।
क्या है लखीमपुर मामला, जिस पर शरद पवार ने दी थी प्रतिक्रिया
लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा पर किसान संगठनों ने आरोप लगाया है कि उनकी गाड़ी किसानों को रौंदती हुई निकल गई थी, जिससे चार किसानों की मौत गई, जबकि कई घायल हो गए हैं।
इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। किसान इस मामले में आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व पर भी प्रेशर बढ़ गया है क्योंकि इस घटना की वजह से विपक्षी पार्टियां चारों तरफ से उसे घेर रही हैं।
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