Monday, October 4, 2021

लखीमपुर गतिरोध को लेकर बीजेपी नेताओं में अलग-अलग राय: किसी ने बताया साजिश तो कोई मानता है चूक, वरुण गांधी ने भी उठाई आवाज

लखीमपुर खीरी हिंसा पर अब बीजेपी के अंदर ही दो स्वर सुनने को मिल रहे हैं। कुछ जहां इसे सुनियोजित साजिश और खालिस्तान से जोड़ रहे हैं, तो वहीं कुछ इस घटना को एक बड़ी गलती और बचाव में प्रयोग की जा रही भाषा को आपत्तिजनक करार दे रहे हैं। वरुण गांधी जैसे कुछ नेता तो खुलकर इसपर ऐतराज भी जता चुके हैं। जबकि कुछ सामने आए बिना नाराजगी जता रहे हैं।

यूपी के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री लखीमपुर हिंसा से बीजेपी को बैकफुट पर आने की बात करते हुए देखे जा सकते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले ये घटना कहीं सेल्फगोल साबित ना हो जाए, इसका भी डर उन्हें सता रहा है।

रायता फैल गया- यही पहला शब्द था योगी सरकार में एक कैबिनेट मंत्री का, जब उनसे इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई। वहीं एक अन्य मंत्री ने सरकार द्वारा इस मामले को हैंडल करने के तरीकों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा- “हमको दोनों तरफ से नुकसान हुआ, हमारे कार्यकर्ता भी मारे गए और हमारी सरकार भी कठघरे में खड़ी है”।

मंत्री ने कहा कि जब राजनीतिक फीडबैक अलग रखी जाती है, कभी चर्चा नहीं की जाती है। जब आप केवल अफसरों के फीडबैक पर भरोसा करते हैं, तो ऐसा होता है। दूसरे मंत्री ने कहा कि ऐसी परिस्थितयों में फालतू की बयानबाजी से बचा जाता है और संयम रखा जाता है। लेकिन क्या कहें।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वर्तमान नेतृत्व की राजनीतिक संस्कृति, एक मजबूत और प्रतिकूल रवैये को प्रोत्साहित करती है। उदाहरण के लिए वो इस घटना से एक हफ्ते पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा का भड़काऊ बयान का हवाला देते हैं। माना जाता है कि इसी बयान ने प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया था।

यूपी भाजपा के एक पदाधिकारी ने कहा कि उन्होंने सोमवार को पश्चिमी यूपी में पार्टी के संगठनात्मक कार्यों के लिए कई जिलों की यात्रा की। कुछ स्थानों पर सपा कार्यकर्ताओं को छोड़कर कोई आंदोलन दिखाई नहीं दे रहा था। पदाधिकारी हरियाणा के पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की अध्यक्षता में एक बैठक में भाग लेने के लिए सहारनपुर गए थे। कैप्टन अभिमन्यु पश्चिमी यूपी और ब्रज क्षेत्रों के चुनाव प्रभारी हैं।

यूपी सरकार में एक और कैबिनेट मंत्री ने कहा- “मैंने अन्य जगहों पर चल रहे आंदोलन को नोटिस नहीं किया… लेट्स वेट एंड वॉच”।

सोमवार को, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव वाई सत्य कुमार ने ट्वीट कर कहा कि क्या आतंकवादी भिंडरावाला एक किसान था? उत्तर प्रदेश में जिस तरह से गुंडे किसान बनकर हिंसक आंदोलन कर रहे हैं, उससे लगता है कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक सुनियोजित प्रयोग है। जिहादी और खालिस्तानी, अराजक तत्व राज्य में अशांति फैलाना चाहते हैं।

बीजेपी यूपी के प्रवक्ता हरीश चंद्र श्रीवास्तव ने यह भी आरोप लगाया कि खालिस्तानियों ने रविवार को लखीमपुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की थी। अभी तक खालिस्तान लिंक के इन दावों के खिलाफ किसी भी वरिष्ठ नेता की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इन सबके बीच पीलीभीत से भाजपा सांसद वरुण गांधी ने जरूर इसपर विरोध जताते हैं। वरुण आगाह करते हुए कहते हैं कि संघर्ष करने वाले किसानों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का उपयोग करना अनुचित और क्रूर है। गांधी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा- “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह देश के लिए भी खतरनाक है। क्योंकि यह समझने के बजाय कि संघर्षरत किसान क्या कह रहे हैं, हम उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल शुरू नहीं कर सकते”।

वरुण गांधी ने आगे कहा कि किसी व्यक्ति या समूह द्वारा आपराधिक लापरवाही करने के बाद हिंसा भड़की और इसके लिए प्रशासन को दोष नहीं दिया जा सकता। वरुण ने इस बार फिर से सीएम योगी को खत लिखा है और किसानों की मौत में शामिल लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। इसके साथ ही सीएम से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में समयबद्ध तरीके से सीबीआई जांच की भी मांग की।

भाजपा के पूर्व महासचिव वरुण गांधी ने यह भी कहा कि नेता क्षेत्र का दौरा करने से पहले, लोगों का गुस्सा शांत होने का इंतजार कर सकते हैं। उन्होंने कहा- “मेरा विचार है कि हर किसी को हर जगह जाने की अनुमति दी जानी चाहिए, किसी भी तरह के जन आंदोलन की राजनीति में पूर्ण भागीदारी की अनुमति दी जानी चाहिए … यह संवैधानिक है। हालांकि, यह तब किया जाना चाहिए जब स्थिति थोड़ी शांत हो जाए ताकि राजनीति के कारण स्थिति खराब न हो”।

बता दें कि इस घटना में आठ लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में किसान और बीजेपी दोनों तरफ के लोग शामिल हैं।

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