लखीमपुर हिंसा मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने योगी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर अपनी असंतुष्टि जाहिर की है। कोर्ट ने मामले को किसी और एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया है। बता दें कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायधीश ने उत्तर प्रदेश के DGP को निर्देश दिया है कि लखीमपुर हिंसा मामले से जुड़े हुए सभी सबूतों को संभाल कर रखें।
बता दें कि इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जांच में लगे अधिकारियों के व्यवहार से ऐसा नहीं लग रहा है कि वो ठीक से जांच कर पायेंगे। CJI ने कहा कि जिन अधिकारियों को इस मामले की जांच में लगाया गया है, सभी वहीं के लोकल फील्ड अधिकारी हैं। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक वैकल्पिक एजेंसी के बारे में अदालत को अवगत कराने के लिए कहा है जो इस मामले की जांच कर सकती है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, यह आठ लोगों की नृशंस हत्या का मामला है और इसमें कानून को सभी आरोपियों के खिलाफ अपना काम करना चाहिए।
योगी सरकार ने क्या कदम उठाए थे: बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गुरुवार को ही इस मामले में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था। उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसपर जानकारी देते हुए कि लखीमपुर हिंसा की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। आयोग को जांच के लिए दो महीने का समय दिया गया है। इस जांच कमीशन में इलाहाबाद हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को शामिल किया गया है।
केंद्रीय मंत्री के बेटे पर FIR: बता दें कि 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में कथित तौर पर गाड़ी के नीचे रौंदे जाने से चार किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद भड़की हिंसा में चार और लोगों की मौत हो गई थी। इस पूरे मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत 14 लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश सहित कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
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