आज भारतीय वायुसेना का 89वां स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। आज के दिन ही 8 अक्टूबर 1932 को भारतीय वायुसेना अपने अस्तित्व में आया था। भारतीय वायुसेना को अपने अनूठे पराक्रमों और वीरता के लिए जाना जाता है। वायुसेना के कई बड़े ऑपरेशन की कहानी उनके अदम्य साहस को दिखलाता है। ऐसी ही कहानी साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान की है जब वायुसेना के ग्वालियर बेस की वजह से पाकिस्तान भारत के सामने घुटने टेकने को मजबूर हो गया था।
दरअसल दो महीने तक चले कारगिल युद्ध में कई दुर्गम स्थानों पर पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों के कब्जे को ख़त्म करने में भारतीय सैनिकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इन दुर्गम स्थानों में टाइगर हिल भारत के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण था और टाइगर हिल से सटा हिस्सा सेना के लिए काफी अहम रूट था जिससे सेना को जरुरी सप्लाई भेजा जाता था। ऐसे में टाइगर हिल पर कब्जा होने का मतलब था भारतीय सेना के सामने बड़ी मुश्किल खड़ा करना और सेना के कई पोस्ट पर हमला होना।
इसी टाइगर हिल की लड़ाई में भारतीय वायुसेना ने बेहद अहम भूमिका निभाई थी। कारगिल युद्ध के दौरान भारत सरकार की तरफ से सख्त आदेश था कि किसी भी हालत में वायुसेना के विमान को एलओसी पार नहीं करना है। ऐसे में टाइगर हिल के पहाड़ों पर छिपे पाकिस्तानी सैनिकों और घुसपैठियों को खोजना बेहद ही मुश्किल हो रहा था। ऐसे में इस समस्या से पार पाने के लिए मध्यप्रदेश के ग्वालियर स्थित एयरबेस पर मौजूद फाइटर जेट मिराज 2000 को तैयार किया गया।
मिराज 2000 में इजराइल की मदद से लेजर गाइडेड मिसाइल को लगाया गया। जिससे दुश्मनों को खोज कर उसपर निशाना बनाने में काफी मदद मिली। इसके बाद 24 जून 1999 को कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना ने मोर्चा संभाला और दो मिराज 2000 को टाइगर हिल के पास भेजा। इन लड़ाकू विमानों ने लेजर गाइडेड मिसाइल के जरिए टाइगर हिल पर जमे पाक सैनिकों और घुसपैठियों पर ताबड़तोड़ हमला किया. मिराज 2000 ने दुश्मनों के बंकर तक तबाह कर दिए। आखिर में 4-5 जुलाई 1999 को भारत ने टाइगर हिल पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद टाइगर हिल पर तिरंगा लहराया गया. टाइगर हिल पर कब्जे ने कारगिल युद्ध की स्थिति ही बदल दी।
कारगिल युद्ध के बाद भी ग्वालियर एयरबेस ने कई मौकों पर अहम भूमिका निभाई। साल 2019 में जब भारतीय वायुसेना ने बालाकोट एयरस्ट्राइक किया तो उस दौरान भी एयर स्ट्राइक में हिस्सा ले रहे मिराज 200 और सुखोई लड़ाकू विमानों ने ग्वालियर एयरबेस से ही उड़ान भरे थे। 24 फ़रवरी की रात को एक साथ 12 मिराज 200 विमानों को बालाकोट एयरस्ट्राइक मिशन पर भेजा गया। जिसके बाद लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों के इलाकों में जमकर हमले किए।
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