Saturday, October 9, 2021

कश्मीर घाटी में ‘अल्पसंख्यकों’ की हत्याएं, पलायन कर रहे पंडित और सिख, पूछा- हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

पिछले कुछ समय से कश्मीर घाटी में हिंदू और सिख अल्पसंख्यक समुदाय के ऊपर हो रहे हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लगातार हो रहे हमले ने कश्मीर घाटी में अल्पसंख्यकों के मन में चिंता और भय पैदा कर दिया है। जिसकी वजह से कश्मीरी पंडित और सिख समुदाय से जुड़े कई सरकारी कर्मचारी और शिक्षक वापस जम्मू लौट रहे हैं तो कई ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं और कई सुरक्षा कारणों से कश्मीर घाटी में काम करने से कतरा रहे हैं।

ऐसे ही श्रीनगर में शिक्षा विभाग में कनिष्ठ सहायक के तौर पर तैनात सुशील कुमार भी शुक्रवार को सुबह सुबह जम्मू लौट आए। द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सुशील ने कहा कि हम कश्मीर से बाइक पर भागे हैं। सुशील कहते हैं कि कश्मीर घाटी में एक सिख महिला प्रिंसिपल और कश्मीरी हिंदू शिक्षक की हत्या ने हमें सभी के लिए संदिग्ध बना दिया है। कश्मीर में सड़क पर चलते हुए हमें एक ही ख्याल आता रहा कि जो कोई भी हमारी तरफ देख रहा है, वो हमें गोली मार देगा।

सुशील की तरह ही जम्मू कश्मीर के शिक्षा विभाग में काम करने वाले सिद्धार्थ रैना (बदला हुआ नाम) भी अपनी पत्नी के साथ अनंतनाग से जम्मू लौट आए। सिद्धार्थ रैना जब करीब दो साल के थे तो उनका परिवार 1990 में कश्मीरी पंडितों के ऊपर हुए जुल्म के बाद कश्मीर से चले आया था। करीब ढाई दशक बाद साल 2015 में वे वापस श्रीनगर लौट आए। उन्हें प्रधानमंत्री पैकेज के तहत जम्मू कश्मीर के शिक्षा विभाग में नौकरी दी गई थी।

जम्मू से इंडियन एक्सप्रेस के साथ फोन पर बातचीत में सिद्धार्थ ने कहा कि जिस दिन उन्होंने कश्मीर से निकलने की योजना बनाई, उससे पहले वाली पूरी रात वे सो नहीं पाए और अगले दिन सुबह होते ही जम्मू निकल आए। सिद्धार्थ कहते हैं कि कश्मीर घाटी में सद्भाव और शांति के बारे में सिर्फ बयानबाजी की जा रही है, सुरक्षा का कोई आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। अगर कश्मीर में वे शिक्षकों के पास जाकर और उनका पहचान पत्र देखकर गोली मार सकते हैं तो हम जैसे कश्मीर पंडित कर्मचारियों को सुरक्षा की गारंटी कौन देगा। 

सिद्धार्थ और सुशील की तरह कई और सरकारी कर्मचारी भी कश्मीर घाटी को छोड़ कर वापस जम्मू आ रहे हैं। पुलवामा में वित्त विभाग के एक कर्मचारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि वे शनिवार को अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ जम्मू लौटे हैं। उन्होंने कहा कि वे कश्मीर नहीं छोड़ना चाहते थे लेकिन जम्मू में रहने वाले उनके माता पिता ने कहा कि जबतक कश्मीर में स्थिति सामान्य नहीं हो जाती है तबतक वे जम्मू लौट जाएं।

हालांकि जम्मू-कश्मीर सरकार ने पीएम पैकेज के तहत घाटी में तैनात अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों के किसी भी रिवर्स माइग्रेशन से इनकार किया। जम्मू-कश्मीर राहत और पुनर्वास आयुक्त अशोक पंडिता ने कहा कि  “हमने कश्मीर संभागीय आयुक्त के साथ मामला उठाया है और उनसे घाटी के सभी उपायुक्तों को उनके संबंधित जिलों में सुरक्षित सरकारी आवास में रहने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की मांग की है।

The post कश्मीर घाटी में ‘अल्पसंख्यकों’ की हत्याएं, पलायन कर रहे पंडित और सिख, पूछा- हमारी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी? appeared first on Jansatta.



from राष्ट्रीय – Jansatta https://ift.tt/3DlVqDa

No comments:

Post a Comment

Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...