Tuesday, October 12, 2021

हर दिन मिलती हैं मानवाधिकार उल्लंघन की 228 शिकायतें

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएसआरसी) को हर दिन औसतन 228 शिकायतें मिल रही हैं और फिलहाल उसके सामने 20,806 मामले विचाराधीन हैं। आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। आयोग के समक्ष विचाराधीन 20,806 नए और पुराने मामलों में से 344 मामले पुलिस हिरासत में मौत के, 3,407 मामले न्यायिक हिरासत में मौत के, 365 मामले पुलिस मुठभेड़ में मौत के हैं। इसके अलावा, बंधुआ मजदूरों से संबंधित 290 शिकायतें, बच्चों से जुड़ी 336 शिकायतें, महिलाओं से संबंधित 1,741 शिकायतें और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ी 338 शिकायतें आयोग के समक्ष विचाराधीन हैं। अन्य श्रेणी के, मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के 13,985 मामले आयोग में विचाराधीन हैं ।

पांच सालों में आयोग को कुल 4,16,232 शिकायतें प्राप्त हुर्इं। इनमें से, साल 2016 में 96,627 शिकायतें, 2017 में 82,006 शिकायतें, 2018 में 85,950 शिकायतें, 2019 में 76,585 शिकायतें और 2020 में 75,064 शिकायतें आयोग को मिलीं। इस प्रकार, हर दिन आयोग को औसतन 228 शिकायतें मिल रही हैं।

एनएचआरसी के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में अब तक उसे 53,191 शिकायतें मिली हैं। पिछले महीने यानि सितंबर 2021 में उसे 10,627 नई शिकायतें मिलीं। सितंबर में ही नयी और पुरानी 8,736 शिकायतों का निपटारा किया गया। आयोग के मुताबिक सितंबर में पुलिस हिरासत में मरने के 24 मामले, न्यायिक हिरासत में मौत के 254 मामले, पुलिस एनकाउंटर में मरने के 19 मामले, बंधुआ मजदूरी के 17 मामले, बच्चों के 72, महिलाओं के 743, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग के 105 मामले और अन्य 9,393 मामले दर्ज किए गए थे।

आयोग ने पिछले महीने स्वत: संज्ञान लेकर एक मामला दर्ज किया था जबकि इस दौरान नए और पुरानों को मिलाकर तीन मामलों को हल किया गया। स्वत: संज्ञान के 90 मामले अभी भी लंबित हैं। सितंबर, 2021 की ही बात करें तो इस दौरान आयोग की ओर से कुल 24 मामलों में 70,10,000 रुपए राहत राशि के रूप में देने की सिफारिश की है।

इसमें बच्ची से बलात्कार के एक मामले में दो लाख रुपए, स्वास्थ्यकर्मी के मामले में तीन लाख, मध्याह्न भोजन के एक मामले में 60 हजार, न्यायिक हिरासत में मौत के नौ मामलों में 2.45 लाख, तथाकथित न्यायिक हिरासत में मौत के एक मामले में दो लाख, असामाजिक तत्वों द्वारा परेशान करने के एक मामले में तीन लाख, पुलिस हिरासत में मौत के दो मामलों में 11 लाख, पुलिस फायरिंग में मौत के एक मामले में सात लाख, पुलिस एनकाउंटर में मौत के एक मामले में पांच लाख, कानूनी कार्रवाई नहीं करने में विफल रहने के तीन मामलों में पांच लाख, सामूहिक बलात्कार के एक मामले में तीन लाख, बिजली से मौत के एक मामले में दो लाख और अनुसूचित जाति के व्यक्ति को प्रताड़ित करने के एक मामले में दो लाख रुपए के मुआवजे की सिफारिश की गई है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन मानवाधिकार सुरक्षा अधिनियम 1993 के तहत 12 अक्तूबर 1993 को किया गया था। आयोग मानवाधिकारों के हनन से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेता है, इसकी जांच करता है तथा पीड़ितों के लिए मुआवजे की सिफारिश करता है। इसके साथ ही आयोग मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले लोक सेवकों के खिलाफ कानूनी उपाय भी करता है।

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