वाईएसआर(YSRCP) के कई नेता इन दिनों चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर काफी बेचैन देखे जा रहे हैं। दरअसल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने जब से घोषणा की है कि प्रशांत किशोर(PK) उनकी पार्टी YSRCP के लिए काम करेंगे, तब से ही पार्टी के कई नेताओं में नाराजगी दिखाई दे रही है। उन्हें लगता है कि PK के मनमानी फैसले पार्टी के लिए हितकारी नहीं होंगे। पार्टी नेताओं का मानना है कि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में YSRCP की जीत में प्रशांत किशोर के योगदान को बहुत अधिक आंका गया।
दरअसल YSRCP के कई नेता PK के व्यवहार को लेकर काफी आहत है। इसको लेकर पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि 2019 के चुनावों में भी PK ने बहुत ही मनमानी तरीके से काम किया था। ऐसी शिकायतें थीं कि YSRCP के प्रभारी, नेताओं, सोशल मीडिया कार्यकर्ताओं और बूथ समितियों ने अपनी तरफ से कड़ी मेहनत की, लेकिन इसका श्रेय टीम PK को गया।
सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को कमतर आंका। अब जब घोषणा हुई है कि फिर से पीके टीम पार्टी के लिए काम करेगी तो पार्टी नेताओं का असंतोष सामने आ रहा है।
2019 से पहले पार्टी के लिए काम करने वालों का आरोप है कि प्रशांत किशोर और उनकी टीम के सदस्यों ने चुनाव के ठीक बाद ही अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिए थे। जबकि सर्वे के लिए कई नेताओं ने अपनी तरफ से भारी पैसा खर्च किया था, लेकिन नतीजों के बाद से पीके से उनका संपर्क नहीं हो पाया। प्रकासम जिले के एक नेता ने कहा कि हमने प्रशांत किशोर की टीम के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च किए। लेकिन जब चुनाव खत्म हुआ तो उन्होंने हमारा कॉल रिसीव करना बंद कर दिया।
पार्टी के कई नेता, जो पीके टीम के साथ इस तरह के अनुभव से गुजरे हैं, वो इस बार मन बना रहे हैं कि वो पीके के सर्वेक्षणों से खुद को अलग रखेंगे। उनका मानना है कि सर्वे के नाम पर वो अपना पैसा नहीं फूंकेंगे।
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