पीएम केयर्स फंड को लेकर एक याचिका की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि केंद्र या राज्य सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है और ये आरटीआई के दायरे में नहीं आता। प्रधानमंत्री कार्यालय के हलफनामे में यह बात कही गई कि ये फंड चेरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है, भारत सरकार से नहीं। कोर्ट में पीएमओ की तरफ से दिए गए दलील के संदर्भ में कई लोगों ने पीएम केयर्स फंड की वेबसाइट पर दिए एड्रेस और उसके एंब्लेम पर सवाल उठाए हैं। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने पूछा है कि वेबसाइट पर भारत सरकार का प्रतीक, ईमेल आईडी और पीएमओ का पता क्यों है।
श्रीनिवास बी वी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किए गए एक ट्वीट में लिखा, ‘अगर तथाकथित पीएम केयर्स फंड एक निजी कोष है, न तो भारत सरकार का कोष है और न ही आरटीआई अधिनियम के तहत ये ‘पब्लिक अथॉरिटी’ है। फिर भारत सरकार का प्रतीक, उसकी ईमेल आईडी और पीएमओ के आधिकारिक एड्रेस का उपयोग करने की अनुमति कैसे दी गई?’
रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने भी इस मसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘ये कहना उचित नहीं कि ये सरकारी फंड नहीं है। PM ऑफिस से डील होता है, भारत सरकार का एंब्लेम, ईमेल इस्तेमाल होता है, GOI के ऑफिसर तैनात हैं, वेबसाइट से देख लो। कुछ तो छिपाया जा रहा है, HC से और देश के लोगों से भी।’
अपने एक और ट्वीट में सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा, ‘PM केयर फंड का CAG ऑडिट क्यों नहीं? किस बात का डर है,मोदी जी को?’ पीएम केयर्स फंड को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में सम्यक गंगवाल (वकील) ने एक याचिका दायर कर यह मांग की थी कि पीएम केयर्स फंड को राज्य का फंड घोषित किया जाए।
याचिका में कहा गया था कि फंड की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उसे आरटीआई के दायरे में लाया जाए। वहीं, पीएमओ की तरफ से कहा गया कि ट्रस्ट पारदर्शिता के साथ काम करता है जिसका सारा विवरण पीएम केयर्स फंड की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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