Tuesday, August 17, 2021

अटल बिहारी वाजपेयी को अपनी पार्टी में शामिल करने का प्रस्ताव लेकर पहुंच गए थे कांग्रेस नेता, वीपी सिंह ने किया था बड़ा दावा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी साल 1957 में पहली बार बलरामपुर से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने कई चुनाव जीते, लेकिन साल 1984 में कांग्रेस की लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। दरअसल इसी साल इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी और उनके बेटे राजीव गांधी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में थे। एक तरीके से देश की सहानुभूति उनके साथ थी। इस चुनाव में अटल बिहारी मध्य प्रदेश की ग्वालियर सीट से चुनाव मैदान में थे।

ऐन मौके पर कांग्रेस ने माधवराव सिंधिया को भी इसी सीट से मैदान में उतार दिया और वाजपेयी की करारी हार हुई थी। पार्टी ने इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया था, जिसमें एक साल से ज्यादा का समय लग गया था। इस बीच अटल बिहारी वाजपेयी के पास कांग्रेसी नेता पार्टी बदलने का प्रस्ताव तक लेकर आते थे।

बीजेपी से अलग होना चाहते थे वाजपेयी? राजनीति विज्ञानी और लेखक विनय सीतापति हिंद पॉकेट बुक्स: पेंगुइन रैंडम हाउस से प्रकाशित अपनी हालिया किताब ‘जुगलबंदी: भाजपा मोदी युग से पहले’ में इस घटना का विस्तार से जिक्र करते हैं। सीतापति लिखते हैं, दूसरे राजनीतिक दलों ने महसूस कर लिया था कि वाजपेयी अलग-थलग पड़ गए थे। इसी दौरान वीपी सिंह ने दावा किया था कि वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी से अलग होना चाहते थे।

वीपी सिंह के हवाले से विनय सीतापति लिखते हैं, कांग्रेस ने भी उन्हें अपने दल में शामिल करने का प्रयास किया था। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने विनय सीतापति को बताया था, ‘राजीव गांधी हिंदू वोट चाहते थे और अटल बिहारी वाजपेयी बिना मुस्लिमों को नाराज़ किए ऐसा कर सकते थे। हमने जब वाजपेयी को पार्टी में शामिल करने की बात बताई तो वे पूरी बात सुनकर हंसे और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन हम समझ गए थे कि वे नहीं आने वाले हैं।’

गलत पार्टी में थे अटल बिहारी वाजपेयी? अटल बिहारी वाजपेयी से कई बार बीजेपी के मूल्यों से उनकी निजी विचारधारा विपरीत होने के बारे में पूछा जाता था। एक बार उनसे आडवाणी की बीजेपी को छोड़ने के बारे में पूछा गया था तो वाजपेयी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया था, ‘जाएं तो जाएं कहां?’ जाने-माने लेखक खुशवंत सिंह ने तो अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर यहां तक लिख दिया था कि वह आदमी ठीक हैं, लेकिन गलत पार्टी में हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी ने इंडिया टीवी के शो ‘आप की अदालत’ में इसका जवाब देते हुए कहा था, ‘अगर मैं सचमुच अच्छा आदमी हूं तो गलत पार्टी में कैसे हो सकता हूं? अगर बीजेपी गलत पार्टी है तो मैं अच्छा आदमी कैसे हो सकता हूं? लोगों ने अभी भारतीय जनता पार्टी को पूरी तरह पहचाना ही नहीं है। हम सांप्रदायिक नहीं हैं। सभी धर्मों में हमारा विश्वास है। मेरे विचार ही पार्टी के विचार हैं जो बिल्कुल भी अलग नहीं हैं।’

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