जातिगत मतगणना को लेकर इन दिनों नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव एक साथ आवाज़ उठा रहे हैं। बीते दिनों वे दोनों इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री मंत्री मोदी से एक साथ मिले थे। इसके बाद वह साथ में मीडिया के सामने भी आए थे। उनके बयानों से भी कयास लगाए जा रहे हैं कि जनगणना के मुद्दे पर वे करीब आए हैं।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार ने तेजस्वी की तारीफ की तो वहीं तेजस्वी ने भी गर्मजोशी से उन्हें धन्यवाद दिया। इन सारी बातों से भाजपा की घबराहट बढ़ गई है। अब जेडीयू के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा का कहना है कि अगर एनडीए में जेडीयू की बातें नहीं मानी जातीं तो मतभेद बढ़ सकताहै।
एक सेमिनार के दौरान कुशवाहा ने कहा, अगर जातिगत जनगणना नहीं कराई जाती तो यह बेमानी होगी। साल 2010 में ही संसद ने इस मामले में एक प्रस्ताव पास कर दिया था। इसके अलावा मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इसके लिए आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा, ‘हमें गर्व होता है जब पीएम मोदी कहते हैं कि वह पिछड़े समुदाय से आते हैं। हमें उम्मीद है कि वह नीतीश कुमार की जातिगत जनगणना वाली बात को ज़रूर मानेंगे।’
कुशवाहा ने यह भी कहा कि इससे मतलब नहीं है कि वे एनडीए का हिस्सा हैं। अगर केंद्र सरकार जातिगत जनगणना की बात नहीं मानती है तो टकराव निश्चित है। उन्होंने कहा, ‘सामाजिक भेदभाव मिटाने के लिए जीतियों की जनगणना ज़रूरी है। जाति, धर्म और लिंग, क्षेत्रीयता के आधार पर भेदभाव होता है।’
एनडीए के साथ टकराव की बात को थोड़ा बदलते हुए उन्होंने फिर कहा, इस टकराव भी मत कहिए, प्रसव पीड़ा कहिए। प्रसव पीड़ा न हो तो सृजन ही रुक जाएगा। इस पीड़ा का अंत सुखद होता है।
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