मरकज निजामुद्दीन का दावा है कि पूर्णबंदी के बाद से ही वे यहां बचे करीब हजार लोगों को भेजने के लिए लगातार अधिकारियों के सपंर्क में रहे। स्थानीय एसएचओ, एसडीएम तक अर्जी दी गई। एसडीएम के कहने पर यहां मौजूद लोगों के नाम-पते मुहैया कराए गए। जब उन्होंने पाया कि लोग दूरदराज के हैं लिहाजा उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया।
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