Saturday, December 1, 2018

बेबाक बोल: गलियारे की गुगली

सात दशक पहले अंग्रेजों से मिली औपनिवेशिक आजादी भारत विभाजन की त्रासदी के साथ सामने आई। इस त्रासदी में लहूलुहान हुई पंजाब की मिट्टी। विभाजन की एक लकीर से गुरु नानक के दर से लेकर बुल्लेशाह की कर्मभूमि तक हमसे दूर हो गई। धर्म और संस्कृति के इस भाव और अभाव के बीच पंजाब ने जो जख्म सहे, उसका दर्द हमें आज भी आगाह कर रहा है। करतारपुर साहब गलियारा बुनियाद समारोह में इमरान खान कश्मीर और परमाणु शक्ति के घालमेल वाली फौज की पकड़ाई जो पटकथा पढ़ रहे थे उससे आगे का क्या दृश्य बनेगा। समारोह में जिस तरह से पाक फौज की ताकत का नूर चमक रहा था, उससे यही डर है कि आस्था का यह पुल कहीं पाक की नापाक हरकतों का गलियारा न बन जाए। आस्था, धर्म और संस्कृति के जरिए लोगों के बीच नफरत और दूरियां मिटाने के हर ऐसे कदम का स्वागत है, लेकिन भावुक पलों के बीच आतंकवाद का दर्द झेल चुके पंजाब की सुरक्षा की कड़वी हकीकत पर इस बार का बेबाक बोल।

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