चार धाम के बूते चलने वाला करोड़ों रुपए का व्यवसाय बिल्कुल ठप पड़ गया है। चार धाम के भरोसे पूरे साल की रोटी का जुगाड़ करने वाले ट्रेवल, होटल, स्थानीय दुकानदार, फूल बेचने वाले, पालकी और खच्चर के माध्यम से रोजी-रोटी कमाने वाले भूखमरी के कगार पर हैं।
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