Friday, July 15, 2022

पहली बार न्‍यूज वेबसाइट्स को कानून के दायरे में लाएगी सरकार, उल्‍लंघन पर म‍िलेगा दंड- मानसून सत्र में आ सकता है ब‍िल 

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार डिजिटल मीडिया को कानूनों के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। संशोधित कानून को मंजूरी मिली तो डिजिटल न्‍यूज वेबसाइट्स को नियमों के उल्‍लंघन के लिए कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें जुर्माना और न्यूज वेबसाइट्स का रजिस्ट्रेशन रद्द करना शामिल है। सरकार अगले सप्ताह से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में ये बिल लेकर आ सकती है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने प्रेस एंड पीरिओडिकल्स बिल के रजिस्ट्रेशन में संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसके दायरे में किसी भी इलेक्‍ट्रानिक माध्‍यम के जरिये डिजिटल मीडिया पर समाचार (News) को भी शामिल किया है। मीडिया के रजिस्ट्रेशन के नए कानून में देश में पहली बार डिजिटल न्यूज वेबसाइट्स को भी कानून के दायरे में लाया जा रहा है, जो पहले किसी भी सरकारी विनियमन का हिस्‍सा नहीं रहा है।

डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करना होगा और कानून लागू होने के 90 दिनों के भीतर ऐसा करना होगा। डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स को प्रेस रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा, जिसके पास उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने का अधिकार होगा। वे रजिस्ट्रेशन को रद्द कर सकते हैं और जुर्माना भी लगा सकते हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के साथ एक अपीलीय बोर्ड की योजना बनाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, बिल को अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य हितधारकों से मंजूरी नहीं मिली है। इस संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद डिजिटल मीडिया सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधीन आ जाएगा।

2019 में भी नए आईटी नियमों के तहत डिजिटल मीडिया को विनियमित करने की कोशिश हुई थी, जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था। तब केंद्र ने एक मसौदा बिल पेश करते हुए डिजिटल मीडिया पर न्यूज को डिजिटल प्रारूप में न्यूज के तौर पर परिभाषित किया था, जिसे इंटरनेट, कंप्‍यूटर या फिर मोबाइल पर प्रसारित किया जा सकता है, जिसमें ऑडियो, टेक्स्ट और ग्राफिक्स भी शामिल हैं। इसको लेकर काफी विवाद हुआ था और इसे डिजिटिल मीडिया को कंट्रोल करने की कोशिश के तौर पर देखा गया था।



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Thursday, July 14, 2022

सड़क दुर्घटनाओं पर ‘इंटीग्रेटेड रोड एक्सिडेंट डेटाबेस’ नाम का मोबाइल ऐप तैयार

सड़क दुर्घटनाओं में हो रही वृद्धि को देखते हुए भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक पहल से ’इंटीग्रेटेड रोड ऐक्सिडेंट डेटाबेस’ नाम का एक मोबाइल एप बनाया गया है।

उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त डीसीपी सागर सिंह कलसी के नेतृत्व में नेशनल इनफार्मेटिकस सेंटर (एनआइसी) ने इंटीग्रेटेड रोड ऐक्सिडेंट डेटाबेस मोबाइल ऐप को लेकर पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण में उत्तरी जिले के सभी पदाधिकारी मौजूद थे। एनआइसी के एसआरएम कुंदन कुमार के मुताबिक ‘घटना की जानकारी मिलते ही निकटतम पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचेंगे तभी इस एप्लीकेशन पर घटनास्थल की पूरी जानकारी जैसे दुर्घटना पर रिपोर्टिंग की तारीख और समय पता करके डालनी होगी। फिर ऐप दुर्घटना स्थल का ‘लोंगिटयूड’ और ‘लेटस्टयूट’ अपने आप ले लेगा।’

इसके बाद दुर्घटना की गंभीरता, घायलों की संख्या और वाहनों की संख्या देखी जाएगी। भविष्य में इस ऐप को स्वास्थ्य विभाग से भी जोड़ा जाएगा। जिससे पुलिसकर्मी के ऐप में घटनाक्रम के दर्ज करते ही निकटतम रोड एक्सीडेंट अस्पताल को नोटिफिकेशन चला जाएगा और इसके अनुसार अस्पताल में व्यवस्था की जाएगी और घायलों को जल्द से जल्द इलाज मुहैया कराया जाएगा।

एनआइसी डीआरएम अखिलेश त्रिपाठी के मुताबिक ‘भारत सरकार ने परियोजना के विकास, प्रशिक्षण और रखरखाव के लिए एनआईसी को नियुक्त किया है सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए आईआईटी मद्रास एनालिटिक्स और नई नीतियां तैयार करेगा। आईआरएडी परियोजना के अंतर्गत इस प्रोग्राम को मोबाइल एप के द्वारा इस्तेमाल किया जाएगा।

हालांकि सड़क दुर्घटना स्थल पर डाटा रिकॉर्ड करने के लिए केवल मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना होगा’। इस परियोजना से भारत सरकार का लक्ष्य है की सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित किया जाए व दुर्घटना से प्रभावित घायलों को वक्त पर इलाज दिलाया जाए।



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भारत में सामने आया मंकीपॉक्स का पहला केस, UAE से तीन दिन पहले केरल लौटा था शख्स , पॉजिटिव आई रिपोर्ट

14 जुलाई को देश में मंकीपॉक्स के पहले केस की पुष्टि हो गयी है। इस वायरस से केरल का एक व्यक्ति संक्रमित हुआ है जो कि संयुक्त अरब अमीरात से लौटा है। इस शख्स की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसके बाद इसे केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के एक अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है। संक्रमित व्यक्ति में मंकीपॉक्स वायरस के लक्षण दिखाई दिए थे। इस मरीज का सैंपल लेकर उसे टेस्ट के लिए पुणे के राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेज दिया गया।

केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि एक शख्स जो तीन दिन पहले संयुक्त अरब अमीरात से लौटा था और वहीं के एक अन्य संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया था। मंत्री ने कहा कि पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में व्यक्ति के नमूनों का परीक्षण किया गया, जिसमें गुरुवार को मंकी पॉक्स की पुष्टि हुई। उन्होंने बताया कि मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोटिक बीमारी है जिसमें चेचक के समान लक्षण होते हैं। साल 1958 में पहली बार बंदरों में चेचक जैसी बीमारी के रूप में ये लक्षण देखे गए थे जिसके बाद इसका नाम ‘मंकीपॉक्स’ पड़ा।

केरल प्रशासन अलर्ट
केरल में मंकीपॉक्स का पहला मामला आने के बाद से केरल प्रशासन अलर्ट मोड पर है केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वायरस की जांच और आवश्यक स्वास्थ्य उपायों को लागू करने में केरल सरकार की मदद के लिए मल्टी-डिसिप्लिनेरी सेंट्रल टीम तैनात करने के आदेश दिए हैं। केरल की स्वास्थ्यमंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि 12 तारीख को यह शख्स केरल आया था वो त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट पर WHO और ICMR की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी कदम उठाए जा रहे हैं।

संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए 11 लोगों की पहचान हुई
केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, ‘केरल का जो शख्स मंकीपॉक्स पॉजिटिव पाया गया है उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर ली गई है। 11 लोग उसके संपर्क में आए थे हालांकि अभी मरीज की हालत स्थिर है। उसके सभी अंग नॉर्मल हैं और काम कर रहे हैं। संपर्क में आए लोगों प्राथमिक संपर्कों की पहचान की गई है।’ उन्होंने कहा कि इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। सभी कदम उठाए जा रहे हैं और मरीज की हालत स्थिर है।

जानिए क्या है मंकीपॉक्स की बीमारी?
मंकीपॉक्स बहुत ही दुर्लभ बीमारी है ये मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण से होती है मंकीपॉक्स से संक्रमित मनुष्यों में चेचक की बीमारी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन ये चेचक से हल्के होते हैं। संक्रमित व्यक्ति को 7-14 दिनों के बाद सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द थकावट और बुखार आता है। इसके आम लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, थकान लगना शामिल हैं।

जानिए कैसे होते हैं मंकीपॉक्स के लक्षण

मांसपेशियों में दर्द होना
तेज सिरदर्द होना
ठंड लगना
एनर्जी लेवल का गिरना या थकान आना
पूरे शरीर पर गहरे लाल रंग के दाने
शरीर में सूजन
स्किन पर लाल चकत्ते
कुछ ही दिनों में लाल चकत्तों का जख्म में बदल जाना



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ललित मोदी ने सुष्मिता सेन संग शेयर की रोमांटिक तस्वीरें तो मीम पोस्ट कर बोले यूजर्स- देख रहे हो बिनोद

बॉलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) एक बार फिर अपनी लव लाइफ को लेकर सुर्खियों में आ गई हैं। आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने सोशल मीडिया पर सुष्मिता के साथ मालदीव में छुट्टियां मनाते हुए तस्वीरें शेयर कीं, जिसके बाद दोनों की शादी की खबरें उड़ने लगीं। इस बीच ललित मोदी ने जानकारी दी है कि दोनों की शादी नहीं हुई है। वे दोनों एक दूसरे को अभी सिर्फ एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।

ललित मोदी ने पहले ट्विटर पर सुष्मिता सेन के साथ कुछ फोटोज शेयर कर हिंट दिया था कि दोनों ने शादी रचा ली है। पोस्ट पर ललित ने लिखा था, “वह ग्लोबल टूर करने के बाद लंदन वापस आ गए हैं। परिवार के साथ वह मालदीव और सर्दीनिया गए थे। मेरी बेटर हाफ सुष्मिता सेन के साथ एक नई शुरुआत। आखिरकार एक नई जिंदगी की शुरुआत। आज चांद के ऊपर हूं।”

शादी नहीं की है: ललित का ये ट्वीट आग की तरह सोशल मीडिया पर फैल गया और लोगों ने मान लिया कि दोनों ने शादी कर ली है। हालांकि इस ट्वीट के बाद ललित ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक और ट्वीट कर सफाई दी कि उन्होंने शादी नहीं की है, बल्कि दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं। ललित मोदी ने लिखा, “साफ कर देना चाहता हूं कि शादी नहीं की है। सिर्फ एक दूसरे को डेट कर रहे हैं। एक दिन ये भी हो जाएगा।”

सोशल मीडिया पर आए तरह-तरह के रिएक्शन: ललित के इन पोस्ट्स के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर रिएक्शन की बाढ़ आ गयी। नरेंद्र नाथ मिश्रा (@iamnarendranath) नाम के यूजर ने पंचायत वेब सिरीज़ का एक मीम शेयर करते हुए लिखा, “देख रहे हो बिनोद।” प्रिया मिश्रा (@priyamishra2908) नाम की ट्विटर यूजर ने लिखा, “बंगाली का दिल जीतने वाले इकलौते मोदी।”

निर्भय विकास (@NIRBHAYVIKASH) नाम के एक यूजर ने पंचायत वेब सिरीज़ का एक मीम शेयर करते हुए लिखा, “रहन दे बिनोद मत देख, देखा नहीं जाएगा तुझसे।” अमन गुप्ता (@iamangpt) ने लोकप्रिय टीवी सीरियल तारक मेहता का जिक्र करते हुए लिखा, “रियल लाइफ के अय्यर और बबिता।”

इसके साथ ही ललित मोदी ने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफाइल फोटो भी बदल ली है। इस फोटो में वह सुष्मिता सेन के साथ नजर आ रहे हैं। इंस्टाग्राम बायो में ललित मोदी ने लिखा है कि उन्होंने नए जीवन की शुरुआत की है, वह भी पार्टनर इन क्राइम, माई लव सुष्मिता सेन के साथ।



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गरीब हैं तो भी कानून मानना होगा- रेलवे की जमीन पर झोपड़ी बनाने वालों के वकील की दलील पर बोले जज

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट गुजरात में एक रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण के मामले में सुनवाई करते हुए कहा, जब संविधान कानून के शासन को मान्यता देता है, तो इसका पालन सभी को करना होता है चाहे वो अमीर हो या गरीब। याचिकाकर्ता की ओर से आए वकील ने जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ को बताया कि अतिक्रमण के तहत हटाए जाने वाले उन पात्र आवेदकों को थोड़ा और समय दे दिया जाए जिन्हें प्रधानमंत्री आवास के तहत घर मिलने घर का किश्तों में भुगतान कर सकें।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “जो कुछ भी किया गया है वह पहले से ही इन सभी व्यक्तियों के लिए दिखाया गया एक रियायत है। वे रेलवे की संपत्ति पर अतिक्रमण से कब्जा करने वाले थे।” इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि ये लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। इस पर कोर्ट ने जवाब देते हुए कहा, “जब संविधान कानून के शासन को मान्यता देता है, तो इसका पालन सभी को करना होता है। गरीबी रेखा से नीचे कानून के शासन का पालन नहीं करने का अपवाद नहीं है।” कई लोग ऐसे हैं जो गरीबी रेखा से नीचे हैं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है और अगर उनके पास योजना के तहत समय बढ़ाने का अधिकार है तो वे इस पर विचार करेंगे।

549 आवेदकों को नहीं मिली मंजूरी, कोर्ट ने दिया ये जवाब
सूरत नगर निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि अभी तक जिन पात्र लोगों ने ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत आवास के आवंटन के लिए 2,450 फार्म भेजे गए थे जिनमें से 1,901 लोगों को आवास की मंजूरी मिली है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत आवंटी को छह लाख रुपये प्रति फ्लैट देने होंगे। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि 549 आवेदकों को मंजूरी नहीं दी गई है। तो इस पर कोर्ट ने कहा, ‘अगर इसे खारिज कर दिया गया है, तो आवेदक प्रॉपर फोरम में उस फैसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं।’

संबंधित अथॉरिटी से बात करें याचीः सुप्रीम कोर्ट
वकील ने बताया कि पश्चिम रेलवे और नगर निगम की ओर से उनके सामने कहा गया है कि संबंधित रेलवे संपत्ति पर अतिक्रमण को पूरी तरह से हटा दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि कुछ आवंटियों को किस्त के भुगतान की समयसीमा बनाए रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे व्यक्ति संबंधित अथॉरिटी से अनुरोध कर सकते हैं जो इसे उचित और कानून के अनुसार समझेगा। इसमें कहा गया है कि जिन आवेदकों के दावों को अधिकारियों ने खारिज कर दिया है,वे फैसले को चुनौती देने के लिए उचित उपाय का सहारा लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

गुजरात हाईकोर्ट ने 2014 में खाली करवाई थी जमीन
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि गुजरात उच्च न्यायालय ने 23 जुलाई 2014 को यथास्थिति के अपने अंतरिम आदेश को खाली कर दिया था और पश्चिम रेलवे को सूरत-उधना से जलगांव तीसरी रेलवे लाइन परियोजना तक आगे बढ़ने की अनुमति दी थी। सूरत की उतरन से बेस्टन रेलवे झोपड़पट्टी विकास मंडल द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया था कि रेलवे की जमीन पर रहने वाले झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों को अपूरणीय क्षति होगी यदि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान नहीं की जाती है तो बेघर होने से उनकी स्थिति और अधिक दयनीय हो जाएगी खासकर कोविड -19 महामारी के दौरान।



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राष्‍ट्रपत‍ि चुनाव में वोट के बदले एक करोड़ के ऑफर का दावा: यशवंत सिन्हा बोले- मुझसे डर गई है BJP

राष्ट्रपति चुनाव की हलचल के बीच विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने गुरुवार को भाजपा पर चुनाव में खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया। यशवंत सिन्हा ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के चुनाव में खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की।

पूर्व वित्त मंत्री ने दावा किया कि भाजपा ‘ऑपरेशन कमल’ चला रही है, जिसके तहत वह अपने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए गैर-भाजपा विधायकों को बड़ी रकम की पेशकश कर रही है। BJP मुझसे और स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव परिणाम से डरती है। मीडिया से बात करते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा, “मैंने आज सुबह बहुत ही दुख के साथ मध्य प्रदेश के एक बड़े अखबार में छपी खबर का शीर्षक पढ़ा, ‘भाजपा की नजर कांग्रेस के 26 आदिवासी विधायकों पर है, क्रॉस वोटिंग की तैयारी।”

विधायकों को बड़ी रकम की पेशकश: उन्होंने आगे कहा, “मैंने विश्वसनीय स्रोतों से यह भी सुना है कि राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार को वोट देने के लिए गैर-भाजपा विधायकों को बड़ी रकम की पेशकश की जा रही है।” यशवंत सिन्हा ने चुनाव आयोग और राज्य सभा के महासचिव से भाजपा के इस भ्रष्टाचार की जांच करने का आग्रह किया।

‘ऑपरेशन कमल’ चला रही है बीजेपी: यशवंत सिन्हा ने कहा, “ऑपरेशन कमल का सही नाम ऑपरेशन मल है, क्योंकि यह सत्ताधारी दल द्वारा गंदे राजनीतिक भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है। इसका इस्तेमाल विपक्षी दलों में दलबदल करने और विपक्षी दलों की राज्य सरकारों को गिराने के लिए किया जाता है।” पूर्व वित्त मंत्री ने कहा, “मध्य प्रदेश के अलावा, भाजपा ने इसका इस्तेमाल कर्नाटक, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और हाल ही में महाराष्ट्र में विपक्षी सरकारों को हटाने के लिए किया है। इस सब में मुझे भारत के लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी सुनाई देती है।”

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी दावा किया था कि बीजेपी राष्ट्रपति चुनावों में खरीद-फरोख्त की राजनीति कर रही है और कांग्रेस के विधायकों को खरीदने की कोशिश में है। कमलनाथ ने यह भी दावा किया था कि उनके एक एमएलए को 1 करोड़ रुपए का ऑफर दिया गया कि राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को वोट दो।



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इतना तो मानेंगे कि संसद में मर्यादा की सीमा लांघी जाती है, एंकर के सवाल पर बोले कांग्रेस नेता- विपक्षी आवाज ‘म्यूट’ कर दी जाती है, बोलने नहीं दिया जाता

असंसदीय शब्दों की सूची को लेकर मचे घमासान के बीचे कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा, लोकसभा जब चलती है तो सदन चीजों को डिसाइड करता है बहुत से शब्द जो अमर्यादित या असंसदीय में नहीं होते हैं किसी ने ऐसे शब्द कह दिए और इस पर किसी ने आपत्ति की उसपर सदन अगर कहे कि इसे हटा दिया जाए तो हटा दिया जाता है ऐसा नहीं है कि सदन में असंवेदनशील लोग बैठे होते हैं। वो लोग भी अच्छी तरह से ये जानते हैं कि क्या संसदीय है और क्या असंसदीय है। लोकतंत्र में विपक्ष का काम निगरानी करने का होता है सरकार की नीतियों का कार्यक्रमों का।

जब अखिलेश सिंह से एंकर ने सवाल पूछा कि छत्तीसगढ़ और राजस्थान की जो विधानसभा है वहां से भी कुछ ऐसे ही शब्दों को एक्सपंच करने की मांग आई है उन शब्दों को भी शामिल कीजिए वहां पर तो आपकी ही सरकार है। छत्तीसगढ़ में अक्षम सरकार, राजस्थान में कांव-कांव करना, तलवे चाटना, तड़ीपार, तुर्रम खान, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे ऐसे शब्दों को राजस्थान विधानसभा से एक्सपंच करने की मांग आई है, क्या मतलब था इसको वहां एक्सपंच करने का? इस पर अखिलेश सिंह ने कहा, अब किस-किस सरकार में लिया गया और क्या लिया गया अगर वहां भी लिया गया होगा तो वहां भी उसका विरोध किया गया होगा।

संसद में कितनी मर्यादा लांघी जाती है आपको पता हैः अखिलेश
बात ये है कि आज जो पूरे हिन्दुस्तान की सरकार है वो हर मोर्चे पर फेल है और जो फेल है और उसके काम कहीं भी जनता के मानक में और उसके अनुरूप नहीं है। इसी दौरान जब एंकर ने उनसे पूछ लिया कि आप इतना तो मानेंगे कि संसद में मर्यादा की सीमा लांघी जाती है? कहीं न कहीं कोई न कोई नियंत्रण तो होना चाहिए ये तो मानेंगे आप कौन तय करे कैसे शब्द इस्तेमाल किए जाएंगे वो तो मानेंगे आप? इस पर अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए कहा अरे संसद में कितनी मर्यादा लांघी जाती है ये आपको कहां पता है आपको मालूम है कि संसद में बोलते हुए विपक्ष के नेता की आवाज म्यूट कर दी जाती है।

विपक्षी नेताओं की आवाज म्यूट कर दी जाती हैः अखिलेश
विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जाता है, उसकी आवाज दबा दी जाती है लिखने या बोलने का समय तो बाद में आता है। जो समय मिलता है उस समय को डिस्टर्ब करवा दिया जाता है ये सब नहीं होता है क्या? बिना प्रोसीजर्स के वोट पड़ जाते हैं बिल पास करवा लिए जाते हैं राज्यसभा से अगर आप गंभीरता से बात करते हैं तो ये एक गंभीर विषय है। जो लोकसभा या राज्यसभा की प्रोसिडिंग्स हैं वो व्यवस्थित तरीके से चलें। लोगों को अपनी बात रखने का मौका मिले और उनकी आवाज को म्यूट ना किया जाए, उनका माइक डाउन न किया जाए कैमरे न हटाए जाएं।



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Wednesday, July 13, 2022

नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ और सारनाथ में बने शेर के मुंह में क्या है फर्क, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और इतिहासकार ओमजी ने बताया

नए संसद भवन पर स्थापित अशोक स्तंभ के स्वरूप को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि अशोक स्तंभ पर मौजूद शांत सौम्य शेरों की जगह संसद भवन पर आक्रोश वाले शेर की प्रतिमा लगाई गई है। हालांकि इसको लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक ट्वीट में कहा कि दोनों प्रतीकों में कोई अंतर नहीं है।

बता दें कि मोदी सरकार में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर आकार को छोड़ दें तो दोनों में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक के आकार को बढ़ा दिया जाए या फिर नए संसद भवन पर बने प्रतीक को छोटा कर दिया जाए, तो दोनों में कोई अंतर नहीं होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दोनों आकृतियों में कोई अंतर नहीं है, चूंकि सारनाथ की आकृति बहुत छोटी और संसद के ऊपर लगी आकृति बड़ी है। इसलिए दोनों में अंतर नजर आ रहा है। बता दें कि हरदीप सिंह पुरी ने अपने ट्वीट में सारनाथ और संसद भवन के ऊपर बने राष्ट्रीय प्रतीक की फोटो शेयर की है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सारनाथ प्रतीक को नीचे से देखता है, तो उसे शेर की आकृति शांत या क्रोधित दिखाई देगी। वहीं आकृति के आकार को लेकर उन्होंने कहा कि अगर मूल प्रतीक की वास्तविक प्रतिकृति संसद की नई इमारत पर लगाई जाती तो इसे दूर से देख पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि ‘विशेषज्ञों’ को यह भी पता होना चाहिए कि सारनाथ में रखा गया मूल प्रतीक जमीन पर है जबकि नया प्रतीक जमीन से 33 मीटर की ऊंचाई पर है।

वहीं इंडिया टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए इतिहासकार डॉ ओमजी उपाध्याय ने कहा, “सारनाथ और संसद पर लगे राष्ट्रीय प्रतीक में समानताएं हैं।” उन्होंने कहा कि कोई राजनीतिक दल किसी राष्ट्रीय प्रतीक से छेड़छाड़ करने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। इतिहासकार ने कहा कि मूर्तियों से छेड़छाड़ की बात एकदम निराधार है।

उन्होंने कहा कि एक पत्थर पर बनी आकृति को जब आप मेटल पर उकेरते हैं तो इसमें कलात्मक अभिव्यक्ति का ही अंतर होगा, बाकी कोई छेड़छाड़ होना मुश्किल है और न ही कोई राजनीतिक दल ऐसा करने की सोचेगा। ओमजी उपाध्याय ने कहा कि भारत अपने कलात्मक कौशल के काफी प्रसिद्ध है। ऐसे में आकृति बनाने में गड़बड़ी हुई है, कहना गलत होगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को दिल्ली में नए संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था। इस दौरान आयोजित समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश मौजूद थे।

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संसद के नए भवन के शीर्ष पर स्थापित राष्ट्रीय चिन्ह का माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लोकार्पण किया। नया संसद भवन जहां नए भारत की आकांक्षाओं को पूरा करेगा वहीं यह राष्ट्रीय चिन्ह हमें भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने को प्रेरित करता रहेगा। कांस्य से बने इस राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह की ऊंचाई 21 फीट, वजन 9500 किलो तथा व्यास 3.3 से 4.3 मीटर है। हमारा प्रयास है कि संसद के नए भवन का निर्माण कार्य भी अतिशीघ्र पूर्ण कर इसे देश की जनता के समर्पित करें।
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– Om Birla (@ombirlakota) 11 July 2022


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PM Cares Fund: पीएमओ से आया महज एक पन्ने का जवाब देख जज हैरान, कहा- इतने अहम मुद्दे को एक पेज में निपटा दिया?

पीएम केयर्स फंड की पारदर्शिता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक याचिका पर पीएमओ द्वारा दिए एक पेज के जवाब पर अदालत ने नाराजगी जताई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएम केयर्स के कानूनी ढांचे से जुड़े सवाल को “महत्वपूर्ण” बताया। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से दिये गये एक पेज के जवाब पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आपत्ति जताई।

मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, “आपने मामले में जवाब दाखिल किया है। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सिर्फ एक पेज? यह केवल एक पृष्ठ का उत्तर है। एक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव (अवर सचिव, प्रधान मंत्री कार्यालय) का हलफनामा है यह। इससे आगे कुछ नहीं? इतना महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसपर सिर्फ एक पेज का जवाब है। इसपर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जानी चाहिए थी।”

अदालत ने क्या कहा: अदालत ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “आप उचित तरीके से जवाब दाखिल करें। यह मामला इतना आसान नहीं है। हमें इसपर विस्तृत जवाब चाहिए। क्योंकि यह मामला शीर्ष अदालत में भी जाएगा। हमें उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर एक आदेश पारित करना होगा।”

4 सप्ताह का दिया समय: अदालत ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर इस मामले में “विस्तृत जवाब” दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को 16 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।

याचिका में की गई मांग: पीएम केयर्स फंड को लेकर याचिकाकर्ता सम्यक गंगवाल ने वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान के जरिए मांग की है कि इस फंड को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत सरकार की संस्था घोषित किया जाये। इसके अलावा फंड की समय-समय पर पीएम केयर्स वेबसाइट पर आडिट रिपोर्ट को भी जारी किया जाये।

इससे पहले इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अवर सचिव की तरफ से एक हलफनामा दायर किया गया था। जिसमें बताया गया था कि पीएम केयर्स ट्रस्ट में अपने कार्यो का निर्वहन कर रहे हैं। इसमें पारदर्शिता है और फंड का आडिट एक लेखा परीक्षक द्वारा किया जाता है।



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बिना त्यागपत्र दिए देश छोड़ मालदीव भागे श्रीलंका के राष्‍ट्रपति राजपक्षे, भारत बोला- इसमें हमारा कोई हाथ नहीं, हम श्रीलंका के लोगों के साथ

श्रीलंका के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़ चुके हैं। अपने आधिकारिक इस्तीफे से पहले वो श्रीलंका से बाहर मालदीव पहुंच गये हैं। इस बीच कोलंबो में फिर से हिंसा शुरू हो गई है।

फिर भड़की हिंसा: गोटाबाया राजपक्षे के श्रीलंका से बाहर जाने के बाद एक बार फिर से देश में हिंसा देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि कोलंबो में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। दरअसल अपना त्यागपत्र सौंपे बिना राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए हैं। बुधवार को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंकाई पुलिस ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के कार्यालय के पास प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी है।

वहीं भारत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है जिसमें कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़ने में भारत ने मदद की है।

गोटाबाया राजपक्षे की मदद करने की खबरों पर भारतीय दूतावास ने साफ किया कि भारतीय उच्चायोग स्पष्ट रूप से निराधार और मीडिया रिपोर्टों का खंडन करता है कि भारत ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की हाल ही में श्रीलंका से बाहर जाने के दौरान सुविधा प्रदान की। बता दें कि भारतीय दूतावास ने कहा कि वो श्रीलंका की जनता के साथ हैं।

इस तरह की खबरों का खंडन करते हुए कोलंबो स्थित भारतीय दूतावास ने दो ट्वीट किये। एक में कहा कि वह श्रीलंका के लोगों के साथ है। वहीं दूसरे ट्वीट में कहा, “हम वहां कि जनता के साथ क्योंकि वे लोकतांत्रिक साधनों और मूल्यों, स्थापित लोकतांत्रिक संस्थानों और संवैधानिक ढांचे के जरिए से समृद्धि और प्रगति के लिए अपनी आकांक्षाओं को साकार करना चाहते हैं।

माले पहुंचे गोटाबाया राजपक्षे: बता दें कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे बुधवार तड़के देश से बाहर निकल गये। एक इमिग्रेशन अधिकारी के हवाले से एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति, उनकी पत्नी और दो अंगरक्षक श्रीलंकाई वायु सेना के विमान में सवार होकर मालदीव की राजधानी माले शहर के लिए रवाना हुए थे। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंकाई स्पीकर ने कहा है कि उन्हें अब तक राष्ट्रपति गोटाबाया का इस्तीफा नहीं मिला है, लेकिन उन्हें एक दिन में इस्तीफा मिलने की उम्मीद है।

बता दें कि श्रीलंका में आर्थिक संकट के चलते वहां लोगों का प्रदर्शन जारी है। श्रीलंका की जनता राजपक्षे शासन को देश में आर्थिक तबाही का ज़िम्मेदार मानती है। वहीं बीते दिनों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने पीएम रानिल विक्रमसिंघे के घर को जला दिया है।

वहीं अपने खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन को देखते हुए 73 साल के गोटाबाया राजपक्षे को भी देश छोड़ना पड़ा है। बुधवार को उनके परिवार सहित मालदीव की राजधानी माले पहुंचने की खबर है। बता दें कि राजपक्षे के देश छोड़ने के बाद ही श्रीलंका में दशकों से चला आ रहा एक परिवार के शासन का खात्मा हो गया है।



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Delhi-NCR Weather Update Today: दिल्ली-NCR में लगातार तीसरे दिन भी बारिश महाराष्ट्र में मौत का आंकड़ा 89 पहुंचा,भूस्खलन के बाद बद्रीनाथ हाईवे बंद

Weather Forecast News Update 13 July 2022: देश के लगभग सभी राज्यों में को मॉनसून हिट कर चुका है। देश की राजधानी दिल्ली में पीछले तीन दिनों से कभी हल्की तो कभी तेज बारिश हो रही है। एनसीआर में भी सुबह से हल्की बारिश हुई है। दिल्ली एनसीआर में जहां बारिश ने मौसम को सुहावना बनाया है वहीं महाराष्ट्र, गुजरात, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अमरनाथ में बारिश कहर बनकर टूटी है। महाराष्ट्र और गुजरात में तो हालात बद से बदतर हो गए हैं। पूरे देश में बारिश ने तबाही मचा रखी है कहीं ज्यादा तो कहीं नहीं हो रही बारिश ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बारिश की वजह से 6 बच्चों सहित 18 लोगों की मौत हो गई है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि आज दोपहर एक बजे तक मुंबई, कल्याण, ठाणे और नवी मुंबई में बहुत तेज बारिश होने की संभावना है, वहीं वसई में बारिश की वजह से एक की मौत हो गई है, जबकि पुणे में रेड अलर्ट जारी हो चुका है। उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से हुए भूस्खलन की वजह से बद्रीनाथ मार्ग बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश के मनाली में भारी बारिश के चलते बस स्टैंड ही बह गया। इसके पहले मंगलवार को भारी बारिश के चलते गुजरात में कई जगहों पर रेलवे ट्रैक तक बह गए थे। जिसकी वजह से वहां ट्रेनों का संचालन भी बंद हो गया था। गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में राहत एवं बचाव दल के जवान भी तैनात किए गए थे। गुजरात में बारिश इतनी ज्यादा हुई कि राजकोट के सरकारी अस्पताल में पानी घुस गया था।

महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटे में बारिश से 5 की मौत
महाराष्ट्र में कई जिलों में बारिश और जलभराव की वजह से पिछले 24 घंटों में 5 मौते हुईं इसके साथ ही महाराष्ट्र में बारिश से मरने वालों की संख्या बढ़कर 89 हो गई। मुंबई और आस-पास के इलाकों में मंगलवार से हो रही बारिश की वजह से सड़कों पर पानी भर गया है। मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल का परिचालन प्रभावित हो गया है। सड़कों पर पानी भरने की वजह से गड्ढों में पानी भर गया है जिसकी वजह से रोड एक्सीडेंट के खतरे बढ़ गए हैं। वहीं बात गुजरात की करें तो वहां भी बारिश ने बुरा हाल कर रखा है। गुजरात के कई स्थानों पर राहत एवं बचाव दल और एनडीआरएफ की तैनाती भी की गई है। वहीं बात राजस्थान की करें तो वहां पर राज्य के कुछ ही हिस्सों में बारिश हुई है। पूरे राज्य में सबसे ज्यादा आठ सेंटीमीटर बारिश माउंट आबू और प्रतापगढ़ में हुई।

जानिए मध्य प्रदेश में बारिश का हाल, 3 छात्रों की मौत
मध्य प्रदेश के कई जिलों में मौसम के अलग-अलग रूप देखने को मिले हैं। जहां कुछ जिलों में भारी बारिश हुई है तो वहीं कुछ जिलों में अभी भी लोगों को बारिश का इंतजार है। मध्य प्रदेश में आकाशीय बिजली गिरने से 3 स्कूली छात्रों की मौत हो गई है। ये घटना आगर मालवा जिले के सोयतखुर्द की है जहां चार अन्य गंभीर रूप से झुलस गये हैं। वहीं भारी बारिश की वजह से पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।

जानिए उत्तर प्रदेश के मौसम का हाल
उत्तर प्रदेश में भी बारिश का हाल कुछ-कुछ मध्य प्रदेश जैसा ही है यहां भी कुछ जिलों में बारिश तो कुछ जिलों में सूखा दिखाई दे रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मंगलवार को जमकर पानी बरसा जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली। वहीं दूसरी तरफ बुंदेलखंड, अवध और पूर्वांचल क्षेत्रों में बारिश नहीं होने की वजह से किसानों की फसलों पर प्रभाव पड़ रहा है। किसान बारिश नहीं होने की वजह से अपनी खरीफ की फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। मौसम विभाग ने बताया,’फिलहाल उत्तर प्रदेश में अभी एक सप्ताह तक मॉनसूनी बारिश के आसार नहीं नजर आ रहे हैं।

गुजरात में स्टेट इमरजेंसी के हालात
गुजरात पिछले दो- तीन दिनों से जमकर बारिश हो रही है पिछले 24 घंटे के दौरान बारिश की वजह से 6 लोगों की मौत हो गई। जी न्यूज के मुताबिक राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री राजेंद्र त्रिवेदी ने बताया कि गुजरात में बाढ़ प्रभावित इलाकों से कुल 27,896 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें से 18,225 अब भी शरणार्थी कैंप में हैं और बाकी अपने घरों को लौट गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक दक्षिण गुजरात के कई जिलों में भारी बारिश जारी है जबकि सौराष्ट्र क्षेत्र के कच्छ तथा राजकोट के कुछ इलाकों में सोमावार की रात से ही भारी बारिश जारी है। ‘स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर’ (SEOC) के मुताबिक कच्छ के अंजार तालुका में मंगलवार सुबह छह बजे से छह घंटे में 167 मिमी बारिश हुई है



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जनसंख्या पर डिबेट के दौरान बोले अनुराग भदौरिया, भाजपा वाले रम में राम बोलते हैं, व्हिस्की में विष्णु बोलते हैं  

हिंदू और मुसलमानों की आबादी को लेकर बहस अक्सर होती रहती है। देश में सांप्रदायिक सद्भाव कायम होने के लिए सभी मजहब के लोगों को साथ-साथ रहने का अधिकार दिया गया है। आए दिन इसको लेकर संविधान की बातें भी कही जाती हैं। इस बीच यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि कई शहरों और राज्यों में हिंदुओं की आबादी तेजी से घट रही है और मुसलमानों की आबादी में इजाफा हो रहा है। इसको लेकर टीवी चैनलों पर भी बहस हो रही है।

न्यूज-18 इंडिया में एंकर अमन चोपड़ा के साथ डिबेट में भाजपा के अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि “केंद्र में सरकार बनाने के लिए 30 फीसदी वोट की जरूरत होती है। और अगर आपने सरकार बना लिया तो संविधान बदलने में भी देर नहीं होती है। कभी पाकिस्तान और बांग्लादेश भी सेक्युलर देश थे। बाद में वहां संविधान बदल दिया गया। 1805 में अफगानिस्तान में प्रधानमंत्री पंडित नंदराम टिक्कू थे, जो कश्मीरी पंडित थे। 1860 में वहा शरिया लागू हो गया था।”

उन्होंने कहा कि “पिछले 75 सालों में राम जी, सीता जी, हनुमान जी, कृष्ण जी विष्णु जी, शंकर जी समेत बाकी हमारे देवी देवताओं का बहुत अपमान हुआ। किसी का गला नहीं काटा गया। और यहां पर स्टेटस लगाने पर आई सपोर्ट कहने पर गला काटा गया।” उनकी बात बीच में ही काटकर समाजवादी पार्टी के अनुराग भदौरिया ने कहा-“भाजपा वाले रम में राम बोलते हैं, व्हिस्की में विष्णु बोलते हैं। देवी देवताओं का अपमान भाजपा वाले करते हैं।”

भाजपा के अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि “भारत के नौ राज्यों में हिंदू पहले ही अल्पसंख्यक हो चुका है। आप डिस्ट्रिक्ट वाइज काउंट करिए तो दो सौ जिलों में पलायन हो रहा है। लद्दाख में हिंदू 1 परसेंट बचा हुआ है, लक्षद्वीप में हिंदू 2 फीसदी बचा हुआ है, कश्मीर में हिंदू 2 परसेंट बचा हुआ है। मिजोरम में हिंदू 2 परसेंट बचा हुआ है। बंगाल के 14 जिलों में हिंदू पलायन कर रहा है। असम के 9 जिलों से हिंदू पलायन कर रहा था, अभी वहां आबादी पचास फीसदी से नीचे आ गई। बिहार के छह जिलों में क्या स्थिति है, यूपी के 18 जिलों में हिंदू बिल्कुल कम हो चुका है।”

कहा कि “जहां-जहां हिंदू घटा है वहां अराजकता का माहौल है। जहां हिंदू कम होता है वहां इलेक्शन कमीशन उसको संवेदनशील क्षेत्र मानता है। जहां हिंदू घटा है वहां नियम कानून नहीं चलता है। वहां सर्वधर्म समभाव, वसुधैव कुटुंबकम, सबका साथ, सबका विकास और नारी दू नारायणी है नहीं चलता है।”



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नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ और सारनाथ में बने शेर के मुंह में क्या है फर्क, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और इतिहासकार ओमजी ने बताया

नए संसद भवन पर स्थापित अशोक स्तंभ के स्वरूप को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि अशोक स्तंभ पर मौजूद शांत सौम्य शेरों की जगह संसद भवन पर आक्रोश वाले शेर की प्रतिमा लगाई गई है। हालांकि इसको लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक ट्वीट में कहा कि दोनों प्रतीकों में कोई अंतर नहीं है।

बता दें कि मोदी सरकार में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर आकार को छोड़ दें तो दोनों में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक के आकार को बढ़ा दिया जाए या फिर नए संसद भवन पर बने प्रतीक को छोटा कर दिया जाए, तो दोनों में कोई अंतर नहीं होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दोनों आकृतियों में कोई अंतर नहीं है, चूंकि सारनाथ की आकृति बहुत छोटी और संसद के ऊपर लगी आकृति बड़ी है। इसलिए दोनों में अंतर नजर आ रहा है। बता दें कि हरदीप सिंह पुरी ने अपने ट्वीट में सारनाथ और संसद भवन के ऊपर बने राष्ट्रीय प्रतीक की फोटो शेयर की है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सारनाथ प्रतीक को नीचे से देखता है, तो उसे शेर की आकृति शांत या क्रोधित दिखाई देगी। वहीं आकृति के आकार को लेकर उन्होंने कहा कि अगर मूल प्रतीक की वास्तविक प्रतिकृति संसद की नई इमारत पर लगाई जाती तो इसे दूर से देख पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि ‘विशेषज्ञों’ को यह भी पता होना चाहिए कि सारनाथ में रखा गया मूल प्रतीक जमीन पर है जबकि नया प्रतीक जमीन से 33 मीटर की ऊंचाई पर है।

वहीं इंडिया टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए इतिहासकार डॉ ओमजी उपाध्याय ने कहा, “सारनाथ और संसद पर लगे राष्ट्रीय प्रतीक में समानताएं हैं।” उन्होंने कहा कि कोई राजनीतिक दल किसी राष्ट्रीय प्रतीक से छेड़छाड़ करने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। इतिहासकार ने कहा कि मूर्तियों से छेड़छाड़ की बात एकदम निराधार है।

उन्होंने कहा कि एक पत्थर पर बनी आकृति को जब आप मेटल पर उकेरते हैं तो इसमें कलात्मक अभिव्यक्ति का ही अंतर होगा, बाकी कोई छेड़छाड़ होना मुश्किल है और न ही कोई राजनीतिक दल ऐसा करने की सोचेगा। ओमजी उपाध्याय ने कहा कि भारत अपने कलात्मक कौशल के काफी प्रसिद्ध है। ऐसे में आकृति बनाने में गड़बड़ी हुई है, कहना गलत होगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को दिल्ली में नए संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था। इस दौरान आयोजित समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश मौजूद थे।

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संसद के नए भवन के शीर्ष पर स्थापित राष्ट्रीय चिन्ह का माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने लोकार्पण किया। नया संसद भवन जहां नए भारत की आकांक्षाओं को पूरा करेगा वहीं यह राष्ट्रीय चिन्ह हमें भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने को प्रेरित करता रहेगा। कांस्य से बने इस राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह की ऊंचाई 21 फीट, वजन 9500 किलो तथा व्यास 3.3 से 4.3 मीटर है। हमारा प्रयास है कि संसद के नए भवन का निर्माण कार्य भी अतिशीघ्र पूर्ण कर इसे देश की जनता के समर्पित करें।
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– Om Birla (@ombirlakota) 11 July 2022


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PM Cares Fund: पीएमओ से आया महज एक पन्ने का जवाब देख जज हैरान, कहा- इतने अहम मुद्दे को एक पेज में निपटा दिया?

पीएम केयर्स फंड की पारदर्शिता को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक याचिका पर पीएमओ द्वारा दिए एक पेज के जवाब पर अदालत ने नाराजगी जताई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पीएम केयर्स के कानूनी ढांचे से जुड़े सवाल को “महत्वपूर्ण” बताया। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से दिये गये एक पेज के जवाब पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आपत्ति जताई।

मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा, “आपने मामले में जवाब दाखिल किया है। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर सिर्फ एक पेज? यह केवल एक पृष्ठ का उत्तर है। एक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव (अवर सचिव, प्रधान मंत्री कार्यालय) का हलफनामा है यह। इससे आगे कुछ नहीं? इतना महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसपर सिर्फ एक पेज का जवाब है। इसपर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की जानी चाहिए थी।”

अदालत ने क्या कहा: अदालत ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “आप उचित तरीके से जवाब दाखिल करें। यह मामला इतना आसान नहीं है। हमें इसपर विस्तृत जवाब चाहिए। क्योंकि यह मामला शीर्ष अदालत में भी जाएगा। हमें उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर एक आदेश पारित करना होगा।”

4 सप्ताह का दिया समय: अदालत ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर इस मामले में “विस्तृत जवाब” दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले को 16 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया है।

याचिका में की गई मांग: पीएम केयर्स फंड को लेकर याचिकाकर्ता सम्यक गंगवाल ने वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान के जरिए मांग की है कि इस फंड को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत सरकार की संस्था घोषित किया जाये। इसके अलावा फंड की समय-समय पर पीएम केयर्स वेबसाइट पर आडिट रिपोर्ट को भी जारी किया जाये।

इससे पहले इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय के एक अवर सचिव की तरफ से एक हलफनामा दायर किया गया था। जिसमें बताया गया था कि पीएम केयर्स ट्रस्ट में अपने कार्यो का निर्वहन कर रहे हैं। इसमें पारदर्शिता है और फंड का आडिट एक लेखा परीक्षक द्वारा किया जाता है।



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बिना त्यागपत्र दिए देश छोड़ मालदीव भागे श्रीलंका के राष्‍ट्रपति राजपक्षे, भारत बोला- इसमें हमारा कोई हाथ नहीं, हम श्रीलंका के लोगों के साथ

श्रीलंका के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़ चुके हैं। अपने आधिकारिक इस्तीफे से पहले वो श्रीलंका से बाहर मालदीव पहुंच गये हैं। इस बीच कोलंबो में फिर से हिंसा शुरू हो गई है।

फिर भड़की हिंसा: गोटाबाया राजपक्षे के श्रीलंका से बाहर जाने के बाद एक बार फिर से देश में हिंसा देखने को मिल रही है। गौरतलब है कि कोलंबो में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। दरअसल अपना त्यागपत्र सौंपे बिना राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए हैं। बुधवार को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंकाई पुलिस ने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के कार्यालय के पास प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस छोड़ी है।

वहीं भारत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया है जिसमें कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़ने में भारत ने मदद की है।

गोटाबाया राजपक्षे की मदद करने की खबरों पर भारतीय दूतावास ने साफ किया कि भारतीय उच्चायोग स्पष्ट रूप से निराधार और मीडिया रिपोर्टों का खंडन करता है कि भारत ने श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की हाल ही में श्रीलंका से बाहर जाने के दौरान सुविधा प्रदान की। बता दें कि भारतीय दूतावास ने कहा कि वो श्रीलंका की जनता के साथ हैं।

इस तरह की खबरों का खंडन करते हुए कोलंबो स्थित भारतीय दूतावास ने दो ट्वीट किये। एक में कहा कि वह श्रीलंका के लोगों के साथ है। वहीं दूसरे ट्वीट में कहा, “हम वहां कि जनता के साथ क्योंकि वे लोकतांत्रिक साधनों और मूल्यों, स्थापित लोकतांत्रिक संस्थानों और संवैधानिक ढांचे के जरिए से समृद्धि और प्रगति के लिए अपनी आकांक्षाओं को साकार करना चाहते हैं।

माले पहुंचे गोटाबाया राजपक्षे: बता दें कि श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे बुधवार तड़के देश से बाहर निकल गये। एक इमिग्रेशन अधिकारी के हवाले से एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति, उनकी पत्नी और दो अंगरक्षक श्रीलंकाई वायु सेना के विमान में सवार होकर मालदीव की राजधानी माले शहर के लिए रवाना हुए थे। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंकाई स्पीकर ने कहा है कि उन्हें अब तक राष्ट्रपति गोटाबाया का इस्तीफा नहीं मिला है, लेकिन उन्हें एक दिन में इस्तीफा मिलने की उम्मीद है।

बता दें कि श्रीलंका में आर्थिक संकट के चलते वहां लोगों का प्रदर्शन जारी है। श्रीलंका की जनता राजपक्षे शासन को देश में आर्थिक तबाही का ज़िम्मेदार मानती है। वहीं बीते दिनों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया। उग्र प्रदर्शनकारियों ने पीएम रानिल विक्रमसिंघे के घर को जला दिया है।

वहीं अपने खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन को देखते हुए 73 साल के गोटाबाया राजपक्षे को भी देश छोड़ना पड़ा है। बुधवार को उनके परिवार सहित मालदीव की राजधानी माले पहुंचने की खबर है। बता दें कि राजपक्षे के देश छोड़ने के बाद ही श्रीलंका में दशकों से चला आ रहा एक परिवार के शासन का खात्मा हो गया है।



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Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...