Tuesday, July 12, 2022

चिंताजनक : अनियोजित शहरीकरण के कारण बढ़ रहे हैं ‘शहरी बाढ़’ के मामले

गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना के कई शहर इन दिनों बाढ़ से जूझ रहे हैं। यह केवल प्रकृति ही नहीं है जो इन शहरों के प्रति निर्दयी है बल्कि मानवीय उपेक्षाओं के कारण ये शहर डूब रहे हैं। भारत के कई राज्य हमेशा बाढ़ की चपेट में रहे हैं। लेकिन करीब एक दशक से देश में शहरी बाढ़ की घटना तेजी से बढ़ी हैं।

कुछ ही घंटों में अधिक आबादी वाले शहरों में अचानक मूसलाधार बारिश और पानी की निकासी के पर्याप्त साधन न होने के कारण शहरी बाढ़ की स्थिति बन जाती है। इस स्थिति पर कई शोध हुए हैं जिन्होंने अनियोजित शहरीकरण, पानी की निकासी के अपर्याप्त साधन, जल निकासी चैनलों पर अतिक्रमण, निचले इलाकों पर अवैध कब्जा और लुप्त हो रहे जल निकायों कारण बताया है। 2005 में मुंबई में आई बाढ़ को पहली बार शहरी बाढ़ की सूची में रखा गया था।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के दो शिक्षको शम्शाद अहमद और शिराजुद्दीन अहमद के 2016 में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि ’शहरी बाढ़’ शहर में दैनिक जीवन की एक बड़ी बाधा है। इससे सड़कें अवरुद्ध हो जाती हैं और लोग काम पर व बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। इससे आर्थिक नुकसान काफी अधिक होता है लेकिन ’शहरी बाढ़’ से हताहतों की संख्या आमतौर पर सीमित रहती है।

शोध में बताया गया है कि कुछ दशकों में एशिया में तेजी से शहरीकरण बढ़ा है। अनुमान है कि भारत में 2025 तक आधी आबादी शहरों में रहने लगेगी। इसकी वजह से अनियोजित हरीकरण हो रहा है। नीति आयोग द्वारा भारत में शहरी नियोजन क्षमता पर एक रिपोर्ट के अनुसार, शहरी नियोजन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है और 7,933 शहरी बस्तियों में से 65 फीसद के पास कोई मास्टर प्लान नहीं है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान की ओर से किए गए एक अन्य शोध के मुताबिक अनियोजित शहरीकरण ने प्राकृतिक जलग्रहण या जल निकासी को काफी बदल दिया है। ड्रेनेज सिस्टम पानी की बढ़ी हुई मात्रा का सामना करने में असमर्थ हैं और ठोस कचरे भरे हुए ड्रेनेज सिस्टम की वजह से बाढ़ जैसे हालात का सामना करना पड़ता है।

दिल्ली, हैदराबाद और मुंबई जैसे शहर एक सदी पुरानी जल निकासी प्रणाली पर निर्भर हैं, जो मुख्य शहर के केवल एक छोटे से हिस्से के लिए पर्याप्त है न की पूरे शहर के लिए। 20 सालों में भारतीय शहरों ने अपने मूल निर्मित क्षेत्र से कई गुना वृद्धि की है। जैसे-जैसे शहर अपनी मूल सीमाओं से आगे बढ़ता गया, पर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के अभाव को दूर करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।

जल निकासी प्रणाली को दुरुस्त करने से हो सकता है बचाव

जामिया के शिक्षकों ने अपने शोध में शहरी बाढ़ का समाधान भी बताया है। वे लिखते हैं कि जिस प्रकार शहरों को बसाया गया है, उसके बाद इन शहरों को शहरी बाढ़ से बचाना बहुत आसान नहीं है। अगर सरकार लोगों का शहरी बाढ़ बचाना चाहती है तो उसे कुछ उपाय करने होंगे। इसका एक तरीका यह है कि बड़े टैंकों का निर्माण किया जाए, जहां बारिश का पानी जमा किया जा सके।

इसके अलावा वर्षा जल संचयन के लिए जगह-जगह पर जमीन में छेद किए जाएं। इससे जमीन की रिसाव क्षमता में वृद्धि होगी। जल को अवशोषित करने या जल जमाव में कमी लाने के लिए शहर की क्षमता में सुधार करने हेतु छिद्रयुक्त निर्माण सामग्री और प्रौद्योगिकियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।इसके अलावा हर शहर के लिए एक समग्र जल निकासी प्रणाली बनाई जानी चाहिए जो शहरी बाढ़ से होने वाली कई लोगों की जान, आर्थिक नुकसान और असुविधा को बचाएगी। शहरी बाढ़ की बड़ी घटनाएं 2020 में हैदराबाद, 2001 व 2020 में अहमदाबाद, 2002, 2003, 2009 व 2010 में दिल्ली, 2004 व 2015 में चेन्नई, 2005 में मुंबई, 2006 में सूरत, 2007 में कोलकाता और 2014 में श्रीनगर में बाढ़ आई।



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गांधी जी की तस्वीर नोट पर कैसे आई- शिवम त्यागी ने सवाल पूछ कांग्रेस प्रवक्ता को घेरा, भड़के आलोक शर्मा ने दिया ये जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (11 जुलाई, 2022) को नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ का अनावरण किया। स्तंभ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कुछ विपक्षी दलों का आरोप है कि संसद भवन की नई बिल्डिंग सेंट्रल विस्टा पर लगे अशोक स्तंभ में बदलाव किए गए हैं। इसी मुद्दे पर चल रही एक टीवी डिबेट में पैनलिस्ट शिवम त्यागी और कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा के बीच में बहस छिड़ गई।

टीवी डिबेट में राजनीतिक विशलेषक शिवम त्यागी ने सवाल किया कि नोट पर गांधी जी की तस्वीर कैसे आई? इस सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता आलोक शर्मा भड़क गए और काफी देर तक दोनों के बीच बहस होने लगी।

आलोक शर्मा ने जवाब में कहा, “मोदी जी के आने के बाद 100 सिक्के बदले गए तो किसी ने कुछ कहा क्या? 200 का नोट आया किसने निर्णय लिया था? नोट की तुलना आप प्रतीक चिन्ह से नहीं कर सकते। अगर आप राजनीतिक विशलेषक हैं तो प्रतीक चिन्ह की तुलना किसी नोट से मत कीजिए।”

बता दें कि विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि हमारे राष्ट्रीय चिन्ह में जो शेर हैं, वो शांत हैं और उनका मुंह बंद है। वहीं, नए संसद भवन में लगे अशोक स्तंभ का शेर आक्रामक है और उसका मुंह खुला हुआ है।

वहीं, विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री द्वारा अशोक स्तंभ का अनावरण किए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन बताया है। उधर, कांग्रेस को इस बात की नाराजगी है कि दूसरी पार्टियों को इस कार्यक्रम में क्यों नहीं न्योता दिया गया। उनका तर्क है कि जब संसद सारी पार्टियों का है, तो संसद से जुड़े कार्यक्रमों में दूसकी पार्टियों को भी बुलाया जाना चाहिए था।

वहीं, सरकार का कहना है कि संसद भवन में जो अशोक स्तंभ रखा गया है, वो पूरी तरह से सारनाथ वाले मॉडल से ही प्रेरित है। उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।



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Tuna Fish Export Scam: लक्षद्वीप के सांसद के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस, दिल्ली-कालीकट में रेड जारी

टूना फिश एक्सपोर्ट स्कैम केस में लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने एनसीपी सांसद के भतीजे और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों में मामला दर्ज किया है। इस मामले को लेकर दिल्ली, कालीकट और लक्षद्वीप में 6 जगहों पर रेड भी जारी है।

अधिकारियों ने कहा कि राकांपा सांसद के भतीजे अब्दुल रजाक और कोलंबो की एक कंपनी एसआरटी जनरल मर्चेंट्स को भी प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है। घोटाले में यह बात सामने आई है कि कुछ जन प्रतिनिधियों और लोक सेवकों ने टूना मछली के निर्यात की सुविधा के लिए एक-दूसरे के साथ मिलीभगत की, जिसका औसत अंतरराष्ट्रीय मूल्य 400 रुपये प्रति किलोग्राम था।

अधिकारियों ने कहा कि मछली लक्षद्वीप सहकारी विपणन संघ (एलसीएमएफ) के माध्यम से स्थानीय मछुआरों से खरीदी गई थी और एसआरटी जनरल मर्चेंट्स को निर्यात की गई थी। यह आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा एलसीएमएफ को कोई भुगतान नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप महासंघ और स्थानीय मछुआरों को भारी राजस्व की हानि हुई।

इससे पहले ये जानकारी सामने आई थी कि सीबीआई और लक्षद्वीप प्रशासन के सतर्कता अधिकारियों ने कई विभागों में ‘संयुक्त औचक निरीक्षण’ किया था। इन विभागों में लक्षद्वीप सहकारी विपणन संघ (एलसीएमएफ), मत्स्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, खादी बोर्ड और सहकारी समिति और पशुपालन विभाग शामिल हैं। जिसके बाद इस घोटाले की सच्चाई सामने आई थी।

इस औचक निरीक्षण के दौरान सीबीआई के अधिकारियों ने घोटाले से संंबंधित कागजात भी जब्त किए थे, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की गई। इस मामले में जांच के बाद पता चला कि निर्यात प्रकिया में कानून का जमकर उल्लघंन किया गया था।

इस मामले के सामने आने के बाद इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सांसद फैजल ने कहा था- “मुझे नहीं पता, वास्तव में (सीबीआई जांच के बारे में) … मछली एसआरटी को बेची गई थी क्योंकि खरीदारों ने बहुत अच्छी कीमत की पेशकश की थी … (सहकारी विपणन) महासंघ ने लंका में एक खरीदार की पहचान की थी, लेकिन बाद में थूथुकुडी बिचौलियों के कुछ हस्तक्षेप के कारण खरीदार पीछे हट गया। नतीजतन, 250 मीट्रिक टन मछली को महासंघ के पास छोड़ दिया गया था। फिर, एक स्थानीय नीलामी हुई और थूथुकुडी बिचौलियों ने इसे खरीद लिया। इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं है। उन्हें इसकी जांच करने दें, सच्चाई सामने आ जाएगी।”



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National Emblem Unveiling Row: नीचे से देखने पर शेर क्रोधित दिखता है- विपक्ष के आरोपों के बीच मूर्तिकार ने किया ये दावा, जानिए क्या है पूरा विवाद

पीएम नरेंद्र मोदी ने निर्माणाधीन नए संसद भवन के ऊपरी तल पर भारत के राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तम्भ का अनावरण किया। यह स्तंभ देश की पहचान है लेकिन अब इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि राष्ट्रीय चिन्ह अशोक स्तंभ को बदल दिया गया है।

हालांकि इसे बनाने वाले मूर्तिकार सुनील देओरे का कहना है कि इसमें कोई बदलाव नहीं है। अशोक स्तंभ बनाने में उन्हें 9 महीने के करीब लगे। देओरे का कहना है कि सरकार से कोई सीधा कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला था। हमने किसी के कहने पर कोई बदलाव नहीं किया है। सारनाथ में मौजूद स्तंभ का ही ये कॉपी है। सुनील देवरे ने कहा कि ये अशोक स्तंभ बनाने के लिए उन्हें सरकार या बीजेपी से कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला। उनका करार टाटा के साथ हुआ था। उन्हीं को सुनील द्वारा अशोक स्तंभ का मॉडल दिखाया गया था।

लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी ने ट्वीट किया कि मूल कृति के चेहरे पर सौम्‍यता का भाव है जबकि नई मूर्ति में आदमखोर प्रवृत्ति दिखाई देती है। तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा और जवाहर सिरकार ने पुराने अशोक स्तंभ के फोटो को ट्वीट किया, वहीं आप सांसद संजय सिंह ने ट्वीट किया कि मैं 130 करोड़ भारतवासियों से पूछना चाहता हूं कि राष्ट्रीय चिन्ह बदलने वालों को राष्ट्र विरोधी बोलना चाहिए कि नहीं बोलना चाहिए।

कांग्रेस ने कहा कि नए संसद भवन में लगे राष्ट्रीय प्रतीक के अनावरण के मौके पर विपक्ष को नहीं बुलाया जाना अलोकतांत्रिक है। इस पर सत्यमेव जयते न लिखा होना भी बड़ी गलती है। इसे अभी भी ठीक किया जा सकता है।

असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर कहा है कि संविधान संसद, सरकार और न्यायपालिका का की शक्तियों को अलग करता है। सरकार के प्रमुख के रूप में पीएम को नए संसद भवन के ऊपर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण नहीं करना चाहिए था। लोकसभा के अध्यक्ष लोकसभा का प्रतिनिधित्व करते हैं। जो सरकार के अधीन नहीं हैं। पीएमओ द्वारा संवैधानिक मानदंडों का उल्लंघन किया है।

भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि मूर्ति के डिजाइन से लेकर फंड और कंस्ट्रक्शन सुपरविजन तक का सारा काम शहरी विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भवन को संसद प्रशासन को सौंप दिया जाएगा। बलूनी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्षी दल निराधार आरोपों लगा रहे हैं। उनके मकसद का पता चल रहा है।

अशोक ने क्यों बनवाया था स्तंभ

कलिंग युद्ध में हुए रक्तपात को देखकर सम्राट अशोक का मोहभंग कर दिया। इस युद्ध के बाद हुए हृदय परिवर्तन के कारण अशोक ने जीवन में कभी युद्ध न करने का संकल्प ले लिया। फिर वो धर्म परिवर्तन करके बौद्ध धर्म की शरण में चले गए। अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए अशोक ने बाकी का जीवन शिक्षा और धर्म प्रचार में लगा दिया। सम्राट अशोक ने धम्म की नीति अपनाने के बाद कई स्तंभों का निर्माण करवाया था।

भारत के राजकीय प्रतिक अशोक स्तंभ को भारत सरकार ने 26 जनवरी, 1950 को अपनाया था। मूल स्तंभ सारनाथ स्थित संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। अशोक के सिंह स्तंभ में शीर्ष पर चार सिंह हैं लेकिन सामने से केवल तीन सिंह दिखाई पड़ते हैं। मूल स्तंभ चुनार के बलुआ पत्थर को काटकर बना है। सिंहों के नीचे एक हाथी, एक घोड़ा, एक सांड तथा एक सिंह की उभरी हुई मूर्तियां हैं। इसके बीच-बीच में चक्र बने हुए हैं।



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Tuna Fish Export Scam: लक्षद्वीप के सांसद के खिलाफ CBI ने दर्ज किया केस, दिल्ली-कालीकट में रेड जारी

टूना फिश एक्सपोर्ट स्कैम केस में लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने एनसीपी सांसद के भतीजे और अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों में मामला दर्ज किया है। इस मामले को लेकर दिल्ली, कालीकट और लक्षद्वीप में 6 जगहों पर रेड भी जारी है।

अधिकारियों ने कहा कि राकांपा सांसद के भतीजे अब्दुल रजाक और कोलंबो की एक कंपनी एसआरटी जनरल मर्चेंट्स को भी प्राथमिकी में आरोपी बनाया गया है। घोटाले में यह बात सामने आई है कि कुछ जन प्रतिनिधियों और लोक सेवकों ने टूना मछली के निर्यात की सुविधा के लिए एक-दूसरे के साथ मिलीभगत की, जिसका औसत अंतरराष्ट्रीय मूल्य 400 रुपये प्रति किलोग्राम था।

अधिकारियों ने कहा कि मछली लक्षद्वीप सहकारी विपणन संघ (एलसीएमएफ) के माध्यम से स्थानीय मछुआरों से खरीदी गई थी और एसआरटी जनरल मर्चेंट्स को निर्यात की गई थी। यह आरोप लगाया गया है कि कंपनी द्वारा एलसीएमएफ को कोई भुगतान नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप महासंघ और स्थानीय मछुआरों को भारी राजस्व की हानि हुई।

इससे पहले ये जानकारी सामने आई थी कि सीबीआई और लक्षद्वीप प्रशासन के सतर्कता अधिकारियों ने कई विभागों में ‘संयुक्त औचक निरीक्षण’ किया था। इन विभागों में लक्षद्वीप सहकारी विपणन संघ (एलसीएमएफ), मत्स्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, खादी बोर्ड और सहकारी समिति और पशुपालन विभाग शामिल हैं। जिसके बाद इस घोटाले की सच्चाई सामने आई थी।

इस औचक निरीक्षण के दौरान सीबीआई के अधिकारियों ने घोटाले से संंबंधित कागजात भी जब्त किए थे, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की गई। इस मामले में जांच के बाद पता चला कि निर्यात प्रकिया में कानून का जमकर उल्लघंन किया गया था।

इस मामले के सामने आने के बाद इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए सांसद फैजल ने कहा था- “मुझे नहीं पता, वास्तव में (सीबीआई जांच के बारे में) … मछली एसआरटी को बेची गई थी क्योंकि खरीदारों ने बहुत अच्छी कीमत की पेशकश की थी … (सहकारी विपणन) महासंघ ने लंका में एक खरीदार की पहचान की थी, लेकिन बाद में थूथुकुडी बिचौलियों के कुछ हस्तक्षेप के कारण खरीदार पीछे हट गया। नतीजतन, 250 मीट्रिक टन मछली को महासंघ के पास छोड़ दिया गया था। फिर, एक स्थानीय नीलामी हुई और थूथुकुडी बिचौलियों ने इसे खरीद लिया। इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं है। उन्हें इसकी जांच करने दें, सच्चाई सामने आ जाएगी।”



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Monday, July 11, 2022

नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी को फिर भेजा गया समन, अब 21 जुलाई को पूछताछ करेगी ईडी

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को फिर से समन भेजा गया है। अब उनसे इस मामले में 21 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ करेगा। बता दें कि राहुल गांधी से पहले ही ईडी पूछताछ कर चुकी है, जिसे लेकर पिछले दिनों कांग्रेस के बड़े-बड़े नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक ने विरोध प्रदर्शन किया था।

बता दें कि इससे पहले सोनिया गांधी से 8 जून को पूछताछ होनी थी, लेकिन कोरोना संक्रमित हो जाने की वजह से उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा था। इसके लिए उन्होंने ईडी से 4 हफ्ते का समय लिया था।

कांग्रेस नेता को 1 जून की शाम को हल्का बुखार हुआ था, जिसके बाद टेस्ट में पता चला कि वह कोरोना पॉजिटिव हैं। ईडी ने 1 जून को सोनिया गांधी को नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पहली बार 8 जून को अपने जांचकर्ताओं के सामने पेश होने के लिए तलब किया था। ईडी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बयान दर्ज करना चाहती है।

प्रदर्शन निदेशालय जानना चाहता है कि नेशलन हेराल्ड मामले में क्या-क्या गड़बड़ियां हुईं और उसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है। गौरतलब है कि यह मामला बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी सामने लेकर आए था जिन्होंने गांधी परिवार पर पार्टी के धन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र जवाहरलाल नेहरू और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने साल 1938 में स्थापित किया था।

इसे मूल रूप से एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया गया था। साल 2008 में इसे चलाया नहीं जा सका और फिर यह बंद हो गया था। इसके बाद 2010 में नेशनल हेराल्ड को यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएल) ने टेक ओवर कर लिया था। इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के 38-38 फीसद शेयर हैं।

सुब्रमण्यम स्वामी ने साल 2012 में कांग्रेस नेताओं पर वाईआईएल (YIL) द्वारा एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) के अधिग्रहण में धोखाधड़ी और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल, आयकर अधिनियम के तहत कोई भी राजनीतिक संगठन किसी तीसरे पक्ष के साथ वित्तीय लेनदेन नहीं कर सकती है।



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Aarey Protest: बुरे फंसे आदित्य ठाकरे, प्रदर्शन के दौरान शिवसेना नेता के साथ थे बच्चे; अब NCPCR ने दिया कार्रवाई का आदेश

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने आरे वन बचाओ अभियान में बच्चों का इस्तेमाल करने के लिए शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। एनसीपीसीआर बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली शीर्ष संस्था है। आयोग ने मुंबई पुलिस को एक नोटिस भेजा है।

एनसीपीसीआर ने अपने नोटिस में कहा है कि उसे एक शिकायत मिली है जिसमें कहा गया है कि मुंबई जिला फुटबाल संघ के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने शिव सेना के युवा प्रकोष्ठ युवा सेना में आरे बचाओ प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल किया। संस्था ने ट्विटर का एक लिंक भी साझा किया जिसमें प्रदर्शन के दौरान बच्चे हाथ में तख्तियां लिए खड़े हैं।

आयोग ने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए आयोग आरोपी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करके मामले की जांच करने का अनुरोध करता है। इसमें कहा गया है कि पत्र के प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए। आयोग के तेवरों से साफ है कि वो ठाकरे परिवार को छोड़ने के मूड़ में नहीं है। पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने को कहना इसी बात को दिखाता है।

गौरतलब है कि मुंबई में आरे कारशेड के फैसले पर सियासी घमासान जारी है। सीएम एकनाथ शिंदे ने महा विकास अघाड़ी सरकार के फैसले को पलट दिया था। इसके बाद से आरे कारशेड पर संग्राम शुरू हो गया है। विरोध प्रदर्शन में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे भी शामिल हुए हैं। उन्होंने एकनाथ शिंदे पर हमला बोलते हुए कहा कि हमारा गुस्सा मुंबई पर न निकालें।

मुंबई के गोरगांव के आरे में बन रहे मेट्रो कारशेड का विवाद पुराना है। आरे में रह रहे लोग मेट्रो कारशेड यहां से हटाने के लिए विरोध कर रहे थे। उद्धव ठाकरे ने इसपर रोक लगाई थी। लेकिन शिंदे ने भाजपा के साथ सरकार बनाई और सीएम बने। उन्होंने सीएम बनते ही उद्धव सरकार के फैसले को पलट दिया। उद्धव ठाकरे गुट ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाकर लड़ाई शुरू कर दी है। आदित्य प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं।

उधर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मप्र के 8 साल के बच्चे का जिक्र करके आयोग को नसीहत दी है। जेजेए में किए गए संशोधनों का हवाला देकर भी उन्होंने सवाल दागे हैं।



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Rajasthan: वसुंधरा की सरकार जो कुछ कर सकती थी की- पायलट ने दिलाई याद कैसे मिली 2018 में जीत, बताई आगे की रणनीति

राजस्थान के विधानसभा चुनाव में अभी करीब डेढ़ साल बाकी है, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस फिर से 2013 जैसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहती है। पार्टी अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करने के मूड़ में है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट से राजस्थान को लेकर लंबी चर्चा की।

सचिन पायलट का कहना है कि सोनिया गांधी को संगठन चुनाव, राजस्थान के राजनीतिक हालात पर फीडबैक दिया गया। हालांकि पिछले दो दशक से अधिक समय राजस्थान में सरकार रिपीट नहीं हो रही है। लेकिन इस मिथक को तोडऩे के लिए सारे नेता संगठित होकर चुनाव मैदान में उतरेंगे। पायलट ने कहा कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसको निभाने के लिए वह तैयार है। पहले भी जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसे निभाया है। उनका कहना था कि जिसे जो कहना है कहे वो अपना काम कर रहे हैं।

सचिन का कहना था कि 2013 में शर्मनाक हार के बाद उन्होंने सड़क पर उतरकर संघर्ष किया। वसुंधरा सरकार ने उनका हौसला तोड़ने के लिए लाठियां तक चलवाईं। कांग्रेस के लोगों की खूब रगड़ाई हुई। लेकिन फिर से पार्टी सत्ता में लौटी। पिछले पांच साल के दौरान तकरीबन हर चुनाव कांग्रेस ने जीता है। अब इस जोश को अगले विधानसभा चुनाव तक बनाए रखना है। उनका कहना है कि कैसे भी हो कांग्रेस सरकार फिर से बनानी है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी चुनावों को देख राजस्थान में खासी सक्रिय हो रही है। सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले जैसे नेता वहां खासी रुचि ले रहे हैं। उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल की हत्या के मद्देनजर बने माहौल को लेकर इस बैठक को अहम माना जा रहा है।

हर पांच साल बदल जाती है सत्ता

1998 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 156 सीटें जीती थी, लेकिन 2003 में पार्टी महज 56 सीट पर सिमट गई थी। जबकि 2008 में कांग्रेस ने 96 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। पांच साल बाद 2013 में पार्टी 21 सीट पर सिमट गई थी। ऐसा फिर से न हो इसके लिए कांग्रेस डेढ़ साल पहले ही रणनीति में बदलाव कर सकती है। कांग्रेस परंपरागत रणनीति छोडकर नए क्लवेर में नजर आ सकती है। आलाकमान भी इसमें रुचि दिखा रहा है।



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शिवसेना में बगावत, एकनाथ शिंदे का सीएम बनना, फडणवीस को डिप्टी सीएम बनाना, महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे में 2024 के लिए बीजेपी ने दिए कौन से संकेत, जानें

उद्धव ठाकरे के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद जब बीजेपी आलाकमान ने एकनाथ शिंदे को महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया तो सभी हैरत में थे। यहां तक कि खुद पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस भी। तभी उन्होंने कहा कि वो इस सरकार का हिस्सा नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार में वो शामिल नहीं होने जा रहे। सरकार को मेरा बाहर से समर्थन रहेगा। लेकिन उसके तुरंत बाद वो डिप्टी सीएम बनने को तैयार हो गए। दरअसल इसके पीछे बीजेपी की एक रणनीति है।

बीजेपी 2024 को ध्यान में रखकर अपने पासे फेंक रही है। उसे पता है कि क्षेत्रीय दल कितने अहम हैं। एकनाथ शिंदे को सीएम की कुर्सी पर बिठाकर उसके साफ इशारा दिया कि वो छोटे सहयोगी दलों के लिए कुर्सी कुर्बान करने को तैयार है। इससे विपक्ष के उस आरोप की धार भी कुंद होगी जिसमें वो भाजपा को सत्तालोलुप बताता आ रहा है। शिंदे के सीएम बनने के बाद बीजेपी पर ये आरोप लगाना विपक्ष के लिए अब मुश्किल होगा।

हालांकि 2014 में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने के बाद मोदी-शाह की जोड़ी ने मिथकों को बदलने का काम किया। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को दरकिनार कर फडणवीस को सीएम बनाया गया। हरियाणा में जाटों को पीछे धकेलकर मनोहर लाल खट्टर को कुर्सी दे दी गई। जबकि झारखंड में रघुबर दास को सामने लाया गया। लेकिन ये फार्मूला कामयाब होता नहीं दिखा। हरियाणा में बीजेपी को सत्ता तक पहुंचने के लिए दुष्यंत चौटाला का हाथ थामना पड़ा तो झारखंड में सत्ता ही चली गई। महाराष्ट्र का हाल सामने है।

लिहाजा बीजेपी ने फिर से वर्चस्व वाले समुदायो को जोड़ने की रणनीति बनाई है। शिंदे मराठा हैं और भाजपा को पता है कि मराठा को दरकिनार कर सूबे की राजनीति में पैठ बनाना मुश्किल है। शिंदे को सीएम बनाने से शिवसेना की धार भी कुंद होगी, क्योंकि वो वहीं से निकले हैं। उद्धव ठाकरे को खत्म करने की सियासत शिंदे को आगे करके ही की जा सकती है। दूसरे सूबों को देखा जाए तो बीजेपी अब वर्चस्व वाले समुदायों के नेताओं पर भरोसा कर रही है। उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी और कर्नाटक में बसवराज बोम्मई को इसी रणनीति के तहत कुर्सी मिली।

सूबे के नेता मानते हैं कि अब फडणवीस का सीएम बनना बहुत मुश्किल है। वो मोदी के तो करीब हैं पर शाह की गुडबुक में नहीं आते। 2024 के बाद उन्हें नितिन गडकरी की जगह केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है। वो बीजेपी के साईड लाइन क्लब के वो नए मेंबर हैं। उन्हें संघ की नजदीकी हासिल है पर लगता नहीं कि सूबे के मुखिया के तौर पर वो फिर से उबर पाएंगे।



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राष्ट्रपति चुनाव: कभी एनडीए का साथ छोड़ गए चंद्रबाबू नायडू ने किया द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का ऐलान, यशवंत सिन्‍हा को लगा झटका

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए का संख्याबल और मजबूत हो गया है। एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने समर्थन करने का ऐलान किया है। टीडीपी प्रमुख और आन्ध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि उनकी पार्टी ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू को भारत की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में देखना अद्भुत होगा।

तेलुगु देशम पार्टी के लोकसभा में तीन सांसद और आन्ध्र प्रदेश विधानसभा में 23 विधायक हैं। इसके साथ ही राज्य के दो प्रमुख दलों ने द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी के लिए अपना समर्थन घोषित कर दिया है। चंद्रबाबू नायडू ने इससे पहले 2019 के आम चुनावों से पहले ही एनडीए छोड़ दिया था। पूर्व में एनडीए सरकार द्वारा राज्य के विभाजन (तेलंगाना बनाने के लिए) के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने पर उन्होंने मोदी विरोधी रुख अपनाया था।

चंद्रबाबू नायडू के ऐलान से विपक्ष और विपक्षी एकता को करारा झटका लगा है। आन्ध्र प्रदेश में अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दल वाईएसआर कांग्रेस और टीडीपी ने द्रौपदी मुर्मू को समर्थन करने का फैसला किया है। टीडीपी के वरिष्ठ नेता वाई रामकृष्णुडु ने कहा कि हमने उनका समर्थन करने का फैसला किया है क्योंकि वह नामांकित होने वाली पहली आदिवासी महिला हैं, कोई अन्य विचार नहीं है।

बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में ओपी राजभर की पार्टी सुभासपा, राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल और शिवपाल सिंह यादव ने भी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का फैसला किया है। अब लगभग द्रौपदी मुर्मू की जीत भी तय मानी जा रही है। यशवंत सिन्हा की विपक्ष की ओर से उम्मीदवारी का सबसे पहले समर्थन करने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि अगर बीजेपी उनसे मुर्मू के नाम पर विचार करती तो वह भी समर्थन कर सकती थीं।

राष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा भी देश के सभी राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों से अपने पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं।



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Sunday, July 10, 2022

हजारों मंदिरों को ध्वस्त कर दिए गजनी-गौरी ने, तब क्या नरेंद्र मोदी की विचारधारा थी- बोले BJP प्रवक्ता तो भदौरिया ने दिया जवाब- जिन्ना के मजार पर कौन गया

फिल्म डायरेक्टर लीना मणिमेकलई द्वारा मां काली का पोस्टर शेयर करने के बाद से देश में विवाद छिड़ा हुआ है। इस पोस्टर में मां काली को सिगरेट पीते दिखाया गया है, जिसको लेकर मणिमेकलई के खिलाफ लोगों में गुस्सा है और कई जगहों पर उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज की गई है। इस मुद्दे पर टीवी डिबेट्स में तीखी नोंकझोक देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे पर एक डिबेट के दौरान भाजपा और सपा नेता के बीच तीखी बहस देखने को मिली। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि इस देश में हजारों मंदिर ध्वस्त कर दिए गए। उन्होंने गजनी-गौरी का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या तब नरेंद्र मोदी की विचारधारा थी?

‘न्यूज18’ पर डिबेट के दौरान प्रेम शुक्ला ने कहा, “हिंदुओं का कत्लेआम किया गया, जनेऊ का वजन करके हिंदुओं का कत्ल किया जाता था तब क्या नरेंद्र मोदी की विचारधारा थी? 1947 में बंटवारा किस आधार पर किया? यही आधार था न मोहम्मद अली जिन्ना का कि हम शासक थे, शासन कर रहे थे तो शासित कैसे हो जाएंगे।”

भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने कहा, “आज भी उस विचारधारा का समर्थन करने के लिए कभी ओवैसी खड़े हो जाते हैं तो कभी आजम खान खड़े हो जाते हैं और आजम खान के साथ खड़ा कौन होता है लोग जानते हैं।” उनकी बातों पर सपा नेता अनुराग भदौरिया ने पूछा, “कौन जाता है जिन्ना की मजार पर?”

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सुबुही खान ने कहा, “जिस दिन इस देश का युवा अपने अंदर ये स्वाभिमान ले आया उस दिन इन लोगों की राजनीति खत्म हो जाएगी।” एक दर्शक ने पूछा कि मेरे भगवान को रोजगार से क्यों जोड़ा जा रहा है। इस सवाल का हवाला देते हुए एंकर ने सलमान निजामी से पूछा तो उन्होंने कहा, “इस देश में भाजपा के कई ऐसे नेता हैं जिन्होंने देवी-देवताओं का अपमान किया है।” उन्होंने नूपुर शर्मा का नाम लेते हुए कहा कि ऐसी बयानबाजी करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती है।



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2014 में 56.51 लाख करोड़ था भारत पर कर्ज, अब है 139 लाख करोड़- बोले सुरजेवाला; श्रीलंका की दिलाई याद

श्रीलंका की आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है और यह देश दिवालिया घोषित हो चुका है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी मुल्क में हालात इतने बुरे हो चुके हैं, कि महंगाई से परेशान जनता सड़कों पर उतर आई है और राष्ट्रपति भवन पर कब्जा कर लिया है। वहीं, राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे अपना आवास छोड़कर भाग गए हैं। श्रीलंका के ऊपर कई देशों के अलावा आईएमएफ का भी कर्ज है। श्रीलंका के इस कर्ज का जिक्र करती एक मीडिया रिपोर्ट को शेयर कर अब कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, “साल 2014, देश पर क़र्ज़= ₹56.51 लाख करोड़, साल 2022, देश पर क़र्ज़= ₹139 लाख करोड़। सोचिये, समझिये, जानिये, सवाल पूछिये, नहीं तो श्रीलंका जैसे हालात हो जाएंगे।” कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा शेयर की गई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 2021 में श्रीलंका में कर्ज जीडीपी का 119 फीसदी हो गया था। जबकि 2019 में यह 94 फीसदी था।

वहीं, इसमें आगे कहा है कि यह भारत के लिए भी चिंता का विषय है क्योंकि पिछले 8 सालों में केंद्र सरकार की देनदारियों में ढाई गुना इजाफा हुआ है जबकि कई राज्यों की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। इसमें आगे कहा गया है कि आईएमएफ के डेटा के मुताबिक, भारत में कर्ज जीडीपी का 90.6 फीसदी तक पहुंच गया है। इस रिपोर्ट को शेयर करते हुए कांग्रेस नेता ने सरकार पर निशाना साधा है।

वहीं, कांग्रेस नेता के ट्वीट पर सीतामढ़ी के बथनाहा के विधायक अनिल कुमार ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा, “बड़ी ही चालाकी से राज्यों का ऋण केंद्र के माथे मढ़ रहे है आप। जनता को पूरी जानकारी दीजिए की यह केंद्र व राज्य दोनो के संयुक्त ऋण है, जिसमें विपक्ष शासित राज्यों का योगदान सबसे ज़्यादा है। भाजपा ने देश को आपके दिए आर्थिक संकट से उबारा है।” इसी तरह भाजपा नेता हरिओम पांडेय ने कहा कि मोदी सरकार में देश की वित्तीय हालत अब तक की सबसे बेहतर स्तिथि में है।



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ये सनातनी हैं ही नहीं- महंत राजू दास पर भड़के TMC प्रवक्ता, पलटवार में बोले धर्मगुरु- लोग सर से तन जुदा करने की बात करते हैं

फिल्म डायरेक्टर लीना मणिमेकलई की डॉक्यूमेंट्री फिल्म काली के पोस्टर पर देशभर में छिड़े विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक समारोह में कहा कि सब कुछ मां की चेतना से ही व्याप्त है। मां काली का आशीर्वाद हमेशा देश के साथ है। इस मुद्दे पर न्यूज़ चैनल आजतक पर एक टीवी डिबेट के दौरान TMC प्रवक्ता मानव जायसवाल महंत राजू दास पर भड़क गए और कहा कि ये सनातनी ही नहीं हैं।

महंत राजू ने अपनी सफाई में कहा, “मैंने कहा था कि देश में क्या चल रहा है। लोग सर तन से जुदा कर देने की बात कर रहे हैं, पर हम उस भाव के नहीं हैं। हम सनातन धर्मी हैं। सनातन धर्म कभी इसको बढ़ावा नहीं देता और न मैं इसे बढ़ावा देने वाला हूं।” उन्होंने कहा, “लेकिन आप क्या करना चाह रही हो? क्या आप अपना सर तन से जुदा करवाना चाहती हो? लोगों को ऐसा करने के लिए उकसाना चाहती हो?” महंत की बात का जवाब देते हुए टीएमसी प्रवक्ता मानव जायसवाल ने कहा, “ये सनातनी हैं ही नहीं, ऐसे लोगों पर एफ़आईआर होनी चाहिए।

सर तन से जुदा वाले बयानों का समर्थन नहीं: अपने बयानों से धार्मिक सद्भावना बिगाड़ने के आरोपों पर हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने कहा, “हम सनातन धर्म को मानने वाले हैं, हम कभी भी सर तन से जुदा वाले बयानों का समर्थन नहीं करते। आप डेनमार्क के कार्टून पर हुई लोगों की हत्या को देखिये, 9 पत्रकार मारे जाते हैं, क्या उस विषय पर कोई कुछ बोला?”

महंत राजू दास ने कहा, “देवी काली की पूजा बंगाल के हर गली-मोहल्ले में होती है। ऐसे में मैं यह जानना चाहता हूं कि जब नूपुर शर्मा का बयान आया था तब एक टीवी डिबेट के दौरान कोई भगवान शिव के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। उस पर जो नूपुर शर्मा ने कहा तो पूरे देश में बवाल मच गया।”

क्या हिंदू भी सड़क पर आ जाएं: उन्होंने आगे कहा, “वहीं, जब लीना मणिमेकलई ने मां काली और भगवान शिव पार्वती को सिगरेट के साथ दिखाया और माफी मांगने से भी इनकार कर दिया, उस पर टीएमसी सांसद ने ऐसी भाव और भाषा का प्रयोग किया जो मैं कहना भी नहीं चाहता।” महंत राजू दास ने कहा कि क्या आप चाहती हैं कि हिंदू धर्म के लोग भी सड़क पर आ जाएं? सनातन संस्कृति भी ऐसी हो जाए?



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J&K: पिछले 4 सालों में 700 लोकल युवाओं को आतंकियों ने किया भर्ती, विदेशी समेत 141 आतंकी अभी घाटी में हैं सक्रिय

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी समूहों ने पिछले चार वर्षों में 700 स्थानीय युवाओं को भर्ती किया। जबकि विदेशी सहित 141 आतंकवादी अभी घाटी में सक्रिय है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकवादियों की मौजूदगी सीमा पार से आतंकी लॉन्च पैड से बेरोकटोक घुसपैठ का संकेत देती है।

5 जुलाई 2022 तक जम्मू-कश्मीर में 82 विदेशी आतंकवादी सक्रिय थे–
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 5 जुलाई 2022 तक जम्मू-कश्मीर में कुल 82 विदेशी आतंकवादी सक्रिय थे, जबकि 59 स्थानीय आतंकवादी सक्रिय थे। एक अधिकारी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि आतंकवादी ज्यादातर लश्कर-ए-तैयबा, इसकी शाखा द रेसिस्टेंस फ्रंट, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से संबंधित हैं।

जून के अंत तक आतंकियों 69 युवाओं को अपने समूह में शामिल किया-
वहीं विभिन्न आतंकी समूहों ने पिछले चार वर्षों में जम्मू और कश्मीर में 700 स्थानीय युवाओं की भर्ती की है, जिसमें साल- 2018 में 187, 2019 में 121, 2020 में 181 और 2021 में 142 युवाओं की भर्ती की गई। इस साल जून के अंत तक आतंकी समूहों ने 69 युवाओं को अपने समूह में शामिल किया है।

इस साल 125 आतंकी किए गए ढेर–
सुरक्षाबलों ने इस साल अब तक 55 एनकाउंटर में 125 आतंकियों को ढेर किया है। इनमें से 91 स्थानीय और 34 विदेशी थे। इसके अलावा, इन मुठभेड़ों में 123 आतंकवादी पकड़े गए। उनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में साल- 2021 में 172, 2020 में 251, 2019 में 148 और 2018 में 185 आतंकवादी पकड़े गए। इस साल अब तक आतंकी घटनाओं में दो सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है और 23 घायल हुए हैं। जबकि 20 नागरिक मारे गए हैं।

2021 में 146 आतंकवादी मारे गए–
जम्मू-कश्मीर में इस साल आठ ग्रेनेड हमले की घटनाएं हुई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 2021 में हुई आतंकी घटनाओं में 146 आतंकवादी, तीन सुरक्षाकर्मी और 41 नागरिक मारे गए थे। 2020 में 215 आतंकवादी, 19 सुरक्षाकर्मी और 38 नागरिक मारे गए। 2019 में 148 आतंकवादी, 49 सुरक्षाकर्मी और 46 नागरिक मारे गए। और 2018 में 185 आतंकवादी, सात सुरक्षाकर्मी और 72 नागरिकों की मौत हुई। आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में आतंकी घटनाओं में कुल 63 सुरक्षाकर्मी, 2020 में 165, 2019 में 376 और 2018 में 765 घायल हुए थे।



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Saturday, July 9, 2022

संबित पात्रा का कांग्रेस पर करारा हमला, कहा- सत्ता में बने रहने के लिए आतंकियों से गठबंधन कर सकती है कांग्रेस

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर करारा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आतंकवाद के साथ खड़ी है और पार्टी सत्ता में बने रहने के लिए आतंकवादियों के साथ गठबंधन भी कर सकती है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि कांग्रेस पार्टी देश के 22 स्थानों पर आतंकवाद पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है। जिस तरह से कांग्रेस ने तुष्टिकरण के कारण आतंकवाद का समर्थन किया है, यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में जहां कहीं भी आतंकवादी गतिविधियां हुई हैं, वहां तुष्टीकरण की राजनीति के कारण कांग्रेस ने वहां आतंकवादियों और आतंकवाद का समर्थन किया है।

पात्रा ने कहा कहा कि बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी फूट-फूट कर रोईं। सलमान खुर्शीद ने खुद बताया था कि सोनिया तीन रात सो नहीं पाईं और वह रोती रहीं। पात्रा ने पूछा कि मारे गए आतंकवादियों की वजह से सोनिया गांधी क्यों रोईं। जाकिर नाइक का जिक्र करते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, ‘कांग्रेस और जाकिर नाइक के बीच के रिश्ते से सभी वाकिफ हैं। सोनिया गांधी खुद आतंकी जाकिर नाइक के साथ खड़ी थीं। गांधी परिवार ने नाइक से 50 लाख रुपये से ज्यादा चंदा लिया था। कांग्रेस पार्टी ने आतंकवादी जाकिर नाइक को बचाने के लिए वे सभी हथकंडे अपनाए।”

पात्रा ने आगे कहा, ‘इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की स्लीपर सेल थी, लेकिन सोनिया गांधी के कहने पर कांग्रेस उन्हें बेगुनाह कहती थी। 26/11 के मुंबई हमले के बाद कांग्रेस खाली बैठी रही और कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार द्वारा यासीन मलिक को जिस तरह का दर्जा दिया गया है, वह एक आतंकवादी का महिमामंडन करना है। कांग्रेस ने बुरहान वानी पर गलत अफवाह फैलाई। हाफिज सईद जैसा कोई आतंकवादी दुनिया में किसी भी पार्टी को पसंद करता है, तो वह कांग्रेस पार्टी है।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ कांग्रेस ने माहौल बनाया था। उन्होंने कहा, “गांधी परिवार को कोई आपत्ति नहीं होगी, भले ही उन्हें सत्ता में बने रहने के लिए आतंकवादियों के साथ गठबंधन करना पड़े।

संबित पात्रा ने कहा, बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी फूट-फूट कर रो पड़ीं. सलमान खुर्शीद ने खुद बताया था कि सोनिया जी तीन रात सो नहीं पाई और वह रोती रहीं. मारे गए आतंकवादियों की वजह से वह क्यों रोई? जाकिर नाइक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, कांग्रेस और जाकिर नाइक के बीच के रिश्ते से सभी वाकिफ हैं।

पात्रा ने आगे कहा, इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की स्लीपर सेल थी लेकिन सोनिया गांधी के कहने पर कांग्रेस उन्हें बेगुनाह कहती थी. 26/11 के मुंबई हमले के बाद कांग्रेस खाली बैठी रही और कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि याकूब मेमन की फांसी के खिलाफ कांग्रेस ने माहौल बनाया था. उन्होंने कहा, गांधी परिवार को कोई आपत्ति नहीं होगी, भले ही उन्हें सत्ता में बने रहने के लिए आतंकवादियों के साथ गठबंधन करना पड़े।



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Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...