Sunday, July 3, 2022

खालसा एड के फाउंडर रवि सिंह के अकाउंट को ट्विटर ने किया बैन, बोले- बीजेपी राज का ये ही सच्चा लोकतंत्र

भारत में खालसा एड के फाउंडर रविंदर सिंह उर्फ रवि सिंह के ट्विटर अकाउंट को बैन कर दिया गया है। इसकी जानकारी रवि सिंह ने अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए दी। उन्होंने इसके साथ ही ट्विटर पर बैन हो चुके अकाउंट का स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किया है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना भी साधा है। उन्होंने पोस्ट में लिखा भाजपा की अगुवाई में यह लोकतंत्र का असल चेहरा है।

रवि सिंह ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि भारत में मेरे ट्विटर अकाउंट को बैन किया गया है। बीजेपी के नेतृत्व में लोकतंत्र का यह असली चेहरा है। उन्होंने लिखा कि सिख सोशल मीडिया अकाउंट्स पर बैन लगाने से हमें अपनी आवाज उठाने से नहीं रोका जा सकेगा!, हमारी आवाज और बुलंद होगी।”

आपको बता दें कि खालसा एड यूनाइटेड किंगडम स्थित एक गैर-सरकारी संगठन है जोकि 2020 में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में किसानों के विरोध को समर्थन देने वाले प्रमुख संगठनों में शामिल था। इसने भारत के बाहर किसान आंदोलन के प्रति ध्यान आकर्षित करने में मदद की थी। इसके स्वयंसेवकों ने किसानों के लिए भोजन(दिल्ली में निशुल्क लंगर) और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था करने में भी मदद की।

किसान आंदोलन के अलावा खालसा एड ने युद्ध प्रभावित सीरिया में राहत कार्य, 2016 की लंदन बाढ़ में और बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर रोहिंग्याओं के लिए शरणार्थी शिविर स्थापित करने के लिए भी काम किया। कहा जा रहा है कि सगंठन ने यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध के दौरान भी वहां लोगों को भोजन उपलब्ध करवाया है।

2021 में खालसा एड को दुनिया भर में किए गए मानवीय कार्यों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। यह नामांकन कनाडा के राजनेताओं द्वारा सार्वजनिक कार्यालय, टिम उप्पल, पैट्रिक ब्राउन और प्रबमीत सिंह सरकारिया द्वारा किया गया था।

बता दें कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खालसा एड की स्थापना साल 1999 में हुई थी। यह गैर-लाभकारी संगठन है आपदाओं के समय दुनियाभर में मदद मुहैया कराने का काम करता है।



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G20 मीटिंग अब जम्मू-कश्मीर के बजाए दिल्ली में, बीजेपी नेता बोले- चीन-पाक से डरा 54 इंच का सीना

भारत में अगले साल जी-20 सम्मेलन होना है। इसके लिए पहले कहा जा रहा था कि यह जम्मू-कश्मीर में आयोजित होगा। कश्मीर का नाम सामने आते ही पाकिस्तान ने इस पर विरोध जताया था और उसके सपोर्ट में चीन भी उतर आया था। अब कहा जा रहा है कि जी-20 मीटिंग श्रीनगर के बजाय दिल्ली में होगा। इस जानकारी के सामने आने पर बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने अपनी ही सरकार पर तंज कसा है।

क्या कहा स्वामी ने- पीएम मोदी पर तंज कसते हुए स्वामी ने कहा कि पाक और चीन से 54 इंच का सीना डर गया। उन्होंने ट्वीट कर कहा- “जी-20 मीट पर मोदी सरकार ने कमर कस ली है। पहले यह घोषणा की गई थी कि यह जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित किया जाएगा। फिर चीन-पाकिस्तान ने विरोध कर दिया। अब मोदी सरकार ने पलटी मारी और अब दिल्ली में G-20 बैठक आयोजित करने का फैसला किया है- प्रगति मैदान हो सकता है। 54″ छाती !!”

सरकार ने क्या कहा था- द हिन्दू के अनुसार भारत द्वारा दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की उम्मीद है। अधिकारियों ने बताया कि शिखर सम्मेलन के स्थल के बारे में औपचारिक अधिसूचना अभी नहीं जारी हुई है। इस सम्मेलन में यू.एस., रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, यूरोपीय संघ के नेता शामिल होंगे। यह सम्मेलन दिल्ली के प्रगति मैदान में हो सकता है। यहां सम्मेलन हॉल, 20 राष्ट्राध्यक्षों, हजारों अधिकारियों और प्रतिनिधियों के रहने के लिए नए होटलों का निर्माण पहले से ही चल रहा है।

चीन ने क्या कहा- इस रिपोर्ट्स के सामने आने के बाद कि भारत जम्मू-कश्मीर में G-20 बैठक आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, चीन ने भारत के फैसले की आलोचना की। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने अपने करीबी सहयोगी पाकिस्तान की आपत्ति को दोहराते हुए कहा- ”कश्मीर पर चीन का रुख स्पष्ट है। कश्मीर मुद्दा, पुराना विवाद है, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौते के अनुसार शांतिपूर्वक और उचित रूप से इसका समाधान किया जाना चाहिए”।

पाकिस्तान ने क्या कहा- पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता असीम इफ्तिखार अहमद ने एक बयान में कहा कि इस्लामाबाद ने भारतीय मीडिया में आने वाली खबरों पर ध्यान दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि भारत जम्मू और कश्मीर में जी 20 से संबंधित बैठक आयोजित करने पर विचार कर रहा है। अहमद ने कहा- “पाकिस्तान भारत के इस तरह के किसी भी प्रयास को पूरी तरह खारिज करता है”।



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अगर हिमाकत की तो पीढ़ियों तक उनको याद रखना पड़ेगा, जानिए बीजेपी को पवन खेड़ा ने क्यों दी ऐसी चेतावनी

एक न्यूज चैनल ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के केरल में दिए एक बयान के क्लिप को उदयपुर हत्याकांड से जोड़कर दिखाया था। इस वीडियो को पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर समेत भाजपा के कई नेताओं ने शेयर किया था और राहुल गांधी पर निशाना साधा था, जिसको लेकर कांग्रेस भाजपा पर हमलावर हो गयी है। कांग्रेस ने भाजपा और उनके नेताओं से माफी की मांग है। पार्टी ने कहा है कि अगर भाजपा नेताओं ने माफी नहीं मांगी तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अब कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भाजपा को खुली चेतावनी दी है।

पवन खेड़ा ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस नेता ने कहा, “शराफत कांग्रेस का गहना है, यह हमारी बेड़ियां नहीं हैं। आज के बाद एक व्यक्ति भी… और ये बात भारतीय जनता पार्टी विशेष तौर पर ध्यान से सुन ले। एक व्यक्ति भी हमारी पार्टी, हमारे नेता, हमारी विरासत के खिलाफ एक शब्द बोलेगा, एक तथ्य तोड़-मरोड़कर पेश करेगा, तो कई-कई पीढ़ियों तक उनको याद रखना पड़ेगा, भाजपा इसे चेतावनी मान ले तो उचित रहेगा।”

पवन खेड़ा ने आगे कहा, “जिन सांसदों और भूतपूर्व मंत्रियों ने अभी भी इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया पर रखा है, वह भी आज सुन लें। देखते रहें कि आने वाले दिनों में उनके साथ कानून सम्मत कैसी कार्रवाई की जाती है।

कांग्रेस ने भाजपा नेताओं से की माफी की मांग: राहुल गांधी से जुड़े वीडियो को भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद कांग्रेस भाजपा पर लगातार हमलावर है। पार्टी ने इसके पहले, शनिवार को कहा कि यह वीडियो ‘फर्जी खबर’ के रूप में फैलाया गया है। साथ ही पार्टी ने कहा कि अगर भाजपा और उसके नेताओं ने इसके लिए माफी नहीं मांगी, तो उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर जयराम रमेश ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखा है और भाजपा नेताओं की तरफ से उनसे माफी की मांग की गई है।



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Saturday, July 2, 2022

नई दिल्लीः जानिए कैसे 2011 के नियमों में सात बदलाव करके केंद्र ने FCRA को बनाया और ज्यादा कारगर

केंद्र सरकार ने विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) 2011 में सात बदलाव किए हैं। इस बदलाव को लेकर सरकार का कहना है कि इससे उन विदेशी चंदों पर रोक लगेगी, जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

नए नियम, जिसे अब विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2022 का नाम दिया गया है, शुक्रवार यानि कि 1 जुलाई से लागू हो गया है। गृह मंत्रालय की तरफ से इस कानून को लेकर एक अधिसूचना जारी की गई है, साथ ही आधिकारिक राजपत्र में इसे प्रकाशित भी किया गया है।

अधिसूचना में कहा गया है- “विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 (2010 का 42) की धारा 48 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम- 2011 में और संशोधन करके निम्नलिखित नियम बनाती है। ये नियम विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम- 2022 कहा जाएगा।”

नए नियमों में सात संशोधन हुए हैं। उनमें से नियम 6 में “एक लाख रुपए” की जगह “दस लाख रुपए” लाया गया है। नियम 9 में भी एक संशोधन है, उप-नियम (1) में, खंड (ई) में, “पंद्रह दिन” के स्थान पर “पैंतालीस दिन” लाया गया है। नियम 13 के खंड (बी) को नए नियमों से हटा दिया गया है और नियम 17क में, “पंद्रह दिन” शब्दों के स्थान पर “पैंतालीस दिन” का नियम लाया गया है।

इस कानून के मूल नियम 29 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित किए गए थे। बाद में इसमें कई बार संसोशधन किया गया था। बता दें कि इसी कानून के सहारे देश में मोजूद एनजीओ के विदेशी चंदों पर नजर रखी जाती है। ताकि देश की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके। अगर किसी एनजीओ को विदेशी चंदा चाहिए तो उसे पहले इस कानून के तहत रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन के बाद है उस एनजीओ को विदेशों से चंदा मिल सकता है।

यह अधिनियम पूरे भारत में लागू होता है साथ ही भारत के बाहर रहने वाले देश के नागरिकों पर भी लागू होता है। भारत में पंजीकृत कंपनियों या निकायों की सहयोगी शाखाओं या सहायक कंपनियों को भी इस अधिनियम के नियमों का पालन करना होता है।



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अब मोदी करें साफ कितनी जमीन चीन के पास- सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र पर दागे सवाल, युद्ध के लिए ललकारा

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने एक बार फिर चीन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। हाल ही में उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अब समय आ गया है कि मोदी यह स्पष्ट करें कि चीन ने कितने अविवादित भारतीय क्षेत्र को निगल लिया है? जिसके बाद उसे हासिल करने के लिए हमें चीन से युद्ध करना होगा।

सुब्रमण्यम स्वामी ने ये भी कहा कि अगर पीएम मोदी चीन के सामने घुटने टेक रहे हैं तो हमारे पास यह कहने का नैतिक अधिकार है कि वह भारत की सत्ता को किसी ऐसे व्यक्ति को सौंप दें जो यह कर सकता है। इससे पहले भी चीन के मुद्दे पर हमला बोलते हुए स्वामी ने ट्वीट किया था कि चीन से लगे हमारे सीमावर्ती इलाकों से मिली जानकारी से पता चलता है कि चीन कश्मीर के लद्दाख और पाक अधिकृत इलाकों की तरफ सुनियोजित तरीके से पैर पसार रहा है। उन्होंने पूछा है कि क्या मोदी अब भी ब्रिक्स के साथ घूमेंगे?

चीन के साल 1993 और 1996 के समझौतों का उल्लंघन करने और एलएसी पार करने पर सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर बीजेपी सरकार पर हमला बोलते हुए लिखा था कि चीनियों के साथ दारू और डिनर कर लेने के बाद आखिर अब नींद खुल ही गई।

चीन ने किया समझौते का उल्लंघन: दरअसल विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत चीन के वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास की अनुमति नहीं देगा। पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद पर बातचीत करते हुये जयशंकर ने कहा था कि चीन ने 1993 और 1996 के समझौते का उल्लंघन करते हुये सीमा पर बड़ी तादाद में सैन्य तैनाती की।

इससे पहले सुब्रमण्यम स्‍वामी ने नूपुर शर्मा मामले पर मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि खाड़ी देशों के सामने मोदी सरकार पूरी तरह से झुक गई है। बीजेपी नेता ने सिलसिलेवार ट्वीट में लिखा था, “मोदी सरकार के 8 वर्षों के दौरान, भारत माता को शर्म से सिर झुकाना पड़ा क्योंकि हम लद्दाख पर चीनियों के सामने रेंगते रहे, रूसियों के सामने घुटने टेकते रहे, क्वाड में अमेरिकियों के सामने झुके रहे। अब हमने छोटे से कतर के सामने साष्टांग दंडवत कर दिया है। यह हमारी विदेश नीति की कमियां हैं।”



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क्या राहुल गांधी ने सच में कन्हैयालाल के हत्यारों को ‘बच्चा’ कहा? जानें वो विवाद, जिसमें फंस सकते हैं कई BJP नेता

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से जुड़े एक वीडियो के बीजेपी के कुछ नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किए जाने के बाद पार्टी हमलावर हो गई है। पार्टी ने कहा कि यह वीडियो ‘फर्जी खबर’ के रूप में फैलाया गया है और अगर भाजपा एवं उसके नेताओं ने इसके लिए माफी नहीं मांगी, तो उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, यह पूरा मामला एक न्यूज चैनल से संबंधित है। न्यूज चैनल ने एक वीडियो चलाया था, जिसमें दावा किया गया था कि राहुल गांधी ने उदयपुर के हत्यारों को ‘बच्चा’ कहा और उन्हें छोड़ देने की बात कही थी। कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया कि राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र वायनाड स्थित उनके कार्यालय पर किए गए हमले के संदर्भ में पूर्व अध्यक्ष ने एक टिप्पणी की, जिसे चैनल ने उदयपुर की घटना से जोड़कर पेश किया। हालांकि, चैनल ने इस पर खेद व्यक्त किया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर, सांसद सुब्रत पाठक, कमलेश सैनी समेत कुछ नेताओं ने इस वीडियो को शेयर किया था और राहुल गांधी पर निशाना साधा था। इस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखा है और कहा कि वे (नड्डा) अपने नेताओं की तरफ से माफी मांगें। साथ ही कहा गया है कि अगर भाजपा नेताओं ने माफी नहीं मांगी तो कांग्रेस पार्टी उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करेगी।

राहुल गांधी ने क्या कहा था?: राहुल गांधी ने वायनाड स्थित उनके दफ्तर में तोड़फोड़ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “यह मेरा दफ्तर है, और मेरे दफ्तर से भी पहले यह वायनाड के लोगों का दफ्तर है। जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। हिंसा से किसी समस्या का समाधान नहीं होता। जिन्होंने यह सब किया वो ‘बच्चे’ हैं, उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम किया, उसको लेकर मेरे अंदर कोई नाराजगी नहीं है, मेरी उनसे कोई दुश्मनी नहीं है।”

कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से राहुल गांधी का बयान शेयर किया गया है। साथ ही कहा गया है, “फेक न्यूज़ की बुनियाद पर भाजपाई हुकूमत अपनी ‘गोदी मीडिया’ के साथ मिलकर, राहुल गांधी जी को बदनाम करना चाहती है। उनकी छवि को खराब करने के लिए पहले भी हजारों-लाखों कोशिशें की जा चुकी हैं। लेकिन हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी है।”

राहुल गांधी ने भी एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने कहा है, “दुष्प्रचार और झूठ ही भाजपा-RSS की नींव है। देश को नफ़रत की आग में झोंक कर हाथ सेंकने वाली भाजपा-RSS का इतिहास पूरा हिंदुस्तान जानता है। ये देशद्रोही चाहे जितना तोड़ने का काम कर लें, कांग्रेस उससे ज़्यादा भारत जोड़ने का काम करती रहेगी।”



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हिटलर के पास तो केवल 1…यहां तो पूरी तरह ही प्रोपेगैंडा है, नूपुर मामले में अखिलेश ने कसा बीजेपी सरकार पर तंज, ओवैसी ने कही ये बात

पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी करने वाली नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर को दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की थी। उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था और इस दौरान कोर्ट ने उन पर सख्त टिप्पणी की थी। इसके बाद, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का हवाला देते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा है कि कुछ ताकतें नूपुर शर्मा के पीछे हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के पास प्रोपेगैंडा के लिए बहुत बड़ी मशीनरी है और पूरी जनता जानती है कि भाजपा कोई भी साजिश कर सकती है। सपा प्रमुख ने कहा, “हिटलर के जमाने में तो केवल एक प्रोपेगैंडा मिनिस्टर था, इस सरकार में तो पूरी सरकार प्रोपेगैंडा है।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि नूपुर शर्मा किसी पार्टी की प्रवक्ता थीं, सत्ता का नशा उनके दिमाग पर चढ़ गया। किसी पार्टी की प्रवक्ता हैं तो देश के कानून की परवाह किए बिना कोई भी बयान दे देती हैं।

नूपुर शर्मा की टिप्पणी के बाद विपक्षी दल लगातार भाजपा पर निशाना साध रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर नूपुर शर्मा को गिरफ्तार करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के जज साहब ने जो कुछ कहा है, मैं देश के पीएम नरेंद्र मोदी से अपील करता हूं और मांग भी करता हूं कि नूपुर शर्मा को बचाने से रोकें। वो और उनकी सरकार नूपुर शर्मा को बचा रही है, कानून को अपना काम करने दें, ये ठीक नहीं हो रहा है।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब आप (नूपुर शर्मा) किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराती हैं तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है लेकिन आपके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में अभी तक आपकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह आपका दबदबा दिखाता है। इसका हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा, “दिल्ली की कानून-व्यवस्था तो केंद्र के अधीन है, फिर नूपुर शर्मा के खिलाफ एक्शन क्यों नहीं लिया गया। क्यों बचा रहे हैं, हमको समझ नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा नूपुर शर्मा को बचा रही है।”



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अग्निपथ प्रोटेस्टः सरकार बाहुबली, लोगों को झुकना ही पड़ेगा, जानिए फौजियों के गांव में कैसे विरोध जता रहे लोग

केंद्र सरकार द्वारा लाई गई अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में विरोध देखा जा रहा है। यूपी के बुलंदशहर के सैदपुर गांव में भी विरोध देखने को मिल रहा है। दरअसल इस गांव का विरोध इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे फौजियों का गांव भी कहते हैं। इस गांव में लगभग हर घर में बच्चे अपने दादा, पिता और भाइयों की तरह सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखते हैं।

सैदपुर गांव के प्रधान अमित सिरोही ने द इंडियन एक्सप्रेस से दावा किया कि गांव में करीब 2,000 घर हैं और इनमें से कम से कम 800 घरों में सेना में सेवा करने वाले मिल जाएंगे। अग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार अब इतनी सख्त है कि या तो बुलडोजर चलेगा, ये करियर खराब होगा। ये सरकार बाहुबली है, लोगों को झुकना ही पड़ेगा।

14 साल के शिव सिरोही के दादा और पिता दोनों सेना में सेवा दे चुके हैं। शिव कहना है कि मेरा सपना फौजी बनने का है। मैंने कभी दूसरे करियर के बारे में नहीं सोचा। मैं अपना स्टेमिना बढ़ाने के लिए सुबह दौड़ता हूं लेकिन नई योजना ने बहुत से लोगों को झकझोर दिया है। यहां तक ​​कि मेरे माता-पिता को भी यकीन नहीं है कि जो मेहनत हम कर रहे हैं वो सिर्फ चार साल के लायक ही है।

वहीं 17 साल के आशीष का कहना है कि हम बचपन से फौजी कल्चर में पले-बढ़े हैं। यहां हर लड़का फौजी बनना चाहता है। अब अचानक से हमारे सामने दूसरे विकल्प आ गये हैं। बता दें कि आशीष के पिता दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। आशीष का कहना है कि सेना मेरे लिए अंतिम लक्ष्य था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि उसके बाद मुझे दूसरी नौकरी की तलाश करनी पड़ेगी। लेकिन नई योजना के तहत अब अनिश्चितता का माहौल है।

दो साल से सेना में जाने की तैयारी कर रहे 21 साल के हरीश कुमार का कहना है कि सरकार कह रही है कि जो भी चयनित होगा उसे चार साल बाद कम से कम 11 लाख रुपये मिलेंगे। क्या मैं इतने पैसों से घर बना सकता हूं? जमींदार किसानों के लिए यह आसान है लेकिन हम क्या करेंगे?”

हालांकि ऐसा नहीं है कि गांव में सभी इस योजना का विरोध कर रहे हैं। 43 वर्षीय जसवीर सिरोही अग्निपथ योजना को बेरोजगारी के उपाय के रूप में देखते हैं। उनके दादा और परदादा दोनों सेना में थे। जसवीर का कहना है कि “दो साल से सेना में भर्ती नहीं हुई। नई योजना के तहत कम से कम युवा हाथ में कुछ पैसे लेकर वापस आ सकेंगे और एक छोटा व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। यह कुछ नहीं से तो बेहतर ही है।”

बता दें कि केंद्र द्वारा अग्निपथ योजना के ऐलान के साथ ही देशभर में विरोध प्रदर्शन देखे गये। इसी क्रम में यूपी के अलीगढ़ में एक पुलिस चौकी और वाहन को आग लगा दी गई। जिसको लेकर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज किया गया। इसमें नौ सेना कोचिंग सेंटर संचालकों को भी गिरफ्तार किया गया।

नौकरी की असुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती होने वाले जवानों में 25 फीसदी को रेग्युलर रखा जाएगा। केंद्र की नई सैन्य भर्ती स्कीम में लगभग 45,000 सैनिकों की सालाना भर्ती की जाएगी, और उनमें से केवल 25% को ही स्थायी कमीशन के तहत अगले 15 वर्षों तक सेवा देंगे।



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पैगंबर विवादः चार सूबे और 9 FIR, जानिए नुपुर शर्मा ने किस वजह से किया था सुप्रीम कोर्ट का रुख

पैगंबर मोहम्मद को लेकर विवादित बयान देने वाली भाजपा से निलंबित नूपुर शर्मा के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में कई केस दर्ज हुए हैं। इन मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने को लेकर नूपुर शर्मा ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया, साथ ही नुपूर शर्मा को कड़ी फटकार भी लगाई। नूपुर ने मांग की थी कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को दिल्ली ट्रांसफर किया जाए क्योंकि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है।

नूपुर शर्मा ने अपनी याचिका में पहला अनुरोध एफआईआर को रद्द करने की थी, जबकि सारे मामलों को एक जगह शिफ्ट करने का अनुरोध अलग था। नूपुर शर्मा के खिलाफ चार राज्यों महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना में कुल 9 एफआईआर दर्ज हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि शर्मा के खिलाफ असम, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में प्राथमिकी दर्ज की गई है, हालांकि इसका विवरण याचिकाकर्ता के पास उपलब्ध नहीं है।

इस याचिका में कहा गया कि प्राथमिकी में निराधार आरोप हैं जो समाचार चैनल पर प्रसारित बहस (डिबेट के दौरान दिए बयान) से पैदा नहीं होते हैं। याचिका में आगे तर्क दिया गया कि देश के विभिन्न हिस्सों में मामलों के दर्ज होने के पीछे गलत मकसद है। इसमें एफआईआर को रद्द करने की अपील भी की गई थी।

वैकल्पिक रूप से, याचिका में सभी एफआईआर को एक साथ करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग प्राथमिकी से कार्यवाही में डुप्लिकेसी आएगी और याचिकाकर्ता को अनावश्यक परेशान किया जाएगा। हालांकि, नूपुर शर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की और अदालत ने कहा कि उनके बयानों के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के लिए वह अकेले ही जिम्मेदार थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से उन्होंने पूरे देश में भावनाओं को भड़काया, उससे वो खुद सुरक्षा के लिए खतरा नहीं बन गई है? कोर्ट ने कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए यह महिला अकेले ही जिम्मेदार है।



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Friday, July 1, 2022

Five Big Supreme Court Quotes on Nupur Sharma: लोकतंत्र में सभी को बोलने का हक, डेमोक्रेसी में घास को बढ़ने का और गधे को उसे खाने का भी अधिकार है, पढ़ें और क्‍या कहा

विवादित बयान को लेकर भाजपा से निलंबित नूपुर शर्मा के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में केस दर्ज हुए हैं। ऐसे में इन मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने को लेकर नूपुर शर्मा ने शुक्रवार(1 जुलाई 2022) को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। नूपुर शर्मा ने मांग की थी कि अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को दिल्ली स्थानांतरित किया जाए। क्योंकि उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है। इस याचिका की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा को राहत न देते हुए जमकर फटकार लगाई।

अदालत ने कहा कि उनकी टिप्पणी की वजह से देश भर में लोगों की भावनाएं भड़की हैं। देश में आज जो कुछ हो रहा है, उसके लिए वो जिम्मेदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त अंदाज में कहा कि इन लोगों में दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान नहीं है। आइए जानते हैं कि आखिर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी फटकार क्या कहा-

देश में जो हो रहा, उसके लिए वही जिम्मेदार: अपनी सुरक्षा की बात कर मामले को दिल्ली ट्रांसफर करने की अपील करने वाली नूपुर शर्मा को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “जिस तरह से उन्होंने पूरे देश में भावनाओं को भड़काया, उससे वो खुद सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है? जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि देश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए यह महिला अकेले ही जिम्मेदार है।”

अपनी हल्की जुबान से पूरे देश में आग लगा दी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि “अपनी हल्की जुबान से उन्होंने पूरे देश में आग लगा दी है।” अदालत ने कहा कि पैगंबर के खिलाफ नूपुर शर्मा की टिप्पणी सस्ते प्रचार, राजनीतिक एजेंडे या कुछ नापाक गतिविधियों के लिए की गई थी।

सत्ता का नशा दिमाग पर चढ़ गया: अदालत ने कहा कि नूपुर शर्मा किसी पार्टी की प्रवक्ता थीं, सत्ता का नशा उनके दिमाग पर चढ़ गया। किसी पार्टी की प्रवक्ता हैं तो देश के कानून की परवाह किए बिना कोई भी बयान दे देती हैं।”

लोकतंत्र में सबको बोलने का अधिकार लेकिन..: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को बोलने का अधिकार है। लोकतंत्र में घास को उगने का हक है और गधे को उसे खाने का भी अधिकार है।

आपका दबदबा है: कोर्ट ने कहा, “जब आप किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराती हैं तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेती है लेकिन आपके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में अभी तक आपकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह आपका दबदबा दिखाता है।”

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित बीजेपी नेता नूपुर की अपील को खारिज कर दिया और उन्हें हाईकोर्ट जाने का सुझाव दिया। नूपुर ने अपनी अपील में अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की थी। जिसके बाद नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।



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नूपुर शर्मा के बयान ने देश में लगाई आग, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर अंबर जैदी बोलीं- जिन्‍होंने घी डाला वो भी जिम्मेदार

निलंबित भाजपा नेता नूपुर शर्मा ने अपनी विवादास्पद टिप्पणी को लेकर कई राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को जांच के लिए दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शर्मा का कहना था कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा को जमकर फटकार लगाई और कहा कि नूपुर शर्मा और उनकी हल्की जबान ने पूरे देश में आग लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी पर समाजिक कार्यकर्ता अंबर जैदी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर जिम्मेदार नुपूर हैं तो वो लोग भी ज़िम्मेदार हैं जिन्होंने प्रोपगैंडा के तहत देश में आग लगाई।

इंडिया टीवी पर एक डिबेट के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “जिस अंदाज में नूपुर ने बात की, उसे हम गलत कह सकते हैं लेकिन उसके बाद जिस तरह के इस बयान को लेकर भड़काया गया और ऐसे लोगों ने इस आग में इतना घी डाला कि एक मासूम को अपनी जान गंवानी पड़ गई। जिन्होंने वीडियो को ट्विस्ट एंड टर्न करके पूरी दुनिया में फैलाया, उनके लिए तो धरने हो रहे हैं। चाहें हिंदू हो या मुसलमान हो, जो भी देश में हिंसा भड़काते हैं, सभी से सवाल होने चाहिए। हिंदू से तो सवाल होगा लेकिन मुसलमान से सवाल नहीं होगा क्योंकि बेचारा मुसलमान है।”

नूपुर शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने नूपुर शर्मा को फटकार लगाते हुए कहा कि उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने और उनके बयान ने पूरे देश में आग लगा दी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि टीवी चैनल और नुपुर शर्मा को ऐसे मामले से जुड़े किसी भी एजेंडे को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, जो कोर्ट में विचाराधीन है।

वहीं, नूपुर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने टिप्पणी के लिए माफी मांगी और टिप्पणियों को वापस ले लिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- उन्हें टीवी पर जाकर देश से माफी मांगनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उदयपुर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए उनका बयान ही जिम्मेदार है, जहां एक दर्जी की हत्या कर दी गई। नूपुर शर्मा के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें खतरा है या वह सुरक्षा के लिए खतरा बन गई हैं?



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Coronavirus News: देशभर में एक्टिव केसों की संख्या पहुंची एक लाख के पार, बीते 24 घंटे में आए 17 हजार से ज्‍यादा मामले, पढ़ें किस राज्य में कैसी है स्थिति

Covid-19 News Updates In India: देशभर में एक बार फिर से कोरोना वायरस के मामलों में इजाफा देखने को मिल रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार बीते 24 घंटे में देश में 17,070 नए कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं। अब देश में कुल कोविड के मामलों की संख्या बढ़कर 4,34,69,234 हो गई हैं जबकि एक्टिव मामलों की संख्या 1,07,189 तक पहुंच गई हैं।

पिछले पिछले 24 घंटे में कोरोनावायरस के कारण 23 लोगों ने अपनी जान गंवाई है, जिसके कारण देश में महामारी के कारण मरने वालों का आंकड़ा 5,25,139 तक पहुंच गया है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में डेली पॉजिटिविटी रेट 3.4 फीसदी है जबकि वीकली पॉजिटिविटी रेट 3.59 है। वहीं, महामारी से ठीक होने वालों का आंकड़ा 4,28,36,906 पर पहुंच गया है जबकि 1.21 इस महामारी के कारण अपनी जान खो चुके हैं।

केरल और महाराष्ट्र में सबसे अधिक मामले: कोरोना वायरस के सबसे अधिक मामले भारत में केरल और महाराष्ट्र में देखने को मिल रहे हैं। पिछले 24 घंटे में केरल में 4083 कोरोना के नए मामले आए हैं जबकि महाराष्ट्र में 3640 नए मामले आए हैं। वहीं, तमिलनाडु में पिछले 24 घंटे में 2069 नए मामले सामने आए हैं जबकि देश की राजधानी दिल्ली में बीते 24 घंटे में 865 नए कोरोना के मामले सामने आए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर पिछले सप्ताह में 41 लाख से अधिक मामलों के साथ नए कोरोनोवायरस मामलों सामने आए हैं जो कि पिछले सप्ताह के मुकाबले 18 फीसदी अधिक हैं। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने महामारी पर अपनी नवीनतम वीकली रिपोर्ट में कहा कि दुनियाभर में बीते एक हफ्ते में कोरोना के कारण मौतों की संख्या में कोई भी वृद्धि नहीं हुई है। दुनिया के तीन क्षेत्रों में कोविड से संबंधित मौतें बढ़ीं, जिसमें मध्य पूर्व, दक्षिण पूर्व एशिया और अमेरिका का नाम शामिल हैं।

197 करोड़ पहुंचा कोरोना वैक्सीन का आंकड़ा: मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब तक 197.7 करोड़ कोरोना वैक्सीन दी जा चुकी है। बता दें, भारत 190 करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन देने वाला दुनिया का पहला देश है।



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सुप्रीम कोर्ट की फटकार के साथ ही नूपुर शर्मा को जफर सरेशवाला ने दी सलाह, बोले- माफी मांग लो किस्सा खत्म

पैगंबर मोहम्मद पर विवादित टिप्पणी कर बीजेपी से निष्कासित हुईं नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से कड़ी फटकार लगी है। कोर्ट का कहना है कि नूपुर को अपने इस बयान के लिए टीवी पर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। इस बीच, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) के पूर्व चांसलर जफर सरेशवाला ने भी नूपुर शर्मा को सलाह दी है कि उन्हें माफी मांगकर इस किस्से को खत्म कर देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस्लाम के मुताबिक, अगर माफी मांग लेते हैं तो पूरा किस्सा खत्म हो जाता है। इसके साथ ही उन्होंने तन से जुदा जैसी बातें करने वाले लोगों को भी निशाने पर लिया और कहा कि इस्लाम इस बात की इजाजत कतई नहीं देता है।

जफर सरेशवाला में कहा, “सिर तन से जुदा करने वाले जो लोग हैं, ऐसी बातें इस्लाम के बिल्कुल खिलाफ हैं। ऐसी कोई हदीस नहीं है। ये जो हदीस है कि गुस्ताख ए रसूल, उसकी एक ही सजा सिर तन से जुदा, ये झूठ है। ये इस्लाम के खिलाफ है। ऐसे लोग गलती कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अगर नूपुर शर्मा ने कोई गलत बात कही थी, तो उस तक सही बात पहुंचाते, लेकिन सिर तन से जुदा वाले जो लोग हैं, ये भी उतने ही दुश्मन हैं पैगंबर के जितना और कोई।

उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान में बहुते सारे हिंदुओं ने पैगंबर की जिंदगी के ऊपर किताबें लिखीं। किसी की भी किताब पढ़ लीजिए और फिर तय कीजिए कि 1400 सालों के बाद भी पैगंबर मोहम्मद की इज्जत ये गैर मुस्लिम क्यों करते हैं।”

गौरतलब है कि पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा की विवादित टिप्पणी के बाद देश में बवाल खड़ा हो गया था। देश के कई हिस्सों में हिंसात्मक प्रदर्शन हुए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह मामला उठा। खाड़ी देशों ने भारतीय राजदूतों को तलब कर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई। हालांकि, भारत सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर साफ कर दिया था कि किसी टीवी चैनल या सोशल मीडिया पर अगर कोई अपने विचार साझा करता है, तो वो उसके निजी विचार हैं, भारत सरकार उसका समर्थन नहीं करती है।

इसके बाद, मामला थोड़ा शांत पड़ने लगा था कि तभी उदयपुर में एक दर्जी की दिनदहाड़े दो लोगों ने धारदार हथियार से इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उसने नूपुर शर्मा का समर्थन किया था। इस घटना के बाद से लोगों में आक्रोश है। मुस्लिम समाज से जुड़े कई लोग इस घटना की निंदा कर चुके हैं और उनका कहना है कि इस्लाम यह कभी नहीं सिखाता।



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मनीष सिसोदिया की बढ़ी मुश्किलें, असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने दर्ज कराया आपराधिक मानहानि का मुकदमा

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने सिसोदिया के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाया है। गौरतलब है कि मनीष सिसोदिया पर इससे पहले सरमा की पत्नी भी 100 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दर्ज कर चुकी हैं।

दरअसल दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कांफ्रेंस में सीएम सरमा पर कोविड पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) के ठेके को लेकर आरोप लगाए थे। आरोप में कहा था कि सरमा ने अपनी पत्नी रिनीकी भुइयां सरमा से जुड़ी एक कंपनी को पीपीई किट का ठेका दिया और इसके लिए अत्यधिक भुगतान किया था।

पिछले महीने सिसोदिया ने आरोप लगाते हुए कहा था हिमंत बिस्वा सरमा ने अपनी पत्नी की कंपनी को पीपीई किट का ठेका दिया। उन्होंने पीपीई किट के लिए 990 रुपये का भुगतान किया, जबकि उसी दिन दूसरी कंपनी से ​​600 रुपये में खरीदा गया।” सिसोदिया ने इसे बहुत बड़ा अपराध है कहा था।

बता दें कि सरमा दंपति ने सिसोदिया के आरोप को खारिज किया है। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सिसोदिया से कहा था कि जल्द ही आपसे गुवाहाटी में मुलाकात होगी। क्योंकि आप आपराधिक मानहानि का सामना करेंगे।’ बता दें कि मनीष सिसोदिया पर इस मामले में मानहानि के दो मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

वहीं असम सरकार के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने मानहानि के मुकदमे पर और जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली के मंत्री द्वारा लगाये गये सारे आरोप झूठे हैं। पीपीई किट बनाने वाली उनकी कंपनी ने कभी कोई बिल नहीं दिया। उस समय, एनएचएम ने पीपीई व्यवसाय में सभी से किट की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था और उन्होंने अपने सीएसआर के हिस्से के रूप में लगभग 1500 पीपीई किट की आपूर्ति की थी। एक पैसा भी नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि इस मामले में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है। जिसमें अपराध साबित होने पर दो साल की कैद और जुर्माने की सजा होगी। कोर्ट ने मामले में शुरुआती बयान की तारीख 22 जुलाई तय की है।



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दिमाग पर चढ़ा सत्‍ता का नशा, हल्‍की जुबान ने पूरे देश में आग लगा दी, किसी ने गिरफ्तार करने की हिम्‍मत नहीं की, सुप्रीम कोर्ट की नूपुर शर्मा को कड़ी फटकार

भाजपा से निलंबित नूपुर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है। दरअसल नूपुर शर्मा ने अपने खिलाफ अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को दिल्ली स्थानांतरित करने की सर्वोच्च अदालत में अपील की थी। शर्मा का कहना है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, ऐसे में मामलों को दिल्ली ट्रांसफर किया जाए।

बता दें कि नूपुर शर्मा की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमकर फटकार लगाई और उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है। सर्वोच्च अदालत ने नूपुर शर्मा पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी ने देश भर में लोगों की भावनाओं को भड़का दिया है। देश में आज जो कुछ हो रहा है, उसके लिए वो जिम्मेदार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त अंदाज में कहा कि इन लोगों में दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि हमने डिबेट देखा, उनको भड़काने की कोशिश की गई लेकिन उसके बाद उन्होंने(नूपुर शर्मा ने) जो कहा, वो बेहद शर्मनाक है। उनकी हल्की जुबान ने पूरे देश में आग लगा दी है। उदयपुर में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए वो जिम्मेदार हैं। उन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। अदालत ने कहा कि पैगंबर के खिलाफ नूपुर शर्मा की टिप्पणी सस्ते प्रचार, राजनीतिक एजेंडे या कुछ नापाक गतिविधियों के लिए की गई थी।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “क्या होगा अगर वह किसी पार्टी की प्रवक्ता हैं, उनको लगता है कि उनके पास सत्ता की ताकत है और देश के कानून का सम्मान किए बिना कोई भी बयान दे सकती हैं।” उनके बयान ने उनके “अड़ियल और अहंकारी चरित्र” को दिखाया। सख्ती दिखाते हुए अदालत ने कहा कि सत्ता का नशा दिमाग पर हावी नहीं होनी चाहिए।

वहीं नूपुर शर्मा के वकील ने कोर्ट को बताया कि वो अपने बयान को वापस ले चुकी हैं, और माफी मांग चुकी है। इसपर अदालत ने कहा तबतक बहुत देर हो चुकी थी। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि उनकी शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है लेकिन खुद इनपर दर्ज हुए कई मामलों के बाद भी दिल्ली पुलिस ने उनको छुआ तक नहीं है।

नूपुर शर्मा की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने टिप्पणी के लिए माफी मांगी और टिप्पणियों को वापस ले लिया। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्होंने माफी मांगी लेकिन देरी हो चुकी थी। उन्होंने अपने बयान वापसी में भी शर्त रखी कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो माफी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें टीवी पर जाकर पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए थी।

नूपुर शर्मा के वकील ने अपनी दलील में कहा कि नूपुर शर्मा ने TV डिबेट में एंकर के सवाल पर इस तरह का बयान दिया था। इसपर कोर्ट ने कहा कि ऐसी सूरत में एंकर पर भी मुकदमा चलना चाहिए।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा के वकील को हाईकोर्ट जाने का सुझाव दिया है। वहीं जब नूपुर शर्मा की वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि शर्मा जांच में शामिल हो रही है और कहीं भाग नहीं रही है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिर तो वहां आपके लिए रेड कार्पेट होना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित बीजेपी नेता नूपुर की अपील को खारिज कर दिया है। जिसमें उन्होंने अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग की थी। जिसके बाद नूपुर शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली।

सर्वोच्च अदालत ने कहा कि जब आप किसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हैं, तो उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया जाता है, लेकिन कोई भी आपको छूने की हिम्मत नहीं करता है। इससे आपका दबदबा दिखता है।



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Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...