Wednesday, April 6, 2022

परिवार से मदद मांगने में न झिझकें

हमारे जीवन में बहुत सारी परिस्थितियां ऐसी आती हैं, जब हमें कुछ समझ नहीं आता है। ऐसे समय में हमें अपने परिवार या दोस्तों की सहायता लेने से झिझकना नहीं चाहिए। हमारे माता-पिता इसके लिए सबसे उचित होते हैं। वे आपको और आपकी आदतों से अच्छी तरह से वाकिफ होते हैं। इसलिए वे आपका सबसे बेहतर मार्गदर्शन कर सकते हैं। साथ ही उन्हें पता होता है कि आप में उत्साह का संचार कैसे करना है। याद रखिए जब भी आपको लगे कि परिस्थितियां आपके काबू से बाहर जा रही हैं, तुरंत परिवार के मदद मांगें। अगर वे दूर हैं तो सहायता के लिए मोबाइल का उपयोग करें।

इसके अलावा सफलता की राह पर चलते-चलते कई बार हमारा ध्यान भटक जाता है। इस भटकाव से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने लक्ष्यों को दिन में एक बार जरूर देखें या पढ़ें। कोशिश करें कि आप अपने लक्ष्यों की सूची बनाकर ऐसी जगह पर चिपकाएं कि उसे आप आसानी से देख सकें। साथ ही इसका भी ध्यान रखें कि आपके परिवार के अलावा इस सूची को कोई और न देखे। अन्य लोग ऐसी सूची को देखकर आपको आपके लक्ष्यों के प्रति हतोत्साहित कर सकते हैं।

अधिकतर ऐसा होता है कि हम किसी न किसी व्यक्ति से प्रेरित होते हैं। यह एक अच्छी आदत है। हमें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए प्रेरणा की जरूरत होती है। अगर आप खुद को ही प्रेरित करने में सफल होते हैं तो उससे बेहतर तो कुछ हो ही नहीं सकता है लेकिन ऐसा बहुत मुश्किल होता है। अगर आप सफल लोगों के बारे में पढ़ेंगे तो पाएंगे कि इनमें से अधिकतर लोग अपने कार्यों से संतुष्ट होने के बाद ही सोने के लिए बिस्तर पर जाते हैं।

ये आदत आपको भी अपने लक्ष्यों को पाने में सहायता कर सकती है। इसलिए कोशिश करें कि हर रात सोने से पहले आप कोई किताब पढ़ लें। अपनी पसंद का कोई धीमा संगीत सुन सकते हैं। इतना ही नहीं आप कुछ देर के लिए चहलकदमी भी कर सकते हैं। ये सभी ऐसे काम हैं जो आप सिर्फ और सिर्फ अपने लिए कर रहे होते हैं। इससे आपकी संतुष्टि का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि अगले दिन आप बहुत ही तरोताजा उठेंगे।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/D1GJBTo

अजान बनाम हनुमान चालीसा: मैं खाड़ी देशों में जा चुकी हूं, वहां ये बैन है तो यहां क्यों? बोलीं अनुराधा पौडवाल

मस्जिदों में लाउड स्पीकर हटाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच गायिका अनुराधा पौडवाल ने कहा है कि खाड़ी देशों में भी ये बैन हैं तो यहां क्यों। उन्होंने कहा, मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन कई चीजों को अनावश्यक बढ़ावा दिया जाता है। बड़े-बड़े लाउड स्पीकर में वो (अजान) चलाया जाता है। फिर दूसरे लोगों को लगता है कि हम अपना क्यों ना चलाएं।

उन्होंने आगे कहा, मैं मिडिल-ईस्ट कंट्रीज में भी जा चुकी हूं। आपको ये कहीं नहीं सुनाई देता है। वहां प्रतिबंधित है। तो फिर यहां पर क्यों? अगर यहां पर वो चलता है किसी ने सोचा फिर हम हनुमान चालीसा चलाएंगे। फिर एक से एक चीज बढ़ती जाती है तो ये बहुत बुरी स्थिति है। हमें सही सोचना चाहिए।

लोगों ने जताया समर्थन
अनुराधा पौडवाल के इस बयान पर कई लोगों ने अपना समर्थन जताया है। एक यूजर ने कहा कि मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूं। हमारी भक्ति और प्रार्थना पूरी तरह से व्यक्तिगत है। इससे किसी और को परेशानी नहीं होनी चाहिए। वहीं एक अन्य ने कहा कि आपके इस बयान का पूरे देश के राजनेताओं के ऊपर दबाव पड़ेगा और वे इस पर कदम उठा सकेंगे। एक यूजर ने कहा कि सभी सेलेब्रिटीज को इसी तरह खुलकर सामने आना चाहिए।

एक और यूजन ने अपना समर्थन जताते हुए कहा कि जी हां हम सभी सही सोचने और करने के योग्य हैं। यही हमारी ताकत है। जिनकी सोच गलत है वो हमेशा गलत करते हैं और कर रहे हैं। यही बात अनावश्यक लाउड स्पीकर पर भी लागू होती है।

जानें कैसे शुरू हुआ था ये विवाद
शनिवार (3 अप्रैल) को गुड़ी पड़वा के अवसर पर राज ठाकरे ने कहा था कि यदि मस्जिदों से लाउड स्पीकर नहीं हटाए गए तो उनकी पार्टी मनसे के कार्यकर्ता मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसे बजाएंगे। इसके बाद राज्य के कई इलाकों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा बजाना शुरू कर दिया था।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/S1nVsXg

Tuesday, April 5, 2022

व्यवस्था पर सवाल : पत्नी को ठेले पर लेकर अस्पताल पहुंचे बुजुर्ग

उत्तर प्रदेश में बलिया के एक अस्पताल में एक वृद्ध अपनी पत्नी को ठेले पर ले कर पहुंचा। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह घटना जिले के अंदौर गांव की है। संबंधित वीडियो में अंदौर गांव का सकुल प्रजापति अपनी बीमार पत्नी जोगनी (55) को ठेले पर लेकर अस्पताल जाता दिखाई दे रहा है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर ट्वीट करके राज्य की चिकित्सा व्यवस्था पर सवालिया निशान उठाए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी नीरज पांडे ने मंगलवार को बताया कि पाठक ने महानिदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) को मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

इस बारे में पूछे जाने पर सकुल प्रजापति ने बताया कि 28 मार्च को पत्नी को अस्पताल ले जाने का कोई साधन नहीं मिला तो वह उसे ठेले पर लेकर चिकलहार स्वास्थ्य केंद्र चला गया, जो उसके घर से तीन किलोमीटर दूर है। सकुल ने बताया कि चिकित्सकों ने कुछ दवाएं देकर उसकी पत्नी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जिसके बाद वह अपनी पत्नी को पियारिया गांव में ठेले पर ही छोड़ कर कपड़े और पैसे लेने घर गया तथा फिर पत्नी को टेम्पो से लेकर अस्पताल पहुंचा।

पुलिस ने बताया कि अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी पत्नी की मौत हो गई। सकुल ने दावा किया कि उसकी पत्नी की मौत रात करीब 11 बजे हुई और अस्पताल ने शव घर ले जाने के लिए एम्बुलेंस मुहैया नहीं कराई जिसके बाद उसने 1100 रुपए में निजी एम्बुलेंस की।

इलाज के दौरान हुई महिला की मौत

सकुल प्रजापति ने बताया कि 28 मार्च को पत्नी को अस्पताल ले जाने का कोई साधन नहीं मिला तो वे उन्हें ठेले पर लेकर चिकलहार स्वास्थ्य केंद्र चले गए, जो घर से तीन किलोमीटर दूर है। सकुल ने बताया कि चिकित्सकों ने कुछ दवाएं देकर उनकी पत्नी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। फिर वे अपनी पत्नी को पियारिया गांव में ठेले पर ही छोड़ कर कपड़े व पैसे लेने घर गए और फिर पत्नी को टेम्पो से लेकर अस्पताल पहुंचे।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/bDEe50k

दिल्ली विश्वविद्यालय: सामान्य विवि प्रवेश परीक्षा के आधार पर मिलेगा दाखिला

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह ने मंगलवार को 2022-23 शैक्षणिक सत्र के लिए विश्वविद्यालय की प्रवेश नीति जारी की।
इस बाबत बुलाई प्रेस कांफ्रेस में उन्होंने कहा कि योग्यता सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के अंकों के आधार पर तय की जाएगी। विश्वविद्यालय में प्रवेश सामान्य परीक्षा के माध्यम से होगा जिसे देश में 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।

उन्होंने सीयूईटी-2022 को मील का पत्थर बताया। पिछले साल तक डीयू में प्रवेश कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में कट-आफ अंकों के आधार पर होता था। कुलपति ने कहा-सभी उम्मीदवारों के लिए सीयूईटी-2022 में उपस्थित होना अनिवार्य है, जिसमें अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश पाने वाले भी शामिल हैं। पात्रता मानदंड सीयूईटी में प्राप्त अंकों के आधार पर तय किया जाएगा। सिंह ने कहा कि अल्पसंख्यक कालेजों के लिए आरक्षित 50 फीसद सीटों में से 85 फीसद मैरिट के आधार पर सीयूईटी से लिए जाएंगे और शेष 15 फीसद कालेजों द्वारा तय किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि गैर-आरक्षित 50 फीसद सीटों पर प्रवेश विशुद्ध रूप से सीयूईटी के आधार पर होगा। जीसस एंड मैरी, सेंट स्टीफंस और श्री गुरु तेग बहादुर खालसा जैसे अल्पसंख्यक कालेजों में 50 फीसद सीटें अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आरक्षित हैं। सीयूईटी में मिले अंकों के आधार पर ही पात्रता तय होगी। सीयूईटी में शामिल होने के लिए छात्र संकाय (12वीं में पढ़े विषयों के अनुसार) चुन सकेंगे।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/0bC9RP4

दिल्ली विश्वविद्यालय: सामान्य विवि प्रवेश परीक्षा के आधार पर मिलेगा दाखिला

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति योगेश सिंह ने मंगलवार को 2022-23 शैक्षणिक सत्र के लिए विश्वविद्यालय की प्रवेश नीति जारी की।
इस बाबत बुलाई प्रेस कांफ्रेस में उन्होंने कहा कि योग्यता सामान्य विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के अंकों के आधार पर तय की जाएगी। विश्वविद्यालय में प्रवेश सामान्य परीक्षा के माध्यम से होगा जिसे देश में 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।

उन्होंने सीयूईटी-2022 को मील का पत्थर बताया। पिछले साल तक डीयू में प्रवेश कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में कट-आफ अंकों के आधार पर होता था। कुलपति ने कहा-सभी उम्मीदवारों के लिए सीयूईटी-2022 में उपस्थित होना अनिवार्य है, जिसमें अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश पाने वाले भी शामिल हैं। पात्रता मानदंड सीयूईटी में प्राप्त अंकों के आधार पर तय किया जाएगा। सिंह ने कहा कि अल्पसंख्यक कालेजों के लिए आरक्षित 50 फीसद सीटों में से 85 फीसद मैरिट के आधार पर सीयूईटी से लिए जाएंगे और शेष 15 फीसद कालेजों द्वारा तय किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि गैर-आरक्षित 50 फीसद सीटों पर प्रवेश विशुद्ध रूप से सीयूईटी के आधार पर होगा। जीसस एंड मैरी, सेंट स्टीफंस और श्री गुरु तेग बहादुर खालसा जैसे अल्पसंख्यक कालेजों में 50 फीसद सीटें अल्पसंख्यक समुदायों के लिए आरक्षित हैं। सीयूईटी में मिले अंकों के आधार पर ही पात्रता तय होगी। सीयूईटी में शामिल होने के लिए छात्र संकाय (12वीं में पढ़े विषयों के अनुसार) चुन सकेंगे।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/0bC9RP4

उत्सर्जन में कमी करने का बेहतरीन मौका

जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक संगठन का कहना है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए दुनिया के पास अभी तक का सबसे अच्छा मौका है, लेकिन सभी क्षेत्रों और देशों में कठोर और तेज कटौती की आवश्यकता है, ताकि तापमान को सुरक्षित स्तर पर रखा जा सके। आज जारी रगवर्नमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज (आइपीसीसी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 में इस तरह के अंतिम आकलन के बाद से वैश्विक उत्सर्जन में कटौती करने के अवसरों में तेजी से वृद्धि हुई है। लेकिन कार्रवाई करने की आवश्यकता भी कहीं अधिक जरूरी हो गई है। रिपोर्ट इस बात का निश्चित आकलन है कि बढ़ते तापमान का समाधान खोजने में दुनिया कितना अच्छा कर रही है। हम सभी ने रिपोर्ट में अपना विशेषज्ञ योगदान दिया। दुनिया के लिए इस रिपोर्ट का क्या अर्थ है।

ग्लेन पीटर्स, दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुकूल शमन पथ के प्रमुख लेखक के मुताबिक रिपोर्ट में पाया गया है कि दुनिया ने एक दशक में उत्सर्जन में कमी पर प्रगति की है। 2010 में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में वृद्धि दर 1.3% प्रति वर्ष हो गई, जबकि 2000 के दशक में यह 2.1% थी। लेकिन वैश्विक उत्सर्जन रेकार्ड ऊंचाई पर बना हुआ है। यदि नीतिगत महत्त्वाकांक्षा तुरंत नहीं बढ़ती है, तो तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाएगा और इसकी वृद्धि को दो डिग्री से कम रखने का पेरिस समझौते का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा।

चिंताजनक रूप से, दुनिया की मौजूदा नीतियों ने हमें 80 वर्षों के भीतर ग्लोबल वार्मिंग के मार्ग पर 2.2 डिग्री सेल्सियस और 3.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा है। यह लगभग एक दशक पहले के 4 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक की आशंका से कहीं बेहतर है, लेकिन अभी भी पेरिस समझौते के अनुरूप नहीं है।

सदी के अंत तक ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने की 50% संभावना के लिए, वैश्विक सीओ2 उत्सर्जन एक दशक में आधा होना चाहिए, 2050 के दशक में शुद्ध शून्य तक पहुंचना चाहिए और उसके बाद शुद्ध नकारात्मक हो जाना चाहिए। इन परिदृश्यों में मीथेन उत्सर्जन को भी 2050 तक आधा करना होगा। आइपीसीसी का कहना है कि 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन को आधा करना व्यवहार्य और हासिल करने योग्य है। लेकिन इसके लिए सभी क्षेत्रों, देशों और सरकार के स्तरों पर जलवायु नीति में तत्काल परिवर्तन की आवश्यकता है। अमीर देशों को उत्सर्जन में सबसे तेजी से कटौती करनी चाहिए।

कोई भी पीछे न छूटे

अरुणिमा मलिक, (इंट्रोडक्शन और फ्रेमिंग पर प्रमुख लेखक) का कहना है कि 2016 में, संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य लोगों, ग्रह और समृद्धि के लिए एक कार्य योजना लागू किए गए। सतत विकास भविष्य की पीढ़ियों से समझौता किए बिना वर्तमान की जरूरतों को पूरा करता है। जैसा कि नवीनतम आइपीसीसी रिपोर्ट जोर देती है, इसे प्रभावी जलवायु कार्रवाई के बिना हासिल नहीं किया जा सकता है।

एक सतत विकास लक्ष्य स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन से निपटने पर केंद्रित है। लेकिन जलवायु कार्रवाई अन्य सभी लक्ष्यों से जुड़ी हुई है, जिनमें ऊर्जा, शहर, उद्योग, भूमि, पानी और लोगों से संबंधित लक्ष्य शामिल हैं। उत्सर्जन में कमी की नीतियां समावेशी होनी चाहिए। साथ ही मौजूदा गरीबी और भूख को बढ़ाने जैसे अनपेक्षित परिणामों से बचना चाहिए। कम कार्बन वाली दुनिया में संक्रमण न्यायसंगत होना चाहिए और किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। (द कन्वरसेशन)



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/uwOJTde

चुनावी घोषणापत्रों को बाध्यकारी बनाने पर फिर छिड़ी बहस

राजनीतिक दलों की ओर से जारी किए जाने वाले चुनावी घोषणापत्रों के बाध्यकारी बनाने पर एक बार फिर से चर्चा शुरू हो गई है। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि चुनावी घोषणापत्र को पार्टियों के लिए बाध्यकारी बनाने के विषय पर सभी राजनीतिक दलों को गंभीरता से विचार करना चाहिए। साथ ही उन्हें देश हित में एक सहमति बनानी चाहिए।

राजनीतिक दलों को चुनावी वादों के प्रति जवाबदेह बनाने और घोषणापत्र को विनियमित करने का मामला समय-समय पर अदालतों के पास भी गया है। हाल में ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्र चुनाव के दौरान उनकी नीति, दृष्टिकोण, वादों और प्रतिज्ञा का बयान है, जो बाध्यकारी नहीं है और इसे अदालतों के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता है।

हालांकि चुनाव आयोग ने इसका पालन कराने की कोशिश की है। अन्ना द्रमुक की ओर से तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2016 के लिए जारी घोषणापत्र में किए गए चुनावी वादों को पूरा करने के लिए तर्कपूर्ण वित्तीय प्रबंध और साधन नहीं बता पाने पर इसे सेंसर कर दिया था। इतना ही नहीं कार्मिक, जन शिकायत, कानून और न्याय पर संसद की स्थायी समिति ने सिफारिश की थी कि आदर्श आचार संहिता को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाया जाए।

इसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 का हिस्सा बनाया जाए। ऐसे उपायों से चुनाव आयोग की शक्तियां बढ़ेंगी और राजनीतिक दलों में चुनावी घोषणापत्र में खोखले वादे न करने का डर पैदा होगा। दो दशक से लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों के घोषणापत्र में संसद और विधान सभाओं में महिला आरक्षण देने का वादा प्रमुखता से होता है। लेकिन सरकार बनने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता रहा है।

नायडू ने यह सुझाव राज्यसभा में उस समय दिया जब राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा ने शून्यकाल में चुनावी घोषणापत्रों की खत्म होती प्रासंगिकता का विषय उठाया। उन्होंने कहा कि घोषणापत्रों को लेकर राजनीतिक दलों में जो गंभीरता होनी चाहिए, उसमें लगातार गिरावट हो रही है। झा ने कहा कि 1952, 1957 और 1962 के दौर के चुनावों में जनसंघ हो या कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी हों या फिर सोशलिस्ट पार्टी हों, जो संभव होने वाली बातें होती थीं, उन्हें ही अपने घोषणापत्रों में शामिल करते थे और उस पर चर्चा होती थी। झा ने कहा कि मैं सभी पक्षों से और सरकार से भी आग्रह करता हूं कि एक बार सामूहिक रूप से बैठकर एक पद्धति विकसित की जाए ताकि चुनाव के केंद्रीय विमर्श में सकारात्मक एजंडा आए। न कि ऐसी चीजें जिनसे नफरत की दीवारें खड़ी होती हैं।

नायडू ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए कुछ सदस्यों से उनके सुझाव भी मांगे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौडा से भी चुनावी घोषणापत्र को कानूनी तौर पर बाध्य बनाने की संभाव्यता पर राय मांगी। इसके जवाब में देवेगौड़ा ने कहा कि उनके लिहाज से इस मुद्दे पर गंभीरता से चिंतन होना चाहिए। इसी दौरान किसी सदस्य ने नायडू से कहा कि वे सरकार से इस बारे में राय पूछें।

इस पर नायडू ने उस सदस्य से कहा कि क्या यदि सरकार तैयार हो जाती है तो आप भी तैयार होंगे? नायडू ने कहा कि राजनीतिक दलों को बैठक कर इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए और फिर देश हित में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां जो मुद्दा उठाया गया है, वह वास्तविक मुद्दा है और महत्त्वपूर्ण भी है।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/B68NgOb

BJP को हराना या जिताना मेरा काम नहीं- ABP News से बोले केजरीवाल, बुलडोजर नीति पर भी कह दी बड़ी बात

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का कहना है कि बीजेपी को हराना या जिताना उनका काम नहीं है। उनके लिए देश सबसे पहले है। कोई उनसे पूछता है कि आप कौन से अलायंस का हिस्सा हैं तो मेरा जवाब होता है कि मेरे लिए देश सबसे पहले है। मैं इस देश के 130 करोड़ लोगों का अलायंस बनाना चाहता हूं। उनको राष्ट्र निर्माण में लगाना चाहता हूं। दरअसल एबीपी पर एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया था कि पीएम मोदी कैसे काम कर रहे हैं। क्या बीजेपी को हराया जा सकता हैं।

एमसीडी चुनावों को लेकर केजरीवाल ने कहा कि एमसीडी में जनता अपना गुस्सा निकालने के लिए बेताब है। बीजेपी मे 15 साल में भ्रष्टाचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दिल्ली के तीनों निगमों को एक करने पर केजरीवाल ने कहा कि हम निगम एकीकरण के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन बीजेपी को एकीकरण नहीं करना था। इनको सिर्फ चुनाव टालने थे।

एक सवाल के जवाब में उनका कहना था कि उनका एकमात्र ख्वाब भारत को दुनिया में नंबर एक बनते देखना है। दिल्ली का सीएम बनने के बाद उन्हें लगता है कि ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने जो काम 5 साल में किया वो 75 साल में नहीं हो पाया। हमारे देश में हर चीज है पर राजनीति खराब है।

केजरीवाल ने कहा कि काम के आधार पर वोट मिलता है। पहले लोग मुझसे कहते थे कि स्कूल, अस्पताल के नाम पर वोट नहीं पड़ता लेकिन हमने तीन चुनाव और पंजाब का चुनाव स्कूल, अस्पताल, बिजली, पानी के मुद्दे पर ही जीते हैं। उनका कहना था कि दस साल के अंदर हम दो राज्यों में क्यों आए क्योंकि हम जो बातें करते हैं वह हर आदमी चाहता है। दिल्ली में हमने कर के दिखा दिया लोगों को समझ आ गया कि ये सिर्फ बातें ही नहीं करते बल्कि काम भी करके दिखाते हैं।

महंगाई पर उनका कहना था कि वो पहले ही दिल्ली के लोगों को काफी राहत दे चुके हैं। उन्होंने बिजली, ट्रांसपोर्ट औऐर शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो रियायतें दी हैं उनसे हर परिवार को 15 हजार रुपये तक का खर्च बच रहा है। उनसे सवाल किया गया था कि क्या वो तेल के दाम घटाने जा रहे हैं।

एंकर ने उनसे सवाल किया कि वो सूबा देखकर आईकॉन को क्यों चुनते हैं। केजरीवाल का जवाब था कि बाबा साहेब अंबेडकर की तस्वीर लगाने के लिए ऐलान के बाद ही सारा विवाद पैदा हुआ। पंजाब में गांधी जी की तस्वीर न लगाने के सवाल पर उनका कहना था कि भगवंत मान के एक कमरे में भगत सिंह और अंबेडकर साहेब की तस्वीर लगाई गई है। यूपी की बुलडोजर सरकार के सवाल पर उनका कहना था कि अपराधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन गरीब की सरकार को मदद करनी चाहिए।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/BplyeUj

Monday, April 4, 2022

पाकिस्तान : संविधान के प्रावधान पर उठे सवाल

पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद वहां के संविधान के अनुच्छेद पांच की बेहद चर्चा है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर ने अनुच्छेद पांच के तहत ही अविश्वास प्रस्ताव को खारिज किया है। पाकिस्तान के 1973 में लिखे गए संविधान के अनुच्छेद पांच में रियासत के नाम वफादारी और संविधान-कानून के अनुपालन की बात करता है।

अनुच्छेद पांच का पहला प्रावधान कहता है ‘पाकिस्तान के हर व्यक्ति का यह बुनियादी फर्ज है कि वह अपनी रियासत के प्रति वफादार रहेगा।’ दूसरा प्रावधान कहता है ‘संविधान और कानून का अनुपालन करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। चाहे वह पाकिस्तान में स्थायी तौर पर रह रहा हो या कुछ समय के लिए शरण लेकर आया हो।’

वहां की नेशनल असेंबली में बैठक के दौरान सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ अनुच्छेद पांच का हवाला देते हुए विपक्ष को घेरा। डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने प्रस्ताव को खारिज कर सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। अब पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद पांच को लेकर बहस शुरू हो गई है। इसके प्रावधानों पर सवाल उठने लगे हैं। पाकिस्तान के कानून विशेषज्ञ सरूप एजाज ने कहा कि पहली नजर में यह कदम संविधान और लोकतांत्रिक मानदंडों के खिलाफ है।

पाकिस्तान के विपक्षी दल ने डिप्टी स्पीकर के कदम को असंवैधानिक बताया है। विपक्ष का कहना है कि जिसने भी नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होने से रोका है, उन्होंने देशद्रोह का अपराध किया है। विपक्ष ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पाकिस्तानी अखबार ‘द डान’ में छपे संपादकीय का शीर्षक ही रखा गया है ‘लोकतंत्र का विनाश’।

इसमें कहा गया ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के कदम ने संसदीय प्रक्रिया को कुचलने और देश को एक संवैधानिक संकट में धकेलने का काम किया है।’ कानून के जानकार जिबरान नसीर ने इस अखबार से बातचीत में कहा अगर इस लोकतांत्रिक देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ ही छेड़छाड़ की गई तो इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का वजूद खतरे में आ जाएगा।

दक्षिण एशिया में ‘एडवोकेट्स फार जस्टिस एंड ह्यूमन राइट्स’ (आइसीजे) की कानूनी सलाहकार रीमा उमर के मुताबिक, इसमें अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं है। डिप्टी स्पीकर का फैसला पूरी तरह असंवैधानिक है। इमरान के पास मौजूदा समय में कोई अधिकार नहीं है कि वे राष्ट्रपति से संसद भंग करने की सिफारिश कर सकें।

पाकिस्तानी कानूनविद सलमान अकरम राजा एक टीवी चैनल से कहा कि विपक्ष के पास सिर्फ एक ही रास्ता था कि वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और इस असंवैधानिक फैसले के खिलाफ कोर्ट के जरिए संविधान का पालन करवाए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 69 के तहत नेशनल असेंबली या सीनेट के किसी फैसले में सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

अब्दुल मोइज जाफरी ने कहा कि अनुच्छेद 69 संसदीय मामलों में दखल की कोर्ट की ताकतों को सीमित तो करता है, लेकिन अगर सदन में ही कोई असंवैधानिक कार्य हो रहा हो तो यह कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह संविधान का पालन करवाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में डिप्टी स्पीकर के फैसले को कोर्ट बदल सकता है। खासकर जब आपके कदम दुर्भावनापूर्ण इरादे से लिए गए हों।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/UVXZuFD

अभी मैं जिंदा हूं- संसद में जब फिसली सुप्रिया सुले की जुबान तो बोल उठे किरेन रिजिजू

लोकसभा में एक चर्चा के दौरान एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले की जुबान फिसल गई और उन्होंने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के नहीं रहने की बात कह दी। इसके बाद जैसे ही इसकी जानकारी रिजिजू को हुई तो उन्होंने मजकिया लहजे में कहा कि वो अभी जिंदा हैं। हालांकि तब तक सुप्रिया सुले अपनी भूल को सुधारते हुए माफी मांग चुकीं थीं।

दरअसल सुप्रिया सुले किरेन रिजिजू की तारीफ कर रहीं थीं, लेकिन ये तारीफ तब की थी जब रिजिजू खेल राज्य मंत्री थे। इसी बात को कहने के दौरान सुले से गलती हुई और उन्होंने मंत्रालय में नहीं रहने के बजाय कह दिया कि केंद्रीय मंत्री अब नहीं रहे…। सुले अपनी बात बोलती ही जा रही थीं, उन्हें इस गलती का जरा सा भी अहसास नहीं था।

उस समय जब सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने उनका ध्यान इस ओर दिलाया तो वो भी चौंक गईं। सबसे पहले उनके इस बयान पर ध्यान कांग्रेस के सांसद गौरव गोगोई का गया। कांग्रेस नेता ने सुले के बयान को सही करते हुए कहा कि रिजिजू अब खेल मंत्री नहीं हैं। इसके बाद जैसे ही सुले को अपनी गलती का अहसास हुआ, उन्होंने इसे ठीक करते हुए माफी भी मांग ली।

इसकी जानकारी जब रिजिजू को हुई तो उन्होंने ट्वीट करके कहा कि वो अभी जिंदा हैं और अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। हालांकि तारीफ के लिए उन्होंंने सुप्रिया सुले का धन्यवाद भी किया।

बता दें कि रिजिजू बीजेपी के सबसे मुखर सदस्यों में से एक हैं। तीन बार अरुणाचल प्रदेश से सांसद चुने गए रिजिजू पहले खेल राज्य मंत्री थे, लेकिन 2021 के कैबिनेट फेरबदल में उन्हें कानून मंत्री बना दिया। यहां भी रिजिजू अपने मुखर स्वभाव के कारण हमेशा चर्चाओं में बने रहते हैं।

हाल ही में जब सीजेआई ने कहा था कि सीबीआई की विश्वसनीयता खतरे में हैं, तब रिजिजू ने कहा था कि अब सीबीआई पिंजरे का तोता नहीं है, बल्कि वो एक बेहतरीन जांच एजेंसी है, जो अपना कर्तव्य सही तरीके से निभा रही है।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/QPhHKn5

मैं एक अदना सा वकील, केवल लोगों की मदद करना चाहता हूं, जानें कश्मीरी छात्रों की मदद करने वाले शख्स की कहानी

तकरीबन पांच महीने पहले हुए T-20 वर्ल्ड कप में भारत अपना मैच पाकिस्तान के हाथों हारा तो सारे देश में बवाल मच गया। क्रिकेट के प्रशंसकों को पाक के हाथों हार बर्दाश्त नहीं थी। सरकार भी लोगों के साथ थी। ऐसे में तीन कश्मीरी छात्रों ने पाक केस समर्थन में कुछ कहा तो उन्हें धर दबोचा गया। लेकिन उसके बाद जो हुआ वो समझ से परे था। किसी भी वकील ने उनकी पैरवी से पल्ला झाड़ लिया। ऐसे में मथुरा की कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस करने वाले माधवन दत्त चर्तुवेदी आगे आए।

फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट जस्टिस अजय भनोट ने तीनों छात्रों को जमानत दे दी है। लेकिन कोर्ट ने उन हालातों पर चिंता जताई जिसमें आगरा की बार एसोसिएशन ने तीनों की पैरवी से ही इन्कार कर दिया। जस्टिस ने कहा कि वो जमानत की याचिका पर सीधे ही सुनवाई कर रहे हैं, क्योंकि कोई भी वकील छात्रों की पैरवी करने को आगे नहीं आ रहा है। उनका कहना था कि हालांकि ये भी एक सच है कि वकील कानून और पीड़ितों की सहायता करने की शपथ लेते हैं पर उसके बाद भी ऐसा मंजर देखने को मिला।

माधवन का कहना है कि उन्होंने जो शपथ ली वो उस पर खरा उतरने की पुरजोर कोशिश करते हैं। चाहें उन्हें कितनी भी धमकियां मिलें। उनका कहना है कि जीवन का अंत जब होना तब होना है। उसकी वो परवाह नहीं करते। इंजीनियरिंग कर रहे तीनों कश्मीरी छात्रों का केस उन्होंने इसी भावना के तहत लिया था। मथुरा कोर्ट के बाहर एक छोटे से चैंबर में प्रैक्टिस करने वाले माधवन कहते हैं कि उनके लिए सेकुलरिज्म कोई इमोशनल या रिलिजियस पहलू नहीं है। मानवता उनके लिए सबसे ऊपर है। इसके लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं।

उनका कहना है कि वो केस लेते समय ये नहीं देखते की सामने वाला पैसा देने की स्थिति में है भी या नहीं। वो उसकी जरूरत पर सबसे पहले गौर करते हैं। उन्हें ये जज्बा अपने पिता राधे श्याम चौबे से मिला है। वो आजादी की लड़ाई के सिपाही थे। 50-60 के दशक में सीपीआई को मथुरा में जमाने में उन्होंने काफी काम किया था। पिता से जुड़े लोगों का उन पर काफी प्रभाव पड़ा। अपने छात्र जीवन से ही वो खुद भी वाम विचारधारा से जुड़े और कई धरना प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।

कश्मीरी छात्रों का केस जब उन्होंने लिया तो सोशल मीडिया पर उन्हें धमकियां तक दी गईं। उन्हें राष्ट्रविरोधी तक करार देने की कोशिश हुई पर इसका उन पर कोई असर नहीं पड़ा। विश्व हिंदू परिषद के संत युवराज के मामले में उन्होंने जमानत का विरोध किया तो उन पर हमला भी हुआ लेकिन इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। माधवन कहते हैं कि क्रांतिकारियों से उन्हें प्रेरणा मिलती है ऐसी धमकियों को झेलने की। उनसे पहले भी बहुत से लोगों ने ऐसी चीजें सहकर उनसे कहीं ज्यादा समाज के लिए किया है। वो मौत से नहीं डरते। जब तक जिंदा हैं काम चलता रहेगा। वो एक अदने से वकील हैं जो लोगों की मदद करने के लिए हमेशा और हर हालात में तत्पर रहता है।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/A1fnVW8

जो राम भक्ति में हैं उनका BJP में स्वागत है- शिवपाल पर सवाल का केशव प्रसाद मौर्य ने दिया इशारों में जवाब

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव इन दिनों अखिलेश यादव से फिर से नाराज बताए जा रहे हैं। बता दें कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के टिकट पर यूपी की जसवंतनगर विधानसभा से विधायक चुने गये हैं। लेकिन बीते दिनों सपा के विधायक दल की बैठक में नहीं बुलाए जाने पर वो सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराज हैं।

ऐसे में अब उनके भाजपा में जाने को लेकर अटकलें चल रही हैं। वहीं सोमवार को शिवपाल यादव ने भगवान श्री राम की स्तुति वाला ट्वीट किया। जिसके बाद से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। बता दें कि यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से इससे जुड़ा सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जो भी आज तक राम भक्ति से दूर रहते थे, आज राम भक्ति कर रहे हैं, उन सबका स्वागत है।

क्या था शिवपाल यादव का ट्वीट: बता दें कि 4 अप्रैल की सुबह शिवपाल यादव ने भगवान राम दरबार की एक फोटो ट्विटर पर शेयर की। उन्होंने लिखा, “प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥ आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥ भगवान राम का चरित्र ‘परिवार, संस्कार और राष्ट्र’ निर्माण की सर्वोत्तम पाठशाला है। चैत्र नवरात्रि आस्था के साथ ही प्रभु राम के आदर्श से जुड़ने व उसे गुनने का भी क्षण है।”

बता दें कि इस ट्वीट के बाद से शिवपाल यादव का झुकाव भाजपा के प्रति माना जा रहा है। वहीं इससे पहले उन्होंने सीएम योगी से मुलाकात भी की थी। जिसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने के कयास लगाये जाने लगे थे। हालांकि शिवपाल सिंह यादव के खेमे ने इसे महज शिष्टाचार भेंट बताया।

चुनाव आते हुई थी सुलह: बता दें कि शिवपाल यादव और अखिलेश यादव में 2012 के बाद से लगभग पांच सालों तक विवाद चलता रहा। वहीं 2022 विधानसभा चुनाव आते-आते शिवपाल और अखिलेश के बीच सुलह हो गई थी। नतीजा ये रहा कि शिवपाल यादव जसवंतनगर से सपा के चुनाव निशान पर मैदान में उतरे और जीते भी।

वहीं चुनाव जीतने के बाद दोनों के बीच फिर मामला का जस का तस नजर आ रहा है। बता दें कि नतीजों के बाद जब समाजवादी पार्टी ने विधायक दल की बैठक बुलाई तो शिवपाल यादव को उसमें नहीं बुलाया गया। इसको लेकर सपा की तरफ से कहा गया कि यह बैठक सपा के विधायकों की थी, न कि सहयोगी दल के नेताओं की। शिवपाल हमारे सहयोगी दल के नेता हैं।

इसी के बाद से ही शिवपाल सिंह यादव अखिलेश यादव से नाराज बताए जा रहे हैं और तब से ही शिवपाल यादव के बीजेपी में शामिल होने की खबरें चल रही हैं। हालांकि मीडिया से बात करते हुए शिवपाल यादव साफ कर चुके हैं कि इसपर जब भी फैसला होगा, बताया जाएगा। वहीं शिवपाल यादव की ‘राम भक्ति’ को लेकर केशव प्रसाद मौर्य ने भी बड़ा बयान देकर यूपी की सियासत में गर्मी पैदा कर दी है।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/HfhW5eu

Sunday, April 3, 2022

पंजाब में जीत के बाद अब गुजरात में तीसरी ताकत के तौर पर बड़ा खेल करने की तैयारी में AAP

पंजाब विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आम आदमी पार्टी का आत्मविश्वास इस वक्त चरम पर है। पंजाब के बाद अब पार्टी अन्य चुनावी राज्यों पर भी अपनी नजरें जमाए हुए हैं। इसी कड़ी में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात की राजधानी अहमदाबाद एक बड़ा रोड शो का आयोजन किया, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के आगे चुनौती पेश कर राज्य के लोगों को तीसरा राजनीतिक विकल्प दिया जा सकें।

जानकारी के मुताबिक आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अहमदाबाद में कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों के साथ बंद कमरे में बैठके की हैं। 27 मार्च को केजरीवाल भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) के नेता और डीडियापाड़ा से विधायक महेश वसावा से मुलाकात की। उनकी पार्टी के पास वर्तमान में दो विधायक हैं। इस मुलाकात के बाद अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी आप के गठबंधन कर सकती है।

आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता योगेश जड़वानी ने कहा कि रविवार को केजरीवाल ने दो कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं के साथ कुछ सामाजिक और राजनीतिक लोगों से मुलाकात की है। हम केजरीवाल के अगले गुजरात दौरे के लिए इससे बड़ा रोड शो करने की योजना बना रहे हैं।

बैठकों से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अहमदाबाद के स्वामी नारायण मंदिर गए, जिसके अनुयायी मुख्य रूप से गुजरात की राजनीति में प्रभाव रखने वाला पाटीदार समुदाय है। वहीं, आम आदमी पार्टी की कोशिश लेउवा पाटीदार के बड़े नेता नरेश पटेल को अपनी पार्टी में लाने की है।

केजरीवाल का रोड शो: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मिलकर रोड शो किया। यह अहमदाबाद के खोडियर माता मंदिर निकोल से शुरू हुआ। इस इलाके में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और पाटीदार समुदाय के लोग रहते हैं। निकोल वहीं इलाका है जहां पर 2015 में हार्दिक पटेल के नेतृत्व पाटीदार आंदोलन हुआ था।

गुजरात सरकार में मंत्री और प्रवक्ता जीतू वघानी ने कहा कि गुजरात सभी बहार के सभी लोगों का स्वागत करता है और केजरीवाल एक बड़े शहर के मेयर है। वहीं, कांग्रेस ने केजरीवाल को भाजपा की ‘बी’ टीम बताया।

गुजरात में आम आदमी पार्टी: आम आदमी पार्टी की गुजरात इकाई का गठन 2013 में किया गया था। 2021 में आप को पहली बार सफलता सूरत नगर निगम चुनाव में मिली, जब वह कांग्रेस को पछाड़कर मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। वहीं, गाँधीनगर निगम में भी आप के पास एक पार्षद है।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/QqrRHIT

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में एक लाख से अधिक फ्लैट खाली

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) के बिल्डरों को अपने 1.01 लाख खाली पड़े (अनसोल्ड) फ्लैटों को बेचने में करीब छह साल लगेंगे। संपत्ति सलाहकार कंपनी प्रॉपटाइगर ने यह राय जताई है। प्रापटाइगर का हालांकि मानना है कि बंगलुरु और कोलकाता के बिल्डर अपने बिना बिके मकानों को 31 माह में बेच सकेंगे।

आस्ट्रेलिया के आरईए समूह और न्यूज कार्प के स्वामित्व वाले तीन रियल एस्टेट पोर्टल हाउसिंग.काम, प्रापटाइगर और मकान.काम सलाहकार और ब्रोकरेज सेवाएं प्रदान करते हैं। प्रापटाइगर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आठ प्रमुख शहरों में बिल्डरों के पास 31 मार्च, 2022 तक करीब 7,35,852 आवासीय इकाइयां ऐसी थीं, जो बिक नहीं पाई हैं। पिछले साल मार्च में ऐसे फ्लैटों की संख्या 7,05,344 थी। प्रापटाइगर की रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले इन खाली फ्लैटों की बिक्री में 47 माह का समय लगने का अनुमान था। लेकिन हाल के समय में घरों की मांग बढ़ी है।

इससे खाली घरों की बिक्री में अब 42 महीने का समय लगने का अनुमान है। सबसे ज्यादा बिना बिके फ्लैट दिल्ली-एनसीआर में हैं। वहीं बंगलुरु और कोलकाता में इनकी संख्या सबसे कम है। 31 मार्च, 2022 तक अहमदाबाद में 62,602 आवासीय इकाइयां खाली थीं। अहमदाबाद के फ्लैटों की बिक्री में 42 महीने का समय लगने का अनुमान है। वहीं बंगलुरु में खाली घरों की संख्या 66,151 और कोलकाता में 23,850 थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगलुरु और कोलकाता के बिल्डरों को अपने खाली फ्लैटों को बेचने में 31 माह का समय लगेगा। इसी तरह चेन्नई में बिना बिके खाली पड़े घरों की संख्या 34,059 है। इन्हें बेचने में बिल्डरों को 34 महीने लगेंगे। हैदराबाद में 73,651 घर खाली पड़े हैं। इनकी बिक्री में 42 महीने का समय लगने का अनुमान है।

मुंबई और पुणे में बिना बिकी आवासीय इकाइयों की संख्या क्रमश: 2,55,814 (बेचने में 48 महीने का समय लगेगा) और 1,18,321 (32 महीने का समय) है। दिल्ली-एनसीआर के बाजार में खाली पड़े फ्लैटों की संख्या 1,01,404 इकाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिल्डरों को इन फ्लैटों को बेचने में छह साल से अधिक यानी 73 महीने का समय लगेगा। पिछले सप्ताह प्रापटाइगर ने कहा था कि आठ प्रमुख शहरों में जनवरी-मार्च के दौरान घरों की बिक्री साल-दर-साल आधार पर सात प्रतिशत बढ़कर 70,623 इकाई हो गई है।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/fiFWsDe

मार्च में भीषण गर्मी पड़ने का ‘अल नीनो’ से कोई संबंध नहीं : मौसम विज्ञानी

भारत में 122 वर्षो में इस साल मार्च के महीने में औसत तापमान सबसे अधिक रहा। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर और मध्­य भारत में लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की संभावना नहीं हैं। मौसमी परिस्थितियों, मानसून के पैटर्न तथा हिमालयी एवं तटीय क्षेत्रों पर इसके प्रभाव के बारे में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) में राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक राजेन्द्र कुमार जेनामणि ने बताया कि भारत में तापमान का रेकार्ड वर्ष 1901 से रखा जाना शुरू हुआ था। साल 2022 के मार्च महीने के तापमान ने वर्ष 2010 के मार्च में दर्ज औसत अधिकतम तापमान के सर्वकालिक औसत को पार कर लिया। 2010 के मार्च में अधिकतम तापमान का औसत 33.09 डिग्री सेल्सियस रहा था लेकिन मार्च 2022 में औसत तापमान 33.1 डिग्री दर्ज किया गया।

दुनियाभर में भी दो दशक में सबसे गर्म साल देखने को मिले हैं। जलवायु परिवर्तन का असर मौसम की तीव्रता पर पड़ रहा है, भारत में भी यह भीषण बाढ़, चक्रवात या भारी बारिश के रूप में देखने को मिला है। इसमें उत्तर में पश्चिमी विक्षोभ एवं दक्षिण में किसी व्यापक मौसमी तंत्र के नहीं बनने के कारण वर्षा की कमी का प्रभाव भी एक कारण है। पिछले कुछ सालों में ऐसे दिन ज्­यादा रहे हैं जब बारिश हुई ही नहीं। कुछ मामलों में बहुत ज्­यादा बारिश हुई और गर्मी भी बढ़ती गई।

जेनामणि ने बताया कि इस साल मार्च के उतरार्द्ध में देश के कई हिस्­सों में तापमान में वृद्धि देखने को मिली, लेकिन बारिश कम हुई। दिल्­ली, हरियाणा और उत्त्र भारत के हिल स्­टेशन में भी दिन के वक्­त सामान्­य से ज्­यादा तापमान दर्ज किया गया। दिल्­ली, चंदरपुर, जम्मू, धर्मशाला, पटियाला, देहरादून, ग्­वालियर, कोटा और पुणे समेत कई स्थानों पर मार्च 2022 में रेकार्ड अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।

पश्चिम हिमालयी क्षेत्र के पर्वतीय पर्यटन स्थलों पर भी दिन के वक्­त काफी ज्­यादा तापमान दर्ज किया गया। देहरादून, धर्मशाला या जम्­मू जैसे हिल स्­टेशन पर मार्च में 34-35 डिग्री सेल्सियस तक तापमान दर्ज किया गया, जो बहुत ज्­यादा है। इस बार तापमान उन क्षेत्रों के अधिक रहा, अपेक्षाकृत ठंडा मौसम रहना चाहिए था। इसका एक उदाहरण पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र है, जहां लंबे समय से ऐसा कुछ नहीं देखने को मिला।

मौसम विज्ञानी के मुताबिक जब कोई महीना तुलनात्मक रूप से ज्यादा गर्म रहता है तब इससे यह संकेत मिलता है कि यह जलवायु परिवर्तन का असर है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव यही है कि इस साल मार्च महीने में तापमान का ज्यादा प्रभाव रहा। ऐसे में 122 वर्ष में इस साल मार्च महीने में तापमान अखिल भारतीय स्तर पर औसतन सबसे अधिक रहा। उन्होंने कहा कि अल नीनो प्रभाव पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में सतही जल के असामान्य रूप से तापमान बढ़ने की स्थिति को दर्शाता है।

हालांकि, भारत में हाल के दिनों में तापमान में वृद्धि का अल नीनो प्रभाव से कोई संबंध नहीं है। भारत बहुत बड़ा देश है और कई मौसमी परिघटनाएं स्थानीय प्रभाव के कारण भी होती हैं। अभी अप्रैल महीना शुरू ही हुआ है और मानसून आने में अभी समय है। हमारे पास ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जो मार्च महीने के तापमान के आधार पर मानसून के पैटर्न से कोई संबंध जोड़ता हो। ऐसे में मानसून पर प्रभाव के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।



from National News in Hindi, Latest India’s News in Hindi, Hindi National News, नेशनल न्यूज़ - Jansatta | Jansatta https://ift.tt/JDvUdlR

Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...