Wednesday, March 30, 2022

आइपीएल खोजेगा भारतीय टीम का अगला कप्तान

चरनपाल सिंह सोबती

इस समय रोहित शर्मा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तीनों स्वरूपों में भारत के कप्तान हैं। विराट कोहली के कप्तानी छोड़ने से जो संकट आया था, वह हाल फिलहाल नहीं है पर इसका मतलब यह नहीं कि भारत की लंबे समय तक के लिए कप्तान की जरूरत की बहस खत्म हो गई- रोहित शर्मा की उम्र (जल्दी ही 35 साल के होने वाले हैं) को देखते हुए, खास तौर पर सफेद गेंद वाली क्रिकेट के लिए, लंबे समय तक टीम के साथ रहने वाले कप्तान को तैयार करना होगा। उसे पहचान कर, रोहित शर्मा के साथ जोड़ना होगा। तो कौन हो सकता इसका दावेदार?

आइपीएल 2022 शुरू हो चुका है और पूरे देश की नजर नए और युवा भारतीय कप्तान पर है जो सिर्फ जीत को लक्ष्य बनाकर मैदान में है – चाहे वे श्रेयस अय्यर, ऋषभ पंत, केएल राहुल, मयंक अग्रवाल या हार्दिक पांड्या हों। आइपीएल, एक शानदार मौका है इन युवा कप्तान को देखने का कि वे अपनी टीम की कप्तानी कैसे करते हैं? देखते हैं इन कप्तानों को :

डीसी : सबसे ज्यादा चर्चा ऋषभ पंत की है- गजब का क्रिकेट दिमाग। युवा ऋषभ ने अपने करिअर में लंबा सफर तय किया है- सिर्फ 24 साल का होने के बावजूद। हर बात में तुलना- विकेटकीपिंग में एमएस धोनी से तो तेज तर्रार और बाएं हाथ की बल्लेबाजी में आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी एडम गिलक्रिस्ट से। उनकी वकालत करने वालों में खास नाम आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान और दिल्ली कैपिटल्स के मुख्य प्रशिक्षक रिकी पोंटिंग का है। पंत और रोहित शर्मा के बीच समानता की चर्चा के लिए उनसे बेहतर स्थिति में कोई नहीं। पोंटिंग तब मुंबई इंडियंस का हिस्सा थे, जब रोहित को 2013 सीजन में फिर से कप्तान बनाया था। आने वाले सालों में, ऋषभ के अंतरराष्ट्रीय कप्तान बनने की पूरी संभावना है।

सीएसके : आइपीएल 2022 की शुरुआत से ठीक पहले धोनी ने सीएसके की कप्तानी रवींद्र जडेजा को सौंप दी। स्टार आलराउंडर, 2012 से चेन्नई सुपर किंग्स टीम में हैं और धोनी और सुरेश रैना के बाद चेन्नई फ्रेंचाइजी का नेतृत्व करने वाले सिर्फ तीसरे खिलाड़ी। यह मानने वालों की कमी नहीं कि रवींद्र जडेजा को टीम इंडिया के कप्तान के तौर पर तैयार करने की योजना है। अब नहीं, तो शायद कभी नहीं क्योंकि जडेजा की भी उम्र बढ़ रही है। रोहित पर कप्तानी का दबाव है और जडेजा उन खिलाड़ियों में से एक हैं जो यह जिम्मेदारी बांट सकते हैं।

केकेआर : पिछले साल तक दिल्ली कैपिटल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले श्रेयस अय्यर इस बार कोलकाता फ्रेंचाइजी के कप्तान- केकेआर ने विशाल नीलामी में 12.25 करोड़ रुपए में खरीदा था और इयोन मार्गन की जगह कप्तान बनाया। तुलना में, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चर्चा में श्रेयस अय्यर को ‘नया’ कहा जा सकता है पर अपनी खूबियों के कारण छुपे रुस्तम हैं। आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है तो ये श्रेयस के पास है। हाल के भारत के लिए सीमित ओवर और टैस्ट क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन से उनकी छवि एकदम बदल गई। नई टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए कुछ खास करने का इरादा और हो सकता है कि टीम इंडिया के लिए फायदे में बदल जाए।

एलएसजी : इस सीजन में आइपीएल में नई आई लखनऊ फ्रेंचाइजी ने भारत के ओपनर बल्लेबाज केएल राहुल को कप्तान बनाया- पिछले सीजन तक पंजाब किंग्स के कप्तान थे। एलएसजी ने टीम का ताना-बाना उनके इर्द-गिर्द बुना और टीम की क्रिकेट पर उनकी छाप रहेगी। केएल राहुल तो कप्तान रह भी चुके हैं। अब एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं।

जीटी : एक और नई फ्रेंचाइजी, गुजरात ने भारत के स्टार आलराउंडर हार्दिक पांड्या को कप्तान बनाया। हार्दिक, पिछले सीजन तक मुंबई इंडियंस का प्रतिनिधित्व कर रहे थे- उनके सेटअप का एक खास हिस्सा थे। इस सीजन में पहली बार किसी आइपीएल टीम का नेतृत्व कर रहे हैं और चूंकि टीम के पहले क्रिकेटर थे- टीम तैयार करने में उनकी खास भूमिका है। गुजरात फ्रेंचाइजी का आइपीएल में पहला सीजन और टीम ने उन्हें सबसे पहले क्रिकेटर के तौर पर लेते हुए गुजरात कनेक्शन को ध्यान में रखा पर बिना कप्तानी के किसी खास अनुभव वाले हार्दिक पांड्या को कप्तान बनाया उनका युवा जोश देखकर। वे इस आइपीएल में चौंका सकते हैं।

पीबीकेएस : पंजाब को मयंक अग्रवाल के तौर पर एक नया कप्तान मिला है- उन्हें विशाल नीलामी से पहले फ्रेंचाइजी ने रिटेन किया था। यह मयंक का आइपीएल कप्तान के तौर पर पहला अनुभव है। कुछ खास होगा, वे तभी दावेदार होंगे।



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एश्ले बार्टी का संन्यास : सायास या तनाव का एहसास

मनीष कुमार जोशी

सुनील गावस्कर ने जब संन्यास लिया था तो कहा था कि खिलाड़ी को तब खेल को अलविदा कह देना चाहिए, जब वह अपने शीर्ष पर हो। उसके संन्यास लेने पर लोग उससे विनती करें कि वह वापस लौटे। यही स्थिति होती है, जब एक खिलाड़ी को खेल से अलग हो जाना चाहिए। यह बयान गावस्कर ने तब दिया था जब क्रिकेट पेशेवर नहीं था। आज क्रिकेटर 40 साल की उम्र तक खेलते हैं।

गावस्कर ने यह बयान दिया था तो टेनिस पेशेवर था। तब मार्टिना नवरातिलोवा जैसी खिलाड़ी 35 की उम्र के बाद भी ग्रैंड स्लैम जीत रही थीं। जान मैकनरो और इवान लैंडल भी बढ़ती उम्र के साथ सफल हो रहे थे। क्रिस एवर्ट लायड का खेल बढ़ती उम्र के साथ और निखर रहा था। तब कोई भी टेनिस खिलाड़ी अपना रैकिट खूंटी पर टांगने को तैयार नहीं होता था। इसी कारण गावस्कर की बात पेशेवर खेलों पर लागू नहीं होती हैं, परन्तु दुनिया की नंबर एक टेनिस खिलाड़ी आस्ट्रेलियाई एश्ले बार्टी ने संन्यास की घोषणा कर दी। उनकी उम्र 25 साल है।

एश्ले बार्टी अभी चारों ग्रैंड स्लैम जीत सकती थीं। वे 2019 में फ्रेेंच ओपन, 2021 में विम्बलडन और 2022 में आस्ट्रेलियाई ओपन जीत चुकी हैं। वे अपने 11 साल के छोटे से करिअर में 15 एकल और 12 युगल खिताब जीत चुकी हैं। ऐसे में उनकी क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है। वे अपने देश की दूसरी ऐसी टेनिस खिलाड़ी हैं जो दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनीं। बार्टी की सोच अलग प्रकार की है। वे जस्टिन हेनिन जैसी सोच की खिलाड़ी हैं जिन्होंने शीर्ष पर रहते हुए अपने खेल को अलविदा कह दिया। जस्टिन हेनिन ने भी मात्र 25 साल की उम्र में संन्यास ले लिया था।

बार्टी ने कहा कि उन्होंने टेनिस में वह सब कुछ पा लिया है जो वे पाना चाहती थीं। अब वे अपनी जिंदगी में कुछ नया करना चाहती हैं। एश्ले पहली बार खेल से अलग नहीं हुईं। इससे पहले भी वे 2015 में खेल से अलग हो गई थीं। उन्होंने 2015 में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। जल्द ही वे आस्ट्रेलिया की क्रिकेट की सबसे बड़ी लीग बिग बेश की एक टीम के लिए चुनी गईं।

उन्होंने महिला क्रिकेट खेलते हुए एक शतक भी लगाया। 2016 में जब उनका नाम आस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेट के लिए चलने लगा तो वे टेनिस में लौट गईं। उन्होंने पहला डब्लूटीए खिताब जीता। उसके बाद तो खिताबों की झड़ी लगा दी। वे तेज गति की टेनिस खेलती हैं और खेल पर उनकी मजबूत पकड़ है। उन्हें टेनिस जानकार लंबी रेस का घोड़ा मान रहे थे। ऐसे में उन्होंने आगे न खेलने का फैसला सुना दिया।

बार्टी को लगा कि ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताएं जीतने और नंबर एक बन जाने के बाद कुछ हासिल करना बाकी नहीं रह जाता है और उनके पास इतना समय है कि वे और भी कुछ कर सकती हैं। परन्तु वे पहली खिलाड़ी नहीं है कि उन्होंने कम उम्र में खेल को अलविदा कहा है। इससे पहले जस्टिन हेनिन व अन्य कई खिलाड़ियों ने भी कम उम्र में सफलता के बाद खेल को अलविदा कहा।

दरअसल पेशेवर खेल में जहां सफलता चमकती हुई दिखाई देती है, वहीं खिलाड़ी पर दबाव भी रहता है। खिलाड़ी को मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है। कई खिलाड़ी तो मानसिक तनाव से निपटने के लिए मोटिवेशन प्रोफेशनल की सेवाएं भी लेते हैं। कोरोना काल में तो टेनिस खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव रहने लगा। बार्टी ने 2021 में अपना 90 फीसद समय बायोबबल में गुजारा। वे होटल से सीधे कोर्ट और कोर्ट से सीधे होटल में जाती थीं। इससे घर से दूर रहने और बायोबबल में रहने का तनाव का सामना खिलाड़ी को करना पड़ता था। इस तनाव के बीच उन्होंने आस्ट्रेलियाई ओपन खिताब जीता।

एक खिलाड़ी जो स्वछंद रहना चाहती हो, उसके लिए तनाव झेलना आसान नहीं है। बार्टी क्रिकेट खेलने के अलावा काफी के लिए क्रेजी हैं। वे पेशेवर रूप से काफी बनाना जानती हैं। वे इसके लिए क्वालिफाइड बारिस्ता बन गई हैं। उन्हें खेल के अलावा इस काम में आनंद मिलता है। यह बात हमें माननी चाहिए कि टेनिस व अन्य खेलों में खिलाड़ी को तनाव का सामना करना पड़ता है। खेल से दूर जाने का सबसे बड़ा कारण खेलों में प्रतिस्पर्धा से पैदा होने वाला तनाव और बंदिशें हैं।

इस संबध में खेल प्रशासकों को ध्यान देने की जरूरत है। खेल में प्रतिस्पर्धा से पैदा कारणों को भी दूर करने के प्रयास होने चाहिए। खिलाड़ी के लिए खेल हमेशा हंसी खुशी का साधन बने रहना चाहिए। खेल तनाव दूर करने का साधन होना चाहिए। एश्ले बार्टी को तनावमुक्त कार्य चाहिए जिसमें आनंद मिल सके। ऐसा खेल में भी होना चाहिए।



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यूपी में सभी सीटों पर जमानत जब्‍त हुई, गोवा, उत्‍तराखंड हारे, मणिपुर गए ही नहीं, MCD चुनाव वाली केजरीवाल की चुनौती पर अमित शाह का पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा विपक्षी नेताओं को मारकर किसी भी राज्य पर शासन नहीं करती है। पश्चिम बंगाल में हिंसा की हालिया घटनाओं और पिछले साल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद हुई हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा, “हां, हम (भाजपा) हर जगह चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन हमारी विचारधारा, प्रदर्शन और कार्यक्रम के आधार पर। यहां तक ​​कि टीएमसी भी चुनाव लड़ने गोवा गई थी, लेकिन हम विपक्षी नेताओं को मारकर और महिलाओं के साथ बलात्कार करके किसी भी राज्य पर शासन नहीं करना चाहते हैं।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा, “जो लोग अपनी पार्टी का चुनाव नहीं करा सकते, वे हमें लोकतंत्र के बारे में उपदेश दे रहे हैं।” अमित शाह ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने डर के चलते आपातकाल लगाया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा, “हम किसी भी चुनाव से डरते नहीं हैं, लेकिन हमारे पास एक इतिहास है कि कैसे डर से आपातकाल लगाया गया था।”

अमित शाह ने कहा कि भाजपा किसी भी चुनाव से नहीं डरती है, “जीत या हार लोकतंत्र का हिस्सा है”। हार के डर से दिल्‍ली एमसीडी चुनावों को लटकाने के आम आदमी पार्टी के आरोपों पर अमित शाह ने कहा, “हमें AAP से क्यों डरना चाहिए? अगर वे चुनाव जीतने के लिए इतने आश्वस्त हैं तो वे छह महीने बाद भी चुनाव जीत सकते हैं। आशंका क्यों है?”

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा, “यूपी की सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी की जमानत जब्‍त हो गई। वे उत्तराखंड की सभी सीटें हार गए, वे मणिपुर भी नहीं गए। वे गोवा में भी बुरी तरह हार गए।” अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में बीजेपी पर दिल्‍ली एमसीडी इलेक्‍शन लटकाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अगर बीजेपी यहां जीत जाए तो वह राजनीति छोड़ देंगे। उन्‍होंने कहा कि ऐसे तो बीजेपी कल को गुजरात और महाराष्‍ट्र के चुनाव भी टाल देगी। यह अलोकतांत्रिक है।



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हीरोइन के बाद कैरेक्टर रोल कर फिर हीरोइन नहीं बना जा सकता- रूपा गांगुली के सवाल पर नितिन गडकरी ने दिया जवाब

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान कुछ ऐसी बातें कही कि वहां मौजूद नेता अपनी हंसी नहीं रोक पाए। भाजपा सांसद रूपा गांगुली के एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि एक बार हीरो या हीरोइन ने एक कैरेक्टर रोल कर लिया तो उन्हें फिर से लीड एक्टर बनने में बहुत दिक्कत होती है।

गडकरी ने कहा “ये बहुत मुश्किल है। एक बार जब एक हीरोइन को कैरेक्टर रोल के लिए कास्ट कर लिया जाता है, तो उस कैरेक्टर एक्टर को हीरोइन के तौर पर रीकास्ट करना बहुत मुश्किल होता है।” उन्होंने आगे कहा ” हीरो के लिए भी ऐसा ही है। एक बार एक हीरो को एक कैरेक्टर रोल में ले लिया जाता है, तो उसे हीरो का रोल वापस नहीं मिलता है।” उनके इस बयान पर पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे।

रूपा गांगुली ने पूछा था कि क्या नई कारों में उपलब्ध सेफ्टी मिजर्स को पुरानी कारों में भी लगाया जा सकता है। बता दें कि रूपा गांगुली एक लोकप्रिय हीरोइन हैं। उन्होंने महाभारत धारावाहिक में द्रौपदी की भूमिका निभाई थी। इसकी वजह से उन्हें काफी प्रसिद्धि मिली।

इसको ध्यान में रखते हुए गडकरी ने बाद में कहा, “वास्तव में, मेरी टिप्पणी किसी के खिलाफ नहीं थी। इसे हल्के में लें। यह बहुत मुश्किल है….ये नियम और कानून केवल नए वाहनों के लिए हैं। पुराने वाहनों के लिए, यांत्रिक रूप से उन्हें सक्षम बनाना बहुत कठिन है।” हालांकि, उन्होंने नोट किया कि कुछ नए सेफ्टी फीचर्स 2-3 साल पुराने वाहनों में भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

बता दें कि नितिन गडकरी बुधवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल के बीच हाइड्रोजन से चलने वाली कार में संसद पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत में ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ का निर्माण किया जाएगा और ईंधन भरा जाएगा, स्टेशनों की स्थापना की जाएगी। इससे देश में स्थायी रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मंत्री ने कहा कि भारत जल्द ही ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ निर्यातक देश बन जाएगा।



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Tuesday, March 29, 2022

As Moon Knight premieres on Disney+ Hotstar; all you need to know about Marvel's latest superhero series

The highly anticipated television series, Moon Knight, is set to premiere today, 30 March, on Disney+ Hotstar. Oscar Isaac plays a superhero whose dissociative identity disorder and psychic connection with the Egyptian god Khonshu leads to him developing four distinct personalities in addition to the titular costumed character.

The show is the sixth Marvel Studios series for Disney+ and was created by Jeremy Slater. Moon Knight will have a six-episode run, with new episodes airing every week.

Before the series premieres, let's get a quick rundown about the main character. Here's everything you need to know about Moon Knight:

History of Moon Knight

Moon Knight has never appeared in a Marvel film or television series, but was initially introduced in 1975 in Marvel Comics' Werewolf by Night Nos. 32-33. The character received his first solo comic in 1980, according to a USA Today report.

Werewolf by Night No. 32, published in 1975, was the first part of a two-issue story arc that pitted the comic's titular Werewolf against Moon Knight, a mercenary with superpowers who wore silver boots and gauntlets, a hooded white cloak, as well as a crescent moon symbol on his chest. The comic was written by Doug Moench.

The series will see several plotlines similar to the comic books. However, as the trailer reveals, the show initially focuses on Steven Grant, a British museum gift-shop employee, who is also one of Spector's other identities. Grant becomes aware of the other personalities as he attempts to differentiate between his “waking life and dreams”.

As he learns about his other identities, including the mercenary Spector, Grant attempts to rein in his dark side and control his mysterious powers.

Who all star in Moon Knight

Apart from Isaac, the Moon Knight also includes Ethan Hawke as the antagonist Arthur Harrow, F. Murray Abraham as the Egyptian god Khonshu, of whom Spector is an avatar and Egyptian-Palestinian actress May Calamawy as Layla El-Faouly, an archaeologist and adventurer from Spector's past.



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In defense of CODA: Apple TV's Best Picture winner at Oscars 2022 sang like no one's listening and made us feel heard

In the opening moments of CODA, which won the coveted Best Picture award at Oscars 2022, we see Emilia Jones' Ruby stare at a fish wriggling in the net, freshly captured by her fisherfolk family. That visual encapsulates Ruby's predicament — a fish out of water — a child of deaf adults who can hear.

That arresting visual also symbolises the precarious position of CODA in the Best Picture nominations. A lone island in the sea of films designed and positioned as Oscar Best Picture contenders, CODA seemed to ape its protagonist's ambition — a coming-of-age girl who just wants to pitch higher.

Still from CODA

When CODA won the top honour, it invited the criticism that it is not 'great cinema.' Again, it is the same old tired argument of what constitutes cinema. The greatest achievement of CODA, even within that narrow framework, is that it is both inclusive and relatable. It doesn't treat inclusivity as a criterion to rank high on the Oscars woke meter. It extends its range of inclusivity from the deaf community to every young hearing individual, who does not feel heard.

In doing so, it not only ceases to paint the deaf as victims, but also steers clear of glorifying the struggles of the privileged hearing class. Ruby is no winy teenager who wants to abandon her deaf family to embark on her selfish pursuit. As their natural translator, she is conditioned to not communicate in any language besides the American Sign Language. But when she realises she has a gift — of great voice and singing skills — she decides to chase her dream, even if that takes moving away from her dependent family.

Still from CODA

But the dependence or the reluctance to let her go also stems from the intention to protect her. "What if she isn't good?" Ruby's mother Jackie (Marlee Matlin) asks her father Frank (Troy Kotsur). The deafness here is a metaphor for the previous generation's incapability to receive, gauge, and process their kids' interests and passions. This is encapsulated in a brilliant scene where Ruby's deaf parents sense her singing prowess through the emotional responses of other audience members who can hear.

And the next scene shows how the response to your kid's inclination, however seemingly incomprehensible, need not be second-hand. Frank touches and feels Ruby's pulsating vocal chords when she sings full throttle.

Still from CODA

That is all the naysayers of CODA needed to do when it emerged as a Best Picture contender — to touch and feel its vibrations, rather than trying to analyse it critically. Here is a film that dared to tell a simple coming-of-age story in a new language. The beats may sound familiar but they never feel the same.

Familiarity has been a cozy cushion during the pandemic but CODA ensures it does not rely on that crutch alone. Had it cast stars instead of actors and a more well-known director, the familiarity would have amplified. By choosing to cast deaf actors, and a newcomer as the protagonist, CODA lets it known its heart is in the right place.

Still from CODA

But the expectation from an 'indie' film is to not limit its subversion to just the screenplay, but also the visual and technical elements. That has clamped down hard on CODA's attempt to be regarded as 'great cinema.' Yes, it does not experiment with its sound design as prolifically as Sound of Metal did, or it projects music that's more pop than alt.

But by picking its battles over the desperate attempt to leave no stones unturned, CODA stands in defiance of every prestige Hollywood film's attempt to pander to the Oscars gaze.

CODA's win is no Green Book tokenism. But it's also not a Moonlight upset, that sneaked the Best Picture win under the nose of La La Land. In fact, it's very close to what happens here in India: the one that wins the Best Film has its eye on the masses but gently pushes the artistic boundaries so as to not alienate its wide target audience, while not limiting itself to the safe standard fare (think Rajkumar Hirani). It's what we call in Bollywood parlance, Best Film - Popular Choice. And all The Powers of the Dogs and Drive My Cars contest the Best Film - Critics Choice category.

A major criterion there, however, is the box office collection. With CODA, that metric was out of the question, as it's now the first global streaming title (or the first title distributed by a streaming company) to ever win the Best Picture Oscar. Netflix has been eyeing that prize for years now, and has missed it by a whisker in the year when The Irishman was nominated. This year, it had The Power of the Dog galloping towards that honour, but Apple TV emerged from the shadows to make history.

Still from CODA

Apple TV's underdog story is also similar to that of CODA and its protagonist. While never strategically, or desperately, aiming for an Oscar, Apple TV made quiet inroads into The Academy circles. It acquired CODA at Sundance Film Festival, and put all its might behind the film. Let's not forget Apple TV doesn't enjoy the same footprint as Netflix nor it is to big on movies; its USP remains shows like Ted Lasso and The Morning Show. But when Apple TV realised it has the gift of CODA, it went all out in pitching its voice into the ears rendered deaf by Netflix algorithms and Oscar conventions.

As a product of the surround sound that channels itself only in the direction of awards validation, CODA managed to rebel with an assured silence. It spoke only when it needed to, and sang when it felt like, like no one's listening.

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NREGS दिहाड़ी में संशोधनः 21 सूबों और UTs में पांच फीसदी से कम की बढ़ोतरी

केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम नरेगा (NREGA) के तहत नई मजदूरी दरों को अधिसूचित किया है। 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 राज्यों में 5 फीसदी से कम और 10 राज्यों में 5 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। तीन राज्यों (मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा) की मजदूरी दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 2022-23 के लिए 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नरेगा मजदूरी को 4 रुपये से लेकर 21 रुपये प्रति दिन की सीमा तक बढ़ाया गया है। बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी।

31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में (जिन्होंने मजदूरी में वृद्धि देखी) गोवा में अधिकतम 7.14% की वृद्धि दर्ज की गई है। 2021-22 में प्रति दिन 294 रुपये से बढ़ाकर 2022-23 में 315 रुपये प्रति दिन मजदूरी का रेट हो गया है। सबसे कम 1.77% की वृद्धि मेघालय में हुई है जहां नई मजदूरी दर मौजूदा 226 रुपये प्रति दिन से 230 रुपये प्रति दिन तय की गई है।

मेघालय के अलावा दो अन्य राज्यों (अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड) में भी नरेगा मजदूरी में 2 फीसदी से कम की वृद्धि देखी गई है। असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में NREGS की मजदूरी में 2-3 फीसदी की वृद्धि की गई है। महाराष्ट्र, ओडिशा, दादरा एंड नगर हवेली और दमन एंड दीव में मजदूरी में 3-4 फीसदी की वृद्धि की गई है। जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 4-5 फीसदी की वृद्धि की गई है।

केवल 10 राज्यों में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई है। इन राज्यों में हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, जम्मू और कश्मीर, लक्षद्वीप, केरल, कर्नाटक और गोवा शामिल है।

नरेगा मजदूरी दर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों के लिए प्रति दिन 213 रुपये, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम के लिए 216 रुपये, ओडिशा के लिए 222 रुपये, पश्चिम बंगाल के लिए 223 रुपये और जम्मू और कश्मीर के लिए 227 रुपये है। मनरेगा मजदूरी दरें CPI -AL (Consumer Price index- Agriculture labour) में बदलाव के अनुसार तय की जाती हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति में वृद्धि को दर्शाती है।



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बांड जारी कर आर्थिक संकट से बचने का रास्ता निकालें स्थानीय निकाय

स्थानीय निकायों की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और आर्थिक संकट को सुधारने के लिए लोकसभा की विशेष समिति ने बांड जारी कर संकट का हल निकालने की सिफारिश की है। यह रिपोर्ट लोकसभा में आवासन और शहरी कार्य संबंधी स्थायी समिति के सभापति जगदम्बिका पाल ने पेश की है। रिपोर्ट में समिति ने माना है कि अम्रुत और स्मार्ट सिटीज मिशन (एससीएम) जैसी योजनाओं में नगर पालिका बांडों के माध्यम से धन जुटाना एक घटक है। वहीं समिति ने वित्तीय मोर्चे पर निकायों की लापरवाही भी पकड़ी हैं।

समिति ने बताया है कि बांड पहल के माध्यम से गाजियाबाद, लखनऊ और 10 अन्य शहरों जैसे विभिन्न निगमों ने क्रेडिट रेटिंग मूल्यांकन किया है और बाजार से धन जुटाने में सफल रहे हैं। हालांकि दिल्ली के निगमों में केवल नई दिल्ली पालिका बांड जारी किए गए हैं। रिपोर्ट में समिति ने बताया है कि इन निगमों की हालत बेहद ही खराब है और इस योजना को दिल्ली के सक्षम अधिकारियों की तरफ से योजना का अनुमोदन नहीं किया है। इसलिए निकाय बांड नीति पर काम कर वित्तीय संकट से उभरने का रास्ता तलाश करें।

स्मार्ट शहरी मिशन में 80 फीसद ने किया धनराशि का प्रयोग : मंत्रालय ने स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत 11 शहर चुने थे। इन शहरों को अब तक केवल पहली किश्त यानी 10 फीसद राशि जारी की गई थी। समिति ने रिपोर्ट में बताया है कि 80 फीसद इस राशि का प्रयोग नहीं कर सके हैं, क्योंकि उन्होंने दूसरे चरण में दावा राशि के लिए दावा ही नहीं किया।

वहीं जांच में यह सामने आया है कि निगमों के पिछले वर्षों के कार्यों के प्रमाणपत्र अभी तक भी प्राप्त नहीं हुए हैं। इसलिए समिति ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक मंत्रालय के पास पहले अनुदान का प्रमाणपत्र न आए, तब तक आगे की राशि निकायों को जारी न की जाए। साथ ही समिति ने अपनी रपट में सिफारिश की है कि भविष्य में परियोजनाओं के निर्माण चरण में ही निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। इनमें स्थानीय निकाय, विधानसभा और वार्ड स्तर और सांसद सदस्यों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए। इससे निरीक्षण के समय सुचारू संचालन संभव हो सकेगा।



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पेट्रोल-डीजल के दाम पर नहीं लग रही लगाम! 9 दिन आठवीं बार बढ़ी कीमतें, जानें- आपके शहर में कितना इजाफा

कोरोना की सुस्त चाल और रफ्तार पकड़ती महंगाई की मार के बीच तेल के दाम पर देश में फिलहाल लगाम लगती नहीं दिख रही है। बुधवार (30 मार्च, 2022) को नौवीं बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई। दोनों के ही दामों 80-80 पैसे का इजाफा हुआ, जिसके बाद कुल नौ दिनों के हिसाब से तेल में 5.60 रुपए (प्रति लीटर) वृद्धि हुई।



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सांसद आदर्श ग्राम योजना : 96,996 परियोजनाओं में से 60 फीसद ही पूरी

केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना के शुरू होने के बाद से अब तक योजनाबद्ध 96,996 परियोजनाओं में से 60 फीसद ही पूरी की जा सकी हैं। सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत अक्तूबर 2014 में हुई थी। लोकसभा में कोमती वेंकट रेड्डी, एम श्रीनिवास रेड्डी के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने यह जानकारी दी। सदस्यों ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की प्रगति की जानकारी मांगी थी।

मंत्री ने बताया कि इस योजना के पोर्टल पर दिए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई) के तहत पंचायतों में ग्राम विकास के लिए योजनाबद्ध 96,996 परियोजनाओं में से 58,228 परियोजनाओं का कार्यान्वयन हुआ है जो कुल परियोजनाओं का 60 फीसद है।
क्या देश में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आदर्श गांव योजना के संबंध में कुछ गांव प्रगति करने में पिछड़ गए हैं, सिंह ने कहा, ‘जी, नहीं। सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत निर्धारित ग्राम पंचायतों का निरंतर विकास हो रहा है। ग्राम पंचायतें, ग्राम विकास योजनाएं तैयार करती हैं जिनमें प्रस्तावित कार्यकलापों को केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं एवं राज्यों की योजनाओं के तालमेल से कार्यान्वित किया जाता है।’

मंत्री ने बताया कि राज्य एवं संघ राज्य क्षेत्र समय-समय पर केंद्र सरकार को अपने सुझाव भेजते हैं। इन सुझावों पर ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली सांसद आदर्श ग्राम योजना संबंधी राष्ट्रीय स्तर की समिति संबंधित मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधियों के साथ आवधिक रूप से चर्चा करती है। उन्होंने बताया कि 17 मंत्रालयों/विभागों ने सांसद आदर्श ग्राम योजना संबंधी ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने के लिए योजनाओं एवं कार्यक्रमों के दिशानिर्देशों में संशोधन किया है।

सरकार द्वारा लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, सांसद आदर्श ग्राम कार्यक्रम में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्राम विकास के 15,698 कार्यकलाप तय किए गए जिनमें से अब तक 8,806 पूरे हुए हैं। इसी प्रकार से, स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्धारित 3,686 कार्यकलापों में से 2,612 पूरे हुए। सांसद निधि (एमपीलैड) के तहत तैयार किए गए 3,396 कार्यक्रमों में से 1,882 पूरे हुए।

सांसद आदर्श ग्राम योजना में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत 2,194 कार्यक्रम बनाए गए जिनमें से 1,324 पूरे हुए। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के 1,847 कार्यकलाप निर्धारित किए गए और 1,246 पूरे हुए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सांसद आदर्श ग्राम योजना में राज्य योजना निधि के तहत 1,794 कार्यकलाप तय किए गए जिनमें से 1,158 पूरे हुए हैं।

इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 1,599 कार्यकलापों में से 1,332 का काम पूरा हो गया है। इसमें एकीकृत कृषि विकास योजना के तहत 1,644 कार्यकलापों में से 989, सर्व शिक्षा अभियान के तहत 1,543 में से 807 कार्यक्रम, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत 986 में से 502 परियोजनाएं और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 904 में से 388 कार्यकलाप पूरे हो गए हैं।

गौरतलब है कि गांवों के विकास के लिए सांसद आदर्श ग्राम योजना का उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में किया था। 11 अक्तूबर 2014 को यह योजना शुरू की गई थी। इसके तहत सांसदों को अपने क्षेत्र में एक ‘आदर्श ग्राम’ का चयन करके उसका विकास करना है।



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उधार पर चल रहा पाकिस्तान, इमरान सरकार का जाना तय- बोले तारिक फतेह, PTI प्रवक्ता का पलटवार- ख्वाहिश नहीं होगी पूरी

पाकिस्तानी पत्रकार तारिक फतह का कहना है कि इमरान सरकार पूरी तरह से झूठ पर चल रही थी। देश की अर्थव्यवस्था चौपट है। पाकिस्तान उधार पर चल रहा है। अब इमरान सरकार का जाना तय है। उधर, उनकी बात पर इमरान की पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल समद याकूब ने उन्हें करारा जवाब देकर कहा कि विदेश में बैठे लोग कुछ भी कह सकते हैं। लेकिन उनकी ख्वाहिश पूरी नहीं होगी। तारिक फतेह विदेश में रहते हैं। एबीपी की टीवी डिबेट में वो कनाडा के टोरंटो से लाइव थे।

फतेह ने कहा कि इमरान खान फौज की ताकत पर नहीं आए थे। वो इतने ज्यादा लोकप्रिय थे कि जनता ने उन्हें सिर पर बिठा लिया था। लेकिन वो देश को चला नहीं सके। सपने तो बड़े दिखाए पर उन्हें पूरा नहीं कर सके। पान की दुकान भी ऐसे नहीं चलती जैसे देश कैसे चलाया जा रहा है। उनका कहना था कि सारा देश गिरवी रखकर भविष्य की योजनाएं बनाई जा रही हैं। देश का एक हिस्सा चीन को तकरीबन बेच दिया गया है।

उधर, समद ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार के बचने न बचने का फैसला हाउस में फ्लोर टेस्ट में हो जाएगा। उनका कहना था कि पीएम बनने के लिए पहले आफिस जाना जरूरी है ये तो कोई शर्त नहीं हो सकती। किसी को भी देश की कमान लोकप्रियता के आधार पर मिलती है। वो इस वजह से नहीं मिलती कि बंदे ने नौ से पांच तक नौकरी की है या नहीं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान तीन अप्रैल को होगा। वो गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। अगर कुछ सहयोगी दल गठबंधन से हटने का फैसला करते हैं तो उनकी सरकार गिर सकती है। पाकिस्तान की 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में पीटीआई के 155 सदस्य हैं और उसे सत्ता में बने रहने के लिए कम से कम 172 सांसदों के समर्थन की जरूरत है।

विपक्ष ने आठ मार्च को नेशनल असेंबली को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा था। इमरान खान 2018 में नया पाकिस्तान बनाने के वादे के साथ सत्ता में आए थे, लेकिन कीमतों को नियंत्रण में रखने में बुरी तरह विफल रहे, जिससे विपक्ष को उनकी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया।



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Monday, March 28, 2022

श्रीलंका का आर्थिक संकट : चीन की चोट से उबारेगा भारत


श्रीलंका इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। इन हालात में चीन और भारत के साथ इस देश के संबंधों ने दिलचस्प मोड़ लिया है। अब तक श्रीलंका दोनों देशों को संतुलित करने और चीन-भारत के भू-राजनीतिक हितों से लाभ उठाने की कोशिश करता रहा है। अब वह मदद के लिए भारत की तरफ देख रहा है। 1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से श्रीलंका सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।

इन हालात में भारत अपने इस पड़ोसी को एक अरब डालर की क्रेडिट लाइन (आसान कर्ज) देने जा रहा है। साथ ही, विश्व बैंक से कर्ज दिलाने की कोशिश कर रहा है। भारत श्रीलंका को 40 हजार टन ईंधन देगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन ने श्रीलंका को कर्ज जाल में फंसा लिया है और उसकी वजह से ही आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है।

श्रीलंका ने चीन से कुल पांच अरब डालर का कर्ज ले रखा था। इसके बाद 2021 में भी चीन से एक अरब डालर का और कर्ज लिया। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने हाल ही में जब कर्ज की शर्तों को आसान करने के लिए चीन से कहा तो उसने मना कर दिया। अब भारत अपने इस पड़ोसी को उबारने के लिए मदद पहुंचा रहा है। हाल में श्रीलंका के वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे ने भारत की यात्रा कर मदद मांगी।

क्या हैं हालात

श्रीलंका साल भर के अंदर बदहाली के कगार पर इस कदर पहुंच गया कि वहां के लोग देश छोड़कर भारत के कई हिस्सों में पलायन तक करने लग गए। सालभर पहले श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार पांच अरब डालर से ज्यादा होता था और यह वह एक अरब डालर तक आ चुका है। उसके दिवालिया होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। श्रीलंका विदेशी मुद्रा की कमी के कारण बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक तेल खरीद नहीं पा रहा।

इस कारण बिजली कटौती चल रही है। पेट्रोल-डीजल का संकट है। ये सभी घटनाएं बैलेंस आॅफ पेमेंट्स (बीओपी यानी किसी एक तय वक्त में देश में बाहर से आने वाली कुल पूंजी और देश से बाहर जाने वाली पूंजी के बीच का अंतर) संकट के परिणाम हैं। श्रीलंका 2020 की शुरुआत से संघर्ष कर रहा है। कोविड-19 महामारी के कारण श्रीलंका ने पर्यटन से अर्जित किए जाने वाली वार्षिक विदेशी मुद्रा प्रवाह का चार अरब डालर गंवा दिया। आर्थिक मोर्चे पर कई फैसले नुकसानदायक साबित हुए। श्रीलंका की विदेशी मुद्रा अंतर्वाह में भारी कमी आई।

वजह क्या चीन?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका की यह हालत चीन से कर्ज लेने की वजह से हुई है। श्रीलंका चीन के कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है। श्रीलंका ने चीन से कुल पांच अरब डालर का कर्ज लिया है। 2021 में भी चीन से एक अरब डालर का और कर्ज लिया था। इसके अलावा श्रीलंका भारत और जापान से भी कर्ज ले रखा है। देश को सात खरब अमेरिकी डालर का कर्ज चुकाना है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2021 तक श्रीलंका पर 35 अरब डालर का विदेशी कर्ज था, जिसमें चीन की हिस्सेदारी 10 फीसद थी। अपने देश को कर्जदार बनाने के लिए मुख्य तौर पर श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को जिम्मेदार माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि उन्होंने ही चीन से भारी कर्ज लिया।

श्रीलंका ने हंबनटोटा पोर्ट को एक हजार करोड़ रुपए में 99 साल के लिए चीन को लीज पर दिया हुआ है। कुछ साल पहले चीनी निवेश की मदद से हंबनटोटा में एक बड़ी बंदरगाह परियोजना की शुरुआत की गई थी। चीन के कर्ज की मदद से शुरू की गई अरबों डालर की यह परियोजना विवाद में फंस गई।

परियोजना पूरी नहीं हो पा रही थी और श्रीलंका चीन के कर्ज तले दबता गया। 2017 में एक समझौते के बाद श्रीलंका ने 99 साल की लीज पर इस बंदरगाह की 70 फीसद की हिस्सेदारी चीन को दी, तब जाकर चीन ने इसमें दोबारा निवेश शुरू किया। चीन पर आरोप लगता रहा है कि उससे कर्ज लेने वाले देश जब इसे चुका नहीं पाते हैं तो वह उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर लेता है। हालांकि चीन इस तरह के आरोपों को खारिज
करता रहा है।

भुखमरी और महंगाई

वहां एक किलो चीनी 290 रुपए में, एक किलो चावल पांच सौ रुपए और चार सौ ग्राम दूध का पाउडर 790 रुपए में मिल रहा है। पेट्रोल के दाम 50 रुपए और डीजल के दाम 75 रुपए तक बढ़ चुके हैं। श्रीलंका तेल, खाद्य पदार्थ, कागज, चीनी, दाल, दवा और यातायात के पुर्जों के लिए आयात पर निर्भर है। श्रीलंका के पास इन जरूरी वस्तुओं को सिर्फ 15 दिन तक ही आयात करने लायक डालर बचा है।

हालात ऐसे हैं कि सरकार के पास परीक्षा के पेपर छापने के कागज और स्याही तक नहीं हैं। डीजल-पेट्रोल और गैस के मामले में स्थिति कुछ ज्यादा ही गंभीर हो चुकी है। पेट्रोल-डीजल खरीदने के चक्कर में कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि श्रीलंका की सरकार ने पेट्रोल पंपों ओर गैस स्टेशनों पर सेना तैनात करने का फैसला किया है।

श्रीलंका में अभी भी 20 फीसद परिवार भोजन बनाने के लिए केरोसिन पर निर्भर हैं। केरोसिन भी लोगों को नहीं मिल रहा है। कच्चा तेल नहीं होने के कारण सरकार को एकमात्र तेल शोधनागार बंद करना पड़ा है।

क्या कहते हैं जानकार

राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए प्रयासरत हैं और भारत उसमें एक बड़ी भूमिका अदा करने जा रहा है। भारत आर्थिक मदद कर रहा है। भारत ने जो कदम उठाए हैं, उससे दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली में मदद मिलेगी। इससे श्रीलंका में चीन की बढ़ती गतिविधि को को लेकर भारत की चिंताएं भी खत्म होंगी।

  • मिलिंडा मोरागोडा, भारत में श्रीलंकाई उच्चायुक्त

भारत-श्रीलंका संबंधों में पिछले तीस साल में कई बदलाव आए हैं। श्रीलंका की आंतरिक राजनीतिक स्थिति और उस पर भारत की प्रतिक्रिया ने ज्यादातर द्विपक्षीय संबंधों को आकार दिया है। खाने-पीने के सामान की कमी से जूझ रहा श्रीलंका अब एक आर्थिक विपदा के मुहाने पर खड़ा है जिस पर अगर काबू नहीं पाया गया तो उसका भारत के सुरक्षा हालात पर गंभीर असर होगा।

  • जितेंद्र नाथ मिश्र, पूर्व भारतीय राजनयिक


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हरप्रीत : ब्रिटेन के टीवी शो में जीतने वाली उद्यमी

भारतीय मूल की उद्यमी और उत्तरी इंग्लैंड में ‘डेजर्ट पार्लर’ चलाने वाली 30 साल की हरप्रीत कौर ने ब्रिटेन के लोकप्रिय टेलीविजन शो ‘द अप्रेंटिस’ में जीत हासिल की है। हरप्रीत कौर ने 16 प्रतिभागियों को मात देकर 2.5 लाख पौंड का निवेश हासिल कर लिया। कौर ने शीर्ष कारोबारी लार्ड एलन शुगर द्वारा संचालित बीबीसी शो के 16वें संस्करण में भारतीय मूल के अक्षय ठकरार सहित ब्रिटेन के विभिन्न हिस्सों के अन्य उभरते उद्यमियों को हराया है।

बीबीसी के टीवी शो में कौर अपने ‘ओह सो यम’ डेजर्ट पार्लर की रेंज को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस लीडर को मनाने में सफल रही कि वह उनका समर्थन करें। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी जीत के बारे में बात करते हुए कौर ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि मैंने बीबीसी का शो ‘द अप्रेंटिस’ जीत लिया है। मेरे पास अपनी खुशी का इजहार करने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं ‘ओह सो यम’ के इस नए संस्करण को लेकर काफी उत्साहित हूं।

हरप्रीत कौर का वेस्ट यार्कशायर में काफी और केक का सफल व्यवसाय चल रहा है। उन्होंने शो में खुद को जन्म से ही लीडर, निडर और मजाकिया बताते हुए प्रवेश किया था। वह अपन इस व्यवसाय का पूरे इंग्लैंड में विस्तार करना चाहती हैं। बर्मिंघम में पली हरप्रीत ने शो की शुरुआत में ही कहा था कि वह यहां दोस्त बनाने नहीं, पैसे बनाने के लिए आई हैं। हरप्रीत कौर का परिवार हडसर्फील्ड में एक स्टोर चलाता है। वहां कौर पढ़ाई करने के साथ ही परिवार का हाथ बंटाती थीं। इसके बाद उन्होंने अपनी बहन के साथ मिलकर अपना पहला डेजर्ट पार्लर खोला।

शो में हर हफ्ते प्रतिभागियों को दो टीमों में विभाजित कर काम दिए जाते थे। सौंपे गए काम कराए जाते थे। इसके बाद दोनों टीमें अपने अनुभवों पर चर्चा करने के लिए बोर्डरूम में लौटती और पता लगाती कि किस पक्ष की जीत हुई है। जीतने वाली टीम को पुरस्कृत किया जाता है।

साप्ताहिक प्रसारित होने वाले शो में 12 कठिन कार्यों के दौरान, 16 उम्मीदवारों में से आखिरी में चार का चयन हुआ। उन लोगों ने 2.5 लाख पौंड के लिए एक दूसरे को मात दी और इसमें हरप्रीत ने बाजी मार ली। टीवी शो ‘द अप्रेंटिस’ के फाइनल में इस साल पहली बार सभी महिलाएं मौजूद थी, जिसमें कौर ने शुगर की नई बिजनेस पार्टनर के रूप में जीत हासिल की।



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ओपेक के रूस से गठबंधन के पक्ष में यूएई

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के ऊर्जा मंत्री ने सोमवार को तेल की कीमतों को संभालने के लिए ओपेक के रूस के साथ गठबंधन का समर्थन किया। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में उछाल आया है और इसकी वजह से बाजार को झटका लगा है तथा उपभोक्ता बाजार में कीमतों में वृद्धि हो रही है।

यूएई के ऊर्जा मंत्री सुहैल अल मजरोई ने कहा कि रूस रोजाना एक करोड़ बैरल का तेल उत्पादन करता है और वह वैश्विक ओपेक प्लस ऊर्जा गठबंधन का अहम सदस्य है। उन्होंने कहा, ‘राजनीति को अलग रख दें तो इस तेल की आज जरूरत है। जब तक कोई एक करोड़ बैरल तेल उत्पादन का इच्छुक नहीं होता, हमें नहीं लगता कि रूस का विकल्प हो सकता है।’ सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व वाले इस गठबंधन के पास उत्पादन बढ़ाकर तेल की कीमतों में कमी लाने की क्षमता है जो बढ़कर 100 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।

अमेरिका, यूरोपीय देश, जापान और अन्य देश खाड़ी के अरब देशों से तेल उत्पादन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं ताकि इनकी कीमतों में कमी लाई जा सके। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए इस महीने के शुरुआत में सऊदी अरब, यूएई की यात्रा की थी। अल मजरोई ने बताया कि ओपेक प्लस गठबंधन एक है और बना रहेगा।

उन्होंने एकतरफा तरीके से यूएई द्वारा तेल उत्पादन बढ़ाने के सुझाव को लागू करने से भी एक तरह से मना कर दिया। उन्होंने कहा, ‘हम एक साथ हैं। और राजनीति को इस संगठन में आने की अनुमति नहीं देंगे। हम हमेशा से मानते हैं जब उत्पादन का सवाल आएगा तो भी हम देश के तौर पर जो भी करेंगे, उस कार्य को हमेशा राजनीति से बाहर रखना होगा।’



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अंटार्कटिका और आर्कटिक पर ‘लू’

इस समय अंटार्कटिका में गर्मी का मौसम चल रहा है और आर्कटिक में गर्मी आ रही है। 21 मार्च को दोनों ही जगह दिन और रात बराबर थे, लेकिन इस सप्ताह मौसम कुछ ऐसा हुआ है कि दोनों ही जगह पर रेकार्ड तोड़ ग्रीष्म लहर चली है। अधिकतम तापमान औसत से 30 डिग्री ज्यादा पाया गया है। यूं तो वैज्ञानिक कहते रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर ऐसे अचानक उछाल के रूप में दिखता रह सकता है, लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि धरती के दो सिरों पर एक ही वक्त तापमान एक साथ उछल गया? वैज्ञानिक इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं।

अंटार्कटिका में में ग्रीष्म लहर आस्ट्रेलिया दक्षिण पूर्व में स्थिति तीव्र उच्च दबाव की धीमी प्रक्रिया के कारण आई, जिसमें भारी मात्रा में गर्म हवा और नमी अंटार्कटिका के आंतरिक इलाकों तक पहुंच गई। इसके साथ ही पूर्वी आंतरिक अंटार्कटिका में एक तीव्र कम दबाव की प्रणाली भी काम कर रही थी, फिर अंटार्कटिका के बर्फीले पठार के ऊपर के बादलों ने सतह से निकली गर्मी को फांस लिया था, जिसने आग में घी का काम किया।

पतझड़ से ही अंटार्कटिका के अंदर का तापमान इतना ज्यादा नहीं रहा था कि ग्लेशियर और बर्फ की परत पिघल जाती। फिर भी तापमान में बड़े उतार-चढ़ाव भी हो रहे थे। बीच पठार में -17 डिग्री के आसपास का तापमान था, जो औसत से 15 डिग्री ज्यादा था। उच्च पठार पर ही स्थित कोनकार्डा में मार्च का औसत तापमान 40 डिग्री सेल्सियस ऊपर तक दर्ज किया गया। अंटार्कटिका में तटीय इलाकों में बारिश कम होती है। ऐसा तभी होता है, जब तापमान बर्फ जमने वाले अंक से ऊपर हो जाता है तब वहां बर्फ गिरने की जगह बारिश होती है।

पिछले हफ्ते आस्ट्रेलियाई कैसे स्टेशन पर तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था, जो दो साल दूसरे ग्रीष्म लहर का मौका था। अंटार्कटिका के तटीय इलाकों में रहने वाले पेंगुइन हाल ही में गर्मी के प्रजनन से निपटे थे। राहत की बात यह है कि ग्रीष्म लहर से पहले ही उनके बच्चे समुद्र में खुद शिकार के लिए चले गए थे। बारिश की वजह से काई पर असर हुआ। इसके असर का पता अगली बार ही लग सकेगा।

इसी तरह का मौसम पिछले सप्ताह आर्कटिक में देखने को मिला। अमेरिका के उत्तर पूर्वी तटीय इलाकों से तीव्र निम्न दबाव का तंत्र बनना शुरू हुआ और यहां एक उच्च दबाव का तंत्र भी बना। इससे आर्कटिक वृत्त में गर्म हवा का प्रवाह बना। नार्वे में अधिकतम तापमान 3.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने इस निम्न दबाव वाले तंत्र को ‘बांब साइक्लोन’ नाम दिया है, क्योंकि यह बहुत तेजी से बनता है।

इस साल आर्कटिक की सर्दियों में समुद्री बर्फ के हाल निचले स्तर के थे और ग्रीनलैंड में तो रेकार्ड बारिश दर्ज की गई थी। यदि गर्म हालात समुद्री बर्फ को सामान्य से पहले तोड़ देते हैं तो इसका बहुत से जीवों पर असर होता है। ध्रुवीय भालू को सील का शिकार करने लिए लंबा सफर करना पड़ता है। शिकार करने की संस्कृति प्रभावित होती है। वहीं नार्वे में फूल खिलने का मौसम जल्दी आने लगा है, क्योंकि गर्मी असामान्य रूप से पहले आने लगी है। माडल वाले अध्ययन सुझाते हैं कि जलवायु के स्वरूप में ज्यादा और विविधता भरे बदलाव देखने को मिलेंगे।

जलवायु परिवर्तन के दौर में एक ग्रीष्म लहर दूसरे का आधार बन सकती हैं। आर्कटिक दुनिया की तुलना में दोगुनी गति से गर्म हो रहा है, क्योंकि बर्फ पिघलने से सूर्य की रोशनी समुद्र में ज्यादा अवशोषित हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के ‘इंटर गवर्नमेंटल पैनल आन क्लाइमेट चेंज’ का कहना है कि आर्कटिक में 2050 तक बर्फ रहित गर्मियां देखने को मिलने लगेंगी। ऐसा ही कुछ अंटार्कटिका में भी दिखेगा।

अंटार्कटिक पर मौसम में यह बदलाव इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि इस वक्त वहां दिन लगातार छोटे होते जा रहे हैं और सर्दी बहुत अधिक होनी चाहिए। ठीक उसी वक्त आर्कटिक सर्दी से बाहर निकल रहा है। इसलिए कुछ वैज्ञानिकों ने कहा है कि एक साथ दोनों जगह एक जैसी घटना होना कल्पनीय भी नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये एकदम उलटे मौसम हैं। आप उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव को एक साथ, एक समय पर पिघलते नहीं देखते। इन घटनाओं पर ला नीलो और अन्य मौसमी घटनाओं का कितना प्रभाव है, यह जानने के लिए गहन अध्ययन की जरूरत होगी।



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Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...