Thursday, September 30, 2021

कांग्रेस की उठापटक पर AAP के पूर्व नेता आशुतोष ने दागा सवाल, पूछा- दिल्ली में बैठे दरबारी नेता क्यों मीडिया में गढ़ते हैं कहानियां?

पिछले कुछ समय से कांग्रेस में केंद्रीय स्तर और प्रदेश स्तर में उठापटक चल रही है। एक तरफ जी-23 के नेता पार्टी के भीतर संगठनात्मक चुनाव की मांग कर रहे हैं तो वहीं पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे कांग्रेस शासित कांग्रेस राज्यों में नेतृत्व को लेकर घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस पार्टी के अंदर उपजी ऐसी स्थिति को लेकर आप के पूर्व नेता आशुतोष ने सवाल दागा और उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि क्यों दरबारी नेता जो दिल्ली में बैठते हैं, वे मीडिया में कहानियां गढ़ते हैं, आखिर वे क्यों अपने-अपने राज्यों में जाकर भाजपा से लड़कर कांग्रेस को मजबूत नहीं कर सकते।

अंदरूनी संकट से जूझ रही कांग्रेस को पिछले कुछ समय से लगातार झटके मिल रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में सबसे पहले कांग्रेस को झटका पंजाब में मिला जहां नवजोत सिंह सिद्धू ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जैसे तैसे आलाकमान ने पंजाब कांग्रेस की कमान नवजोत सिंह सिद्धू को सौंपी लेकिन इसके बावजूद भी पंजाब का कलह समाप्त नहीं हुआ। आख़िरकार आलाकमान के कहने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।

कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया। चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद आलाकमान को लगा कि पंजाब कांग्रेस में उपजी कलह समाप्त हो गई है। लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बने कुछ ही दिन बीते ही थे कि नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर फिर से पंजाब कांग्रेस के संकट को बढ़ा दिया। इधर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कांग्रेस से अलग होने का ऐलान कर दिया और अब उनके बीजेपी में जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं। पंजाब की तरह ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ से भी गाहे बगाहे असंतोष के स्वर सामने आते रहते हैं। 

पहले से ही पार्टी की राज्य इकाई में अंदरूनी कलह का सामना कर रही कांग्रेस को अब केंद्रीय स्तर पर भी कलह का सामना करना पड़ रहा है। अब कांग्रेस नेताओं के G-23 गुट ने भी शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले दिनों कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने प्रेस कांफ्रेंस से शीर्ष नेतृत्व से अपनी नाराजगी जाहिर की। कपिल सिब्बल ने प्रेस कांफ्रेस में कहा कि पता नहीं, कांग्रेस में कौन फैसले ले रहा है। लोग पार्टी छोड़कर जा रहे हैं इस पर सोचने की जरूरत है। पार्टी नेतृत्व जिन लोगों को अपना खास मानता था वह पार्टी छोड़कर चले गए और जो लोग यह समझते हैं कि वह पार्टी नेतृत्व के खास नहीं है, वह आज भी उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा हम जी-23 के नेता वे नहीं हैं जो पार्टी छोड़कर कहीं और जाएंगे।

कपिल सिब्बल के इन बयानों के बाद युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कपिल सिब्बल के घर के बाहर जमकर हंगामा किया। लोगों ने ‘गद्दारो पार्टी छोड़ो’ के नारे लगाए गए। कपिल सिब्बल के घर पर हुए हमले से नाराज कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने हैरानी जताते हुए इसे बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया और हमले करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कपिल सिब्बल के अलावा कई और वरीय नेताओं ने कांग्रेस पार्टी के मौजूदा हालात को लेकर कांग्रेस आलाकमान को जिम्मेदार ठहराया। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साधते हुए कहा कि अब न तो CWC की मीटिंग होती है और न ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जाती है। कांग्रेस में फिलहाल कुछ भी सही नहीं है। राहुल गांधी के पास कोई पद नहीं है, लेकिन पार्टी से जुड़े सभी मामलों में वह फैसले लेते हैं।

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परमबीर सिंह की नहीं कोई खोज खबर, जांच एजेंसियों को शक- देश छोड़कर रूस भागे

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से जुड़े मामलों की पड़ताल कर रही जांच एंजेसियों के पास कोई जानकारी नहीं है कि आखिर वह कहां हैं? महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार या जांच एजेंसियों को मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह के ठिकाने की जानकारी नहीं है। परमबीर सिंह के रूस में होने की अफवाहों पर मीडिया से चर्चा करते हुए पाटिल ने कहा कि सिंह को जांच एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों की तरफ से कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं लेकिन वह पेश नहीं हुए हैं, अब उनके खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने कहा कि मैंने उनके बारे में ऐसा कुछ सुना है कि वह देश से बाहर हैं लेकिन उम्मीद करता हूं कि सरकारी अधिकारी होने के नाते वह बिना सरकारी मंजूरी के विदेश नहीं गए होंगे। फिलहाल उनके ठिकानों की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमने लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) जारी किया है लेकिन वह देश छोड़कर भाग गए हैं तो यह अच्छी बात नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वह आखिरी बार अप्रैल महीने में देखे गए थे और सरकार ने उनसे अगस्त महीने में आखिरी बार बात की थी। सुनवाई के दौरान उनके वकील पेश हो रहे थे। परमबीर सिंह का नाम एंटीलिया मामले में सामने आने के बाद उन्हें होमगार्ड डिपार्टमेंट में भेज दिया गया था। 22 मार्च को उन्होंने अपना पदभार संभाला था लेकिन 5 मई से वह स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर छुट्टी पर चले गए थे और इसके बाद वह अपनी छुट्टी लगातार बढ़ाते चले गए।

नोटिस भेजने के बावजूद जब वह हाजिर नहीं हुए तो अधिकारियों ने सिंह के मुंबई, चंडीगढ़ और रोहतक स्थित आवासों का दौरा किया, वह वहां नहीं मिले, ऐसे में जब उनका फोन लगाया गया तो वह भी स्विच ऑफ मिला है। गृह मंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा कि एक सरकारी अधिकारी होने के चलते, परमबीर बिना जानकारी के देश छोड़कर नहीं जा सकते हैं, अगर ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परमबीर सिंह के खिलाफ 5 मामले दर्ज हैं, जिसमें से एक की जांच मुंबई पुलिस, एक की ठाणे पुलिस और बाकी के तीन मामलों की जांच स्टेट सीआईडी कर रही है। परमबीर सिंह महाराष्ट्र में उस वक्त सुर्खियों में दिखाई देने लगे थे, जब उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक लेटर लिखकर गृहमंत्री अनिल देशमुख पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। जिसके बाद हुए सियासी बवाल के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

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‘मैं पंजाब का पूर्व CM नहीं गोलकीपर हूं’, टैग करने से परेशान खिलाड़ी ने लिखा- कैप्टन अमरिंदर ने दिया जवाब

पंजाब की सियासत में जारी उठापटक के बीच नाम को लेकर भी बड़ा कन्फ्यूजन हो गया। लोगों ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बदले भारतीय फुटबॉल टीम के गोलकीपर अमरिंदर सिंह को ही सोशल मीडिया पर टैग करना शुरू कर दिया। टैग करने से परेशान होने पर उन्हें ट्वीट करते हुए लिखना पड़ा कि मैं पंजाब का पूर्व मुख्यमंत्री नहीं बल्कि गोलकीपर हूं। अमरिंदर सिंह के इस ट्वीट पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी जवाब दिया।

दरअसल पिछले कुछ महीने से पंजाब की राजनीति में उठापटक चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर इस उठापटक के केंद्र में हैं। इसी को लेकर उन्हें राजनीति से जुडी ख़बरों में टैग भी किया जाता है लेकिन नाम में कन्फ्यूजन को लेकर कई लोगों ने उनके बदले भारतीय फुटबॉल टीम के गोलकीपर अमरिंदर सिंह को ही टैग करना शुरू दिया। लगातार कई जगहों पर टैग किए जाने से वे परेशान हो गए और उन्होंने ट्वीट कर लोगों से टैग ना करने की अपील की। 

भारतीय फुटबॉल टीम के गोलकीपर अमरिंदर ने ट्वीट करते हुए लिखा कि प्रिय न्यूज मीडिया, जर्नलिस्ट, मैं अमरिंदर सिंह हूं, भारतीय फुटबॉल टीम का गोलकीपर ना कि पंजाब का पूर्व मुख्यमंत्री। इसलिए कृपया करके मुझे टैग करना बंद करें। गोलकीपर अमरिंदर सिंह के इस ट्वीट पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी जवाब दिया। अमरिंदर सिंह ने जवाब देते हुए लिखा कि मेरी सहानुभूति आपके साथ है, मेरे युवा दोस्त, आपको आगे के मैच के लिए शुभकामनाएं।

गुरुवार को कांग्रेस से अलग होने का ऐलान करने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बार फिर कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू पर जमकर निशाना साधा। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सिद्धू पंजाब के लिए सही व्यक्ति नहीं है, अगर वो चुनाव लड़ेगा, जहां से भी लड़ेगा मैं उसको जीतने नहीं दूंगा। साथ ही उन्होंने कहा कि  वह गंभीर व्यक्ति नहीं हैं और सबको साथ लेकर काम नहीं कर सकते। 

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अफसर हटाने का काम प्रधान का नहीं है, अफसर को मुख्यमंत्री लगाता, हटाता और बदलता है। मेरे 9.5 साल के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में कई प्रधान रहे हैं, हमारी एक-दूसरे से बातचीत होती थी। लेकिन कभी ये हाल नहीं थे जो सिद्धू ने बनाए हैं।

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पंजाब: सीएम से मिलकर सुलझाएंगे झगड़ा, सिद्धू बोले- मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए मुझे बुलाया है…

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि वह बातचीत के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से गुरुवार को मुलाकात करेंगे। यह पहल चन्नी के सिद्धू के पास जाने और बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की पेशकश करने के एक दिन बाद आई है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष के पद से मंगलवार को इस्तीफा दे चुके सिद्धू ने कहा, “मुख्यमंत्री ने बातचीत के लिए मुझे बुलाया है….आज दोपहर तीन बजे चंडीगढ़ में पंजाब भवन पहुंच जाऊंगा, किसी भी चर्चा के लिए उनका स्वागत है।”

सिद्धू ने बुधवार को पुलिस महानिदेशक, राज्य के महाधिवक्ता और ‘दागी’ नेताओं की नियुक्ति पर सवाल उठाया था। अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद और राज्य में अगले साल की शुरुआत में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू के अपने पद से इस्तीफा दे देने से कांग्रेस की पंजाब इकाई में उथल-पुथल मची है। नई कैबिनेट और अन्य शीर्ष अधिकारियों की हालिया नियुक्तियों को लेकर पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खुल कर सामने आ गई।

बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए चन्नी ने कहा था, “मैंने आज सिद्धू साहब से टेलीफोन पर बात की है। पार्टी सर्वोच्च है, सरकार पार्टी की विचारधारा को स्वीकार करती है और उसका पालन करती है। (मैंने उनसे कहा कि) आप आओ, बैठो और बात करो।” उन्होंने कहा, “अगर आप (सिद्धू) को लगता है कि कुछ गलत है, तो बता सकते हैं।’’ सिद्धू की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर चन्नी ने कहा कि नेता ने उनसे कहा कि वह बैठेंगे और बात करेंगे, और उन्हें बैठक के लिए समय देंगे।

चन्नी ने कहा कि उनकी सरकार अदालतों में मुकदमे लड़ने के लिए एक विशेष अभियोजक के नेतृत्व में एक टीम गठित करेगी। उन्होंने कहा, “हम एक विशेष अभियोजक और 10 सदस्यों की एक टीम बना रहे हैं और यह हमारे (राज्य सरकार) महत्वपूर्ण मामलों को संभालेगी।” उन्होंने कहा, “एक विशेष टीम नियुक्त की जाएगी। इसलिए मुझ पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए। सब कुछ पारदर्शी होगा।”

चन्नी ने कहा, “हमें सहयोगियों और अन्य से जो प्रतिक्रिया मिली और जिन्हें नियुक्त किया जा सकता था, हमने उन्हें नियुक्त किया। लेकिन फैसला पंजाब के लोगों के अनुसार लिया जाएगा।” हाल की नियुक्तियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे किसी भी बात में कोई आपत्ति या अहंकार नहीं है। मैं बहुत स्पष्ट हूं। अगर किसी बात से लोगों को गलत संदेश जाता है, तो मैं उस पर अड़ा नहीं रहूंगा।” मुख्यमंत्री ने 2015 में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले में मिले न्याय का स्पष्ट तौर पर संदर्भ देते हुए कि वह उन मुद्दों पर कभी पीछे नहीं हटेंगे जिनके लिए वह लड़ रहे थे। भाषा नेहा मनीषा

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No Time To Die movie review: Daniel Craig’s sloppy, sentimental farewell

Language: English

Cary Joji Fukunaga’s No Time To Die is heavy-handed from the first scene, where James Bond (Daniel Craig) and his love-interest, Madeline (Léa Seydoux) glide across Europe like the protagonists in an Imtiaz Ali movie. Except there’s no song playing in the background which underlines their ‘free spirit’ ways. As they enter (what looks like) a town in Italy, she teases him for looking over his shoulder. He denies it, and says something profound about the ‘past’. We see locals burning tiny pieces of paper, which we’re told are past regrets and secrets, as a ritual.

Craig’s Bond has been marinating in distrust and trauma since that climactic betrayal in Casino Royale, something that has arguably worked splendidly for the franchise, rooting it in real-world opacity. And to Craig’s credit, he embodies the stiff upper-lipped Mi6 agent to perfection, instead of being the one firing zingers in every scene. Which is why it’s shocking that the No Time To Die makers saddle him with melodramatic lines like “We all have our secrets, we just didn’t get to yours yet.” But then again, that’s probably the ‘pitch’ of Fukunaga’s film. Now, only if they had shown more conviction to deliver a sappy finale for Craig’s final outing as James Bond.

It’s troubling how little No Time To Die does to separate itself from its predecessors. It’s just another bloated Bond film, with call-backs from within the Bond franchise (since Craig got on board), ‘exotic’ landscapes, a supervillain with a God complex nursing genocidal ambitions. “Just another day,” Mallory tells Bond in one scene. There’s the wry British humour on display, the umpteen close-ups of alcohol being served in a glass often gulped within seconds. Even the action scenes, though impressive in the moment, aren’t particularly memorable like the parkour scene in Casino Royale. There’s no weighty grief in the way Bond nurses a broken heart in Quantum of Solace, and surely none of the bitterness or existential dread from Skyfall.

no time to die

Far from bearing Fukunaga’s signature on it, No Time To Die seems like a dish that the director cooked up from a bullet-point recipe using each of the studio executive’s favourite ingredients. Some humour? Add some of Ana De Armas and Daniel Craig’s playful chemistry from Knives Out. Some action? Let’s blow things up - a street in Cuba, a sailboat, or even an island. Some ‘progressive’ posturing? Let’s get Lashana Lynch as the new 007 to impress the liberals. The decision really does feel that shallow, especially the way they handle Lynch, characterising her as someone chasing her own tail based on Bond’s leads. The treatment meted out to Lynch at least answers the question about whether she is going to be trusted with the franchise. Nope.

Rami Malek, sporting a Noh mask and spotted skin, isn’t nearly as creepy as his plain face in Mr Robot. Playing a character, who is an odd mix of Russian and Japanese heritage, means Malek gets ample room for his homegrown eccentricities. Malek hisses his lines like a snake with an obvious menacing Russian accent, but it never really has the intended effect. Something Javier Bardem did with such elan in Skyfall.

rami malek james bond

 

Like most lazy, mainstream films from around the world, it’s almost embarrassing the way No Time To Die assaults the tear ducts, constantly giving us moments screaming… practically begging us to ‘feel’. And that ultimately proves too much even for a superb Bond like Daniel Craig.

Trying to give a ‘fitting’ finale for Craig’s final outing as 007, Fukunaga’s film sacrifices every bit of nuance by the end. Which could have still been done well, but the chief problem with No Time To Die is that it tries to be a tribute to Bond’s valour by the end, which is unnecessary if one thinks about the four Craig films before this, or even the 24 films in the franchise before this.

In the final scene, Mallory toasts to Bond, like some (heavy-handed) fan service for those raising their glasses for Craig’s incredible run. It’s not quite the send-off everyone might have hoped for, but everyone (in the cast) probably knows it’s time to walk away.



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मनीष गुप्ता के घर पहुंचे अखिलेश यादव, पुलिस ने बंद कर दिया था गेट, कानपुर में भी जमकर बवाल

गोरखपुर में कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता की पुलिस पिटाई के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। बता दें कि गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मृतक के घर कानपुर पहुंचे। उन्होंने उनके परिजनों से मुलाकात की। वहीं जब अखिलेश यादव मनीष गुप्ता के घर पहुंचे तो पुलिस ने घर का दरवाजा बंद कर दिया था, जिसकी वजह से वो कुछ देर घर के बाहर ही खड़े रहे। हालांकि भारी बवाल के बीच अखिलेश यादव ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात तो की लेकिन उनके साथ आई भीड़ को घर के अंदर नहीं इजाजत नहीं मिली।

20 लाख आर्थिक मदद का ऐलान: पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा राशि देने का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की इस मामले की जांच हाई कोर्ट के किसी सीटिंग जज की निगरानी में हो।

योगी सरकार आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि, यह मामला सीधे तौर पर सरकार की नाकामी है। उन्होंने कहा कि, यह घटना काफी गंभीर है। इसमें सारे सबूत मिटा दिए गए। राज्य सरकार को पीड़ित परिवार को दो करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देनी चाहिए। हमारी पार्टी भी उन्हें 20 लाख रुपये देगी।

अखिलेश को बताया मामा: अखिलेश यादव ने मनीष गुप्ता के बेटे से सवाल किया कि, बेटा क्या नाम है? पढ़ाई चल रही है? अचानक इतनी भीड़ देखकर बच्चा अपनी मम्मी के पास दुबक गया। इस पर उसकी मां मीनाक्षी गुप्ता ने कहा कि ये भी मामा हैं। बता दें कि परिवार का आरोप है कि, पुलिस वालों ने मनीष की पीट-पीट कर हत्या कर दी।

पुलिस और सपाइयों में झड़प: मनीष गुप्ता के घर अखिलेश यादव के आने से पहले सपाइयों का जमावड़ा लगना शुरु हो गया था। इस बीच सपा कार्यकर्ताओं और प्रशासन के बीच झड़प भी हुई। दरअसल अखिलेश यादव के आने से पहले ही मृतक मनीष गुप्ता की पत्नी को स्थानीय पुलिस अपने साथ ले जा रही थी। जब सपा कार्यकर्ताओं द्वारा इसका विरोध हुआ उनकी पुलिस वालों के साथ झड़प हो गई। फिलहाल भारी विरोध के बाद पुलिस मीनाक्षी को फिर से घर के अंदर ले गई।

क्या है मामला: मंगलवार तड़के कानपुर के 38 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर मनीष गुप्ता की गोरखपुर में एक होटल में मौत हो गई थी। इस मौत का आरोप उन पुलिस कर्मियों पर लगा है जो मनीष गुप्ता के कमरे में अपराधियों की तलाश करने का दावा कर घुसे थे। इन पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से हमला करने के बाद ही मौत हो गई।

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कांग्रेस में नहीं रहूंगा, कैप्टन अमरिंदर का बड़ा ऐलान, शाह के बाद एनएसए डोभाल से भी मिले

पंजाब का विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वहां सत्तारूढ़ दल में सियासी बवंडर भी बढ़ता जा रहा है। राज्य में कांग्रेस पार्टी के हाल ही में अध्यक्ष बनाए गए नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे के बाद जिस तरह की गतिविधियां चल रही हैं, उससे तो सियासी हलके में तूफान जैसा माहौल बन गया है। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का अचानक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पर अटकलों और कयासों का दौर और तेज हो गया। कैप्टन अमरिंदर सिंह बुधवार को गृहमंत्री से उनके आवास पर मुलाकात की, उसके बाद गुरुवार को वे अचानक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल मिलने पहुंच गए।

हालांकि कांग्रेस पार्टी में जिस तरह से अपमानित होकर वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिए हैं, उससे उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन वे लगातार इससे इंकार करते रहे। राजधानी दिल्ली पहुंचने पर भी वे मीडिया से बातचीत में अपने दौरे को राजनीतिक होने से मना करते रहे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करने के बाद भी उन्होंने इसे पंजाब से जोड़ने के बजाए कहा कि वे यहां किसानों के आंदोलन को लेकर बात करने आए थे। गुरुवार को उन्होंने साफ किया कि वे भाजपा में नहीं जा रहे हैं, लेकिन अपमान नहीं सहन कर सकते, इसलिए कांग्रेस छोड़ रहे हैं। अब यह देखना है कि आगे उनका सियासी रुख किधर होगा

उन्होंने ट्वीट किया, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिला। कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को लेकर चर्चा की और उनसे आग्रह किया कि कानूनों को निरस्त करके, MSP की गारंटी देकर तथा पंजाब में फसल विविधिकरण को सहयोग देकर इस संकट का तत्काल समाधान किया जाए।”

लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल उनकी मुलाकात को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं। यह भी कहा जा रहा था कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो वे भाजपा में शामिल हो सकते हैं, साथ ही पार्टी उन्हें कोई बड़ा पद भी दे सकती है। दूसरी तरफ नवजोत सिंह सिद्धू का इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं हुआ है।

सिद्धू ने बताया है कि वे गुरुवार दोपहर बाद 3 बजे सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने ट्वीट किया, “मुख्यमंत्री ने मुझे बातचीत के लिए आमंत्रित किया है… आज दोपहर 3:00 बजे पंजाब भवन, चंडीगढ़ पहुंचकर जवाबी कार्रवाई करेंगे, किसी भी चर्चा के लिए उनका स्वागत है!” जबसे किसान आंदोलन चल रहा था, तब से पंजाब में कांग्रेस पार्टी की स्थिति सबसे मजबूत लग रही थी। लेकिन सिद्धू ने जिस तरह से कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ विरोध की मुहिम चलाई तब से पार्टी के अंदर ही कई गुट बन गए और आपस कलह तेज हो गई।

इससे अब लगता है कि नेताओं के अहम की वजह से पार्टी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल इस सियासी बवंडर में अभी अगले दो-तीन दिन में स्थितियां साफ हो सकेंगी।

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Katrina Kaif's lookalike Alina Rai storms the internet; see her viral pictures

Katrina Kaif has a doppleganger and her name is Alina Rai, who has taken over the Internet courtesy her uncanny resemblance to the Bollywood star. Several social media users have been sharing pictures of the two and talking about the uncanny similarities between them.

A social media star herself, Rai boasts of over two lakh followers on Instagram. The 25-year-old was first noticed in 2019 because of her resemblance to Kaif. Since then, Rai has often garnered attention on social media for her similar appearance to the Ek Tha Tiger star.

Take a look a few pictures here:


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In an interview to Times of India last year, Rai had said that while she really admired Kaif as an actress, she wanted to carve her own path in the entertainment industry.

The model and social media star has appeared in a music video with singer Badshah. Titled Kamaal, the YRF song came out in December 2019. It has reached over 30 crore views since the time it was released.

Rai is set to make her Bollywood debut with the film Lucknow Junction, in which she plays the role of a journalist. The movie, which was set to release sometime in 2020, was postponed due to the coronavirus pandemic. The new release date of the film has not been announced.

Meanwhile, Kaif is busy shooting for the third film in the Tiger franchise with Salman Khan, directed by Maneesh Sharma of Band Baaja Baraat fame. The third part sees Khan and Kaif reprising their roles as Avinash Singh Rathore aka Tiger and Zoya respectively. The film also stars Emraan Hashmi as the main antagonist. The film is being filmed in locations such as Turkey, Austria, and Russia.

Kaif is also gearing up for the release of Rohit Shetty’s cop drama Sooryavanshi, where she will be seen alongside Akshay Kumar. The actor is also set to star in Farhan Akhtar’s new directorial venture Jee Le Zaraa. The road trip movie will also feature Alia Bhatt and Priyanka Chopra in pivotal roles.



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आपके बजट में ये पांच शानदार बाइक, कम कीमत के साथ देती हैं बेहतर माइलेज

आज के दौर में बाइक मंहगी हो गई है, और इनके दाम बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे बाइक के बारें में बताने जा रहे, जो आपके बजट में हैं। अगर आप भी कम दाम में बाइक लेने का प्‍लान कर रहे हैं और बेहतर माइलेज चाहते हैं तो आपको इनके बारे में जानना आवश्‍यक है। इन पांच बाइक की कीमत 60 हजार तक हो सकती है। साथ ही इनके फीचर्स के बारे में भी हम आपको विस्‍तार से जानकारी देंगे।

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बजाज प्लेटिना
कम बजट में बजाज ऑटो की भी एक बाइक बजाज प्लेटिना (bajaj platina) मार्केट में उपलब्ध है। यह दमदार माइलेज के साथ बिकने वाली बजाज की बेहतरीन बाइक है। इसकी दिल्ली एक्सशोरूम की शुरुआती कीमत 56,480 रुपये है। इस बाइक के दो वेरिएंट हैं- Platina 100 ES और Platina 100 KS। प्लेटिना 100 केएस की कीमत 52,915 है जबकि बाइक में 102 cc, 4-Stroke, DTS-i, Single Cylinder इंजन है। इसकी माइलेज 75 से 90 किलोमीटर प्रति लीटर है।

हीरो एचएफ 100
हीरो मोटोकॉर्प कंपनी अधिक बिकने वाली व सस्ती बजट में अच्छी बाइक हीरो एचएफ 100 (Hero HF 100) है। इस बाइक की दिल्ली एक्सशोरूम कीमत 50,900 रुपये है। इसमें आपको 97.2 cc, Air cooled 4 Stroke single cylinder OHC इंजन है। इसमें 65 से 82.9 किलोमीटर प्रति लीटर माइलेज मिलेगा। साथ ही यह बाइक चलाने में भी बहुत ही आरामदायक होती है।

टीवीएस स्पोर्ट
टीवीएस मोटर की काफी पॉपुलर टीवीएस स्‍पोर्टस बाइक है। कंपनी का कहना है कि यह बाइक माइलेज के मामले में सबसे अधिक चलती है। इस बाइक की दिल्ली में शुरुआती एक्सशोरूम कीमत 57,330 रुपये है। इसमें Single Cylinder, 4 Stroke, fuel injection, air cooled spark ignition इंजन है। बाइक में माइलेज 75 किलोमीटर प्रति लीटर है।

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टीवीएस रेडिऑन
टीवीएस मोटर की बाइक टीवीएस रेडिऑन भी आपके बजट में फिट बैठती है. इसकी दिल्ली एक्सशोरूम शुरुआती कीमत 59,992 रुपये है. इसमें 4 Stroke Dura-life Engine लगा है।

होंडा सीडी 110 ड्रीम डीलक्स
60 हजार से थोड़ी ज्यादा रकम पर आप होंडा की बाइक होंडा सीडी 110 ड्रीम डीलक्स (Honda CD110 DREAM DELUXE) बाइक को भी खरीद सकते हैं। इसकी दिल्ली एक्सशोरूम शुरुआती कीमत 65,930 रुपये है।

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ये रायडर्स आपके टर्म प्‍लान को बना सकते हैं बेहतर, जानिए किस तर‍ह का मिलते हैं फायदे

भारत में, अक्सर लोग टैक्स बचाने के लिए टर्म प्लान खरीदते हैं न कि अपने प्राथमिक उद्देश्य – आश्रितों की वित्तीय सुरक्षा के लिए। देनदारियों और वित्तीय आश्रितों को सलाह दी जाती है कि वे पर्याप्त कवरेज के साथ एक कंप्रेसिव टर्म इंश्योरेंस प्लान में निवेश करें, ताकि यह उनकी सेवानिवृत्ति तक कम से कम उनकी सुरक्षा करे।

दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के लिए तैयार रहना
हां, परिवार के सदस्यों और दोस्तों के बीच मौत पर चर्चा करना किसी के लिए भी एक अप्रिय अनुभव हो सकता है, लेकिन फिर हम सभी को इस बात को स्वीकार करना चाहिए कि मृत्यु एक सार्वभौमिक सत्‍य है। जबकि कोई भी मृत्यु से बचने में सक्षम नहीं हो सकता है, अप्रत्याशित परिस्थितियों से सुरक्षित रहना हमेशा बुद्धिमानी है। मृत्यु के खिलाफ आर्थिक रूप से तैयार रहने के साथ-साथ बीमारी और विकलांगता के लिए भी योजना बनाना महत्वपूर्ण है। ये सभी स्थितियां आश्रितों वाले परिवार को प्रमुख रूप से प्रभावित कर सकती हैं। आपको इन तीनों कारकों मृत्यु, बीमारी और विकलांगता को अपने परिवार पर उनके वित्तीय प्रभावों के संबंध में विस्तार से समझना चाहिए।

टर्म लाइफ इंश्योरेंस का एकमात्र उद्देश्य पॉलिसीधारक की आकस्मिक मृत्यु के मामले में पॉलिसीधारक के आश्रितों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। एक टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान के लिए, ग्राहक चुनी गई बीमित राशि/कवरेज राशि के लिए पूर्व-निर्धारित अवधि के लिए एक निश्चित प्रीमियम का भुगतान करता है। यह बीमा राशि पॉलिसीधारक के आश्रितों को उसकी मृत्यु पर भुगतान की जाती है। मृत्यु के अलावा, कुछ महत्वपूर्ण कवर हैं जो टर्म प्लान राइडर्स/अतिरिक्त कवरों के रूप में प्रदान करते हैं – विकलांगता और बीमारी।

दूसरी अप्रत्याशित परिस्थितियों को कवर करना
विकलांगता को कवर करना क्यों महत्वपूर्ण है? यदि आप 65 वर्ष तक जीवित रहते हैं, तो आप अपने परिवार की देखभाल करने के लिए वहां मौजूद रहेंगे। यदि आपकी 35 वर्ष की आयु में मृत्यु हो जाती है और आपके पास टर्म इंश्योरेंस प्लान था, तो पॉलिसी से भुगतान आपके परिवार की वित्तीय जरूरतों का ख्याल रखेगा। हालाँकि, क्या होगा यदि आप 65 तक जीवित रहते हैं, लेकिन 35 पर विकलांग हो जाते हैं? ऐसे मामलों में, विकलांगता राइडर आपके बचाव में आता है और एकमुश्त राशि का भुगतान करता है जिसका उपयोग आपके परिवार की वित्तीय जरूरतों को यथासंभव पूरा करने के लिए किया जा सकता है।

दूसरी ओर, एक गंभीर बीमारी/बीमारी किसी के परिवार के वित्तीय भविष्य को कई तरह से प्रभावित करती है। संभवत: बिना वेतन के तीन महीने की छुट्टी, इसके बाद कम तनाव वाले जॉब प्रोफाइल में शिफ्ट होना जिसमें सीमित विकास पथ है। इसके अलावा, जिनके पास स्वास्थ्य बीमा कवरेज नहीं है, उनके लिए बीमारी के मामले में खराब स्वास्थ्य सुविधाएं मृत्यु या विकलांगता का कारण भी बन सकती हैं। और, कुछ स्टैंडअलोन प्लान की तुलना में इन राइडर्स या अतिरिक्त कवरों की लागत बहुत किफायती होती है। इस प्रकार, गंभीर बीमारी के लाभों की पेशकश करने वाले टर्म प्लान को खरीदने का जोरदार सुझाव दिया जाता है।

आपको जल्द से जल्द एक टर्म प्लान खरीदना चाहिए, जिसमें कई प्रमुख अध्ययन संभावित तीसरी लहर के बारे में चेतावनी देते हैं। पिछली लहरों के दौरान, फिजिकल मेडिकल की प्रक्रिया धीमी हो गई, जिसके कारण टर्म इंश्योरेंस जारी करने की पूरी प्रक्रिया में देरी हुई। आमतौर पर, एक टर्म इंश्योरेंस 4-5 दिनों में जारी किया जाता है। हालांकि, पहले की लहरों के दौरान, इस प्रक्रिया में लगभग 8-10 दिन लगते थे। और अगर कोई COVID के कारण प्रभावित होता है, तो उसे टर्म इंश्योरेंस प्लान के लिए पात्र होने के लिए तीन महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है, जो कि बहुत बड़ा जोखिम है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए जल्द से जल्द टर्म प्लान खरीदने की सलाह दी जाती है।

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Wednesday, September 29, 2021

Shershaah songs set new records, claim crossover success with Billboard’s Global charts

Cinemas may not have yet opened across the country but film songs are back to ruling the music charts. Towards the end of August, two tracks from Shershaah, 'Raataan Lambiyan' by Tanishk Bagchi, Jubin Nautiyal and Asees Kaur and 'Ranjha' by Jasleen Royal and B Praak set new records for the most streams in a week on Spotify India, with over 8.2 million and 7.3 million plays on the platform respectively, surpassing the 5.1 million mark set by BTS’s “Butter” in May.

The Shershaah hits have tallied upwards of 5 million streams in every week since then. The numbers have been big enough to make them the only Indian tunes so far to reach the top 100 of , on which 'Raataan Lambiyan' peaked at No.63 and 'Ranjha' at No.79.

Sony Music India, which released the soundtrack, celebrated the achievement saying that it’s “fascinating to see how music transcends all geographic and language barriers”. Except that while there’s no doubt the soundtrack is arguably the most popular OST since that of Kabir Singh from 2019, more than 90% of 'Raataan Lambiyan' and 'Ranjha's plays are from within India. The other 10% are more from countries with a large Indian diaspora.

This indicates two things. Firstly, Spotify’s listenership in the country is growing as it acquires customers beyond the metros. (Notably, at the time of writing, 'Raataan Lambiyan' had over 50 million streams on Spotify, compared to 47.8 million on JioSaavn, despite the former having only one-fifth or even less of the latter’s monthly active user base. It’s no wonder that the Swedish service chose to remix the hit for the second of its series of Singles releases in India.)

Secondly, it shows that Indians are finally streaming music in quantities substantial enough for our releases to crack international charts.

Siddharth Malhotra and Kiara Advani in a still from Shershaah

For a wider perspective, we can turn to Billboard’s Global charts, which were launched a little over a year ago in the first half of September 2020. The American charts bible launched two surveys, including one that leaves out streams from the US, which is the world’s largest music market. Exactly 18 Indian songs have scaled the ‘Global Excl. US’ chart.

These are the eight that have got to the top 100 of the 200-position list and their peak positions:

'Lut Gaye', Jubin Nautiyal, Nusrat Fateh Ali Khan and Tanishk Bagchi, T-Series, No.23 (March to June 2021)

'Raataan Lambiyan' (from Shershaah), Asees Kaur, Jubin Nautiyal and Tanishk Bagchi, No.28 (August and September* 2021)

'Titliaan', Afsana Khan, Avvy Sra and Jaani, Universal Music, No.46 (December and January 2020)

'Bachpan Ka Pyaar', Aastha Gill, Badshah, Rico and Sahdev Dirdo, Universal Music, No.50 (August 2021)

'Filhaal2 Mohabbat', B Praak and Jaani, Universal Music, No.68 (July 2021)

'Paani Paani', Aastha Gill and Badshah, Saregama, No.71 (June to August 2021)

'Ranjha' (from Shershaah), B Praak and Jasleen Royal, Sony Music, No.73 (September* 2021)

'Saiyaan Ji', Neha Kakkar, No.98 (February and March 2021)

*Currently on the chart.

As Billboard observes, most of the Indian tracks to have reached the chart get the bulk of their chart points from video plays. India, after all, is YouTube’s biggest market with more than 325 million MAUs as of October 2020. Seven of these eight tunes hit No.1 on YouTube’s Global Music Videos chart but only two songs have hit the top 40 of Billboard’s Global Excl. US list, traditionally considered “hit” territory. Both of them have performed well on both video and audio OTT services. So far, Billboard factors in streams from only international services such as Apple Music and Amazon Prime Music, which means that to touch the upper ranks of the worldwide charts, a track needs to have success on both.

For example, Haryanvi phenomenon '52 Gaj Ka Daman' by Aman Jaji, Mukesh Jaji and Renuka Panwar, which was the most viewed music video in the world on YouTube for all of January and most of February, did not reach the Global Excl. US chart because it didn’t really take off on audio OTT platforms. Similarly, viral Punjabi hip-hop hit 'Brown Munde' by the Canadian crew of AP Dhillon, Gminxr, Gurinder Gill and Shinda Kahlon, which is among the year’s hugest hits on Apple Music in India didn’t land on the Billboard survey because its weekly YouTube plays were never quite as high.

Shifting focus back to Shershaah, we should acknowledge Sony isn’t the first or only label to claim crossover success. Last week, Times Music and Speed Music touted how Punjabi pop and hip-hop star Karan Aujla’s new album BTFU had debuted in the top five on Apple Music in international markets such as Canada, where he’s based, as well as Australia and New Zealand, countries with a high concentration of Indian diaspora.

However, the fact is that, as of now, it’s only when a song truly crosses over to non-Indian listeners that we’ll see our homegrown hits reaching the top ten of global charts such as those published by Billboard - unless they start factoring in plays on Indian audio services such as Gaana and JioSaavn.

That will only happen if Indian labels allow these DSPs to share their streaming information with chart compilers such as MRC Data, the company formerly known as Nielsen Music, and BMat, which puts together the Indian Music Industry’s International Top 20. Then, if the platforms actually have 150 million-plus MAUs they claim, Indian music should surely start having a greater impact on Billboard’s Global charts.



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जातिगत जनगणना पर बोले सुशील मोदी, केंद्र सरकार के पास इतना समय नहीं, अपने खर्च पर कराएं राज्य

देशभर में कुछ विपक्षी दल केंद्र सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि इस बार की जनगणना के साथ जातीय जनगणना भी कराई जाए। इसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव समेत कई अन्य नेता पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर मांग कर चुके हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने इस पर राजी नहीं हुई है और इसको कराने में व्यावहारिक दिक्कतें बता रही है। सरकार का कहना है कि अब काफी देर हो चुका है। अब प्रक्रिया में बदलाव संभव नहीं है।

राज्य सभा सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जो एफीडेविट दिया है, उसमें साफ-साफ बताया है कि यह व्यावहारिक नहीं है कि केंद्र सरकार इसको कराए, इस बार की जनगणना हैंडहेल्ड डिवाइस या डिजिटल तरीके से होने वाली है। जनगणना की पूरी तैयारी तीन साल पहले हो जाती है। उसका मैनुअल छप चुका है। उसका टाइम टेबल बन चुका है, ट्रेनिंग का काम पूरा हो चुका है।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में जो पिछड़ी जातियां हैं, जब 2011 में जो आर्थिक-जातीय जनगणना की गई थी, तब 46 लाख जातियों की सूची मिलीं, जबकि इस देश के अंदर मुश्किल से सात-आठ हजार जातियां होंगी। केंद्र ने कहा कि जनगणना की पूरी तैयारी हो चुकी है। अब अंतिम समय में पिछड़े लोगों के लिए जनगणना करना केंद्र के लिए संभव नहीं हैं। लेकिन कोई राज्य कराना चाहे तो करा सकता है। जैसे तेलंगाना ने कराया है। कर्नाटक में जब सिद्धारमैया की सरकार थी, उन्होंने कराया है। यह बात अलग है कि सिद्धारमैया की सरकार ने सर्वेक्षण कराया, लेकिन आज तक वह रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो पाई है। ओडिशा सरकार कराने की तैयारी कर रही है। अगर कोई राज्य सरकार कराना चाहे तो वह स्वतंत्र है। केंद्र की सरकार ने अपनी असमर्थता जताई है।

बोले कि राजद के लोग कहते हैं कि केवल एक कॉलम जोड़ दें। यह केवल एक कॉलम जोड़ देने का सवाल नहीं है। यह केवल एक कॉलम जोड़ देने से नहीं होगा। यह डिजिटल तरीके से गणना की जानी है। अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना इसलिए होती है कि लोकसभा- विधानसभा में जो आरक्षण मिला हुआ है, वह तय है, इसलिए उनका गणना कराना आवश्यक है।

इसलिए कोई राज्य सरकार कराना चाहे तो करा सकती है, स्वतंत्र है, लेकिन केंद्र सरकार ने कहा कि इस जनगणना के साथ उसकी गणना हम नहीं करा सकते हैं। और यही एफीडेविट केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दी है।

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आप जैसे लोग रात को लिख आते होंगे- ‘तिलक, तराजू और तलवार…’ वाले नारे पर मायावती ने रजत शर्मा को दिया था ये जवाब

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां बढ़ गई हैं। सत्तारूढ़ भाजपा से लेकर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी जैसे दल जातीय समीकरण साधने में जुटे हैं। खासकर बसपा की निगाहें सवर्ण वोट बैंक पर हैं। सवर्ण मतदाताओं को लुभाने के लिए पार्टी तमाम जिलों में प्रबुद्ध सम्मेलन आयोजित कर रही है। बीते दिनों ऐसे ही एक सम्मेलन में जब मायावती के हाथ में त्रिशूल दिखा और जय श्रीराम के नारे लगे तो यह चर्चा का विषय बन गया।

क्यों हुआ आश्चर्य? एक दौर ऐसा था जब बहुजन समाज की राजनीति करने वालीं मायावती की रैली और सभाओं में ‘तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार’ जैसे नारे लगा करते थे। बाद में जब बसपा को लगा कि सत्ता में आने के लिए सवर्ण मतदाताओं, खासकर ब्राम्हण वोटर्स को साथ लाना जरूरी है तब ‘हाथी नहीं गणेश हैं, ब्रह्मा-विष्णु महेश हैं’ जैसे नारे लगने लगे।

वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा के चर्चित कार्यक्रम ‘आप की अदालत’ में कुछ साल पहले जब मायावती आई थीं तो उनसे इसी मुद्दे को लेकर सवाल किया गया था। रजत शर्मा ने मायावती से पूछा था कि आप पर जातिवादी होने का आरोप इसलिए लगता है कि कभी बसपा का नारा हुआ करता था ‘तिलक तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार’…। बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि ‘मेरी आवाज में या मान्यवर कांशीराम की आवाज में पूरे भारत में कोई यह बता दें कि यह मैंने कहा है तो मैं राजनीति से सन्यास ले लूंगी।

नाराज हो गई थीं मायावती: रजत शर्मा उन्हें टोकते हुए कहते हैं कि आप जब भाषण देने जाती थीं तब इस तरह के नारे लगते थे। इस पर मायावती थोड़ा नाराज हो जाती हैं और कहती हैं ‘आपने कभी सुना है? आपके पास कोई रिकॉर्ड है मेरी आवाज का? कोई टेप है क्या? है तो बताइए…।

मायावती ने तंज कसते हुए आगे कहा था कि ‘आप जैसे लोग ही रात में जाकर दीवारों पर ऐसे नारे लिख आते होंगे।’ मायावती ने इसी कार्यक्रम में आगे कहा था कि हम तो सभी के साथ रिश्ते बनाना चाहते हैं, लेकिन इसके साथ हमें यह देखना होगा कि बहुजन समाज का हित किधर है।

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टैक्‍सपेयर्स के लिए वरदान बन सकता है इनकम टैक्‍स अपीलेट ट्रि‍ब्‍यूनल का फैसला, मिलेगी बड़ी राहत

यदि आपके पास घाटे में चल रही संपत्ति है तो आप आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण यानी इनकम टैक्‍स अपीलेट ट्रि‍ब्‍यूनल, मुंबई के हालिया फैसले का लाभ उठा सकते हैं। इसे एक प्रोफ‍िटेबल अकाउंट (एसेट ट्रांसफर) से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ सेट-ऑफ किया जा सकता है, इस प्रकार ओवरऑल टैक्‍स लायबिलिटी को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

आईटीएटी ने रखी नजीर
ITAT-मुंबई ने माइकल ई देसा बनाम आयकर अधिकारी अंतर्राष्ट्रीय कराधान मामले में दोहराया कि टैक्स-प्लानिंग एक कानूनी गतिविधि है और अगर कानून के ढांचे के भीतर किया जाता है तो इसे टैक्स से बचने के रूप में नहीं माना जा सकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए, आयकर नियम के अनुसार, लांग टर्म कैपिटल लॉस को लांग टर्म कैपिटल गेन के अलावा किसी दूसरे इनकम के खिलाफ सेट ऑफ नहीं किया जा सकता है। हालांकि, शॉर्ट टर्म कैपिटल लॉस को लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के खिलाफ सेट ऑफ किया जा सकता है।

क्‍या होगा फैसले का असर
कई बार असेसी ऑफ‍िसर ऐसे सेट-ऑफ पर सवाल उठाते हैं और दावा करते हैं कि करदाता टैक्स से बचने की कोशिश कर रहे हैं। नवीनतम फैसले से टैक्‍सपेयर्स को अब से सेट-ऑफ का दावा करने में मदद मिलेगी। इस विशेष मामले में, आईटीएटी ने अपीलकर्ता को संपत्ति की बिक्री पर लांग टर्म कैपिटल गेन के साथ एक नॉन लिस्‍टेड कंपनी के शेयरों की बिक्री पर नुकसान को समायोजित करने की अनुमति दी।

संक्षेप में मामला
अमरीकी नागरिक, टैक्‍यपेयर ने संपत्ति की बिक्री पर एलटीसीजी बनाया। उन्होंने एक नॉन लिस्‍टेड कंपनी में शेयरों की बिक्री पर लांग टर्म कैपिटल लॉस की सूचना आयकर विभाग को दी और कहा कि इसे मेरे एलटीसीजी के साथ सेट ऑफ कर दिया जाए। असेसी ऑफ‍िसर सेट ऑफ को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि शेयरों की बिक्री प्राइम ऑफ फेसी में काल्‍पनिक दिख रही है। जिसके खिलाफ टैक्‍सपेयर ने आईटीएटी में अपील की। पूरा मामला जानने के बाद आईटीएटी ने माना कि असेसी ऑफ‍िसर किसी लेनदेन की अवहेलना नहीं कर सकता क्योंकि इससे असेसी को टैक्‍स बेनिफ‍िट मिलता है।

फैसले के बारे में क्या कहते हैं विशेषज्ञ
यह देखते हुए कि आयकर कानून में ऐसे प्रावधान हैं जो आय से होने वाले नुकसान के एक सेट-ऑफ की अनुमति देते हैं। इस पर जानकार कहते हैं कि यह निर्णय बहुत अच्छी तरह से एक उदाहरण के रूप में सामने आ सकता है। वित्तीय परिसंपत्तियों की बिक्री पर पूंजीगत लाभ की योजना बनाने के तरीके – इक्विटी, बांड और अचल संपत्तियां – जो कि एक परिसंपत्ति वर्ग से दूसरे से आय के साथ नुकसान की भरपाई कर रहा है।

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अब ‘पीएम पोषण’ के नाम से जानी जाएगी मिड-डे मील योजना, नहीं बढ़ा कुक और कर्मचारियों का मानदेय

स्कूल के बच्चों के लिए चलाई जाने वाली मिड-डे मील योजना को अब ‘पीएम पोषण के नाम से जाना जाएगा।’ केंद्र सरकार का दावा है कि इस स्कीम के जरिए प्री-प्राइमरी एजुकेशन के तहत सरकारी और ऐडेड स्कूलों के 24 लाख अन्य बच्चों को फायदा मिलेगा। वर्तमान में योजना के तहत कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के 11.80 करोड़ स्टूडेंट्स को भोजन दिया जाता है। पीएम पोषण शक्ति निर्माण और पीएम पोषण स्कीम के तहत अब 24 लाख अन्य स्टूडेंट्स को भी जोड़ा जाएगा। इसमें आंगनवाड़ी से जुड़े बालवाटिका में में पढ़ने वाले बच्चों को भी लाभ दिया जाएगा।

शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमिटी ने बड़े फैसले लिए हैं और अब स्कूल जाने वाले बच्चों के पोषण का ध्यान रखने के लिए प्रभावी नीति तैयार की गई है। इसे शुरुआत के पांच साल के लिए लागू किया जाएगा।

इस योजना के तहत कुल 1.3 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें से 54,061 करोड़ का खर्च केंद्र सरकार करेगी और 31,733 करोड़ राज्य सरकार को खर्च करना होगा। अच्छे अनाज के लिए केंद्र सरकार 4500 करोड़ रुपये का फंड जारी करेगी। वहीं विपक्ष का कहना है कि केंद्र ने कोई नया सुधार न करते हुए केवल ‘मिड डे मील योजना’ का नाम बदल दिया गया है। खाना बनाने वाले कर्मचारियों का मानदेय भी नहीं बढ़ाया गया है।

नहीं बढ़ा कर्मचारियों का मानदेय

प्रधान ने बताया, ‘नई शिक्षा नीति के तहत प्री-प्राइमरी स्कूल एजुकेशन को भी औपचारिक बनाया जाना है। यह उसी की तरफ एक कदम है। इस कदम से पारदर्शिता भी बढ़ेगी और स्कूलों को सीधा धनराशि मिला करेगी। अभी ब्रेकफास्ट देने पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।’ उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों में खाना बनाने वाले रसोइए और कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी का कोई फैसला नहीं किया गया है। हालांकि राज्य सरकारें मानदेय बढ़ाने के लिए स्व

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Monkeypox In India: केरल में मिला मंकीपॉक्स का दूसरा केस, दुबई से पिछले हफ्ते लौटा था शख्स

monkeypox second case confirmed in kerala केरल में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला सामने आया है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दुबई से प...