जिस दौर में विकास के दावे बढ़-चढ़ कर किए जा रहे हों और अर्थव्यवस्था की मजबूती को इस तरह आंका जा रहा हो कि महामारी और पूर्णबंदी के बावजूद यह फिर से पहले की तरह चमकने को तैयार है, तो उसमें कुपोषण की खबरें चौंकाती हैं!
from Jansattaराष्ट्रीय – Jansatta https://ift.tt/36d7lFy
No comments:
Post a Comment