भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और रेटिंग एजेंसियों के जो अनुमान आए हैं, वे भविष्य की मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। कुछ रेटिंग एजेंसियां तो अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ्तार बहुत ही धीमी रहने तक की भविष्यवाणी करती रही हैं।
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